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Category: मन को दिव्य शान्ति और जीवन का मार्गदर्शन करने वाली पुण्यवर्धक मोक्षदायिनी धार्मिक कथायें

ईश्वरीय खोज की अंतहीन गाथा : निराशा भरी उबन से लेकर ख़ुशी के महा विस्फोट तक

कभी कभी बड़े से बड़े भक्तों के मन में भी प्रश्न आता है कि, क्या लगातार ईश्वर को देखने से उबन (बोरियत) नहीं होगी ? और अगर बोरियत होगी तो फिर कोई आदमी क्यों...

जो गलती सत्यभामा जी ने की, वही आज भी बहुत से लोग कर रहें हैं

यह सत्य घटना महाभारत काल की है जब कुरुक्षेत्र में एक भव्य उत्सव का आयोजन चल रहा था ! भगवान श्री कृष्ण भी द्वारिकावासियों के साथ मेले में आए हुए थे ! देवर्षि नारद...

ईश्वर को पिता समझने के भ्रम से उबरें क्योंकि ईश्वर पिता नहीं, सखा (मित्र) है : श्री वेदव्यास (ब्रह्म सूत्र)

वास्तव में ब्रह्मर्षि वेदव्यास भगवान श्री कृष्ण के चरित्र के हर आयाम से बहुत इम्प्रेस (प्रभावित) थे इसलिए उन्होंने श्री कृष्ण पर बहुत रिसर्च किया था और उस रिसर्च से मिलने वाले रिजल्ट्स के...

क्या पुरुष और प्रकृति के रौद्र रूप से कोई संतान नहीं पैदा हुई ?

इस पहलू को जानकर ही समझ में आता है कि ईश्वर ना कभी खुश होते हैं, ना ही कभी नाराज होते हैं ! जैसा कि हमारे शास्त्रों में बार बार कहा गया है कि...

ऐसी गलत फहमी जिसने बहुतों को अंधेरे मे रखा है

अाज के युग मे ऐसे बहुत से धनपशु देखने को मिल जाते हैं जो अपने द्वारा कमाए हुये धन के जोर से अपना परलोक सुधारना चाहते हैं ! लेकिन वे भूल जाते हैं कि...

हर रोम में करोड़ो ब्रह्माण्ड, हर ब्रह्माण्ड में असंख्य लोक

संसार का आकर्षण किसका दिमाग ना ख़राब कर दे ! माया इतनी प्रबल है कि एक से एक ज्ञानियों को संसार की सच्चाई देखने ही न दे ! एक बार श्री इन्द्र ने अपना...

गलत कमाई रखे या दान करें नरक तो जाना ही पड़ेगा

शिवपुराण में यह वर्णन पाया जाता है कि महाराज शतानीक को दानी होने पर भी नरक-यातना भोगनी पड़ी थी। इसमें सन्देह नहीं कि महाराज शतानीक महादानी थे, किन्तु उनके बाद जब उनका पुत्र सिंहासन पर...

24 घंटा साथ रहने वाली सबसे बड़ी वफादार; मौत

श्रावस्ती नगरी में कृशागौतमी नाम की एक कन्या रहती थी। गौतमी उसका असली नाम था। काम करते-करते वह जल्दी थक जाती थी, अतएव लोग उसे कृशागौतमी के नाम से पुकारते थे। गौतमी ने जवानी...

थोड़ा सावधान रहे तो शासन का सुख भी उठाये और परलोक भी सँवारे

शास्त्र वर्णित कथानुसार एक बार अनेक ऋषि-मुनि बैठकर आत्मा और ब्रह्म के विषय में विचार-विमर्श करने लगे। बहुत विचार करने पर भी जब वे सहमत न हो पाये तब उन्होंने सोचा-क्यों न इसके समाधान...

केवल हर सम्बन्धों रिश्तों को धर्मपूर्वक निभाने भर से ही स्वर्ग मिल जाता है

महाभारत का युद्ध जीतने के बाद धर्मराज युधिष्ठिर ने निष्कण्टक राज्य किया। अश्वमेध-सहित अनेक बृहद् यज्ञों का अनुष्ठान भी किया। संन्यास लेने का समय आया तो उन्होंने अपना सब राजपाट परीक्षित को सौंप दिया...

जब हाथ में कटार लेकर दौड़े परम शक्ति तो पूरा ब्रह्माण्ड हाहाकार कर उठे

ताकत की चरम सीमा और खतरनाक इतनी की दुष्टों को देखते ही ह्रदय आघात हो जाय, ऐसी माँ चंडिका के चरणों में बारम्बार हाथ जोड़ कर विनती है कि हमारे भी सभी भय का...

पूरी पृथ्वी को भी नाग भगवान ने ही उठा रखा है अपने सिर पर

नागराज वासुकी प्रसन्न होकर अभय प्रदान करते हैं उनको, जो श्रावण पंचमी के दिन नागों की पूजा करते है । नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह...

शरण में जाओ, जिंदगी भर पेट भरने की गारंटी

पूरी दुनिया में जहा भी जिसका भी पेट भर रहा है, वो सिर्फ और सिर्फ श्री भगवान नारायण की कृपा से ही हो रहा है | इन्ही को भगवान विष्णु, नरसिंह और पद्मनाभ कहते है...

सिर पर भगवान का हाथ हो तो, अकेला आदमी पूरी सेना को पीट दे

कीचक के वध की सूचना आँधी की तरह फैल गई। वास्तव में कीचक बड़ा पराक्रमी था और उससे त्रिगर्त के राजा सुशर्मा तथा हस्तिनापुर के कौरव आदि डरते थे। कीचक की मृत्यु हो जाने...

एक कमजोर औरत क्या कर सकती है

जब यमराज सत्यवान (सावित्री के पति) के प्राणों को अपने पाश में बाँध ले चले, तब सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी। उसे अपने पीछे आते देखकर यमराज ने उसे वापस लौट जाने के...

प्रकृति का लय ही, प्रलय है

हर व्यक्ति के जीवन का अन्त ही प्रलय है । श्री महर्षि ने जाने कितने छात्रों को, जाने कितनी बार पढ़ाया होगा यह सूक्त। कितनी बार दुहराया होगा वह अर्थ जो उन्होंने अपने गुरु से सुना था।...