जानिये, कैसे अगले कुछ सालों में आम आदमी का जीवन भी पूरी तरह से बदल सकता है “ए. आई.” (A. I.; आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)

Symbolic Image (प्रतीकात्मक चित्र)

“स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए विभिन्न विषयों के मूर्धन्य शोधकर्ताओं का हमेशा सेवा भाव से यही उद्देश्य रहता हैं कि वे ऐसी जानकारियों को सही रूप में आप सभी आदरणीय पाठकों तक पहुंचा सकें, जिनसे वर्तमान दुनिया की अधिक से अधिक मुश्किलें हल हो सकें या भविष्य में आ सकने वाली किसी नयी समस्या के प्रति पहले से ही सावधान हुआ जा सके !

चूंकि इस आर्टिकल का विषय “ए. आई.” (A. I.; Artificial intelligence; आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) है इसलिए सबसे पहले जिन आदरणीय पाठको को यह नहीं पता है कि ए. आई. होता क्या है, उन्हें हम बताना चाहेंगे कि ए. आई. को सरल भाषा में मशीनों (जैसे- अति विकसित रोबोट, कंप्यूटर आदि) द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली “कृत्रिम बुद्धि” कहा जा सकता है ! ये जरूरी नहीं है कि ए. आई. केवल कंप्यूटर या रोबोट की शक्ल में हो क्योकि ए. आई. किसी भी ऐसी इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के रूप में हो सकता है जिसमे काफी एडवांस्ड माइक्रो प्रोसेसर्स (Microprocessor; डेवलप्ड आई. सी.) लगा हुआ होता हैं जिसकी वजह वो इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बहुत कम समय में बहुत ज्यादा काम कर सकती है (आम तौर पर लोगों को समझने की सुविधा के लिए ए. आई. को कंप्यूटर या रोबोट के रूप में दिखाया जाता है) !

वैसे कई लोगों के मन में अक्सर यह प्रश्न उठता है कि साधारण पुराने कंप्यूटर (या रोबोट) में भी तो थोड़ी बहुत बुद्धि रहती थी (जिसकी वजह से वो कई कठिन काम कर पाते थे) तो फिर उस साधारण कंप्यूटर की बुद्धि को ए. आई. क्यों नहीं कहा जाता हैं ! तो सामान्य भाषा में इसका उत्तर यह है कि, पुराने साधारण कंप्यूटर (या रोबोट) की जो बुद्धि थी वो लगभग उतना ही काम कर पाती थी जितने के लिए उन्हें प्रोग्राम्ड किया जाता था, लेकिन ए. आई. आधारित कंप्यूटर (या रोबोट) को बहुत थोड़े से कमांड (आदेश) देकर बहुत ज्यादा काम करवाया जा सकता है, क्योकि इनकी प्रोग्रामिंग इतनी ज्यादा एडवांस्ड होती है कि उनके पास लगभग हर नई परिस्थिति के हिसाब से काफी कुछ नया सीखकर, कई निर्णय खुद लेने की क्षमता होती है !

जैसे- अगर पुराने साधारण कम्प्यूटर को हम किसी कार से जोड़कर, बिना ड्राइवर के उस कार को चलाने की कोशिश करें, तो हमें अपनी कार को रास्ते पर चलने वाली दूसरी गाड़ियों की टक्कर से बचाने के लिए और सड़क पर सिर्फ सही दिशा में कार को बढ़ाने के लिए, लगभग हर सेकंड अपने कंप्यूटर को इंस्ट्रक्शंस (आदेश) देना पड़ सकता है ताकि कंप्यूटर हमारी कार को जरूरत के हिसाब से दाए, बाएं, आगे, पीछे मोड़ता रहे ! साधारण कंप्यूटर को कार से जोड़ने पर हमें इतनी तो सहूलियत मिल सकती है कि बिना किसी ड्राइवर के, हम घर बैठकर इंटरनेट से ही अपनी कार को पूरी दुनिया की किसी भी सड़क पर चला सकते है, लेकिन तब भी हम इस सहूलियत से कोई ख़ास फायदा नहीं उठा पाते हैं क्योकि आजकल की सड़कों पर हर सेकंड बहुत सी दूसरी गाड़ियां भी चलती रहती है जिससे कम्प्यूटर को कमांड देने में हमारे द्वारा थोड़ी सी देरी करने पर भी एक्सीडेंट होने का चांस हमेशा बना रहता है, इसलिए बिना ड्राइवर के सिर्फ साधारण कंप्यूटर के भरोसे कार को चला पाना बहुत मुश्किल हो जाता है !

