सभी बीमारियो को दूर करने का बहुत लाभप्रद तरीका

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यह जानकारी है ऐसे तरीको के बारे में जो बीमारी चाहे कुछ भी हो आराम पहुचाते ही है।

मतलब बीमारी चाहे कैंसर हो या जुकाम, चाहे एड्स हो या सिर दर्द, अंधापन हो या पेट दर्द, पीलिया हो या नपुंसकता, ह्रदय रोग हो या डायबिटीज, टी बी हो या पथरी, बवासीर हो या गंजापन, गिल्टी हो या कमरदर्द, किडनी की खराबी हो या ब्लड प्रेशर , स्याटिका हो या गठिया, फाइलेरिया हो या मलेरिया, विकलांगता हो या लकवा, कोमा हो या खुजली, सफ़ेद दाग हो या हड्डी की कमजोरी,  मतलब हर बीमारी में यह लाभ पहुँचाता ही पहुँचाता है अगर नीचे दिए गए तरीको को सावधानी से और लम्बे समय तक नियम से किया जाय तो।

और हाँ अगर आप पहले से स्वस्थ है तो इन प्रयोगो को करने से आप हमेशा अपने आप को युवा और स्वस्थ महसूस करेंगे। बीमार लोगो को यह प्रक्रिया खोयी हुई युवा अवस्था, शारीरिक ताकत को पुनः प्राप्त करवा कर उनके शरीर को फौलाद की तरह मजबूत बनाने में निश्चित ही बहुत सहयोग देगी ।

इस तरीके या इस इलाज़ में दो काम करने पड़ते है-

पहले काम में कुछ आयुर्वेदिक दवाये खानी पड़ती है और ये आयुर्वेदिक दवाये ऐसी है जिन्हे आयुर्वेद में रसायन कहते है। आयुर्वेद में रसायन उन जड़ीबूटियों को कहते है जिनसे रोग और मृत्यु दूर भागते है। ये आयुर्वेदिक दवाये बहुत आसानी से हर जगह मिल जाती है इसलिए कई मूर्ख लोग इनके प्रचंड फायदे को नहीं समझते। पर अगर इन जड़ीबूटियों को नियम से लंबे समय तक खाया जाय तो शर्तिया चमत्कारी फायदा होता है।

अगर आप महानगरो में रहते है और आपको ये दवाये रोज – रोज,  ताजी अवस्था में न मिल सके तो निराश होने की जरुरत नहीं है क्योकि आपको ये दवाये श्री बाबा रामदेव के पतंजलि स्टोर से सूखी अवस्था में (टेबलेट या पाउडर रूप में) भी मिल सकती है। यहाँ पर ध्यान देने वाली बात ये है की पौधों को सूखा कर बनायीं गयी दवाये भी लगभग उतना ही फायदा करती है जितना ताजे हरे पौधों से तुरंत तैयार की गयी दवा पर किसी बीमारी में आराम पहुचाने में सूखी दवा, ताजी दवा से कुछ ज्यादा समय लेती है लेकिन आराम पहुचाती जरूर है।  श्री बाबा रामदेव की दवाये 100 % शुद्ध और असली होती है इसलिए ताजी हरी जड़ीबूटियां रोज -रोज ना मिल पाने की स्थिति में श्री बाबा रामदेव की दवा बेहिचक इस्तेमाल की जा सकती है।

ये आयुर्वेदिक जड़ीबूटियां है, – (1) तुलसी पत्ती,  (2) गोमूत्र,   (3) त्रिफला चूर्ण

अब इन दवाओ को कब, कैसे और कितना खाना है ये जानना जरूरी है।

असल में इस चीज को आपको ही तय करना है। मतलब इन सारी दवाओ को सुबह – सुबह बासी मुंह खाने से सबसे ज्यादा फायदा होता है। पर आप अपनी सुविधा के हिसाब से इन दवाओ को कभी भी खा सकते है पर ध्यान दे की तुलसी जी की पत्तियों को सूर्यास्त के बाद नहीं लेते और इन सारी दवाओ के खाने के आधा घंटा पहले और आधा घंटा बाद कुछ भी (खासकर दूध से बने सामान) ना खाए ना पिए। वैसे तो इन दवाओ के खाने की जो सामान्य मात्रा है, वह है, 5 से 8 पत्ता तुलसी जी की, 1 छोटा चम्मच त्रिफला चूर्ण, 1 चम्मच गोमूत्र ।

