अघोषित वैश्विक महामारी बन चुकी “विटामिन डी की कमी” का आसान समाधान जानिये इस आयुर्वेद दिवस पर

शायद आपमें से बहुत से स्त्री/पुरुषों (चाहे आप जवान हों, बूढ़े हों या बच्चे हों) को यह पता भी नहीं होगा कि आपके शरीर में विटामिन डी (Vitamin D) की साधारण कमी या भयंकर कमी हो सकती है जिसकी वजह से आपके शरीर में कई छोटी – मोटी समस्याएं भी पिछले कई सालों से बनी हुई हो सकती हैं (जिन समस्याओं का सही कारण आप अब तक कुछ और ही समझ रहे थे) !

पहले आम तौर पर माना जाता था कि शरीर में विटामिन डी की कमी, सिर्फ उन अमीर लोगों को हो सकती थी जो महलों में रहने की वजह से नाजुक मिजाज हो जाते थे और जिन्हे थोड़ी सी भी सूरज की धूप बर्दाश्त नहीं होती थी या उन गरीब – बीमार लोगों को जो बेचारे हमेशा अँधेरे सीलन में रहने के लिए मजबूर थे !

लेकिन अभी स्थिति काफी बदल चुकी है क्योकि क्या अमीर, क्या गरीब, क्या पुरुष, क्या स्त्री, क्या बच्चा, क्या बूढ़ा और क्या जवान, जिसका भी बॉडी चेकअप करवाओ, उनमें से अधिकाँश के शरीर में कुछ ना कुछ विटामिन डी की डेफ्फिसिएन्सी (अभाव) सुनने को मिल सकता है, इसलिए कई लोग अब इसे अघोषित रूप से वैश्विक महामारी मान रहें हैं ! प्राप्त जानकारी अनुसार भारत के शहरों में रहने वाले लगभग 80 प्रतिशत लोग विटामिन डी की कमी से ग्रसित हैं और दिल्ली में तो हर 10 आदमी में से 8 आदमी विटामिन डी की कमी से प्रभावित है (अधिक जानकारी के लिए कृपया मीडिया में प्रकाशित यह खबरे पढ़ें- Vitamin D Deficiency- An Ignored Epidemic और The Vitamin D Epidemic and its Health Consequences ) !

भारत में तो अधिकाँश लोगों को पता ही नहीं होता है कि उनके शरीर में विटामिन डी की कमी है लेकिन जब वो अपने शरीर की किसी दूसरी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह पर ब्लड सैंपल से पैथोलॉजी में डायग्नोसिस करवाते हैं तब उन्हें अचानक से पता चलता है कि, अरे मेरे शरीर में तो विटामिन डी की भी कमी है !

फिर डॉक्टर्स उन लोगों को आम तौर कुछ एलोपैथिक मेडिसिन्स देते हैं विटामिन डी का लेवल शरीर में बढ़ाने के लिए, जिनकी मदद से विटामिन डी का लेवल कुछ दिनों में बढ़कर नार्मल हो तो जाता है लेकिन यहाँ पर हमेशा यह याद रखने की जरूरत है कि जब तक कमी का कारण मौजूद रहेगा तब तक विटामिन डी की दुबारा शरीर में कमी होने की संभावना बनी रहती है (विटामिन डी की ज्यादा मात्रा भी, शरीर में कई खतरनाक बीमारियाँ पैदा कर सकता है जिनके बारे में अधिक जानने के लिए कृपया मीडिया में प्रकाशित यह खबर पढ़ें- Vitamin D का ओवरडोज शरीर को बना सकता है इन 9 बीमारियों का अड्डा, कोमा तक की आ सकती है नौबत) !

आईये भगवान धन्वंतरि जयंती (23 अक्टूबर 2022) अर्थात “राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस” के इस महान अवसर पर, क्रमशः जानते हैं कि “विटामिन डी की कमी” से शरीर में आम तौर पर क्या समस्याएं पैदा हो सकती हैं, और विटामिन डी की कमी पैदा होने के मुख्य कारण क्या हो सकतें है, तथा उस कमी को दूर करने के आसान नेचुरल उपाय क्या हो सकतें हैं !