जबकि वहीँ दूसरी तरफ, ए. आई. टेक्नोलॉजी आधारित कार बिना किसी ड्राइवर की मदद के, रास्ते में अचानक आने वाले किन्ही भी बाधाओं (जैसे दूसरी कार, बाइक्स आदि) से बिना टकराये हुए, और टेढ़े – मेढ़े मार्ग पर भी बिना रास्ता भटके हुए, आराम से अपनी मंजिल तक पहुँच जाती है और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी को भी, कोई भी इंस्ट्रक्शन देने की जरूरत नहीं होती है क्योकि कार को कब, कहाँ, कैसे मोड़ना है ये सब सेकण्ड्स से भी कम समय में ए. आई. खुद लगातार तय करता रहता है, इसलिए कई लोग ए. आई. को सुपर ह्यूमन (मतलब विशेष शक्तिशाली मानव) भी कहते हैं क्योकि जहां एक तरफ अच्छे से अच्छा मानव ड्राइवर भी अक्सर ड्राइविंग करते समय गलती कर बैठता है, वहीँ दूसरी तरफ सामन्यतया ए. आई. से कभी भी, कोई भी गलती नहीं हो सकती है (जब तक की ए. आई. की मशीन में कोई खराबी ना आ जाए या ए. आई. की मेमोरी में स्टोर्ड कोई जानकारी गलत ना हो) !

वैसे तो ए. आई. का थोड़ा बहुत इस्तेमाल तो हम लोग काफी पहले से कर रहें हैं (जैसे- यूट्यूब में गाना सुनते वक्त यूट्यूब हमारी पसंद/सोच के हिसाब से जो कई दूसरे गानों का सजेशंस हमें अपने आप देता रहता है वह ए. आई. की मदद से कर पाता है) लेकिन आजकल ए. आई. का प्रयोग सिर्फ कार चलाने के लिए नहीं हो रहा है, बल्कि अब ए. आई. का प्रयोग दुनिया के लगभग सभी क्षेत्रों में काफी तेजी से फ़ैल रहा है, इसलिए कई लोगों ने आशंका जाहिर की है कि ए. आई. की वजह से अगले कुछ सालों में महा भयंकर बेरोजगारी आ सकती है क्योकि बिना किसी गलती के जितना अच्छा काम ए. आई. करके दे सकता है उतना शायद लाखो रूपए सैलरी लेने वाले कर्मचारी भी नहीं कर सकते हैं !

अतः सुनने में आ रहा है कई कम्पनीज़ अपने यहाँ से लोगों को नौकरी से निकालकर ए. आई. का इस्तेमाल कर रहें हैं क्योकि ए. आई. जूनियर स्टाफ से लेकर सीनियर मैनेजमेंट तक के कामों को बखूबी निभा रहा है ! ए. आई. आधारित कुछ प्रसिद्ध वेबसाइट ऐसी भी हैं जो घरेलू बच्चों को होमवर्क्स में मदद करने से लेकर मल्टीनेशनल आई. टी. कम्पनीज़ के इंजीनियर्स तक को सॉफ्टवेयर बनाने में मदद कर रहीं हैं, जिसकी वजह से यहाँ तक सुनने में मिल रहा है कि कई आई. टी. कम्पनीज़ ने भी अपने स्टाफ में काफ़ी कटौती की है (जैसे देखिये इस वीडियो में बताया जा रहा है कि विश्वप्रसिद्ध आई. टी. कंपनी आई. बी. एम. ने अपने 7800 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया क्योकि उनकी जगह अब ए. आई. काम करेगा- AI Tkeover: IBM Fires 7800 Employees ) !

वास्तव में आई. टी सेक्टर की कम्पनीज में ए. आई. की घुसपैठ को सबसे ज्यादा गंभीरता से इसलिए लिया जा रहा है क्योकि वैसे तो आई. टी सेक्टर अकेले विश्व के टॉप 10 सबसे बड़े सेक्टर्स में से एक है, लेकिन वर्तमान विश्व के अन्य जो सबसे बड़े इंडस्ट्रियल सेक्टर्स हैं (जैसे- फाइनेंशियल सेक्टर, इंश्योरेंस सेक्टर, टेलीकम्यूनिकेशन सेक्टर, ऑटोमोबाइल सेक्टर, आयल एंड गैस सेक्टर, फ़ूड सेक्टर, हेल्थकेयर सेक्टर, रियल एस्टेट सेक्टर, इंजीनियरिंग वर्क्स सेक्टर, वेपन्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर आदि) उनको भी लगातार आई. टी. सपोर्ट की काफी जरूरत पड़ती रहती है, इसलिए कई लोगो का कहना है कि वर्तमान विश्व में आई. टी. सेक्टर ही अघोषित रूप से विश्व की सबसे बड़ी इंडस्ट्री बन चुका है जिससे सबसे ज्यादा लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़कर नौकरी कर रहे है ! अतः ए. आई. की आई. टी. सेक्टर में घुसपैठ करने से बेरोजगारी वाकई में क्या रूप पकड़ सकती है इसका सही अंदाजा लगाना अभी थोड़ा मुश्किल है !

आईये एक छोटे से उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर लोग क्यों कह रहें है कि आई. टी. प्रोफेशनल्स के लिए ए. आई. मुसीबत खड़ी कर रहा है ! इस विडियो में देखिये की कैसे बताया जा रहा है कि ए. आई. की वजह से हो सकता है कि अगले 5 साल में किसी सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को कोडिंग की मेहनत करने की जरूरत कभी नहीं पड़े क्योकि ए. आई. अभी ही इसे मुफ्त में तुरंत डेवलप करके दे रहा है और जल्द ही भविष्य में इससे भी ज्यादा अच्छी कोडिंग करके दे सकेगा (जिन आदरणीय पाठको को नहीं पता, उन्हें हम बताना चाहेंगे किसी सॉफ्टवेयर के डेवलपमेंट में या किसी सिस्टम का ऑटोमेशन करने में कंप्यूटर कोडिंग करना एक सबसे महत्वपूर्ण व कठिन काम होता है और इसी को बनाने व टेस्ट करने के लिए इंजीनियर्स लाखो रूपए सैलरी लेते हैं- Coding won’t exist in 5 years? You might be right.) !