गोमूत्र के साथ ध्यान देने वाली बात ये है कि जिन गाय माता की मूत्र हो वो बीमार ना हो और गर्भवती भी ना हो. और सिर्फ देशी गाय माता का ही मूत्र, दूध और गोबर फायदेमंद है जबकि जर्सी गाय के दूध पीने से कैंसर होता है। वैज्ञानिको के द्वारा, देशी गाय को अधिक दूध पैदा करने के लिए देशी गाय के जींस में परिवर्तन करके जर्सी गाय को विकसित किया गया है। जर्सी गाय दूध तो अधिक देती है पर उसके दूध पीने से शरीर में कई किस्म की बीमारिया पैदा होती है।

इसी तरह वैज्ञानिको ने खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए लगभग हर सब्जी, हर अनाज (गेहू-चावल-दाल आदि ) में सैकड़ो बार प्रयोग करके अनेक नयी नयी किस्मे पैदा कर दी है और ये सभी किस्मे न जाने मानव शरीर पर क्या – क्या बुरे प्रभाव डाल रही है। इंसान द्वारा प्रकृति के नियमो से छेड़छाड़ गलत है और इसके परिणाम हमेशा से घातक रहे है। भगवान ने जो ओरिजिनल सब्जियों और अनाजों की प्रजातिया डेवेलप की थी वही फायदेमंद है, बाकि इंसानो के द्वारा जेनिटकली मॉडिफाइड अनाज मात्रा में तो ज्यादा पैदा होते है पर उनके गुणों का ह्रास हो जाता है।

अगर आपको दवाओ को रोज रोज शुद्ध रूप से इकट्ठा करने में दिक्कत हो रही है तो आप श्री बाबा रामदेव की निम्नलिखित दवाओ को खरीद सकते है जिनसे ऊपर लिखे लाभ मिल जायेंगे। तुलसी जी की पत्तिया ना मिले तो तुलसी घन वटी खरीद ले, गोमूत्र ना मिले तो गोधन अर्क ख़रीदे और घर पर त्रिफला चूर्ण न बना सके तो पतंजली स्टोर से त्रिफला चूर्ण (पाउडर) ख़रीदे।

इन दवाओ को खाने का सबसे आसान तरीका है कि सुबह – सुबह खाली पेट इन दवाओ को खाकर दो ग्लास पानी पी लिया जाय और फिर आधा घंटा तक कुछ भी खाया या पिया ना जाय।

अगर आपको गोमूत्र पीने के बाद मुह में बदबू महसूस हो तो आप छोटी इलायची खा सकते है। कुछ छोटे बच्चों व महिलाओं को गोमूत्र की महक से शुरुआत में उल्टी महसूस हो सकती है तो ऐसे लोग शुरुआत में कुछ दिनों तक गोमूत्र की महक की आदत डालने के लिए, गोमूत्र पीने के तुरंत बाद थोड़ा सा गुड़ या कोई मिठाई आदि खा सकतें हैं ! यह निश्चित है कि मात्र कुछ ही दिनों में गोमूत्र की महक की आदत पड़ जायेगी जिससे उल्टी नहीं महसूस होगी ! वास्तव में यह सभी को अच्छे से समझने व याद रखने वाला तथ्य है कि सिर्फ बदबू की वजह से गोमूत्र जैसी जबरदस्त फायदेमंद चीज को ना लिया जाय तो यह बहुत बड़ी मूर्खता व दुर्भाग्य होगा !

आप अपनी बीमारी की गम्भीरता के हिसाब से, ऊपर लिखी हुई दवाओ की मात्रा घटा बढ़ा सकते है। मतलब आपको तकलीफ ज्यादा हो तो आप दवाओ की मात्रा भी किसी जानकार वैद्य की सलाह से बढ़ा सकते है। यहाँ पर लिखी हर एक दवा अपने आप में अकेले ही सारी बिमारियों का धीरे – धीरे नाश करने की ताकत रखती है।

और हाँ अगर आपका पहले से कोई भी होम्योपैथिक, ऐलोपैथिक, आयुर्वेदिक या अन्य कोई भी पैथी का इलाज़ चल रहा हो तो आप उसके साथ इन ऊपर लिखी हुई दवाओ को ले सकते है।

तो ये रहा पहला काम, कि ऊपर लिखी हुई तीनो दवाओ को रोज खाना !