विटामिन डी की कमी से शरीर में पैदा हो सकने वाली समस्याएं निम्नलिखित हो सकती हैं-

• हर समय थकान महसूस होना

• मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द, ऐंठन होना

• जोड़ों व हड्डियों में दर्द होना (हड्डियों इतनी कमजोर हो जाना कि मामूली चोट/झटकों से टूट जाने का डर होना)

• स्वभाव में निराशा, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, ब्रेन फॉग (सोचने, समझने में दिक्क्त महसूस) होना

• बच्चों की लम्बाई ना बढ़ना

• हृदय रोग (जैसे ब्लड प्रेशर, हृदयाघात आदि) होना

• त्वचा पर असमय झुर्रियां पड़ना

• शूगर लेवल नियंत्रित ना रहना (डायबिटीज बढ़ना)

• आँख की रोशनी पर बुरा असर होना

• लीवर फैटी या खराब होना

• किडनी संबंधित रोग होना

• पुरुषत्व की कमी होना

• बालों का झड़ना (alopecia)

• अस्थमा या अन्य फेफड़ों के रोग होना

• दांतों का कमजोर होना

• मोटापा बढ़ना

• शरीर की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर हो जाने की वजह से शरीर में अक्सर कोई छोटी – बड़ी समस्या पैदा होते रहना

• कैंसर हो जाने का भी खतरा होना

अब बात करते हैं कि आखिर शरीर में विटामिन डी कम कैसे हो जाती है ! आम तौर पर इसका सबसे मुख्य कारण माना जाता है कि शरीर पर पर्याप्त सूर्य प्रकाश (धूप) का ना पड़ना और डेयरी प्रोडक्ट्स (मतलब ताजा दूध, दही, मक्खन, छाछ, घी, छेना आदि) का रोज सेवन ना करना ! लेकिन इन कारणों के अलावा भी कुछ ऐसे नए संभावित कारण भी खोजे गए हैं जिनके बारे में आज भी अधिकाँश लोग एकदम अनजान हो सकतें हैं, जैसे-

कुछ लोगों ने संभावना व्यक्त की है कि घरों में लगे हुए कुछ वॉटर प्यूरीफायर्स (ऑर ओ; RO – Water Filters & Purifiers) पानी को बहुत ज्यादा साफ़ करने के चक्कर में पानी से गन्दगी के साथ – साथ कई आवश्यक पोषक तत्वों को भी बाहर निकाल देते हैं जिसकी वजह से वह पानी शरीर में विटामिन डी की आपूर्ति में सहायक सिद्ध नहीं हो पाता है ! जैसा कि आपको पता होगा ही कि हम सभी मानवों के शरीर में लगभग 60 प्रतिशत जल होता है जिसमें मस्तिष्क में 85 प्रतिशत जल होता है, ब्लड में 79 प्रतिशत जल होता है और फेफड़ों में 80 प्रतिशत जल होता है; इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा कि “जल जो की जीवन है, उसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करना, जीवन के साथ छेड़छाड़ करने के समान हो सकता है” !

अब आजकल के शहरों में रहने वाले लोगों की मॉडर्न लाइफस्टाइल (जिसमें कदम – कदम पर विभिन्न तरह के केमिकल्स का बहुत ही ज्यादा इस्तेमाल होता है) और गावों में रहने वाले गरीब लोगों द्वारा खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले केमिकल्स (फर्टिलाइज़र्स, पेस्टिसाइड्स आदि) की वजह से भूमिगत पानी (Ground water) में भी इतने खतरनाक तरह के रसायन घुल चुके हैं कि उस पानी को पीने से पहले, उसकी ठीक से सफाई ना करना भी खतरनाक है और सफाई के नाम पर गंदगी के साथ – साथ आवश्यक पोषक तत्वों को बाहर निकाल देना भी खतरनाक है (अधिक जानकारी के लिए मीडिया में प्रकाशित यह खबर देखें जिसमें यह संभावना व्यक्त की गयी है कि कुछ ऑर. ओ. वॉटर की वजह से विटामिन डी की कमी और कई अन्य बीमारियां बढ़ रहीं हैं- RO Water increasing the Vitamin D deficiency and many more diseases) !