इसके अलावा लोगो का कहना है कि आई. टी कम्पनीज़ में होने वाले जितने भी अन्य तरह के काम होते हैं हैं उन सब में भी ए. आई. इतनी तेजी से घुसपैठ बनाते जा रहा है कि निकट भविष्य में सभी छोटी – बड़ी आई. टी कम्पनीज़ में काम करने वाले सभी इंजीनियर्स द्वारा जितने भी तरह के काम किये जाते हैं, वे सारे काम जल्द ही ए. आई. भी लगभग मुफ्त में करके दे सकेगा ! जिसकी वजह से लोगों का मानना है कि निकट भविष्य में ऐसा भी हो सकता है कि अधिकाँश लोगो को किसी आई. टी. कंपनी की कभी कोई मदद लेने की जरूरत ही ना पड़े और हर आदमी अपना सारा छोटा – बड़ा काम घर बैठे ही मामूली पैसा खर्च करके ए. आई. से करवा ले ! जैसे- जो वेबसाइट बनाने के लिए अब तक कई आई. टी प्रोफेशनल्स अपने कस्टमर्स से हजारो – लाखो रूपये तक फीस ले लेते थे और साथ ही साथ वेबसाइट बनाने में कई महीने तक का समय लगा देते थे, अब वही वेबसाइट ए. आई. के द्वारा लगभग मुफ्त में मात्र 10 सेकण्ड्स में बन जा रही है जिसके बारे में अधिक जानने के लिए कृपया यह वीडियो देखें- How to Create a website in just 10 seconds with the help of artificial intelligence

तो इस तरह हम लोग यह अजीब विडंबना देख सकते हैं कि जिस ए. आई. को खुद आई. टी. इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स द्वारा ही बनाया गया है, अब वही ए. आई. सबसे पहले आई. टी. इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स की जॉब्स के लिए समस्या पैदा कर सकता है, इसलिए लोगो का मानना है कि संभवतः निकट भविष्य में आई. टी. जैसी बड़ी इंडस्ट्री में भी ज्यादातर वही प्रोफेशनल्स अपनी नौकरी बरकरार रख सकेंगे जो ए. आई. के हिसाब से अपने आप को अपग्रेड (नवीनीकृत) कर सकेंगे या मल्टी टैलेंटेड/एक्स्ट्रा आर्डिनरी टैलेंटेड (बहुमुखी या विशेष प्रतिभाशाली) होंगे ! आई. टी. के अलावा ए. आई. से किन दूसरी इंडस्टीज की जॉब्स को खतरा महसूस हो रहा है इसे आप निम्नलिखित न्यूज़ को पढ़कर भी समझ सकते हैं !

वो न्यूज़ यह है कि- अमेरिका की हॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री एसोसिएशन ने 63 साल बाद सामूहिक हड़ताल घोषित किया है पिछले 2 महीने से ! इस एसोसिएशन से लगभग 1 लाख 60 हजार अमेरिकन फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले लोग जुड़े हुए हैं जिन्होंने ये हड़ताल ए. आई. की वजह से उनकी फिल्म इंडस्ट्री में पैदा होने वाली बेरोजगारी के खिलाफ बुलाई है जिसके बारे में अधिक जानने के लिए कृपया मीडिया में प्रकाशित इस खबर को पढ़ें- ‘AI हमारे जैसा नहीं…’, हॉलीवुड के बड़े एक्टर्स हड़ताल पर क्यों? 63 साल बाद इतना बड़ा प्रदर्शन

“स्वयं बनें गोपाल” समूह का खुद यह मानना है कि ए. आई. चाहे भविष्य में कितना भी ज्यादा डेवलप्ड हो जाए लेकिन वह कभी भी मानव मस्तिष्क से ज्यादा शक्तिशाली नहीं हो सकता है क्योकि मानव मस्तिष्क के ब्रह्मरंध्र के सहस्त्रार चक्र में जन्म – मृत्यु रहित ईश्वर खुद रहते हैं जो कि एक सेकंड से भी कम समय में अनंत ब्रह्माण्डों को बना और बिगाड़ सकते हैं (इसलिए ये गुप्त शक्ति सुप्तावस्था में हर मानव मस्तिष्क में भी हर समय रहती है जिसकी वजह से मानव भी अपने संकल्पबल से, ईश्वर की ही तरह, हर बड़े से बड़ा काम तुरंत कर सकता है) लेकिन ये सब ए. आई. का सुपर माइंड कभी नहीं कर सकता क्योकि ए. आई. कुछ और नहीं है बल्कि ह्यूमन्स के ही कई थॉट्स, लर्निंग्स, फाइंडिंग्स (मानवीय सोच – विचार) आदि का केवल एक मशीनरी कलेक्शन (यांत्रिक संग्रह) है जिसे अभी आगे अनंतकाल तक लगातार अपग्रेड (नवीनीकृत) होते रहने की जरूरत है क्योकि मानवीय सोच का भी कोई अंत नहीं है !

