एक कठोर अनुशासक ऐसा भी

हर अस्तित्व के पृष्ठभूमि में एक कारण होता है
जो समय के साथ रोशनी में आता है

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में
अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की भाग दौड़ में

जब हम अपने रिश्तो की अहमियत को भूलने लगे
तब अनजाने ही रिश्तो के मूल्य कम होने लगे
और हम अपने – अपने सलीके से जिंदगी जीने लगे

अपनी संस्कृति को भूल कर
आधुनिकता और फैशन के नाम पर

अपनी सभ्यता और मर्यादाओं का
उल्लंघन करने लगे
खाद्यों और अखाद्यों का
भेद करना ही भूल गए

तब एक ऐसा कठोर अनुशासक (कोरोना)
पूरे विश्व के गलियारे में अवतरित हुआ

जिसने ना गरीब देखा ना अमीर
ना जाति देखा ना धर्म
निष्पक्ष भाव से सभी को अपने कठोर दंड से

दंडित करता रहा
जिंदगी रोती रही
मृत्यु आलिंगन करती रही

और हम अनजाने ही कब
एक मर्यादित और संत सा जीवन
जीने के लिए विवश हो गए
हम स्वयं ही समझ ना सके

लेखिका –
श्री देवयानी (श्री देवयानी की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए, कृपया नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें)-

एक माँ – पुत्र के विछोह की असीम पीड़ायुक्त संवाद

सिर्फ अपनी ख़ुशी की तलाश बर्बाद कर रही है अपने अंश की ख़ुशी

वो अपने

वो अनजाना कर्ज

माँ

सर्वे से पता चली ऐसी सीधी वजह, जिसे मानते बहुत लोग हैं, पर स्वीकारते कम लोग हैं

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