नोवेल कोरोना वायरस (Novel Corona Virus; COVID-19) में लाभकारी हो सकतें है ये उपाय

नोवेल कोरोना वायरस (Novel Corona Virus; COVID-19) का नाम सुनते ही कई तरह के भय व शंकाएं मन में उठने लगतीं हैं कि आखिर ये वायरस अचानक आया कहाँ से, और इससे मुक्ति कैसे मिल सकती है !

ये वायरस आया कहाँ से; इसके बारे में तो कई तरह की बातें मीडिया में प्रचलित हैं जैसे- यह किसी गुप्त जैविक हथियार के निर्माण के दौरान गलती से फ़ैल गया या किसी जहरीले जानवर के मांस को खाने से फ़ैल गया आदि आदि !

पर इस वायरस की प्रबल शक्ति को देखकर इसके पीछे किसी साजिश की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है ! यहाँ पर वायरस की प्रबल शक्ति से तात्पर्य है;- इसकी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने की क्षमता और इस वायरस पर जल्दी किसी दवा का असर ना होना ! जैसे लगता है मानो ये वायरस स्मार्ट हों और दवाओं (एंटीबायोटिक्स) के खिलाफ अपनी क्षमता बढ़ाना जानतें हों !

वैसे इस बात की भी संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि पूरा कोरोना वायरस का प्रकरण एक “प्रोपेगेंडा वॉर” (Propaganda War; अफवाह जनित युद्ध) का हिस्सा हो !

“प्रोपेगेंडा वॉर” आज एक नए तरह के युद्ध की स्टाइल है जिसमें सिर्फ मीडिया के माध्यम से अफवाह फैला कर किसी एक देश या कई देशों की अर्थव्यवस्था को एकदम चौपट कर देना !

अफवाह का यह मतलब नहीं है कि कोरोना वायरस का अस्तित्व है ही नहीं पर यह भी तो संभव हो सकता है कि कोरोना वायरस को जानबूझकर कुछ खुराफाती लोगों द्वारा विश्व के अलग – अलग हिस्सों में गुप्त रूप से फैलाया जा रहा हो जिसे टी आर पी की भूखी मीडिया जाने अनजाने इस कदर हाई लाइट कर रही है कि कई देशों में दहशत का माहौल पैदा हो गया है जिससे उनके उद्योग धंधे, निवेश, पर्यटन, शेयर मार्केट आदि को लाखो करोड़ो का घाटा पहुच रहा है !

यह भी हो सकता है कि जो देश आज इस वायरस से खुद पीड़ित हैं उन्होंने ने ही इस वायरस का वर्तमान या भविष्य में किसी दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए निर्माण किया हो !

वास्तविकता चाहे जो भी हो वह सघन जांच के बाद एक ना एक दिन सामने आ ही जाएगी; पर यह समय है हम सभी का आपस में एकजुट होकर, हर तरह की अफवाहों का खंडन करते हुए, इस बिमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने का !

इस बिमारी के सामान्य लक्षण (जैसे- जुखाम, खांसी, गले में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, बुखार आदि) और सामान्य बचाव (जैसे- चेहरे पर मास्क लगाना, हाथ मिलाने की बजाय नमस्ते करना, हाथ अच्छे से धोकर ही कुछ भी खाना पीना आदि) के बारे में तो अधिकाँश को पता चल चुका है अतः अब हम यहाँ चर्चा कर रहें हैं कुछ ऐसे उपायों की जो कोरोना वायरस में लाभकारी साबित हो सकतें हैं !

इस समस्या की गम्भीरता को देखते हुए इन उपायों की जानकारी प्राप्त करने में “स्वयं बनें गोपाल” समूह को परम आदरणीय ऋषि सत्ता का मार्गदर्शन प्राप्त होने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ जिसके लिए हम उनके अति आभारी हैं ! अतः वे लाभकारी उपाय इस प्रकार है-

पहला उपाय- औषधियों में लहसुन (Garlic) वो औषधि है जो इस कोरोना वायरस के विनाश में भूमिका निभा सकती है इसलिए प्रतिदिन लहसुन की कम से कम 1 कली और अधिक से अधिक 3 (या 5) कली तक रोज खाना चाहिए !

लहसुन चूंकि बहुत गर्म व उग्र औषधि है इसलिए हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपने ब्लड प्रेशर के हिसाब से ही लहसुन की मात्रा लेनी चाहिए !

