एजुकेशन हाई है तो क्या ह्यूमैनिटी के गुण भी हाई हैं ?

इंग्लिश भाषा की एक फेमस कहावत है कि “चाइल्ड इज द फादर ऑफ़ मैन” इसलिए आज के बच्चों की बचपन की ही ट्रेनिंग, भविष्य के पूरे समाज की दिशा तय करती है अतः इसे किसी भी हाल में हल्के में लेना, बिल्कुल भी बुद्धिमानी नहीं है !

अभी कुछ दिन पहले, हमने उत्तर भारत के एक इंटरनेशनल स्कूल में पढने वाले एक बच्चे की कुछ फोटोग्राफ्स अपने एक आर्टिकल (जिसका लिंक नीचे दिया है) में डाली थी क्योंकि उस बच्चे के कुछ संस्कारों ने हमें प्रभावित किया था (उस बच्चे के नाम हम यहाँ प्रकाशित नहीं कर रहें हैं क्योंकि ऐसी उस बच्चे के अभिवावकों की इच्छा है) !

इसी बच्चे के अभिवावकों ने हमें बताया है कि इस बच्चे का खाली समय में मोस्ट फेवरेट एंटरटेनमेंट है, विभिन्न भूखे जानवरों (जैसे कबूतर, गिलहरी, पपी, गाय माता आदि) को भोजन खिलाना और मजे की बात है कि अब ये बेजुबान जानवर भी इस थोड़े से शरारती पर अंदर से काफी उदार बच्चे की पवित्र भावनाओं को समझने लगें हैं इसलिए ये सभी जीव, इस बच्चे से इतना घुल मिल कर व्यवहार करतें हैं कि यह बच्चा उनके एकदम पास जाकर भी इनकी कैमरे से रिकॉर्डिंग करता है तब भी वे जीव डरकर भागने की बजाय एकदम बेतकल्लुफ होकर आराम से बच्चे द्वारा दिया गया भोजन खाते रहतें हैं !

यह वाकई में आश्चर्य की बात है कि, गिलहरी जैसा बेहद डरपोक जानवर जो 10 कदम दूर से भी किसी इंसान की थोड़ी सी आहट पाकर तुरंत भाग खड़ा होता है वो कैसे, नीचे दिए गए वीडियो में बच्चे के घर की बालकनी पर निश्चिन्त होकर बच्चे के हाथ में स्थित कैमरे के साथ खेलता हुआ दिखायी दे रहा है !

जन्मदिन के केक का वीडियो बनाना तो लगभग सभी बच्चों को पसंद है लेकिन भगवान् के द्वारा बनाये गए इन छोटे छोटे जीवों (जिनकी परवाह कम ही लोगों को होती है) की देखभाल की नियमित चिंता होना, यही प्रदर्शित करता है, कि इस बच्चे में मानवीय गुण (जैसे दया, परोपकार) आदि सही तरीके से पनप रहें हैं और जो निश्चित रूप से अन्य समकक्ष बच्चों के लिए भी प्रेरणास्रोत है कि सिर्फ हाई एजुकेशन से काम नहीं चलेगा बल्कि हाई ह्यूमैनिटी के गुण भी होने ही चाहिए !

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