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Category: आपबीती सच्चे अनुभव

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 40 (समस्त उलझनों की एक हल-माँ गायत्री)

अन्धे होने पर भी सर्व शास्त्र पारंगत- आर्य समाज के स्थापक नैष्ठिक ब्रह्मचारी स्वामी दयानन्द जी के गुरु प्रज्ञाचक्षु स्वामी श्री विरजानन्द जी सरस्वती ने अनेक कष्टï सहते हुए तीन वर्ष तक गंगा तीर...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 39 (सकाम से निष्काम साधना)

श्री पं. रामस्वरुप जी चाचोदिया, राठ का कहना है सामान्यतया मनुष्य तत्काल के लाभ को देखता है। तात्कालिक लोभ के लिए वह भविष्य की भारी हानि का खतरा भी उठाता है। इसके विपरीत यदि...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 38 (चिकित्सा में सफलता)

श्री भूरेलाल जी वैद्य, हर्रई लिखते हैं कि पं. नर्मदाप्रसाद शास्त्री भदरस कानपुर के रहने वाले उद्ण्ट विद्यावान भाग्यवश हर्रई (जागीर) के राम मन्दिर में आकर पुजारी हो गये थे, ईश्वर कृपा से उनके...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 37 (छोटी नौकरी से धनी व्यापारी)

शा. मोड़कमल केजड़ीवाल, कलकत्ता लिखते हैं कि जोधपुर राज्य के एक गाँव में हमारी जन्मभूमि है। हिन्दी मिडिल पास करने के बाद पास के गाँव में प्राइमरी स्कूल का अध्यापक हो गया। 12 रु....

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 36 (गई लक्ष्मी का पुनरागमन)

श्री शंभूचरण विश्वनोई, वीरपुर लिखते हैं कि हमारे पिता जी बड़े चतुर और बुद्घिमान थे। उन्होने अपने हाथों लगभग दस लाख की सम्पत्ति कमाई थी। जमींदारी, देन-लेन, घी और गल्ले का व्यापार तथा और...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 35 (गायत्री के निजी अनुभव)

श्री लक्ष्मीनारायण श्रीवास्तव वकील कनकुआ लिखते हैं कि एक वर्ष के पहले मुझे साढ़े साती आया था । जिस काम में हाथ डालता था, उसी में हानि दृष्टिïगोचर होती थी । हानि पर हानि...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 34 (पिता जी की तपस्या का प्रतिफल)

श्री बामन जी तरुड़कार ,बेतूल लिखते हैं कि मेरे पिताजी गायत्री के अनन्य भक्त हैं। उनका अधिकांश समय गायत्री उपासना में जाता है। 24 लक्ष का अनुष्ठान कर चुके हैं और सवा करोड़ की...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 33 (असफलात में सफलता की झांकी)

श्री बैजनाथ भाई रामजी भाई गुलारे का कहना है कि गायत्री की पूजा में धर्म और अर्थ दोनों का लाभ है, इसलिए दूसरी पूजाओं के बजाय मुझे यही अधिक प्रिय है। गायत्री की मैंने...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 32 (गायत्री की कृपा से उच्च पद की प्राप्ति)

पं. शंभूप्रसाद मिश्र, हृदयनगर, कहते हैं कि मुझे अनुभव है कि मेरे इष्ट वेदमाता ने मेरे बड़े-बड़े हानि-लाभ के कार्यों में स्वप्नों में ही दिग्दर्शन कराके आने वाली विपत्ति से रक्षा की और शुभ...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 31 (गायत्री की कृपा से प्रिंसिपल बना)

पं. लक्ष्मीनथा झा व्याकरण साहित्याचार्य, झॉंसी लिखते हैं कि यह सेवक मिथिल के चौमथ ग्राम वास्तव्य राज ज्योतिषी पंडित प्रकाण्ड श्रीयुक्त कृपालु झा का लक्ष्मीकान्त झा नामक पुत्र है। यह यज्ञोपवीत संस्कार के अनन्तर...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 30 (परीक्षा में उत्तीर्ण)

श्री बसन्त कुमार गौड़, देहरादून, लिखते हैं कि पिछले वर्ष मेरी अच्छी पढ़ाई नहीं हो पाई थी। तीन बार मास्टर बदले। हर एक ने अपने-अपने ढंग से पढ़ाया। मन भी अच्छी तरह न लगा।...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 28 (प्रलोभन का पतन)

पं. पूजा मिश्र, ठोरी बाजार, लिखते हैं कि हमारे यहाँ एक बड़े प्रसिद्घ महात्मा हो गए हैं। इनका असली नाम तो मालूम नहीं, पर उनको परमहंस जी कहा जाता था। ये भूमिहार ब्राहम्ण थे।...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 27 (मनोवांछित पति-पत्नी)

श्री कौशल किशोर माहेश्वरी, संभलपुर लिखते हैं कि हमारे बाबा महेश्वरी थे और दादी राबुत थीं। उनका गन्धर्व विवाह हुआ था। उनकी प्रेम गाथा को लिखकर अपने पूजनीय पूर्वजों की शान में कोई धृष्ठता...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 26 (उच्च शिक्षा की सुविधा)

श्री. रघुराथ प्रसाद बरनवाल, बलहज, लिखते हैं कि अखण्ड ज्योति के लोगों से प्रभावित होकर मैं गायत्री उपासना के मार्ग में बढ़ा। अति अल्प काल के जप में ही अपने में बड़ा अधिक परिवर्तन...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 25 (पुरश्चरण और पाठ कराने से लाभ)

श्री बलवन्त विष्णु नागदे, राजमहेन्द्री कहते हैं कि व्यापारी को फुरसत नहीं मिलती । हमकों बहुत काम रहता है। रात को दो बजे तक अक्सर काम करना पड़ता है। इसलिए सबेरे देर से आँख...

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 24 (गायत्री पर अटूट विश्वास)

श्री मेघायती जी नगीना अपनी अनुभूति प्रकट करती हुई लिखती हैं कि गायत्री मन्त्र ईश्वर की उपासना के लिये मुख्य मन्त्र है। मेरा तो इस पर अति अटूट विश्वास और श्रद्घा रही है। मुझे...