इसके अलावा कई लोग एयर कंडीशनर (Air Conditioner) को भी बड़ा दोषी मानते हैं विटामिन डी की कमी का, क्योकि एयर कंडीशनर के आरामदायक ठंडे माहौल का आदती हो चुका इंसान, थोड़ी सी भी देर के लिए खुले आसमान के धूप, गर्मी, पसीना युक्त माहौल में जाना नहीं चाहता है (इसके बारे में अधिक जानने के लिए कृपया मीडिया में प्रकाशित यह खबर पढ़ें- क्या ऑफिस में हमेशा रहते हैं बीमार ? ये है इसके पीछे की वजह

आईये अब हम बात करते हैं उन उपायों के बारे में जिनसे हम अपने शरीर में विटामिन डी का लेवल आसानी से बढ़ा सकतें हैं ! हम सबसे पहले बात करेंगे कुछ सामान्य तरीकों के बारे में जिनका प्रयोग लोग आदिकाल से करते आ रहें हैं और उनके अलावा हम बात करेंगे परम आदरणीय ऋषि सत्ता द्वारा प्रदत्त कुछ विशेष जानकारियों की जो इस समस्या के समाधान में अत्यन्त लाभकारी साबित हो सकती हैं (चूंकि विटामिन डी की कमी की समस्या अब विश्व स्तर पर व्याप्त हो चुकी है इसलिए “स्वयं बनें गोपाल” समूह ने इसके समाधान के लिए, परम आदरणीय ऋषि सत्ता का भी मार्गदर्शन प्राप्त करने का प्रयास किया और हर बार की तरह हमें सर्वकल्याणार्थ उनका आशीर्वाद स्वरुप ज्ञान सहज ही प्राप्त हुआ जिसके लिए हम उनके अत्यंत आभारी है) !

तो सर्वप्रथम वे सामान्य 3 तरीके हैं-

(1)- सुबह व शाम की धूप में कम से कम 15 मिनट से लेकर आधे घंटे तक लेटना (या टहलना) ! कोशिश करिये कि धूप, आपके शरीर के अधिक से अधिक अंगो पर पड़े इसलिए शरीर पर कम से कम कपड़े हों तो बेहतर है ! धूप लेते समय अगर शरीर पर सरसों/नारियल के तेल से या देशी घी से मालिश भी किया जाए तो सोने में सुगंध वाला लाभ मिलता है यानी धूप से मिलने वाला फायदा कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है !

(2)- रोज कम से कम 1 ग्लास दूध जरूर पीना चाहिए ! हो सके तो दोपहर में 1 कटोरी दही भी अवश्य लें ! शुद्ध छेना, छाछ आदि भी बेहद फायदेमंद हैं और अगर आपको डायबिटिज, मोटापा या हृदय रोग है तब भी आप भारतीय देशी गाय माँ के दूध से बना कोई भी ताजा प्रोडक्ट बेहिचक उचित मात्रा में ले सकते हैं और इससे आपको कोई नुकसान नहीं होगा (दही में चीनी की जगह काला नमक या गुड़ मिला सकते हैं और दूध में भी गुड़ मिलाकर पी सकते हैं) !