लहसुन आश्चर्जनक रूप से बहुत ही ज्यादा गुणकारी औषधि है लेकिन इसका सेवन सिर्फ वही योगी नहीं करते जो ध्यान के माध्यम से ईश्वर को प्राप्त करने का प्रयास करतें हैं क्योंकि इसको खाने से चित्त उग्र होता है जिससे मन को एकाग्र करने में थोड़ी दिक्कत आ सकती है !

बाकी सभी गृहस्थों को रोज लहुसन का प्रयोग अवश्य करना चाहिए ! लहसुन खाने का सबसे आसान तरीका यही होता है कि रात को खाना खाते समय लहसुन की कच्ची कलियों को छीलकर खा लेना चाहिए ! लहसुन खाने के बाद काफी देर तक मुंह से थोड़ी बदबू आती रहती है इसलिए रात में ही खाना श्रेयस्कर होता है ! बदबू को कम करने के लिए इलायची का प्रयोग भी किया जा सकता है !

कुछ लहसुन आकार में बहुत ही बड़े होतें है, मतलब वे सामान्य लहसुन से लगभग 10 गुना ज्यादा बड़े होतें हैं इसलिए उन्हें पूरा खाने की बजाय, उनका उतना ही बड़ा टुकड़ा खाना चाहिए जितना कि सामान्य लहसुन की एक से तीन कलियाँ होतीं हैं अन्यथा ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है !

लहसुन का प्रयोग इस तरह की खतरनाक महामारियों में काफी पहले से होता आ रहा है इसका एक उदाहरण पूर्व जन्म चिकित्सा पद्धति (Past Life Therapy) के विश्वप्रसिद्ध डॉक्टर ब्रायन विज (Dr. Brian Weiss) की पुस्तक “मैनी लाईव्ज़ मैनी मास्टर्स“ (Many Lives, Many Masters) में भी दिया गया है जिसमें एक महिला मरीज तन्द्रा अवस्था में अपने पूर्व जन्म में जाकर देखती है कि उसके निवास क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खतरनाक महामारी फैली हुई है जिसके इलाज के लिए लोग लहसुन का प्रयोग कर रहें हैं ! निष्कर्ष यही है कि लहसुन की खतरनाक से खतरनाक बिमारी के विषाणुओं की नाश की क्षमता के बारे में लोग काफी पहले से जानते और प्रयोग भी करते आ रहें हैं !

दूसरा उपाय- कोरोना वायरस का सबसे बड़ा दुश्मन है सूर्य की किरणे (Sun Rays) ! इसलिए कोरोना वायरस के मरीजों को अधिक से अधिक सूर्य की किरणों को अपने शरीर पर पड़ने देना चाहिए !

सूर्य से निकलने वाली किरणों के बारे में, मात्र थोड़े से ही लाभों को खोजकर, आज के वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हो गएँ है जबकि हमारे अनंत वर्ष पुराने परम आदरणीय हिन्दू धर्म में सूर्य को भगवान् नारायण का प्रत्यक्ष अवतार बताते हुए पूरी धरती का पोषक बताया गया है तो आप इसी से अंदाजा लगा सकतें कि प्रतिदिन सूर्य की किरणों का शरीर पर पड़ने का कितना अधिक लाभ मिलता है; जिसके सबसे बड़े उदाहरण है सड़कों के किनारे हमेशा धूप सहने वाले लाखों – करोड़ो गरीब मजदूर लोग, जो ना जाने कितना कूड़ा कचरा युक्त जहरीला भोजन रोज खाने के बाद भी वर्षों तक कड़ी मेहनत युक्त जीवन जीतें है, जबकि सूर्य प्रकाश से विहीन 24 घंटे एयर कंडीशनर युक्त महलों में रहने व अच्छी क्वालिटी का खाना खाने के बाद भी, बहुत से ऐसे लोग हैं जो आये दिन किसी ना किसी बिमारी से पीड़ित होकर बिस्तर पर ही पड़े रहतें हैं !

एक समस्या यह भी है कि ऐसे देशों के मरीज व जनता क्या करे जहाँ कई – कई दिनों तक सूर्य के दर्शन ही नहीं होतें हों या जब कोई मरीज किसी हॉस्पिटल के आई सी यू में भर्ती हो तो उसे कैसे सूर्य प्रकाश के दर्शन हों ?

