Category: महान लेखकों की सामाजिक प्रेरणास्पद कहानियां, कवितायें और साहित्य का अध्ययन, प्रचार व प्रसार कर वापस दिलाइये मातृ भूमि भारतवर्ष की आदरणीय राष्ट्र भाषा हिन्दी के खोये हुए सम्मान को

कविता -देवपाल-दूती खंड, बादशाह-दूती खंड, पद्मावती-गोरा-बादल-संवाद खंड, गोरा-बादल-युध्द-यात्राा खंड, गोरा-बादल-युध्द खंड, बंधन-मोक्ष; पद्मावती-मिलन खंड,- (संपादन – रामचंद्र शुक्ल )

कुंभलनेर राय देवपालू । राजा केर सत्राु हिय सालू॥ वह पै सुना कि राजा बाँधाा । पाछिल बैर सँवरि छर साधाा॥   सत्राुसाल तब नेवरै सोई । जौ घर आव सत्राु कै जोई॥  ...

कहानी – सौत- (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

जब रजिया के दो-तीन बच्चे होकर मर गये और उम्र ढल चली, तो रामू का प्रेम उससे कुछ कम होने लगा और दूसरे व्याह की धुन सवार हुई। आये दिन रजिया से बकझक होने...

कविता -राजा-बादशाह-मेल खंड, बादशाह भोज खंड, चित्तौरगढ़-वर्णन खंड, पद्मावती-नागमती-विलाप खंड, रत्नसेन-बंधन खंड- (संपादन – रामचंद्र शुक्ल )

सुना साह अरदासैं पढ़ीं । चिंता आन आनि चित चढ़ी॥ तौ अगमन मन चीतै कोई । जौ आपन चीता किछु होई॥   मन झूठा, जिउ हाथ पराए । चिंता एक हिए दुइ ठाएँ॥  ...

कहानी – उपदेश- (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

प्रयाग के सुशिक्षित समाज में पंडित देवरत्न शर्मा वास्तव में एक रत्न थे। शिक्षा भी उन्होंने उच्च श्रेणी की पायी थी और कुल के भी उच्च थे। न्यायशीला गवर्नमेंट ने उन्हें एक उच्च पद...

कविता -रत्नसेन-देवपाल-युध्द खंड, राजा रत्नसेन बैकुंठवास खंड, पदमावती-नागमती-सती खंड, उपसंहार,- (संपादन – रामचंद्र शुक्ल )

सुनि देवपाल राय कर चालू । राजहि कठिन परा हिय सालू॥ दादुर कतहुँ कँवल कहँपेखा । गादुर मुख न सूर कर देखा॥   अपने रँग जस नाच मयूरू । तेहि सरि साधा करै तमचूरू॥...

कहानी – स्वत्व-रक्षा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मीर दिलावर अली के पास एक बड़ी रास का कुम्मैत घोड़ा था। कहते तो वह यही थे कि मैंने अपनी जिन्दगी की आधी कमाई इस पर खर्च की है, पर वास्तव में उन्होंने इसे...

कविता -स्त्री – भेद- वर्णन खंड,पद्मावती-रूप चर्चा खंड, बादशाह-चढ़ाई खंड,राजा-बादशाह-युध्द खंड,- मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल )

पहिले कहौं हस्तिनी नारी । हस्ती कै परकीरति सारी॥ सिर औ पायँ सुभर गिउ छोटी । उर कै खीनि लंक कै मोटी॥   कुंभस्थल कुच मद उर माहीं । गयन गयंद ढाल जनु वाहीं॥...

कहानी – दुस्साहस- (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

लखनऊ के नौबस्ते मोहल्ले में एक मुंशी मैकूलाल मुख्तार रहते थे। बड़े उदार, दयालु और सज्जन पुरुष थे। अपने पेशे में इतने कुशल थे कि ऐसा बिरला ही कोई मुकदमा होता था जिसमें वह...

कहानी – रक्षा – (लेखक – वृंदावनलाल वर्मा)

मुहम्मदशाह औरंगजेब का परपोता और बहादुरशाह का पोता था। 1719 में सितंबर में गद्दी पर बैठा था। सवाई राजा जयसिंह के प्रयत्न पर मुहम्मदशाह ने गद्दी पर बैठने के छह वर्ष बाद जजिया मनसूख...

लेख – संग्राम – भाग -1 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पहला दृश्य प्रभात का समय। सूर्य की सुनहरी किरणें खेतों और वृक्षों पर पड़ रही हैं। वृक्षपुंजों में पक्षियों का कलरव हो रहा है। बसंत ऋतु है। नई-नई कोपलें निकल रही हैं। खेतों में...

कहानी – थोड़ी दूर और – (लेखक – वृंदावनलाल वर्मा)

जब मुहमूद गजनवी (सन 1025-26 में) सोमनाथ का मंदिर नष्ट-भ्रष्ट करके लौटा तब उसे कच्छ से होकर जाना पड़ा। गुजरात का राजा भीमदेव उसका पीछा किए चल रहा था। ज्यों-ज्यों करके महमूद गजनवी कच्छ...

लेख – संग्राम – भाग -2 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पहला दृश्य स्थान : चेतनदास की कुटी, गंगातट।   समय : संध्या।   सबल : महाराज, मनोवृत्तियों के दमन करने का सबसे सरल उपाय क्या है ?   चेतनदास : उपाय बहुत हैं, किंतु...

कहानी – खजुराहो की दो मूर्तियाँ – (लेखक – वृंदावनलाल वर्मा)

चंद्रमा थोड़ा ही चढ़ा था। बरगद की पेड़ की छाया में चाँदनी आँखमिचौली खेल रही थी। किरणें उन श्रमिकों की देहों पर बरगद के पत्तों से उलझती-बिदकती सी पड़ रहीं थीं। कोई लेटा था,...

लेख – संग्राम – भाग -3 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

प्रथम दृश्य स्थान : कंचनसिंह का कमरा।   समय : दोपहर, खस की टट्टी लगी हुई है, कंचनसिंह सीतलपाटी बिछाकर लेटे हुए हैं, पंखा चल रहा है।   कंचन : (आप-ही-आप) भाई साहब में...

कहानी – ‘कंजूस और सोना – (लेखक – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)

एक आदमी था, जिसके पास काफी जमींदारी थी, मगर दुनिया की किसी दूसरी चीज से सोने की उसे अधिक चाह थी। इसलिए पास जितनी जमीन थी, कुल उसने बेच डाली और उसे कई सोने...

लेख – संग्राम – भाग – 4 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पहला दृश्य   स्थान: मधुबन। थानेदार, इंस्पेक्टर और कई सिपाहियों का प्रवेश।   इंस्पेक्टर : एक हजार की रकम एक चीज होती है।   थानेदार : बेशक !   इंस्पेक्टर : और करना कुछ...