Category: महान लेखकों की सामाजिक प्रेरणास्पद कहानियां, कवितायें और साहित्य का अध्ययन, प्रचार व प्रसार कर वापस दिलाइये मातृ भूमि भारतवर्ष की आदरणीय राष्ट्र भाषा हिन्दी के खोये हुए सम्मान को

जिसका आनंद अंतहीन है

हमारा एक स्वरूप ऐसा भी है जो असीम शक्तियों का भंडार है अपनी क्षमता में अनंत विस्तार वान है हमारी आत्मा में ही परमात्मा का वास है हमारी चेतना के नीचे ईश्वर की चेतना...

एक कठोर अनुशासक ऐसा भी

हर अस्तित्व के पृष्ठभूमि में एक कारण होता है जो समय के साथ रोशनी में आता है आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की भाग दौड़ में जब हम...

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एक माँ – पुत्र के विछोह की असीम पीड़ायुक्त संवाद

{नोट- पहली कविता “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए एक आदरणीय स्वयं सेवक द्वारा रचित है पर उन्होंने हमसे अपने नाम को प्रकाशित ना करने का अनुरोध किया है इसलिए हम उनकी कविता...

वो अपने

जो अपने कभी मेरे बहुत करीब थे आज वही मेरे बुरे वक्त के दर्पण में अपना वो वास्तविक अक्स छोड़ गए जो मेरी कल्पना से भी परे था ! आज जब मुझे उन अपनों...

कहानी – ठाकुर का कुआँ – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी । गंगी से बोला- यह कैसा पानी है ? मारे बास के पिया नहीं जाता । गला सूखा जा रहा है और...

माँ

माँ आज तुम मेरे पास नहीं हो फिर भी मै अकेला नहीं हू क्योकी जब भी कभी मै किसी अनदेखी अनछुई तपिश में घिरता हूँ तुम्हारी ममता की छाँव मुझे सहला जाती है और...

कहानी – विजया (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

कमल का सब रुपया उड़ चुका था-सब सम्पत्ति बिक चुकी थी। मित्रों ने खूब दलाली की, न्यास जहाँ रक्खा वहीं धोखा हुआ! जो उसके साथ मौज-मंगल में दिन बिताते थे, रातों का आनन्द लेते...

कहानी – बिंदा (लेखिका- महादेवी वर्मा)

भीत-सी आँखोंवाली उस दुर्बल, छोटी और अपने-आप ही सिमटी-सी बालिका पर दृष्टि डाल कर मैंने सामने बैठे सज्जन को, उनका भरा हुआ प्रवेशपत्र लौटाते हुए कहा – ‘आपने आयु ठीक नहीं भरी है। ठीक...

कहानी – एक जीवी, एक रत्नी, एक सपना (लेखिका – अमृता प्रीतम)

पालक एक आने गठ्ठी, टमाटर छह आने रत्तल और हरी मिर्चें एक आने की ढेरी “पता नहीं तरकारी बेचनेवाली स्त्री का मुख कैसा था कि मुझे लगा पालक के पत्तों की सारी कोमलता, टमाटरों...

कविताये (लेखिका – महादेवी वर्मा)

  जो तुम आ जाते एक बार कितनी करूणा कितने संदेश पथ में बिछ जाते बन पराग गाता प्राणों का तार तार अनुराग भरा उन्माद राग आँसू लेते वे पथ पखार जो तुम आ...

कहानी – स्वर्ग के खंडहर में (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

वन्य कुसुमों की झालरें सुख शीतल पवन से विकम्पित होकर चारों ओर झूल रही थीं। छोटे-छोटे झरनों की कुल्याएँ कतराती हुई बह रही थीं। लता-वितानों से ढँकी हुई प्राकृतिक गुफाएँ शिल्प-रचना-पूर्ण सुन्दर प्रकोष्ठ बनातीं,...

लेख – ईश्वरोन्मुख प्रेम – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

पहले कहा जा चुका है कि जायसी का झुकाव सूफी मत की ओर था जिसमें जीवात्मा और परमात्मा में पारमार्थिक भेद न माना जाने पर भी साधकों के व्यवहार में ईश्वर की भावना प्रियतम...

कहानी – बिसाती (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

उद्यान की शैल-माला के नीचे एक हरा-भरा छोटा-सा गाँव है। वसन्त का सुन्दर समीर उसे आलिंगन करके फूलों के सौरभ से उसके झोपड़ों को भर देता है। तलहटी के हिम-शीतल झरने उसको अपने बाहुपाश...

कहानी – बूढ़ी काकी- (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्वा-स्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा...

कहानी – खंडहर की लिपि (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

जब बसन्त की पहली लहर अपना पीला रंग सीमा के खेतों पर चढ़ा लायी, काली कोयल ने उसे बरजना आरम्भ किया और भौंरे गुनगुना कर काना-फूँसी करने लगे, उसी समय एक समाधि के पास...

कहानी – विमाता – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

स्त्री की मृत्यु के तीन ही मास बाद पुनर्विवाह करना मृतात्मा के साथ ऐसा अन्याय और उसकी आत्मा पर ऐसा आघात है जो कदापि क्षम्य नहीं हो सकता। मैं यह कहूँगा कि उस स्वर्गवासिनी...