एच.आई.वी/एड्स जैसी घातक बीमारियों का सम्पूर्ण इलाज योग, आसन, प्राणायाम व आयुर्वेद से

· October 28, 2017

यूं तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह से अब तक विभिन्न बीमारियों के यौगिक इलाजों को जानने के लिए हजारों मरीजों ने सम्पर्क किया है, पर आश्चर्य है कि एड्स (human immunodeficiency virus, acquired immune deficiency syndrome) की बिमारी का इलाज जानने के लिए अब तक सिर्फ तीन ही मरीजों ने सम्पर्क किया !

हम अपने से सम्पर्क करने वाले हर मरीज को बेहद गंभीरता से लेते हैं और पूरी कोशिश करते हैं उन्हें सर्वोत्तम सलाह देने की ! सर्वोत्तम सलाह प्राप्त करने के लिए हम सर्वोत्तम विशेषज्ञों की सहायता लेतें हैं !

पर जब हमसे सबसे खतरनाक बिमारियों में से एक, एड्स के इलाज के बारे में, किसी मरीज ने सबसे पहली बार जानना चाहा, तो हमें महसूस हुआ कि इस बिमारी के निश्चित इलाज के बारे में सिर्फ मूर्धन्य योग विशेषज्ञों से ही पूछना पर्याप्त ना होगा, क्योंकि सवाल जीवन और मौत का है, इसलिए मूर्धन्य योग विशेषज्ञों के भी परे, दिव्य दृष्टिधारी ऋषि सत्ता का भी अनुग्रह प्राप्त करना अनिवार्य है !

और यह निश्चित रूप से परम सौभाग्य ही है कि लोक हित के मसलों पर परम आदरणीय ऋषि सत्ता से सम्पर्क व ज्ञान, हम तुच्छ मानवों के अति साधारण प्रयासों से ही प्राप्त हो जाता है !

अगाध ममता युक्त ऋषि सत्ता ने हमें बताया कि एड्स जैसी खतरनाक बीमारी के विषाणुओं को पूर्ण रूप से ख़त्म करने की क्षमता अगर किसी में है तो वह है भगवान् सूर्य में !

उन्होंने हमें बताया कि भगवान् भास्कर के होते हुए ऐसे किसी भी मरीज को घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, बस जरूरत है तो भगवान् सूर्य की कृपा प्राप्त करने की !

यह कृपा जितनी ज्यादा होगी, एड्स के विषाणु शरीर में उतना ही जल्दी मरेंगे और इस स्तर की विशाल कृपा, सिर्फ भगवान् सूर्य को जल देकर या अंगूठी में कोई रत्न आदि धारण करके नहीं प्राप्त की जा सकती है ! इस स्तर की कृपा प्राप्त करने के लिए एक ऐसी महान वैज्ञानिक क्रिया का अभ्यास करना होता है जो दिखने में तो अति साधारण है पर इसका पूर्ण फल अकल्पनीय है !

इस वैज्ञानिक क्रिया के बारे में सबसे पहले स्वयं भगवान् सूर्य ने ही पतंजलि ऋषि को बताया था, इस क्रिया का नाम है, “सूर्य नमस्कार” ! सिर्फ पहुचे हुए योगियों को ही पता है कि सूर्य नमस्कार का प्रतिदिन प्रातः काल कम से कम 13 बार से लेकर अधिकतम 52 बार तक अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी में स्थित स्वाधिष्ठान चक्र में, दिव्य उर्जा का विस्फोट होने लगता है और यह विस्फोट धीरे धीरे इतना ज्यादा प्रबल होने लगता है कि एड्स के कीटाणु तेजी से जल कर भस्म होने लगतें हैं !

अतः पूर्ण परहेजों के साथ इस योग का प्रतिदिन नीचे बताई गयी विशेष विधि के अनुसार अक्षरशः पालन करने वाले मरीज बहुत संभव है कि सिर्फ 1 वर्ष में ही इस बिमारी से हमेशा के लिए मुक्ति पा जाएँ (अगर एक वर्ष में पूर्ण लाभ नहीं मिल पाया हो, तो तब तक इस विधि का अक्षरशः पालन करते रहना चाहिए, जब तक कि पूर्ण लाभ ना मिल जाए) !

