अकाल मृत्यु क्या होती है ?

· December 26, 2016

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़कर अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में विश्वस्तरीय योग/आध्यात्म सेंटर खोलकर सुख, शान्ति व निरोगता का प्रचार प्रसार करना चाहतें हैं, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप विश्व प्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह से योग, आध्यात्म से सम्बन्धित शैक्षणिक कोर्स करके अपने व दूसरों के जीवन को भी रोगमुक्त बनाना चाहतें हैं, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में योग, प्राणायाम, आध्यात्म, हठयोग (अष्टांग योग) राजयोग, भक्तियोग, कर्मयोग, कुण्डलिनी शक्ति व चक्र जागरण, योग मुद्रा, ध्यान, प्राण उर्जा चिकित्सा (रेकी या डिवाईन हीलिंग), आसन, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर, नेचुरोपैथी का शिविर, ट्रेनिंग सेशन्स, शैक्षणिक कोर्सेस, सेमीनार्स, वर्क शॉप्स, एक्जीबिशन (प्रदर्शनी), प्रोग्राम्स (कार्यक्रमों), कांफेरेंसेस आदि का आयोजन करवाकर समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना चाहतें हैं, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अब लुप्त हो चुके अति दुर्लभ विज्ञान के प्रारूप {जैसे- प्राचीन गुप्त हिन्दू विमानों के वैज्ञानिक सिद्धांत, ब्रह्मांड के निर्माण व संचालन के अब तक अनसुलझे जटिल रहस्यों का सत्य (जैसे- ब्लैक होल, वाइट होल, डार्क मैटर, बरमूडा ट्रायंगल, इंटर डायमेंशनल मूवमेंट, आदि जैसे हजारो रहस्य), दूसरे ब्रह्मांडों के कल्पना से भी परे आश्चर्यजनक तथ्य, परम रहस्यम एलियंस व यू.ऍफ़.ओ. की दुनिया सच्चाई (जिन्हें जानबूझकर पिछले कई सालों से विश्व की बड़ी विज्ञान संस्थाएं आम जनता से छुपाती आ रही हैं) तथा अन्य ऐसे सैकड़ों सत्य (जैसे- पिरामिड्स की सच्चाई, समय में यात्रा, आदि) के विभिन्न अति रोचक, एकदम अनछुए व बेहद रहस्यमय पहलुओं से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों व एक्जीबिशन (प्रदर्शनी) आदि का आयोजन करवाकर, इन दुर्लभ ज्ञानों से अनभिज्ञ समाज को परिचित करवाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अति पवित्र व मोक्षदायिनी धार्मिक गाथाएं, प्राचीन हिन्दू धर्म के वेद पुराणों व अन्य ग्रन्थों में वर्णित जीवन की सभी समस्याओं (जैसे- कष्टसाध्य बीमारियों से मुक्त होकर चिर यौवन अवस्था प्राप्त करने का तरीका) के समाधान करने के लिए परम आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी व उपयोगी साधनाएं व ज्ञान आदि से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों व एक्जीबिशन (प्रदर्शनी) आदि का आयोजन करवाकर, पूरी तरह से निराश लोगों में फिर से नयी आशा की किरण जगाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक आदर्श समाज की सेवा योग की असली परिचायक भावना अर्थात “वसुधैव कुटुम्बकम” की अलख ना बुझने देने वाले विभिन्न सौहार्द पूर्ण, देशभक्ति पूर्ण, समाज के चहुमुखी विकास व जागरूकता पूर्ण, पर्यावरण सरंक्षण, शिक्षाप्रद, महिला सशक्तिकरण, अनाथ गरीब व दिव्यांगो के भोजन वस्त्र शिक्षा रोजगार आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन, मोटिवेशनल (उत्साहवर्धक व प्रेरणास्पद) एवं परोपकार पर आधारित कार्यक्रमों (चैरिटी इवेंट्स, चैरिटी शो व फाईलेन्थ्रोपी इवेंट्स) का आयोजन करवाकर ऐसे वास्तविक परम पुण्य प्रदाता महायज्ञ में अपनी आहुति देना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या हमसे किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

इसका जवाब है कि,

अकाल मृत्यु जैसी कोई चीज नहीं होती है !

क्योंकि जब तक काल नहीं आता तब तक कोई मरता ही नहीं अर्थात कोई भी जीव कभी भी अकाल मौत नहीं मर सकता है !