इसलिए “स्वयं बनें गोपाल” समूह का यह स्पष्ट रूप से कहना है कि देर – सवेर लोगों का ए. आई. का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल करने से “मोह भंग” जरूर होगा, और ए. आई. की वजह से लोगों को यह “डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है कि उनकी नौकरी चली जायेगी” क्योकि दुनिया में तो हमेशा से तकनीकी में उत्थान या परिवर्तन होता रहा है और जो लोग बदलती तकनीकी के हिसाब से अपने आप को भी बदल लेते हैं उनकी आर्थिक स्थिति पर कभी कोई असर नहीं पड़ता है ! तो इसी परिप्रेक्ष्य में आईये जानते है कि आखिर क्यों लोगों को लगने लगा है कि ए. आई. समाज की लगभग हर तरह की नौकरियों और कामों को खुद अकेले ही करने में सक्षम है-

• बिना थके हुए ए. आई. , रेस्टॉरेंट्स में 2 हजार किस्म का खाना बना रहा है और साथ ही साथ ग्राहकों को गर्म – गर्म लाकर परोस भी रहा है (उदाहरण के तौर पर ये 2 वीडियो को देखें- Introducing Nala – a multi-cuisine AI based robotic chef capable of making over 2000 dishes a day. और Robot Waiter )

• अब कोर्ट में वकीलों की जगह ए. आई. बहस कर सकता है क्योकि ए. आई. को क़ानून की हर छोटी से छोटी जानकारी, हर सेकंड याद रहती है (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- Advocate Robot: मशीन के हाथ कानून का हथौड़ा | Artifical Intelligence | Lawyer Robo | Latest News)

• अब करोड़ो रूपये फीस लेने वाले एक्टर्स की जगह, फिल्मो, टी वी सीरियल्स, न्यूज़ चैनल्स, सोशल मीडिया वीडियोज़ आदि में एक्टिंग भी ए. आई. के द्वारा डेवलप किये गए ऐसे काल्पनिक एक्टर्स कर सकते हैं जिन्हे नकली कहना मुश्किल है (उदाहरण के तौर पर ये 2 वीडियो को देखें- A.I. Made This Video और Meet Lisa, OTV And Odisha’s First AI News Anchor)

• अब सिर्फ महंगे गायकों के मुंह से अपना मनपसंद गाना सुनने का इंतजार करने की जगह, किसी भी तरह की मनपसंद सुरीली आवाज में, अपने किसी भी मनपसंद गाने को, अपनी मनपसंद म्यूजिक के साथ कम्पोज करके, तुरंत मुफ्त में सुना जा सकता है ए. आई. की मदद से (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- This A.I. can make a Complete Song !!)

• किसी डॉक्टर की ही तरह, ए. आई. भी सही दवाओं का सेलेक्शन अपने सुपर माइंड से मुफ्त में तुरंत कर सकेगा और यहाँ तक की भविष्य में कठिन सर्जरी भी ए. आई. अपने दम पर कर सकेगा (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- Junior Doctors replaced by ChatGPT) !

• ए. आई. खुद एक तेजतर्रार और चालाक सेल्स मैनेजर (सेल्स सुपरवाइजर) की तरह कंपनी के माल को मार्केट में खूब बिकवाकर, बढ़िया प्रॉफिट कमाकर दे सकता है (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- World’ First AI Supervisor – Welcome to the Future of Sales @ AI !!)

• मनमानी या पक्षपाती सलाह देने की जगह, ए. आई. मैथेमैटिकल बेस्ड (गणित आधारित) सलाह दे सकता है, शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करने के लिए (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- Chatgpt Trading Strategy Test Using Tradingview)

• हर तरह के स्कूल/कॉलेज/यूनिवर्सिटी/कोचिंग/ट्रेनिंग सेंटर्स आदि में टीचर्स (शिक्षकों) की जगह, ए. आई. बिना थके हुए पढ़ा सकता है और स्टूडेंट्स के हर आसान – कठिन प्रश्नों का जवाब भी दे सकता है (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- They replaced school teachers with A.I.)

• बैंक के कई कर्मचारियों द्वारा किये जाने वाले कठिन कामों को, बिना किसी गलती के अकेले ए. आई. तुरंत निपटा दे रहा है (उदाहरण के तौर पर ये 2 वीडियो को देखें- Infosys applied AI: AI enabled banking और Artificial intelligence in banking and finance | Benefits of Ai)

• बिना कभी लड़ाई झगड़ा किये हुए, एक विनम्र व बुद्धिमान स्वभाव वाले लाइफ पार्टनर (जीवन साथी), फ्रेंड (मित्र), या पर्सनल असिस्टेंट (निजी सहायक) की तरह जीवन के सुख दुःख शेयर कर सकता है ए. आई. और साथ ही साथ कई घरेलु कामों में मदद भी कर सकता है (उदाहरण के तौर पर ये 3 वीडियो को देखें- Will Smith’s date with Sophia the Robot और Robot Sophia Dating Rumours ! और Most Advanced And Realistic “Humanoid” Robot In The World !!)