प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से पहले, कम से कम 2 हजार बार कपालभाती प्राणायाम करना चाहिए ! दो हजार बार कपालभाति प्राणायाम लगातार करने में मात्र 20 मिनट समय लगता हैं ! पर पहले ही दिन 2 हजार बार कपालभाती प्राणायाम करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, नहीं तो गले में खिचाव आ सकता है इसलिए अभ्यास को सुविधानुसार धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए !

कपालभाति प्राणायाम करने के बाद सूर्य नमस्कार करना चाहिए ! हर बार सूर्य नमस्कार शुरू करते समय भगवान् सूर्य के मन्त्र का एक बार जप करना चाहिए ! भगवान् सूर्य के तेरह मन्त्र होतें हैं उन्हें बारी बारी हर बार सूर्य नमस्कार शुरू करते समय जपना चाहिए ! जब तेरह बार सूर्य नमस्कार समाप्त हो जाए तो चौदहवीं बार सूर्य नमस्कार करते समय फिर से पहले मन्त्र से जप शुरू करना चाहिए ! इस तरह सत्ताईसवी बार और चालीसवी बार से सूर्य नमस्कार करते समय भी मन्त्रों की पुनरावृत्ति होगी ! सूर्य नमस्कार के वे तेरह मन्त्र निम्नवत हैं-

1- ॐ मित्राय नमः 2- ॐ रवायै नमः 3- ॐ सूर्याय नमः 4- ॐ भानवे नमः 5- ॐ खगाय नमः 6- ॐ पूष्णे नमः 7- ॐ हिरण्यगर्भाय नमः 8- ॐ मरीचये नमः 9- ॐ आदित्याय नमः 10- ॐ सावित्रे नमः 11- ॐ अर्काय नमः 12- ॐ भास्कराय नमः 13- ॐ श्री सावित्रसूर्यनारायणाय नमः (पूर्ण लाभ पाने के लिए इन सभी मन्त्रों का उच्चारण, सदा एकदम शुद्धता पूर्वक ही करना चाहिए)

परम आदरणीय ऋषि सत्ता ने हमें बताया कि वास्तव में भगवान् सूर्य की किरणें तेरह किस्म की होतीं हैं जिनमे प्रचंड ताकत होती है शरीर की हर बड़ी से बड़ी बीमारी का निश्चित नाश करने की !
अतः इन तेरह मंत्रो को जपकर सूर्य नमस्कार करने से, सूर्य की वे तेरह किरणें शरीर में स्थित हर तरह की बीमारी के कारणों को भस्म करने लगतीं हैं !

मन्त्र जपने के बाद मन में एक बार यह प्रार्थना भी करनी चाहिए कि, हे प्रत्यक्ष भगवान् सूर्य, कृपया मेरे द्वारा जाने अनजाने हुए सभी पापों के लिए मुझे क्षमा करें तथा कृपया मेरे सभी कष्टों को हर लें !

सूर्य नमस्कार का अभ्यास शुरुआत के 6 महीने इस प्रकार करना चाहिए कि पहले सप्ताह प्रतिदिन 13 बार सूर्य नमस्कार करना चाहिए, दूसरे सप्ताह 26 बार, तीसरे सप्ताह 39 बार और चौथे सप्ताह 52 बार करना चाहिए ! इस तरह 4 सप्ताह अर्थात 28 दिनों तक करना चाहिए !

फिर 4 सप्ताह के बाद पुनः इसी प्रक्रिया को दोहराना चाहिए अर्थात 4 सप्ताह के बाद पहले सप्ताह 13 बार सूर्य नमस्कार करना चाहिए, दूसरे सप्ताह 26 बार, तीसरे सप्ताह 39 बार और चौथे सप्ताह 52 बार करना चाहिए !

इस तरह लगातार 168 दिन (लगभग 6 महीने) तक करना चाहिए !

फिर इसके बाद इस क्रम को ठीक उल्टा कर देना चाहिए अर्थात अब पहले सप्ताह 52 बार सूर्य नमस्कार करना चाहिए, दूसरे सप्ताह 39 बार, तीसरे सप्ताह 26 बार और चौथे सप्ताह 13 बार करना चाहिए ! फिर इसी नए क्रम में अगले 6 महीने तक लगातार सूर्य नमस्कार करना चाहिए !

