माँ

zxcमाँ आज तुम मेरे पास नहीं हो

फिर भी मै अकेला नहीं हू

क्योकी जब भी कभी मै किसी अनदेखी

अनछुई तपिश में घिरता हूँ

तुम्हारी ममता की छाँव

मुझे सहला जाती है

और जब भी मेरे कदम गलत दिशाओ की ओर उन्मुख होते है

तुम्हारे मधुमिश्रित नीतिवाक्य वापस उन्हें मोड़ लेते है

जब भी मै आत्मश्लाघा की प्रवंचना से छला जाता हूँ

तुम्हारी पावन मूर्ति की उजास मुझे सत्य का आईना दिखाती है

माँ आज तुम मेरे पास नहीं हो फिर भी मै अकेला नहीं हूँ

लेखिका –
श्री देवयानी
(श्री देवयानी की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए, कृपया नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें)-

वो अपने

वो अनजाना कर्ज

सिर्फ अपनी ख़ुशी की तलाश बर्बाद कर रही है अपने अंश की ख़ुशी

सर्वे से पता चली ऐसी सीधी वजह, जिसे मानते बहुत लोग हैं, पर स्वीकारते कम लोग हैं

(आवश्यक सूचना – “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट में प्रकाशित सभी जानकारियों का उद्देश्य, सत्य व लुप्त होते हुए ज्ञान के विभिन्न पहलुओं का जनकल्याण हेतु अधिक से अधिक आम जनमानस में प्रचार व प्रसार करना मात्र है ! अतः “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान अपने सभी पाठकों से निवेदन करता है कि इस वेबसाइट में प्रकाशित किसी भी यौगिक, आयुर्वेदिक, एक्यूप्रेशर तथा अन्य किसी भी प्रकार के उपायों व जानकारियों को किसी भी प्रकार से प्रयोग में लाने से पहले किसी योग्य चिकित्सक, योगाचार्य, एक्यूप्रेशर एक्सपर्ट तथा अन्य सम्बन्धित विषयों के एक्सपर्ट्स से परामर्श अवश्य ले लें क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं)



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