• मात्र कुछ हफ्तों में ही मनमाफिक घर बना दे रहा है ए. आई. (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- Watch robots build houses at incredible speed. 3D printing meets AI)

• ए. आई. हर तरह की खेती को ठण्ड – गर्मी – बारिश आदि जैसे कठिन मौसम से बिना प्रभावित हुए कर सकता है (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- Artificial Intelligence (AI) in Agriculture | The Future of Modern Smart Farming with IoT)

• ए. आई. खुद एक वैज्ञानिक की तरह भी काफी काम कर सकता है (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- Will AI Replace Data Scientists?)

• सैकड़ों गंदे बर्तनों को तुरंत साफ़ कर दे रहा है ए. आई. (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- Watch: Dishwashing Robot Cleans Plates At Restaurant)

• आपके घर की बहुत खूबसूरत इंटीरियर डिज़ाइन तुरंत मुफ्त में कर रहा है ए. आई. (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- AI Design Your Interior | Get inspirational Ideas)

• ए. आई. फैक्ट्री में इंजीनियर और मैकेनिक की तरह भी काम कर रहा है (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- BMW Factory – Integration of A.I. in the Production Line)

• बिना नाक – भौं सिकोड़े हुए मोहल्ले व घर की सफाई कर रहा है ए. आई. (उदाहरण के तौर पर इस वीडियो को देखें- Meet the LeoBots – Specialised Cleaning Robots)

• बिना डरे, घर – मोहल्ले में चौकीदारी करने से लेकर, शहर में कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले अपराधियों को भी पकड़ सकेगा ए. आई. (उदाहरण के तौर पर ये 2 वीडियो को देखें- Meet the AI-powered robot replacing humans as security guards in Switzerland और How does Dubai Police implement Artificial Intelligence in their operations?)

Anti-robot protesters – Twitter/Rick Jervis

अभी तक ए. आई. क्या – क्या आश्चर्यजनक काम कर सकता है लोग वही देखकर हैरान हो रहें हैं जबकि ए. आई. का विकास तो अभी केवल प्रारम्भिक दौर में ही पहुंचा हैं ! लेकिन कई देशों के साइंटिस्ट्स के द्वारा लगातार रिसर्च करते रहने की वजह से, ए. आई. रोज पहले से ज्यादा एडवांस्ड (विकसित) होकर, रोज पहले से और ज्यादा बुद्धिमान व शक्तिशाली बनता जा रहा है, इसलिए सुनने में आ रहा है कि लोगों के मन में बेरोजगरी से संबंधित यह आशंका भी बढ़ती जा रहा है कि, जब सारा छोटा – बड़ा काम अकेले ए. आई. खुद कर लेगा तो इंसानों के लिए कौन सी नौकरी बच पाएगी ! जैसे, इससे संबंधित प्रसिद्ध मीडिया में प्रकाशित इन ख़बरों को देखिये-

AI की वजह से अगले कुछ साल में खत्म हो सकती है 80% जॉब, एक्सपर्ट दे रहे यह कैसी चेतावनी?

2025 तक चली जाएंगी साढ़े सात करोड़ नौकरियां, क्या आपकी नौकरी रहेगी सुरक्षित?

रिपोर्ट: 2030 तक रोबोट्स छीन लेंगे 80 करोड़ नौकरियां, इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बेरोजगार होंगे

एलन मस्क (Elon Musk) ने बताया AI को परमाणु हथियारों से ज्यादा खतरनाक

वॉरेन बफे ने एटम बम से की AI की तुलना: बर्कशायर हैथवे के CEO ने कहा- AI दुनिया में सब कुछ बदल सकता है

तबाह हो सकता है मानव भविष्य, हो जाएगा कंट्रोल से बाहर, AI को लेकर एलन मस्क और Apple को-फाउंडर ने दी चेतावनी

AI के गॉडफादर जेफ्री हिंटन ने कहा- ‘क्लाइमेट चेंज से ज्यादा खतरनाक है AI’, पर क्यों?

एलन बोले- 5 साल में ह्यूमन इंटेलिजेंस से आगे निकल जाएगा AI

तो इस विषय की गंभीरता को देखते हुए हमने डॉक्टर सौरभ उपाध्याय जी (Doctor Saurabh Upadhyay) से बात की, जो की “स्वयं बनें गोपाल” समूह के मुख्य मार्गदर्शक (Chief Mentor) के साथ – साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के हाई क्लास एक्सपर्ट भी है (डॉक्टर सौरभ भारतवर्ष के विभिन्न यूनिवर्सिटीज में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के 10 वर्षों से तक प्रोफेसर रहे हैं और इनके कई विश्व विख्यात रिसर्च पेपर्स भी पब्लिश्ड हैं) ! डॉक्टर सौरभ के अनुसार ये सही है कि ए. आई. के विकास से लगभग सभी क्षेत्रों में नौकरियों पर गहरा असर पड़ेगा लेकिन इससे घबराने की बजाय, अपने आप को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की जरूरत है !