यदि एक वर्ष में एड्स पूरी तरह से समाप्त ना हो पाया हो, तो ऊपर दी गयी विधि को बार बार तब तक दोहराना चाहिए जब तक कि एड्स का पूरी तरह से खात्मा ना हो जाए !

सूर्य नमस्कार बहुत जल्दी जल्दी नहीं करना चाहिए बल्कि इसको करते समय हर स्टेप में कम से कम 3 से 4 सेकंड्स तक रुकना ही चाहिए, नहीं तो अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा ! इस तरह 52 बार सूर्य नमस्कार करने में लगभग ढाई से तीन घंटे समय लग सकता है ! शुरुआत में इस तरह सूर्य नमस्कार करने वाले को यह समय बहुत ज्यादा लग सकता है पर कुछ ही महीनो बाद इस क्रिया के बदले में मिलने वाले बेहद आश्चर्यजनक लाभों को देखकर, उसे निश्चित महान ख़ुशी प्राप्त होगी कि मैंने रोज इतना ज्यादा समय सूर्य नमस्कार करने में खर्च करके कोई बेवकूफी नहीं बल्कि बहुत ही बुद्धिमानी का काम किया है !

परम आदरणीय ऋषि सत्ता के अनुसार, पूर्ण परहेजों के साथ इस तरह सूर्य नमस्कार करने वाला, निश्चित रूप से अपने अंदर स्थित एड्स के कीटाणुओं को जलाने लगता है जिससे उसका शरीर धीरे धीरे स्वस्थ, मजबूत व ताकतवर बनने लगता है !

और इस तरह सूर्य नमस्कार प्रतिदिन करने से, ना केवल एड्स बल्कि दुनिया की कोई भी ऐसी बड़ी से बड़ी व खतरनाक से खतरनाक बीमारी (जैसे किसी भी अंग का कैंसर लास्ट स्टेज, ट्यूबरक्लोसिस, दमा, नपुंसकता, शीघ्रपतन, सफ़ेद दाग, कोढ, लकवा, पागलपन डिप्रेशन स्ट्रेस जैसे सभी मानसिक रोग, अत्यधिक बढ़ी हुई डायबिटीज, मोटापा, हाई या लो ब्लड प्रेशर, हार्ट ब्लोकेज, हृदय की अनियमित धड़कन, किडनी की खराबी, गंजापन, असमय सफदे बाल, नेत्र रोशनी में कमी, ग्लूकोमा, पीलिया, त्वचा की झुर्रियाँ व ग्लो की कमी, त्वचा का ढीलापन, शरीर में ताकत की कमी, सुस्ती, जोश उत्साह की कमी, गठिया, स्याटिका, सरवाईकल स्पोन्डिलाइटिस, अल्सर, बहुमूत्र, पथरी, बवासीर, भगन्दर, गिल्टी, कमजोर पाचन शक्ति, कमजोर मसूढ़े व दांत, पुरानी कब्ज, दस्त, गैस, एसिडिटी, पुराना नजला जुकाम, पुरानी खांसी, किसी भी क़िस्म की एलर्जी, पेट दर्द, फाइलेरिया, खुजली, हड्डी की कमजोरी आदि) नहीं है जिसका सम्पूर्ण इलाज ना किया जा सके !

परम आदरणीय ऋषि सत्तानुसार यह पूरी एक साल की प्रक्रिया, एक अति दिव्य कायाकल्प की प्रक्रिया है, जिससे पूरे शरीर का नवीनीकरण होने लगता है ! अतः शरीर में कोई बड़ी बीमारी हो या ना हो, लेकिन जीवन में एक बार इस क्रिया का सभी स्त्री पुरुषों को अभ्यास जरूर करना चाहिए !

परम आदरणीय ऋषि सत्ता अनुसार इस क्रिया में इतना महा सामर्थ्य इसलिए है क्योंकि यह क्रिया भगवान् सूर्य से सम्बंधित एक अति दुर्लभ व गुप्त वैज्ञानिक अनुसंधान है जिसकी जानकारी बहुत ही कम लोगों को है !

अगर नौकरी व्यापार की व्यस्तता की वजह से इस क्रिया को पूरी तरह से करने का समय ना मिल पाता हो, तो प्रतिदिन केवल 13 बार सूर्य नमस्कार करने से भी देर सवेर लगभग सारे लाभ मिलने लगतें हैं !

