स्वयं बने गोपाल

बस एक बार श्री सिद्धिदात्री का कृपा कटाक्ष, और तत्क्षण सर्व मनोरथ सिद्धि

इनकी आराधना से भक्त को 8 महा सिद्धियाँ – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व और 9 निधियों की प्राप्ति होती है ! नवदुर्गाओं में माँ सिद्धिदात्री अंतिम हैं ! सिद्धिदात्री...

महा मातृ भक्त, अथाह संपत्ति दाता श्री गणेश अनायास परम प्रसन्न हो जाते है अपनी माँ गौरी के भक्त से

महागौरी रूप में देवी ममतामयी और शांत दिखती हैं ! भगवान गणेश स्वयं माँ गौरी की संतान है अतः श्री गौरी आराधना से महा मंगल दायक, महा शुभकारी, महा सम्पति दाता श्री गणेश अनायास...

हर सांस से भयंकर ज्वाला निःसृत करने वाली माँ कालरात्रि प्रलय काल में पूरे ब्रह्माण्ड को अपने में ही समेट लेती है

मौत (काल) भी जिनसे डर कर थर थर कांपती है ऐसी है माँ कालरात्रि ! सिर के बाल खुले और बिखरे हुए हैं। इनकी कराल वाणी सुनकर भय से कितने पापियों की तुरन्त मृत्यु...

अगर पाप ना करे तो माँ कात्यायनी का भक्त पूरी दुनिया में अपराजित है

कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन...

एक क्षण भी बहुत ज्यादा है प्रसन्न स्कंदमाता के लिए महा दरिद्र को महा धनी बनाने में

बच्चों को खुश करो तो माँ अपने आप गदगद हो जाती है ! बहुत ही आसान और सरल है माँ स्कन्द माता को खुश करना ! बस छोटे गरीब बच्चे जो जिंदगी की हर...

अपने पेट में अंडे के रूप में ब्रह्माण्ड को धारण करने वाली श्री कूष्मांडा

मातृ शक्ति श्री कूष्मांडा देवी का ध्यान एक गर्भवती स्त्री के रूप में किया गया है ! अपने उदर (पेट) से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम...

लेख – “स्त्री दान ही नहीं, आदान भी” (लेखिका – महादेवी वर्मा)

संपन्न और मध्यम वर्ग की स्त्रियों की विवशता, उनके पतिहीन जीवन की दुर्वहता समाज के निकट चिरपरिचित हो चुकी है। वे शून्य के समान पुरुष की इकाई के साथ सब कुछ हैं, परंतु उससे...

देवी चंद्रघंटा के घंटे की ध्वनि से प्रेत पिशाच भूत राक्षसों में खलबली मच जाती है

माँ चन्द्र घंटा की आराधना से समाज में रुतबा बढ़ता है ! इनका भक्त जहाँ भी जाता है उसे विशेष सम्मान मिलता है ! देवी चन्द्रघंटा के घंटे की आवाज जहाँ भक्तों को परम...

लेख – दुर्गादास – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

जोधपुर के महाराज जसवन्तसिंह की सेना में आशकरण नाम के एक राजपूत सेनापति थे, बड़े सच्चे, वीर, शीलवान् और परमार्थी। उनकी बहादुरी की इतनी धाक थी, कि दुश्मन उनके नाम से कांपते थे। दोनों...

3000 सालों तक सिर्फ पेड़ की सूखी पत्तियां खाकर की घोर तपस्या माँ ब्रह्मचारिणी ने

श्री दुर्गा के परम तेजस्वी ब्रह्मचारिणी रूप के पूजन का है नवरात्रि का दूसरा दिन ! अपनी सारी इच्छाओं का दमन करके अत्यंत कठिन तप करने की वजह से माँ पार्वती का नाम ब्रह्मचारिणी...

प्रथमं शैलपुत्रीं

मातृ शक्ति दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। पहाड़ों के राजा हिमालय के यहाँ पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है,...

कहानी – लिली – (लेखक – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)

पद्मा के चन्द्र-मुख पर षोडश कला की शुभ्र चन्द्रिका अम्लान खिल रही है। एकान्त कुंज की कली-सी प्रणय के वासन्ती मलयस्पर्श से हिल उठती,विकास के लिए व्याकुल हो रही है। पद्मा की प्रतिभा की...

लेख – राष्ट्र का सेवक – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

राष्ट्र के सेवक ने कहा – देश की मुक्ति का एक ही उपाय है और वह है नीचों के साथ भाईचारे का सलूक, पतितों के साथ बराबरी का बर्ताव। दुनिया में सभी भाई हैं,...

कविता – अखरावट – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल )

दोहा गगन हुता नहिं महि हुती, हुते चंद नहिं सूर।   ऐसइ अंधाकूप महँ रचा मुहम्मद नूर॥   सोरठा   साईं केरा नाँव, हिया पूर, काया भरी।   मुहमद रहा न ठाँव, दूसर कोइ...

कहानी – हार की जीत – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

केशव से मेरी पुरानी लाग-डाँट थी। लेख और वाणी, हास्य और विनोद सभी क्षेत्रों में मुझसे कोसों आगे था। उसके गुणों की चंद्र-ज्योति में मेरे दीपक का प्रकाश कभी प्रस्फुटित न हुआ। एक बार...

कविता – मंडपगमन खंड, पदमावती-वियोग-खंड, सुआ-भेंट-खंड, बसंत खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल )

राजा बाउर बिरह बियोगी । चेला सहस तीस सँग जोगी॥ पदमावति के दरसन आसा । दँडवत कीन्ह मँडप चहुँ पासा॥   पुरुष बार होइ कै सिर नावा । नावत सीस देव पहँ आवा॥  ...