तो  दूसरा काम क्या है ?

दूसरा काम जानने से पहले, यह समझने की जरूरत है कि दूसरे काम को करने की वास्तव में जरूरत क्या है ?

देखिये हमारे परम आदरणीय हिन्दू धर्म के सारे शास्त्र, पुराण, ग्रन्थ एक इसी परम सत्य को बार – बार व अलग – अलग तरीके से समझातें व दोहरातें है कि दुनिया का कोई भी आदमी जो कुछ भी दुःख, तकलीफ, समस्या (चाहे वह कोई भी बीमारी, एक्सीडेंट, गरीबी, मुकदमेबाजी, अपमान, मारपीट, विकलांगता, बुरी आदत हो या किसी भी किस्म की मजबूरी, लाचारगी) झेलता है, वे सारी तकलीफें, दर्द उस आदमी के इस जन्म या अनगिनत पिछले जन्मो के बुरे कर्मो का मात्र हिसाब – किताब ही है !

बहुत ही सीधा सा और सभी पर लागू होने वाला यह भगवान का ही बनाया हुआ कठोर नियम है कि अच्छे काम करने से सुख मिलता है और बुरे काम करने से दुःख मिलता है और ये सुख – दुःख हमें आज मिलेगा या कुछ समय बाद मिलेगा या अगले किसी जन्म में मिलेगा इसका निर्णय सिर्फ भगवान ही करते है लेकिन एक बात 100 % तय है कि हमारे द्वारा किये गए सभी अच्छे/बुरे कामो का फल हमें मिलकर ही रहेगा !

इस कलियुग में बुरे काम करने वाले लोग ज्यादा है और कई बार बुरे काम करने वाले लोग धन – दौलत, पावर के क्षेत्र में बहुत सुखी भी देखे जाते है पर इसका मतलब ये नहीं की इन्हे इनके बुरे कामो का फल मिलेगा ही नहीं !

बुरे काम करने वाले पहले तो गलत तरीको से खूब पैसा जमा करते है फिर जब उनके पाप से जमा किया हुआ पैसा उनके लिए कई तरह की समस्या, झंझट या बीमारिया पैदा करने लगता है तो वो उसके इलाज़ के लिए अमेरिका, लंदन, मुंबई, दिल्ली भागते है ! और वहा जाने पर पता चलता है कि आजकल का जो so called Allopathic मॉडर्न मेडिकल साइंस है (जिसमें दुनिया भर के खतरनाक भयंकर साइड इफेक्ट्स भी जुड़े रहतें हैं) उसमे जुकाम तक का ठीक से इलाज़ है नहीं, तो उनकी बड़ी – बड़ी बीमारियां कैसे ठीक हो पाएंगी !

तो अंत में अपनी बीमारी- तकलीफ से परेशान होकर ऐसी काली कमाई करने वाले हर मंदिर – फ़क़ीर के पास दौड़ते है और करोड़ो अरबो रूपए चंदा देते है कि थोड़ा सा उन्हें आराम मिल जाए !

वास्तव में हमारे द्वारा किये गए बुरे कर्म ही हमारे लिए दुर्भाग्य का निर्माण करतें है, जिसकी वजह से खूब धन – दौलत होने के बावजूद भी आदमी एक – एक रोटी खाने के लिए तरसता रहता है ! हम सभी लोगो ने इस जन्म में और पिछले कई जन्मो में जाने अनजाने कई बड़े छोटे गलत काम किये होते है और ये हमें पता ही नहीं होता है कि उन गलत कामों का अब तक हमने प्रयाश्चित किया है या नहीं ! बार – बार जन्म लेना और मरने के खेल का अंत ही मोक्ष होता है ! मोक्ष का मतलब होता है, भगवान (यानी परम सुख) में ही समा जाना वो भी सदा – सदा के लिए !

अब इसमें देखने वाली बात यह है कि कोई आदमी जिसने खूब गरीबो का पैसा अपनी जेब में डाला हो या कई लोगो से मारपीट झगड़ा किया हो या निर्दोषो को सताया हो तो अगर ऐसे पापी दुष्ट आदमी को कोई बीमारी हो जाए, तो वो आदमी कैसे केवल दवा की गोली खाने से ठीक हो जायेगा !