इस प्रक्रिया का पूरा फायदा सिर्फ तभी मिलेगा जब सूर्य नमस्कार सुबह सूर्योदय के समय पूरब दिशा की ओर मुंह करके करना शुरू किया जाए ! यहाँ इस बात को फिर से दोहराया जा रहा है कि प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्य नमस्कार शुरू करना कंपल्सरी (अनिवार्य) है क्योंकि तभी पूर्ण लाभ मिल पायेगा ! सबसे बेहतर है कि सूर्य नमस्कार खुले आकाश के नीचे किया जाए पर खुले आकाश के नीचे कर पाना संभव नहीं हो तो ऐसे स्वच्छ, खुले व हवादार कमरे में करना चाहिए जिसमें अधिक से अधिक सूर्य प्रकाश आता हो ! पर सूर्य नमस्कार धूप में नहीं करना चाहिए !

सूर्य नमस्कार या कोई भी योगासन नंगी जमीन पर नहीं करना चाहिए, बल्कि कोई सूती मोटी चादर या भेड़ के बाल से बना कम्बल बिछाकर करना चाहिए ! सिर्फ समतल जमीन पर करना चाहिए और जूता पहन कर नहीं करना चाहिए, अगर ठण्ड ज्यादा हो तो मोज़े पहना जा सकता है, बाकी शरीर पर ढीला ढाला कपड़ा ही पहनना चाहिए ! सूर्य नमस्कार केवल दिन में करना चाहिए, ना कि रात में ! ए. सी. (एयर कंडीशनर, Air Conditioners) जैसे कृत्रिम वातावरण में योगासन व प्राणायाम करने से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता है इसलिए ए. सी. को बंद करके खिड़की दरवाजे खोलकर योग करना चाहिए (कुछ महीने पहले सर्जरी करवा चुके मरीजों को इसे करने से पहले एक बार चिकित्सक की सलाह भी ले लेना चाहिए परन्तु गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए ! हृदय रोगियों को कोई भी योग, आसन, प्राणायाम या अन्य कोई एक्सरसाइज धीरे धीरे शुरू करके बढ़ाना चाहिए) !

सूर्य नमस्कार सुबह खाली पेट करना चाहिए ! अगर सुबह कोई लिक्विड (जैसे – पानी, चाय, काफी आदि) पिया हो तो एक से डेढ़ घंटे बाद सूर्य नमस्कार करना चाहिए पर कुछ सॉलिड सामान खाया हो तो कम से कम 3 से 4 घंटे बाद ही सूर्य नमस्कार कर सकतें हैं ! सूर्य नमस्कार करने के आधे घंटे बाद ही कुछ खाना या पीना चाहिए पर अगर बहुत प्यास लगे तो बीच में भी या करने के तुरंत बाद सिर्फ एक दो घूँट पानी पीया जा सकता है !

सूर्य नमस्कार को करने के तुरंत बाद 8 – 10 तुलसी पत्ती खाकर, लगभग आधा कप शुद्ध भारतीय देशी नस्ल की गाय माता का गोमूत्र पी लेना चाहिए और फिर आधे घंटे तक कुछ भी नहीं खाना पीना चाहिए !

पूर्ण ब्रह्मचर्य, मूली, ज्यादा तला भुना, मसालेदार, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब, बियर, सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, पान मसाला, मांस मछली अंडा युक्त भोजन बिल्कुल ना करना ही मुख्य परहेज हैं !

हमने एड्स के इस इलाज की पूर्ण विधि को हमसे सम्पर्क करने वाले पहले मरीज को बताया था और उससे यह भी कहा था कि इस उपाय को बिना नागा करें और अपनी हर महीने की मेडिकल रिपोर्ट के बारे में भी हमें निश्चित अवगत करातें रहें ताकि हमें भी पता लगता रहे कि उस मरीज को ऋषि सत्ता द्वारा बताये गए इस इलाज से कितना फायदा मिल रहा है और साथ ही हम उसके इस फायदे के बारे में अपनी वेबसाइट पर भी प्रकाशित कर सकें जिससे जीवन के प्रति निराश हो चुके अन्य एड्स के मरीजों में भी आशा की प्रबल किरण पुनः प्रज्वलित हो सके !