डॉक्टर सौरभ का कहना है कि, वास्तव में अर्थव्यवस्था का भी यही बेसिक कैरेक्टरिस्टिक (मूल चरित्र) होता है कि अर्थव्यवस्था लगभग हर 20 साल बाद अपना रूप रंग बदलने लगती है और चूंकि अर्थ यानी धन इस संसार की लगभग सभी गतिविधियों का आधार होता है इसलिए अर्थव्यवस्था के बदलने से संसार भी उसी के अनुरूप बदलने लगता है (इसे सामान्य भाषा में कहा जा सकता है कि “परिवर्तन संसार का नियम है”) !

इसलिए इसे बुद्धिमानी कहा जाए या मजबूरी, लेकिन यह जरूरी है कि आने वाली समस्या का पूर्व आंकलन करके उसके हिसाब से अपने आप को तैयार करते रहना चाहिए, नहीं तो अचानक से दिक्क्त महसूस हो सकती है, जैसे- जब 90 के दशक में भारत में कंप्यूटर धीरे – धीरे फैलने लगा था तब कई लोगो ने सोचा था कि आखिर उन्हें कंप्यूटर जैसी एकदम अनोखी चीज सीखने के लिए मेहनत करने की क्या जरूरत है, लेकिन जब अचानक से सभी सरकारी व प्राइवेट ऑफिसेस में कंप्यूटर पर काम करना जरूरी होने लगा तब कई लोगों को बहुत दिक्क्त महसूस हुई थी कंप्यूटर सीखने में (कितने लोगों को तो कंप्यूटर चलाना बिल्कुल समझ में नहीं आया था तो उन्होंने नौकरी छोड़कर, दूसरी नौकरी ज्वाइन कर ली थी) !

सौरभ जी का मानना है कि, वैसे तो ऐसा कभी नहीं होगा कि कोई भी बुद्धिमान सरकार ए. आई. का इस्तेमाल करना, जनता पर जबरदस्ती थोप देगी, बल्कि ऐसा होने की संभावना ज्यादा है कि खुद सुविधाप्रेमी जनता को निकट भविष्य में ए. आई. से इतनी सहूलियत महसूस होने लगेगी की जनता को बिना ए. आई. के अपना रोजमर्रा का जीवन भी शायद कठिन लगने लगेगा (जैसे- आजकल ये मानसिकता सर्वत्र देखने को मिलती है कि भीड़ में घिरे होने के बावजूद लोगों के पास अगर कुछ देर के लिए भी उनका मोबाइल ना हो तो वे अपने आप को समाज से कटा हुआ व असुरक्षित महसूस करने लगते हैं ! जबकि आज के 20 साल पहले तक ऐसी मानसिकता बिल्कुल नहीं थी) !

डॉ सौरभ का यही सामान्य सुझाव है कि भविष्य के दृष्टिकोण से सभी को उतना ज्यादा ए. आई. सीखने की जरूरत नहीं है कि सभी ए. आई. एक्सपर्ट बन जाएँ, लेकिन सभी को इतना कम भी ए. आई. नहीं सीखना है कि वो ए. आई. आधारित मशीनों को बिल्कुल इस्तेमाल ही ना कर सकें, क्योकि भविष्य में रेल-बस में सफर करने से लेकर हॉस्पिटल्स में इलाज करवाने तक, दुकानों में सामान खरीदने से लेकर ऑफिसेस में कोई काम करवाने तक, खेतों में फसल बोने से लेकर पार्कों में घूमने तक, में भी ए. आई. का इस्तेमाल हो सकता है !

कई सीनियर सिटिज़न्स (बुजुर्गों) को ए. आई. आधारित मशीनों को इस्तेमाल करना सीखने में दिक्क्त हो सकती है पर आजकल की नई पीढ़ी (खासकर शहरों में रहने वाले बच्चों) में तो में नयी इंटेलीजेंट मशीनरीज़ को सीखने के प्रति गजब की दीवानगी देखने को मिलती है और वे कठिन से कठिन टूल्स, मशीन, एप्स आदि को भी अपने आप यूज़ करना सीख जाते हैं !

वास्तव में कई सीनियर सिटिज़न्स को कोई नयी चीज सीखने में इसलिए दिक्क्त होती है क्योकि उन्होंने अपने स्टूडेंट पीरियड के बाद से किसी नयी चीज को सीखने का अभ्यास करना एकदम छोड़ दिया होता है ! मतलब जब तक हम बचपन में क्लास में पढ़ते समय नयी बातें सीखने की कोशिश करते रहते हैं तब तक हमारा माइंड शार्प (बुद्धि तीक्ष्ण) बनी रहती है लेकिन जब हम बड़े होकर पैसा कमाने की दौड़ में सिर्फ एक ही तरह का काम रोज करने लगते हैं (जिसमें बुद्धि का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना होता है) तो हमारी बुद्धि भी धीरे धीरे मंद पड़ने लगती है, क्योकि यह शरीर का नियम है कि हम अपने शरीर के जिन भी अंगो से बहुत कम काम या जिन भी अंगो से बहुत ज्यादा काम लेते हैं, वे सभी अंग जल्दी कमजोर होने लगता है ! जैसे- आम तौर पर हम लोग कम काम दिमाग के अलावा, गर्दन, कमर, घुटने आदि अंगो से लेते है, रोज दिनभर बैठ कर काम करने की वजह से ! और हम लोग ज्यादा काम आँख (कंप्यूटर, मोबाइल, टी वी जैसी अप्राकृतिक चमकदार स्क्रीन को रोज घंटो देखकर), लिवर (केमिकल प्रिजर्वेटिव मिला हुआ जंक फ़ूड रोज खाकर), कान (रोज घंटों इयरफोन या पॉवरफुल स्पीकर से गाना सुनकर) आदि अंगो से लेते हैं !