लेकिन कुछ ऐसी दुर्लभ हस्तियाँ हर युग, हर काल में होती हैं जिन्हें मारना सिर्फ काल के बस की बात नहीं होती है !

जैसे रावण ने अपनी प्रचंड मेहनत से इतनी ज्यादा शक्ति अर्जित कर ली थी कि उसे मारना काल के बस की बात नहीं रही इसलिए स्वयं महाकाल को श्री राम बनकर आना पड़ा उसे मारने के लिए !

रावण प्रचंड मेहनती तो था लेकिन महान नहीं था क्योंकि उसके कर्म दुष्टता पूर्ण थे इसलिए रावण को ईश्वर (अर्थात भगवान् राम) के प्रेम की जगह क्रोध का सामना करना पड़ा !

लेकिन जब सज्जन व परोपकारी स्वभाव के महान योगी (चाहे वह कर्म योगी हों या हठ योगी या राज योगी या भक्ति योगी हों) अपने प्रचंड पुरुषार्थ से अनंत ब्रह्मांडो के निर्माता ईश्वर का दर्शन पाने का महा सौभाग्य प्राप्त कर लेतें है तो उनके जीवन की बागडोर भी स्वयं महा काल अपने हाथों में ले लेतें हैं मतलब उन ईश्वर दर्शन प्राप्त योगी पर भी काल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है !

हालाँकि ईश्वर का दर्शन भी कई प्रकार का होता है, जैसे किसी योगी का उनके द्वारा लगातार किये जाने वाले सद्कर्मों द्वारा उच्च स्थिति में पहुचने पर, उन्हें स्वप्न में ईश्वर का दर्शन प्राप्त होता है तो यह एक बड़ी उपलब्धि होती है, फिर जब वो योगी अपनी और ज्यादा मेहनत से उच्चतर स्थिति में पहुच जातें है तो ईश्वर की महती कृपा से वो कभी अचानक ऐसी प्रचंड भावोन्माद स्थिति में कुछ क्षण के लिए पहुँच जातें हैं कि उनकी सामने स्थित पत्थर की मूर्ती से भगवान् एकदम दिव्य सजीव (अर्थात मानवों की ही तरह जीवंत मांसल रूप में) रूप में प्रकट हो जातें हैं लेकिन यह जरूरी नहीं है कि इस दिव्य स्थिति में वह योगी भगवान् के उन सजीव रूप से बात भी कर सकें |

भगवान् के इस तरह सजीव (मांसल) रूप का दर्शन कर चुके योगियों का तो यह तय हो जाता है कि वे मरने के बाद ईश्वर के धाम पहुचेंगे लेकिन उनकी पीढ़ियों के अन्य सदस्यों को यह सुविधा प्राप्त नहीं होती जब तक कि उनके खुद के कर्म इस लायक ना हों |

किन्तु जब कोई योगी अपनी अथक प्रचंड मेहनत से उच्चतर स्थिति को भी पार करके, उच्चतम स्थिति में पहुँच जाते हैं तो उन्हें ईश्वर के ऐसे दुर्लभ रूप का दर्शन होता है जिसमें उन योगी की, अनंत ब्रह्मांडो के निर्माता ईश्वर से आमने सामने उसी तरह बातचीत होती है जैसे कोई इन्सान दूसरे इंसान से आमने सामने बैठ कर बातचीत करता है |

इस बातचीत के कुछ अंश ईश्वर के दर्शन देकर लौट जाने के बाद भी उन योगी को हमेशा याद रहता है और केवल बातचीत ही नहीं होती बल्कि ईश्वर उन महान योगी से वरदान मांगने के लिए बार बार जोर भी देते हैं और वह योगी जो भी वरदान अंततः मांगते हैं उस वरदान को ईश्वर अवश्य पूरा करते हैं | इस तरह ईश्वर का परम दुर्लभ दर्शन व वरदान प्राप्त करने वाले योगी खुद तो देह त्यागने के बाद ईश्वर का ही स्वरुप पाकर, ईश्वर के धाम में, ईश्वर के साथी बन जाते हैं और साथ ही उनकी 21 पीढियों का भी उद्धार होता हैं जिसके लिए उनकी 21 पीढ़ियों से सम्बंधित पारिवारिक सदस्यों को उसी जन्म में या एकाधिक और जन्म लेकर बहुत से कष्टसाध्य परोपकार के कार्य करने होते हैं (जो वे दैवीय प्रेरणा से उचित समय आने पर करके ही छोड़ते हैं) !