उसको उसके बुरे कर्मो की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी और ऐसे में वह कोई भी दवा खाए उसे इतनी आसानी से परमानेंट आराम मिलेगा ही नहीं।

अतः अब ऐसी स्थिति में यहाँ प्रश्न उत्पन्न होता है कि अपने ही बुरे कर्मो का भोग जो किसी को सजा के तौर पर बीमारी या अन्य किसी सामाजिक दिक्कत के रूप में मिली हो उसे आखिर वह कैसे ख़त्म कर सकता है ?

और ख़त्म कर भी सकता है या नहीं ?

तो चिन्ता करने की जरुरत नहीं है क्योकि निश्चित तौर पर अपने द्वारा किये गए पापो को खत्म किया जा सकता है जिसके दो सर्वप्रचलित तरीके है।

पहला तरीका है की हमें अपने ही द्वारा किये गलत कामो की जो भी सजा भगवान के द्वारा बीमारी या अन्य किसी तकलीफ के तौर पर मिली है उसे हम अपना दुर्भाग्य समझ कर झेल ले या दूसरा तरीका है कि हम अपने द्वारा किये हुए पापों को ही जला डालें !

अब पाप कैसे जलते है ?

इसके भी दो आसान तरीके है, पहला है नर सेवा, और दूसरा है नारायण सेवा (वास्तव में नर सेवा और नारायण सेवा कोई अलग अलग चीज नहीं है, एक ही है, पर यहाँ समझने की आसानी के कारण अलग अलग बताया जा रहा है) ।

मतलब नर सेवा में, आप सत्यता व ईमानदारी के पथ पर रहते हुए, आपने तन, मन, धन से गरीबो, जरुरतमंदो, असहायों, अनाथ बच्चो, वृद्ध महिला पुरुषो, रोगियों, निर्दोष जीव जन्तुओ (मुर्गा, बकरा, भैसा, अंडा, गाय माता आदि) के साथ साथ अपने मातापिता, भाई बहनों, गुरु जनों, परिचितों, मित्रों, रिश्तेदारों, कर्मचारियों आदि की भी जितनी ज्यादा से ज्यादा उचित सेवा, सहायता, मदद कर सके उतना ही अच्छा होता है, आपके खुद के फायदे के लिए या यूँ कहे आपकी खुद की बीमारियो के नाश के लिए !

इन सभी लोगो की सेवा, सहायता करने से आप के पाप तेजी से खत्म होने लगतें है जिससे आपको कोई बीमारी जल्दी होगी नहीं, और अगर कभी हो भी जायेगी तो आसानी से ठीक भी हो जायेगी !

और दूसरे तरीका यानी नारायण सेवा के, वैसे तो बहुत से तरीके धर्म ग्रंथो में दिए गए है पर सबसे आसान है कि भगवान के किसी भी नाम को रोज अधिक से अधिक मुह से बोलना से या मन में जप करना !

इस तरह भगवान के अति पवित्र नाम को लगातार याद करने से पाप बहुत ही तेजी से जल कर खत्म होने लगतें है क्योकि पुराणो में कहा गया है कि भगवान के हर नाम में इतने ज्यादा पाप नष्ट करने की शक्ति है जितने पाप कोई आदमी अनन्त जन्मो में भी नहीं कर सकता !

इसलिए कोई भी भगवान का नाम (चाहे राम कहे या शिव, चाहे गोपाल कहे या माधव, राधा कहें या दुर्गा, सरस्वती कहें या हरि) अपनी रूची के अनुसार चुने और खूब जपें !

निराकार भगवान के हर अलग – अलग साकार अवतारों के नाम भले ही अलग अलग होते हों, लेकिन हर नाम की शक्ति एकदम बराबर होती है ! मतलब किसी भी नाम की शक्ति कम या अधिक नहीं होती है !

भगवान के सभी नामो की शक्ति कल्पना से भी परे अर्थात महा प्रचण्ड होती है जो कि लगातार जपने से धीरे – धीरे खुद ही समझ में आने लगती है !