इसलिए ऐसे लोग जो पूरे जीवनभर कोई ना कोई नयी बात हमेशा सीखने वाला काम करते रहते हैं (जैसे- वैज्ञानिक, मेहनती प्रोफेसर, लेखक आदि) उनका शरीर भले ही बूढ़ा हो जाए लेकिन बुद्धि बुढ़ापे में भी युवाओं की तरह तेज बनी रहती है ! इसलिए किसी भी आदमी/औरत की उम्र चाहे जो भी हो, उसे रोज थोड़ी ही देर के लिए ही सही, लेकिन पढ़ना – लिखना या कोई ऐसी नयी बाते सीखने का अभ्यास करना बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए जो उसके लिए थोड़ी कठिन हो ! और इस अभ्यास से मिलने वाले कई फायदों में से दो मुख्य फायदे ये हैं- बुढ़ापे में डिमेंशिया/अल्जाइमर (भुलक्क्ड़पन/स्मृतिलोप) होने का चांस काफी कम हो जाता है, और युवा पीढ़ी से भी काफी सम्मान व प्रेम मिलता है क्योकि ज्यादातर युवा किसी बूढ़े व्यक्ति के साथ समय बिताने से इसलिए कतराते है क्योकि अक्सर बूढ़े लोग जल्दी कोई बात समझ नहीं पाते हैं, पर अगर बुढ़ापे में भी दिमाग मजबूत व स्वभाव हॅसमुख बना रहे तो वाकई में बहुत से युवा किसी वृद्ध के साथ बैठकर उनके बेशकीमती एक्सपीरियंस को समझने के लिए काफी उत्सुक रहते हैं ! इसलिए अब तो कई शहरों में कई ऐसे लर्निंग सेण्टर (जिन्हे दिमाग का जिम भी कहते हैं ) भी खुल गए हैं जहाँ विभिन्न तरह की आसान व कठिन दिमागी एक्सरसाइज करवाई जाती है ताकि बढ़ती उम्र के साथ दिमाग पर कम होती पकड़, वापस मजबूत हो सके !

वास्तव में ए. आई. का प्रयोग जब तक उचित तरीके से होता रहेगा तब तक तो ठीक है, लेकिन इस सार्वभौमिक सत्य को कभी नहीं भूलना चाहिए कि किसी अच्छी चीज का भी अनुचित व अनावश्यक इस्तेमाल उसे काफी नुकसानदायक बना सकता है, जैसे- जिस मोबाइल फोन की वजह से अपनों का हालचाल तुरंत मिल जाने से मन बहुत प्रसन्न हो जाता है, उसी मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल कमजोर याद्दाश्त, आँखे, हृदय व नपुंसकता पैदा कर रहा है !

डॉक्टर सौरभ के अनुसार आज भी विश्व में जब लगभग 70 करोड़ लोग अनपढ़ हैं तो जाहिर सी बात है कि बिना ए. आई. की जानकारी के भी, किसी इंसान को अपना जीवन सामान्य तरीके से जीने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए लेकिन भविष्य में अगर समाज में विशेष आर्थिक उन्नति करनी हो तो शायद ए. आई. के इस्तेमाल को पूरी तरह से इग्नोर (अनदेखा) कर पाना मुश्किल हो सकता है !

ए. आई. से जुडी हुई कुछ बड़ी समस्याएं भी हैं जिनसे सावधान रहने की जरूरत है, जैसे- ए. आई. पर ब्लाइंड डिपेंडेंस (आँख बंद करके विश्वास) करना भी कभी – कभी खतरनाक हो सकता है क्योकि दुनिया की कोई भी ऐसी मशीन नहीं है जो कभी ख़राब नहीं हो सकती है इसलिए सीरियस मैटर्स (महत्वपूर्ण मुद्दों) में ह्यूमन क्रॉसचेक (मानवीय पुनर्निरीक्षण) जरूरी है ! ए. आई. द्वारा मिलने वाली कुछ मामूली सहूलियत ऐसी है जिनसे समाज में दिक्क्त भी पैदा हो सकती है, जैसे- आजकल ए. आई. की मदद से किसी की भी वीडियो/फोटो में ऐसा परिवर्तन तुरंत आसानी से किया जा सकता है जिसे अनजान आदमी कभी पहचान ही नहीं सकेगा- AI makes you look younger, older, or happier! Face editing in videos ! वैसे कई लोगों का कहना है कि ए. आई.का बहुत तरह से दुरुपयोग किया जा सकता है जिसके बारे में अब मूवीज तक में भी अक्सर आगाह किया जाने लगा हैं !