(3)- रोज एक ही तरह का अनाज/सब्जी/दाल खाने की जगह कोशिश करिये रोज बदल – बदल कर खाने की, मतलब हर दिन अलग – अलग अनाजों/सब्जियों/दालों को खाइये, या थोड़ा – थोड़ा सभी अनाज/सब्जी/दाल आपस में मिलाकर रोज खाइये ताकि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक किसी पोषक तत्व {विटामिन्स व मिनरल्स जैसे- Biotin (vitamin B7), Folic acid (folate, vitamin B9), Niacin (vitamin B3), Pantothenic acid (vitamin B5), Riboflavin (vitamin B2), Thiamin (vitamin B1), Vitamin B6, Vitamin B12, Vitamin C, Vitamin A, Vitamin D, Vitamin E, Vitamin K, Calcium, Chloride, Magnesium, Phosphorus, Potassium, Sodium, Sulfur, Chromium, Copper, Fluoride, Iodine, Iron, Manganese, Molybdenum, Selenium, Zinc आदि} की कभी कमी ना पड़ने पाए (मल्टी ग्रेन आटा का एक श्रेष्ठ विकल्प है श्री बाबा रामदेव के पतंजलि स्टोर पर मिलने वाला “नवरत्न आटा” जिसमें गेहूं, जौ, चौलाई, मक्का, ज्वार, चना, सिंघाड़ा, सोयाबीन व बाजरा का मिश्रण होने की वजह से ये बेहद पोषक है) ! दालों के लिए आप अरहर, चना, मसूर, मूंग, उड़द आदि को मिक्स करके रोज खाएंगे तो मुफ्त में कई बीमारियों का नाश हो जाएगा और आपके शरीर में कभी प्रोटीन की कमी नहीं पड़ेगी ! हर अलग – अलग मौसम में मिलने वाली सब्जियों व फलों का ही सिर्फ सेवन करना चाहिए (ना की बेमौसम मिलने वाली फ्रोजेन सब्जियों व फलों का) ! डाइटिंग के नाम पर लम्बे समय तक बहुत कम खाने से बुढ़ापा तेजी से आता है ! सिर्फ एक ही तरह के अनाज व सब्जियों का रोज सेवन करने से भी शरीर में कुछ विटामिन्स व मिनरल्स की कमी पड़ सकती है इसलिए करोड़ो वर्ष पुराने आयुर्वेद में भारतीय गाय माँ के दूध – दही आदि का भी रोज सेवन करना कम्पलसरी (अनिवार्य) बोला गया है ताकि शरीर में कभी भी, किसी भी विटामिन्स व मिनरल्स की कमी ना पड़ सके (कोशिश करिये सिर्फ देशी गाय माँ का दूध का ही सेवन करने की लेकिन अगर ना मिल सके तो, भैंस के दूध का भी सेवन किया जा सकता है, किन्तु जर्सी गाय के दूध का सेवन बिल्कुल ना करें) !

अब बात करते हैं परम आदरणीय ऋषि सत्ता द्वारा प्रदत्त विशेष जानकारी की-

परम आदरणीय ऋषि सत्तानुसार विटामिन डी की कमी होने का एक सबसे बड़ा कारण है मानवों का सूर्यास्त के बाद भोजन करना जो कि आयुर्वेद सम्मत नहीं है ! आयुर्वेद के अनुसार मानवों को अंतिम भोजन (यानी डिनर) सूर्यास्त से पहले कर लेना चाहिए और रात में 9 बजे तक सो जाना चाहिए (क्योकि सर्वश्रेष्ठ नींद मध्य रात्रि यानी रात 12 बजे से पहले की ही होती है) ! ऋषि सत्तानुसार सूर्यास्त के बाद भोजन करने से वह भोजन, सूर्य के कई गुणों से विहीन हो जाता है इसलिए उससे विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है और उसका पाचन भी अपेक्षाकृत धीरे होता है जिससे शूगर लेवल व मोटापा भी बढ़ सकता है !

इसलिए भोजन को दिन में (यानी जब सूर्य आकाश में हो) खाने से पर्याप्त विटामिन डी मिलता है ! आधुनिक वैज्ञानिको को भले ही अभी इस थ्योरी को डाइजेस्ट करने में मुश्किल हो कि “सूर्य के उदय और अस्त होने से भोजन के विटामिन डी पर कैसे असर पड़ सकता है” लेकिन उम्मीद है जल्द ही वैज्ञानिक इस थ्योरी को भी उसी तरह स्वीकारेंगे जैसे करोड़ो साल पहले भारतीय ज्योतिष ग्रंथ में लिख दिया गया था कि आकाश में चन्द्रमा की साइज के हिसाब से हर मानव मन का स्वभाव भी रोज बदल सकता है और जिसे बाद में सम्भवतः आधुनिक शोधकर्ताओं ने भी स्वीकारा (इसके बारे में अधिक जानने के लिए कृपया यह न्यूज़ पढ़ें- चांद का आपके मूड से है एक रिश्ता)