जैसा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भक्ति योग के साधकों के लिए कहा है,- “कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा” ! अर्थात इस कलियुग में किसी भी कठिन कर्म काण्ड में उलझने की जरूरत नहीं है क्योंकि कठिन कर्मकाण्ड युक्त पूजा पाठ से मिलने वाले सारे लाभ आसानी से केवल भगवान् के नाम जप से भी बिल्कुल मिल सकतें हैं और नाम जप में सबसे बड़ी ख़ास बात यह है कि भगवान् के नाम जप को कभी भी, कहीं भी (यहाँ तक कि सबसे अपवित्र माने जाने वाले स्थानों जैसे बिना नहाए धोये, ब्रश किये हुए टॉयलेट में फ्रेश होते समय भी) निःसंकोच किया जा सकता है और इसमे सिर्फ लाभ ही लाभ है, हानि कुछ भी नहीं है, जबकि भगवान के मन्त्रों से युक्त कर्मकाण्ड युक्त पूजा पाठ को अशुद्ध शरीर, अशुद्ध उच्चारण या अशुद्ध जगह करने से लाभ की जगह हानि होने की संभावना बनी रहती है (नोट- निराकार भगवान का श्री हनुमान अवतार पूर्णतः ब्रह्मचर्य के महा तप के प्रति समर्पित है इसलिए हनुमान जी का नाम पति पत्नीं की रति क्रिया के समय अशुद्ध शरीर से नहीं जपना चाहिए) !

अगर पेशेंट की हालत इस कंडीशन में ना हो कि वो खुद भगवान के नाम का स्मरण कर सके तो पेशेंट के घर परिवार का कोई भी स्त्री/पुरुष, पेशेंट के स्वास्थ्य लाभ के लिए जप कर सकता है लेकिन जो भी करे भगवान के नाम का जप जल्दी – जल्दी करने में गलत उच्चारण ना करे। और जैसे ही पेशेंट ठीक होने लगे, वैसे ही उसे अपने स्वास्थ लाभ के लिए खुद ही जप करना शुरू कर देना चाहिए क्योकि खुद की समस्या के लिए खुद ही जप करने से ज्यादा फायदा मिलता है !

कोई परिचित स्त्री/पुरुष जब किसी पेशेंट की तबियत में सुधार के लिए जप करे तो उसे जप शुरू करने से पहले भगवान से प्रार्थना कर लेनी चाहिए कि मैं अमुक स्त्री/पुरुष के स्वास्थ्य में सुधार के लिए आपके नाम का जप करने जा रहा हूँ, कृपया इसे सफल बनाने का आशीर्वाद दीजियेगा ! नाम जप के लिए किसी भी माला की जरूरत नहीं होती है !

इस तरह नाम जप का लम्बे समय तक अभ्यास करने से, जब धीरे – धीरे सारे पापो का नाश होने लगता है तो जीवन से धीरे – धीरे दुःख नाम की चीज़ खत्म होने लगती है और साथ ही साथ सभी उचित मनोकामनाए भी अपने आप धीरे – धीरे पूरी होने लगती है, जिससे जिंदगी में हर पल, हर तरफ सिर्फ खुशिया ही खुशिया नजर आने लगती हैं !

कई अनुभवी संतो का कहना है कि भगवान के नाम का लगातार बिना हिम्मत हारे, धैर्य पूर्वक जप करते रहने से एक न एक दिन भगवान का परम दुर्लभ साक्षात् दर्शन भी निश्चित मिलकर ही रहता है !

तो ऐसे में सबसे अच्छा यही है कि किसी भी बीमारी से जल्दी मुक्ति पाने के लिए ऊपर लिखे हुए सारे काम आदमी एक साथ करे, मतलब ऊपर लिखी तीनो आयुर्वेदिक दवाओ को नियम से रोज खाए, और बिना किसी प्रशंसा की उम्मीद से, अर्थात निःस्वार्थ भाव से सभी परिचित व अपरिचित लोगो की अधिक से अधिक उचित सेवा, सहायता करे साथ ही साथ भगवान के नाम का भी लगातार मन में जप करता रहे !