इसके अलावा ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ए. आई. को जनता का परसेप्शन (दृष्टिकोण) बदलने के लिए कभी इस्तेमाल ना किया जा सके, मतलब आजकल ए. आई. का इस्तेमाल लोगो को विभिन्न जानकारियां उपलब्ध के लिए भी काफी किया जा रहा है, इसलिए अगर ए. आई. द्वारा जाने – अनजाने सही जानकारिया जनता को उपलब्ध नहीं कराई गयी तो बड़े पैमाने पर लोगों का कांसेप्ट भी बिगड़ सकता है इसलिए सभी देश की सरकारों को ए. आई. द्वारा दी जाने वाली जानकारियों पर भी निगाह रखने की जरूरत है !

डॉक्टर सौरभ ने यह भी कहा कि पूरी उम्मीद है कि भविष्य में भी मीडिया हमेशा की तरह सिर्फ सही तरीके से ए. आई. से हो सकने वाले सामाजिक बदलाव के बारे में, जनता के समक्ष प्रस्तुत करेगी ताकि जनता में कोई अनावश्यक नकारात्मक भावना ना फ़ैल सके ! सौरभ जी के अनुसार नकारात्मक भावना उस स्थिति में वाकई में पूरे समाज के लिए हानिकारक हो सकती है जब इसके बारे में बहुसंख्यक जनता लगातार सोचती रहे, क्योकि यह सभी लोगों ने अपने जीवन में कभी ना कभी जरूर महसूस किया होगा की अगर हम किसी बुरी चीज के बारे में लगातार सोचते रहते हैं तो वो चीज वाकई में हमारे जीवन में सच हो जाती है (जबकि किसी अच्छी चीज के बारे सोचते हैं तो वो सच नहीं होती है, क्योकि किसी बुरी चीज के बारे में हम लोग जितनी ज्यादा गहराई से और जितनी ज्यादा देर तक से सोचते हैं, उतनी गहराई से व उतनी देर तक किसी अच्छी चीज के बारे में नहीं सोच पाते है) !

डॉक्टर सौरभ ने इस मौके पर भारतीय वेदांत का सार बताते हुए कहा कि, वास्तव में हमारा यह जगत निष्प्राण है जिसमें रंग हम लोग अपनी इच्छानुसार ही भरते हैं इसलिए कई बार बहुसंख्यक जनता अगर किसी काल्पनिक डर को भी सच मानने लगे तो वो डर सही में मूर्त रूप लेकर हमारे सामने आ सकता है जिसके बारे में “योगवशिष्ठ” नामक दिव्य ग्रन्थ में लिखा है कि वास्तव में माया और यथार्थ में अंतर होते हुए भी, कोई अंतर नहीं होता है क्योकि माया भी तो ईश्वर के द्वारा ही बनाई गयी है इसलिए वो पूरी तरह से नकली कैसे हो सकती है ! अतः जब समधिवस्था या गहन ध्यानावस्था (या गहन चिंतन) में परमात्मा की अंश स्वरूपा आत्मा कोई चिंतन बार – बार करती है तो वो चिंतन सच होने लगता है ! इसलिए धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि आत्मा यानी हम मानवो को किसी फालतू डर या चिंता के बारे में लगातार सोचने की जगह, ईश्वर के बारे सोचना चाहिए ताकि ईश्वर सही में मूर्त रूप लेकर हमारे सामने आ जाए !

हमारी गहरी सोच या तीव्र भावना कितना आश्चर्यजनक चमत्कार कर सकती है इसके बारे में इस धार्मिक श्लोक में समझाया गया है- “न देवो विद्यते काष्ठे न पाषाणे न मृण्मये ! भावे हि विद्यते देवस्तस्माद्भावो हि कारणम्”, जिसका मतलब यह है कि, भगवान ना तो लकड़ी में वास करते हैं और ना ही पत्थर या मिट्टी में, ये तो हमारी भावना ही है जो इनसे बनी मूर्ती से भी भगवान को प्रकट होने पर मजबूर कर देती है ! इसलिए फिर से, ध्यानपूर्वक समझने वाली बात यह है- “वास्तव में कोई सामान नहीं, बल्कि हमारी भावना ही सबसे शक्तिशाली चीज होती है जो किसी एक कण से भी अनंत ब्रह्माण्डों के निर्माता ईश्वर तक को प्रकट होने के लिए मजबूर कर सकती है” ! अतः सारांश यही है कि हम सभी विश्व के साधारण आम जनमानस को ए. आई. की वजह से नौकरी छूट जाने के काल्पनिक डर से बिल्कुल घबराना नहीं चाहिए, और अगर भविष्य में आवश्यक हुआ तो, हमें धीरे – धीर अपनी जरूरत के अनुसार अपने आप को अपग्रेड (नवीनीकृत) करने की जरूरत पड़ सकती है !

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