तो ऐसे में मरीज यह कर सकता है कि वह अपने शरीर की नाभि में स्थित भगवान् सूर्य का ध्यान करे ! जैसा कि “स्वयं बनें गोपाल” समूह ने अपने पूर्व के कई लेखों में खुलासा किया है कि हर स्त्री/पुरुष के सूक्ष्म शरीर के नाभि प्रदेश में साक्षात भगवान् सूर्य का वास होता है !

अतः कोरोना वायरस से ग्रस्त कोई मरीज या अन्य कोई भी स्वस्थ स्त्री/पुरुष बेड पर लेटे हुए यह ध्यान कर सकता है कि उसके पेट की नाभि में साक्षात भगवान् सूर्य स्थित हैं जिनसे निकलने वाली दिव्य प्रकाश की किरणे पूरे शरीर के हर अंगो के रोम – रोम में तेजी से समा रही हैं जिससे उसका पूरा शरीर तेजी से स्वस्थ, मजबूत, ताकतवर व सुंदर बनता जा रहा है !

बीमार कमजोर व्यक्ति को इस तरह ध्यान बस उतने ही देर तक करना चाहिये जितने देर में उसे कोई तकलीफ (जैसे- सिर दर्द आदि) ना हो और स्वस्थ व्यक्ति इसे आधा घंटा तक रोज करे तो पर्याप्त है !

बीमार व्यक्ति थोड़ी – थोड़ी देर (जैसे- 5 – 10 मिनट) का ध्यान 24 घंटे में कई बार कर सकता है ! पर जब भी भरपेट खाना (जैसे लंच, डिनर) खाया हो तो उसके 2 घंटे बाद और थोड़ा सा खाना खाया हो (जैसे- चाय काफी, ब्रेकफास्ट आदि) तो उसके आधे घंटे से एक घंटे बाद ही ध्यान करना चाहिए नहीं तो एसिडिटी हो सकती है ! इस ध्यान को सीधे लेटकर (रीढ़ की हड्डी एकदम सीधे रहे तो बेहतर होता है) या बैठकर किया जा सकता है ! इस ध्यान को रात में भी क्या जा सकता है (क्योकि नाभि में स्थित सूर्य कभी भी अस्त नहीं होतें है) !

इसमें एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि सूर्य किरणों का ध्यान करते समय केवल किरणों के प्रकाश का ही ध्यान करना चाहिए, ना कि किरणों की गर्मी का ! मतलब हम सभी जानतें हैं कि सूर्य एक गर्म पिंड होता है इसलिए इससे निकलने वाली किरणे भी गर्म होती हैं लेकिन जब सूर्य का ध्यान पेट की नाभि में करतें हैं तो सूर्य को गर्म पिंड के रूप में ध्यान नही करतें हैं और ना ही इसकी किरणों को गर्म रूप में ध्यान करतें हैं क्योकि कोई आदमी अगर अपने पेट की नाभि में भगवान् सूर्य की किरणों में प्रकाश के साथ – साथ ऊष्मा का भी ध्यान करेगा तो उसे पेट में एसिडिटी भी हो सकती है !

इसलिए सर्वोत्तम यही है कि नाभि में ध्यान करते समय सूर्य को सिर्फ एक प्रकाश पिंड के रूप में ध्यान करना चाहिए और इससे निकलने वाली किरणों की केवल प्रकाश व दिव्यता (ना कि किरणों की गर्मी पर) पर ही ध्यान देना चाहिए जिनमें अमृत के समान तेजी से सर्वरोग नाश करने की क्षमता होती है !

कभी – कभी यह भी समस्या देखने को मिलती है कि मरीज बिमारी के वजह से बहुत ही ज्यादा कमजोर होकर, बेड पर बेहोश लेटा रहता है तो ऐसे में मरीज का कोई भी हितैषी (जैसे- माता, पिता, पति, पत्नी, बेटा, बेटी, मित्र आदि) चाहे तो वह मरीज की जगह खुद ही इस तरह मानसिक ध्यान कर सकता है कि मरीज के पेट की नाभि में स्थित भगवान् सूर्य चमक रहें है और उनसे निकलने वाला अनंत दिव्य प्रकाश की किरणे मरीज को बहुत ही तेजी स्वस्थ, मजबूत, ताकतवर व सुंदर बना रहीं है ! मरीज का हितैषी, मरीज के लिए इस तरह का ध्यान चाहे कितनी भी दूर सी बैठकर (मतलब अपने घर में भी बैठकर) कर सकता है !

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