वैसे तो पूर्ण श्रद्धा भाव से उपर लिखे हुए तरीके को करने पर, पहले ही दिन से कुछ ना कुछ लाभ मिलना शुरू हो जाता है पर अलग अलग व्यक्तियों की अलग अलग समस्या की गंभीरता अनुसार पूर्ण लाभ मिलने में कुछ दिनों से लेकर, कुछ महीनों या कुछ वर्ष या कई वर्ष तक भी लग सकतें हैं लेकिन पूर्ण लाभ मिलता निश्चित है क्योंकि परम आदरणीय संतों के अनुसार दुनिया का कौन सा ऐसा उचित कार्य है जो भगवान् की कृपा से संभव ना हो सके ! लाभ पाने का समय इस बात पर भी निर्भर करता है कि कौन व्यक्ति, कितना ज्यादा सत्यता व ईमानदारी की दिनचर्या जीते हुए, इस तरीके को कितना ज्यादा निभा पा (मतलब रोज कितना अधिक ईश्वर के नाम का जप कर पा) रहा है !

अतः अंततः निष्कर्ष यही है कि उपर्युक्त उपाय को पूर्ण नियम, पूर्ण श्रद्धा व पूर्ण परहेजों (नीचे लिखे हुए परहेजों) के साथ करने पर, क्यों नहीं और कैसे नहीं, किसी को भी (चाहे वह आदमी कितना भी ज्यादा परेशान क्यों ना हो) को उसकी बीमारी और अन्य सभी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा !

इन सभी बातो के लिए भी रहें सावधान-

(1) –    मांस, मछली, अंडे खाने वालो की कोई भी प्रार्थना भगवान नहीं सुनते और ऐसे लोगो को शाकाहारी लोगो की तुलना में ज्यादा कठिन बीमारिया और तकलीफ होती है। इसलिए अगर ठीक होना चाहे तो मांसाहारी खाना तुरंत छोड़ देना चाहिए और घर परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और परचितो से भी मांसाहार को छुड़ाना चाहिए क्योकि आपके प्रयास से अगर किसी एक निर्दोष जानवर की जान बच जाती है तो उस जीव का बहुत सा आशीर्वाद आपको लगेगा जो कि आप के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा !

और हाँ ध्यान देने वाली बात है यह भी है कि आजकल ये हर जगह सुनने में आ रहा है कि बहुत सी विदेशी कम्पनीयो के डिब्बा बंद खाने – पीने के सामानो और कॉस्मेटिक्स (जैसे – चॉक्लेट, टॉफ़ी, नूडल्स, ब्रेड, चाय की पत्ती, टूथ पेस्ट और टूथ पाउडर, साबुन (सोप) और हैंड वाश, केक, लिपस्टिक, फेस क्रीम और पाउडर, परफ्यूम, डिओड्रेंट आदि) में धड़ल्ले से जानवरो से बनायीं हुई चीजे मिलायी जाती है और ऊपर से धोखा देने के लिए शाकाहारी का ग्रीन मार्क भी लगा दिया जाता है। विदेशी कंपनीया ऐसा इसलिए करती है क्योकि उनके लिए मांस मछली कोई बुरी चीज नहीं है और बिना अण्डा या मीट पाउडर या मीट एसेन्स  मिलाये उनकी कंपनी के बनाये हुए सामानो में वो फ्लेवर नहीं आता जो वो चाहती है।

तो ऐसे में इन धोखेबाज़ बड़ी बड़ी विदेशी कम्पनीयो से भी बचना बहुत जरुरी है। इसलिए बाजार के किन खाने पीने के सामानो में अण्डे या मांस की मिलावट हुई है इसकी कन्फर्म जानकारी इंटरनेट से या अन्य किसी तरीके से जरूर लेकर ही खाना चाहिए और अगर जानकारी ना मिले तो खाना ही नहीं चाहिए !

(2) –    दोपहर और रात के खाने के आधे घंटा पहले से लेकर 1 घंटा बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए, नहीं तो गैस बनेगी और खाना भी धीरे – धीरे पचेगा। खाना खाने के बीच में आधा ग्लास पानी पी सकते है ! सुबह बासी मुह छोड़कर कभी भी एक साथ एक ग्लास से ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए पर दिन भर में 3 से 4 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए !

फ्रीज़ का ठंडा पानी नुकसान करता है और इसे पीने से शरीर में गिल्टिया निकल आती है इसलिए फ्रीज़ के पानी की जगह मिटटी के घड़े (सुराही) का पानी पीना चाहिए और कोशिश करिये हमेशा ताजा बना हुआ कम तेल मसाले का खाना खाईये ! एक बहुत ध्यान देने वाली बात यह है कि जिस घर में रोज  बार – बार खाने पीने का सामान, खाने की बजाय कूड़े में फेका जाता हो, उस घर में यह 100 % निश्चित है कि लोग कभी भी सुखी नहीं रह सकते क्योकि अन्न का अपमान साक्षात ईश्वर का अपमान है !

