स्वयं बने गोपाल

आत्मकथा – असंबल गान – (लेखक – पांडेय बेचन शर्मा उग्र)

उपदेशक— तेरी कन्‍था के कोने में कुछ संबल, या संशय है, अरे पथिक, होने में? तेरी. यदि कुछ हो न ठहरता जा ना, कन्‍था अपनी भरता जा ना, करम दिखा इन बाज़ारों में कुछ...

कहानी – पशु से मनुष्य – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

दुर्गा माली डॉक्टर मेहरा, बार-ऐट ला, के यहाँ नौकर था। पाँच रुपये मासिक वेतन पाता था। उसके घर में स्त्री और दो-तीन छोटे बच्चे थे। स्त्री पड़ोसियों के लिए गेहूँ पीसा करती थी। दो...