ईश्वर के दर्शन के बाद जीव को परम दुर्लभ मुक्ति मिलती है पर वास्तव में मुक्ति है क्या ?

मुक्ति का अर्थ होता है, सभी में अपनी ही अभिव्यक्ति और जब सभी में अपनी ही अभिव्यक्ति का अहसास होने लगता है तो वहां सभी तरह की उम्मीदें, आसक्ति और मोह की भावना ख़त्म हो जाती है – इसी को मुक्ति कहते हैं | सुनने में यह सरल लगता है लेकिन समझने में थोड़ा कठिन है और आत्मसात करने में तो यह बहुत ही कठिन है !

बहुत से लोगों को यह गलत फहमी होती है कि कोई जीव मरने के बाद अगर ईश्वर के धाम में पहुँच जाता है तो वो वहां पहुच कर सिर्फ अपने सुख, आराम में ही मग्न होकर रह जाता है और पृथ्वी स्थित अपने पारिवारिक सदस्यों को वो एकदम भूल जाता है !

जबकि ऐसा होता है नहीं क्योंकि जब स्वयं ईश्वर हम सभी लोगों की चिंता से मुक्त नहीं हो पाते और दिन रात ईश्वर सिर्फ हम सभी जीवात्माओं के उद्धार के बारे में ही सोचते रहते हैं तो फिर कैसे साक्षात् ईश्वर के ही स्वरुप उनके साथी अपना महान परमार्थी स्वभाव छोड़ सकते हैं ?

अर्थात ईश्वरीय प्रेरणा से, वे परम दिव्य साथी गण इस ब्रह्मांड में ईश्वर के ही समान सभी में व्यक्त होकर सभी के कल्याणार्थ लगातार प्रयास करते रहते हैं पर आसक्ति से रहित होकर मतलब जैसे ममता एक दिव्य गुण है प्रेम की ही तरह (जिस वजह से यह माँ को महान बनाता है) लेकिन जब ममता में आसक्ति की मिलावट हो जाती है तो यह मोह का रूप धारण कर लेती है जिससे यह मुक्ति के विपरीत बंधन का कारण बनने लगती है !

ऐसे ईश्वर के स्वरुप, ईश्वर के साथी गण की जिम्मेदारी तब बहुत बढ़ जाती है जब प्रकृति उन्हें ही आधार बना कर कुछ ऐसी दुर्लभ घटनाओं का सूत्र पात्र करने जा रही होती है जिसके बारे में कहा जा सकता है कि ना “भूतो ना भविष्यति” अर्थात ये घटनाएं इतनी ज्यादा गुप्त होती हैं कि इनकी थोड़ी बहुत ही जानकारी सिर्फ उन मानवों को पता लग पाती है जिनका भविष्य में इन घटनाओं को अंजाम देने में बेहद महत्वपूर्ण किन्तु कष्ट साध्य भूमिका होने वाली होती है !

तो यह है मुक्ति के बाद की अहम जिम्मेदारियों का असली परिचय !

हमेशा याद रखने वाली बात है कि मुक्ति कभी भी आयु की मोहताज नहीं होती है, ऐसे कई उदाहरण हमारे धर्म ग्रन्थों में वर्णित है जिसमें कम उम्र में ही मानवों ने देह त्याग कर मुक्ति पायी है !

मरने के बाद पिशाच योनी में जन्म उन्ही का होता है जिनके पाप कर्म इतने ज्यादा होते हैं कि वे दुबारा मानव योनि या इससे ऊँची योनि में जन्म लेने के योग्य नहीं होते हैं ! ऐसे पापी लोग भले ही पूरी आयु (100 वर्ष) जी कर मरें, तब भी बनेंगे भूत प्रेत ही !

और कोई पुण्यात्मा भले ही बहुत कम आयु में मर जाए, लेकिन होगा उसका उद्धार ही !

निष्कर्ष यही है कि अकाल मृत्यु जैसी कोई चीज नहीं होती है !


Complete cure of deadly disease like HIV/AIDS by Yoga, Asana, Pranayama and Ayurveda.

एच.आई.वी/एड्स जैसी घातक बीमारियों का सम्पूर्ण इलाज योग, आसन, प्राणायाम व आयुर्वेद से



ये भी पढ़ें :-