आप अपने घर में उतने ही सामान (जैसे फर्नीचर, कपड़े, गाड़िया, गहने आदि) रखिये जितने की वाकई में आपको जरुरत है क्योकि जरुरत से ज्यादा सामान खरीदते जाने से मन में निश्चित ही बेचैनी, उलझन बढ़ने लगती है !

(3) –   किसी भी तरह का नशा (जैसे- सिगरेट, गुटखा, तम्बाखू, शराब, बियर आदि) शरीर को खोखला कर देता है ! जल्दी उम्र में बुढ़ापा, नपुंसकता, कैंसर जैसी जान लेवा बीमारी पैदा करता है इसलिए अगर आप ऐसा करते है तो तुरन्त छोड़ दे और ऐसे नशेड़ी दोस्तों से भी एकदम दूरी बना ले ।

(4)-    किसी भी तरह का बुरा बिज़नेस या नौकरी (जैसे- नशे का, मांस मछली अण्डे, जुआ, हानिकारक खाद्य पदार्थों आदि) नहीं करना चाहिए क्योकि नशे से बर्बाद हुए लोगो की बद्दुआए, नशे के कारोबारियों को निश्चित लगती है जिससे वे खुद ही कुछ समय बाद अनगिनत समस्याओं से घिर जाते है !

(5) –   कई व्यापारी सामानो में मिलावट करने और कई कर्मचारी बिना रिश्वत के काम ना करने के, इतने बड़े आदती हो चुके है कि उनको इसमे कोई भी बुराई लगती ही नहीं है ! ऐसे लोगो की आँखे तभी खुल पाती है जब वे खुद कई समस्याओ व तकलीफो से घिर जाते है ! ऐसे में जब आँख खुले तभी सवेरा, तभी से सुधार लाना चाहिए !

(6) –   खाने पीने के हर सामान को जरुरत से ज्यादा मतलब औकात से ज्यादा खाना, या,  बार – बार भूख मारना मतलब भूख लगने पर भी ना खाना बहुत गलत है। बार- बार पेशाब या मल के प्रेशर को रोकना भी बहुत ही नुकसान करता है ! बाजार के सामान जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, पिज़्ज़ा, बर्गर, चाट, पकौड़ी, डिब्बाबंद प्रिज़र्वेटीव डाले हुए खाने पीने के सामान, अचार, मिठाईयां, चाय कॉफी, आइसक्रीम, नूडल्स आदि ऐसी चीजे है जिनको कोई भी ये नहीं कह सकता कि इनको खाने से सेहत बनती है ! अतः इनका जितना कम से कम इस्तेमाल करे, उतना ही बेहतर है !

(7) – हर मामूली से मामूली और बड़ी से बड़ी एलोपैथिक दवा का कुछ न कुछ साइड इफेक्ट्स होता है (कई बार तो बीमारी से कहीं ज्यादा खतरनाक एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट्स देखे गएँ हैं) जिसकी वजह से एलोपैथिक दवाओं से किसी रोग की पूर्ण सुरक्षित तरीके से परमानेंट ठीक होने की संभावना एकदम नहीं होती है और साथ ही साथ हर कुछ दिन बाद एलोपैथिक दवा का पावर भी बढ़ाना पड़ सकता है, नहीं तो फायदा कम महसूस होता है ! इसलिए कोशिश करिये कि किसी योग्य चिकित्सक की सलाह से एलोपैथिक दवा धीरे – धीरे कम करते हुए, उसकी जगह किसी सुरक्षित इलाज की पद्धति (जैसे- यौगिक, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक) से इलाज शुरू हो सके !

(8) –   अगर आप कोई योग, प्राणायाम या अन्य कोई एक्सरसाइज करते है तो नीचे लिखी हुई कुछ बातो पर जरूर ध्यान दे, अन्यथा फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है-

– अगर आपने कोई लिक्विड पिया है चाहे वह एक कप चाय ही क्यों ना हो तो कम से कम एक से डेढ़ घंटे बाद प्राणायाम करे और अगर आपने कोई सॉलिड (ठोस) सामान खाया हो तो कम से कम 3 से 4 घंटे बाद प्राणायाम करे !