पर पहले मरीज ने हमसे कभी दुबारा सम्पर्क ही नहीं किया जिसके पीछे का कारण हमें उस मरीज के शुरूआती हाव भाव को देखकर व उसकी बातचीत को सुनकर ही पता लग गया था कि उसे सूर्य नमस्कार जैसी यौगिक चिकित्सा पद्धति में कोई ख़ास विश्वास नहीं था, और वो हमारे पास मुख्यतः आया था, किसी नए चमत्कारी टाइप के इलाज के बारे में जानने के लिए ! ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि इस संसार में चमत्कार जैसी कोई चीज होती ही नहीं है, क्योंकि जिसे हम चमत्कार समझ रहें होतें हैं, वास्तव में वह सिर्फ ज्ञान ही होता है !

जैसे साधारण उदाहरण के तौर पर, किसी कम जानकार आदमी के लिए एक रिवाल्वर मात्र लोहे का एक टुकड़ा ही है, पर जब कोई जानकार आदमी उसी रिवाल्वर से गोली फायर करके सैकड़ो मीटर दूर रखी हुई किसी चीज को तबाह कर देता है तो उस कम जानकार आदमी को यह प्रक्रिया चमत्कार लगती है पर उस जानकार आदमी को अच्छे से पता होता है कि इसमें चमत्कार जैसा कुछ भी नहीं है, बस ज्ञान ही तो है ! जिसे ज्ञान पता है वह इस्तेमाल करता है और सुखी रहता है लेकिन जिसे पता नहीं है वह इधर उधर भटकता रहता है और परेशान होता रहता है, ठीक यही स्थिति सूर्य नमस्कार की भी है जिसके बारे में पता तो बहुतों को है पर इसके नियमित अभ्यास से शरीर में क्या क्या आश्चर्यजनक चमत्कारी परिवर्तन आ सकता है इसके बारे में सिर्फ खुद ऐसा अभ्यास करने वाले योगी ही जानतें हैं !

सूर्य नमस्कार को करने से एड्स में कोई फायदा होगा या नहीं, इस विश्वास की कमी की समस्या, पहले एड्स के मरीज के साथ साथ दूसरे में भी थी, इसलिए उसने भी हम लोगों से दुबारा सम्पर्क नहीं किया पर तीसरे एड्स के मरीज ने लगभग 4 महीने बाद हमसे सम्पर्क किया और काफी उत्साह से हमें बताया कि उसकी लेटेस्ट मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार उसमें कुछ ऐसे आश्चर्यजनक सुधार दिखने शुरू हो रहें हैं, जिसके बारे में एक्सपीरियंसड डॉक्टर्स भी चकित हैं तो हमने उस मरीज से निवेदन किया कि अगर आप लिखित में हमें अनुमति दें तो हम आपके इस दुर्लभ अनुभव को अपनी वेबसाइट पर भी प्रकाशित करना चाहेंगे ताकि अधिक से अधिक अन्य एड्स के मरीजों के जीवन में भी फिर से खुशियों के दिन लौटने की उम्मीद जग सके पर पूरी दुनिया के सामने अर्थात वेबसाइट पर अपना परिचय, एक एड्स के मरीज के तौर पर छपने की बात सुनकर उस मरीज ने तुरंत ना कर दी और फिर हमसे कभी दुबारा सम्पर्क ही नहीं किया !

“स्वयं बनें गोपाल” समूह ने कई महीनों तक किसी ऐसे एड्स मरीज की प्रतीक्षा की जो ऋषि सत्ता के द्वारा बताये गए इस उपाय को पूरी निष्ठा से करे और उसके परिणाम को हमें प्रकाशित करने की अनुमति भी प्रदान करे पर ऐसा कोई मरीज हमसे सम्पर्क करने आया नहीं !

मरीज हमारे पास नहीं आया तो अंततः हम लोग ही मरीजों के पास पहुँच गए अर्थात कई छोटे बड़े हॉस्पिटल्स में इलाज करवाने वाले एड्स के मरीजों के पास गए पर हम यह देखकर बेहद आश्चर्य चकित थे कि क्या घनघोर मूर्खता का माहौल सर्वत्र व्याप्त है कि जो एलोपैथिक चिकित्सा विज्ञान जो मात्र कुछ सौ वर्ष पुराना है और जो किसी भी बीमारी को परमानेंट ठीक करने का कभी दावा भी नही करता है जबकि सैकड़ों खतरनाक साइड इफेक्ट्स भी मुफ्त में प्रदान करता है, उससे इलाज करवाने के लिए लोगों की भीड़ मची रहती है जबकि अनन्त वर्ष पुराने योग आयुर्वेद से कठिन से कठिन बीमारियों को भी पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, इस पर किसी को विश्वास ही नहीं होता है खासकर तब जब कोई अपनी बीमारी से बहुत ज्यादा डरा हुआ हो !