परम आदरणीय ऋषि सत्तानुसार अगर कोई मानव किसी कारणवश अपना अंतिम भोजन (डिनर) सूर्यास्त से पहले तक ना कर सकता हो तो भी वह एक आसान तरीके को अपनाकर विटामिन डी की कमी से बच सकता है ! इस तरीके में केवल इतना करना है कि कोई व्यक्ति 24 घंटे में जितना भी खाना खाता हो उसका आधे से ज्यादा खाना (यानी लगभग 60 प्रतिशत खाना) वह दिन में (यानी जब तक सूर्य डूबे ना हों) खा ले और 40 प्रतिशत खाना रात में जब चाहे अपनी सुविधानुसार खा ले ! यानी आसान भाषा में कहें तो अगर आप 24 घंटे में 6 रोटी खाते हों तो आपको 4 रोटी दिन में खाना है और 2 रोटी रात में खाना है ! इसी तरह भोजन की अन्य सामग्रियां (जैस- सब्जी, दाल, चावल, दूध आदि) की 24 घंटे की कुल मात्रा का, 60 प्रतिशत हिस्सा दिन में खाना है और 40 प्रतिशत रात में खाना है !

इसके अलावा परम आदरणीय ऋषिसत्ता ने एक और अति महत्वपूर्ण जानकारी बताई जिसके अनुसार शिवपुराण में योगिराज भगवान शिव ने माँ पार्वती को बताया है कि दुनिया में सारी उपलब्धियों को पाया जा सकता है दो चीजों की मदद से, और वो हैं- वायु और पारा ! पारा से कई दुर्लभ औषधियां बन सकती हैं जिन्हे बना पाना तो आज के अल्प सामर्थ्य वाले मानवों के लिए अब सम्भव नहीं है , लेकिन वायु के दुर्लभ लाभ निश्चित प्राप्त किये जा सकते हैं सभी मानवों द्वारा ! वायु के सभी औषधीय लाभ पाने का सबसे आसान तरीका है प्राणायाम ! और उन्ही प्राणायामों में से एक है अनुलोम विलोम प्राणायाम जिसे प्रतिदिन ठीक तरीके से मात्र 100 बार (जिसमे कम से कम आधा घंटा लग सकता है) करने से, सामान्यतया शरीर में किसी भी विटामिन या मिनरल्स की कमी नहीं पड़ सकती है !

अब यहाँ पर प्रश्न यह बनता है कि अगर किसी व्यक्ति से खाने पीने में कभी – कभी लापरवाही हो जाती है, लेकिन उससे प्राणायाम में कभी लापरवाही नहीं होती है, तो क्या तब भी वह विटामिन्स व मिनरल्स की कमी से बच सकता है ! तो इसका उत्तर है, हाँ ! मतलब सिर्फ प्राणायाम की वजह से, उसके खाने पीने में की गयी कई छोटी मोटी लापरवाहियां उस पर कुछ ख़ास असर नहीं डाल सकती हैं ! खाने की कमी को, प्राणायाम कैसे पूरा कर सकता है ? वो ऐसे कर सकता है कि अनुलोम विलोम प्राणायाम की वजह से सुषम्ना स्थित 7 चक्र, हर बार पहले से ज्यादा एक्टिवेट होते जाते हैं और इन्ही चक्रों में छिपे हुए अमृत द्रव (जो स्वयं महासंगम है उन सभी दुर्लभ पदार्थों का जो शरीर का अद्भुत कायाकल्प करने की क्षमता रखते हैं) के अति सूक्ष्म स्राव से भी शरीर के सारे आवश्यक पोषक तत्वों की स्वतः पूर्ती हो सकती है ! इसलिए हर व्यक्ति को प्रतिदिन आधा घंटा धीरे – धीरे अनुलोम विलोम प्राणायाम अवश्य करना चाहिए !

अतः सारांश यही है कि विटामिन डी की लम्बे समय तक शरीर में कमी होने से, शरीर में क्या – क्या उपद्रव पैदा हो सकते हैं यह ऊपर दिए हुए लक्षणों से समझा जा सकता है इसलिए यह अति आवश्यक है कि वक्त रहते अपनी दिनचर्या में मामूली परिवर्तन करके, किसी बड़ी समस्या से बचा जा सकता है !

जय हो परम आदरणीय गौ माता की !
वन्दे मातरम् !

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