– अगर हर्निया या अपेण्डिस्क का दर्द हो या आपने 6 महीने के अंदर पेट या हार्ट का ऑपरेशन करवाया हो तो प्राणायाम न करे !

– प्राणायाम करते समय रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी रखे और चेहरे को ठीक सामने रखे (अक्सर लोग चेहरे को सामने करने के चक्कर में या तो चेहरे को ऊपर उठा देते है या जमींन की तरफ झुका देते है जो की गलत है) !

– कोई ऊनी कम्बल या सूती चादर बिछाकर ही प्राणायाम करे ! नंगी जमींन पर बैठ कर प्राणायाम ना करे । प्राणायाम के 1 मिनट बाद ही जमींन पर पैर रखे !

यह बार – बार देखा गया है कि हजारो लोग ऊपर दी गयी मामूली सावधानियों का पालन नहीं करते और प्राणायाम से उनको फायदे की जगह नुकसान पहुचता है जिससे वे प्राणायाम को कोसते फिरते है कि उनको प्राणायाम से फायदा नहीं बल्कि नुकसान हुआ। जबकि प्राणायाम एक बहुत ही दिव्य क्रिया है और हठ योग के अनुसार प्राणायाम करने से भी पाप जलते है जैसे की भगवान का नाम जपने से इसलिए अगर आप बहुत कमजोर नहीं है तो आप प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट कपाल भाति और 10 मिनट अनुलोम विलोम प्राणायाम जरूर करे !

प्राणायाम का समय धीरे – धीरे बढ़ाना चाहिए ना कि पहले ही दिन से 15 मिनट प्राणायाम शुरू कर देना चाहिए अन्यथा गर्दन की नली में खिचाव या कोई अन्य समस्या पैदा होने का डर रहता है !

(9) –        जितना हो सके अपने और अपने परिवार को कीटनाशक (पेस्टिसाइड) वाली सब्जिया, फल और अनाज कम से कम खिलाये। आज कल 100 % सब्जियों में भयंकर कीटनाशक, 100 % फलों पर (खासकर महंगे फलो जैसे सेब, अनार आदि) और 100 % अनाजों पर (दाल, चावल, गेहू) भयंकर कीटनाशक खूब धड़ल्ले से रोज डाला जा रहा है।

और साथ ही साथ सैकड़ो किस्म की खतरनाक रासायनिक खाद भी डाली जा रही है जिससे आदमी की नस्ल, पशु पक्षियों की नस्ल और धरती माँ की उपजाऊ क्षमता सब खतरे में पड़ गयी है। इन भयंकर कीट नाशको की वजह से हर साल हज़ारो किसान जो इनका खेतो में छिड़काव करते है, वे खुद ही मर जाते है।

इन कीटनाशको के छिड़काव से पैदा हुई सब्जिया अलग – अलग किस्म का कैंसर पैदा कर रही है ! ऐसे में यह जरुरी है कि आप जब बाजार सब्जी खरीदने जाए तो सब्जी के दुकानदारो पर रोज दबाव बनाये कि वह सिर्फ गोबर खाद से पैदा हुई सब्जियों को ही आपको दे।

(10) –      सबसे आखिरी में एक और मुख्य बात यह है कि, आपकी किन लोगो और किन चीज़ो से संगती है यही आपकी जीवन की राह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संगती जैसी बातो को मामूली बाते कहकर बहुत से लोग टाल जाते है पर इसका बहुत गहरा असर पड़ता है हमारी आदतो, स्वभाव और सोचने के तरीको पर !

इसलिए जितना हो सके उतना दुष्ट, भ्रष्टाचारी, पापी लोगो से दूरी बना कर रखे और अगर व्यहारिक मजबूरी वश ऐसा संभव ना हो सके तो अधिक से अधिक भगवान की संगती करे मतलब अधिक से अधिक भगवान का नाम जप करे जिसके की असंख्य फायदे है !

तो इन बातो को ध्यान में रखने से और अपने जीवन में उतारने से, बड़ी सी बड़ी बीमारी या सामाजिक संकट, का निश्चित ही निदान होकर रहता है ! और धीरे – धीरे हर समय अपने अंदर एक सुन्दर सी अनजानी ख़ुशी महसूस होती रहती है जो कि प्रतिदिन बढ़ती ही जाती है !

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