ऋषि सत्ता ने हमें इस इलाज के बारे में बताते समय ही यह आगाह किया था कि यह मत सोचना कि इस इलाज के बारे में खूब प्रचार प्रसार करके इस दुनिया से एड्स बीमारी का नामोनिशान मिटा दोगे क्योंकि यह जो समय चल रहा है उसका नाम है कलियुग, और इस कलियुग की ताकत प्रचंड घातक है क्योंकि यह सबसे पहले आदमी की सही सोचने समझने की क्षमता अर्थात बुद्धि को ही भ्रष्ट कर देता है इसलिए भले ही किसी बीमारी का इलाज ठीक सामने ही रखा रहा हो, लेकिन कोई मरीज तब तक सही इलाज की तलाश में इधर उधर भटकता रहेगा जब तक कि उसके किसी अच्छे कर्म के फलस्वरुप उसकी समझ पर से मूर्खता का पर्दा हटकर उसे शुद्ध तार्किक बुद्धि ना प्राप्त हो जाए !

“स्वयं बनें गोपाल” समूह की तीव्र इच्छा थी कि एड्स के इस इलाज को कम से कम दो तीन मरीजों की मेडिकल प्रोग्रेस रिपोर्ट् के साथ इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए ताकि इस लेख को पढ़ने वाले एड्स के मरीजों को इस इलाज के प्रति ज्यादा से ज्यादा विश्वास और उत्साह जग सके पर सिर्फ प्रोग्रेस रिपोर्ट्स के इन्तजार में अब भी इस इलाज को प्रकाशित करने में और ज्यादा विलम्ब करना उचित नहीं लगता है, इसलिए आज हम एड्स की इस उपचार विधि को यहाँ प्रकाशित कर रहें हैं !

अंत में हम निवेदन करना चाहेंगे उन सभी एड्स के मरीजों को जो इस लेख को पढ़ रहें हैं कि आप पूर्ण विश्वास के साथ, ऊपर दिए गए इस प्रयोग के अक्षरशः अभ्यास को कृपया कम से कम 4 महीने तक निश्चित करके देखें तो हमें पूरी उम्मीद है कि दिव्यदृष्टिधारी व अगाध ममता युक्त ऋषि सत्ता द्वारा बताये गए इस अति दुर्लभ व पूर्ण वैज्ञानिक सूर्य चिकित्सा पद्धति से आपको जरूर जरूर जरूर लाभ प्राप्त होगा और साथ ही साथ अगर आप जीवन के प्रति निराश हो चुके दूसरे एड्स के मरीजों को, इस इलाज से आपको मिलने वाले सत्य लाभों के बारें में बताकर, उन्हें अपार सांत्वना व ख़ुशी प्रदान करने वाले महापुण्य के भागीदार भी बनना चाहतें हों तो इस इलाज से होने वाले लाभों की मेडिकल रिपोर्ट्स कृपया हमसे शेयर जरूर करें (इस इलाज के साथ आप एड्स की रेग्युलर एलोपैथिक या होम्योपैथिक दवाओं का सेवन भी बिल्कुल कर सकतें हैं) !

साथ ही इस लेख को पढ़ने वाले अन्य सभी स्वस्थ नागरिकों से भी प्रार्थना है कि कृपया वे इस लेख को फेसबुक/ट्विटर आदि पर अधिक से अधिक शेयर करें ताकि यह लेख किसी जरूरतमन्द एड्स के मरीज के पास आसानी से पहुँच सके, क्योंकि आज भी एड्स के अधिकाँश मरीज लोक लाज की डर की वजह से अपनी बीमारी की अधिक से अधिक जानकारी इन्टरनेट पर ही खोजना ज्यादा सुरक्षित समझतें हैं !

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“स्वयं बनें गोपाल” समूह का आप सभी आदरणीयों के लिए विशेष धन्यवाद संवाद सूचना

मातृ भूमि कि रक्षा के लिए अंतरात्मा कर रही पुकार कि,- “स्वयं बनें गोपाल”



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