कई रोगों का नाश मुफ्त में करती हैं डाला छठ पर भगवान सूर्य से निकलने वाली दिव्य किरणें

%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8बिहार में जिसे डाला छठ कहते हैं, असल में एक बहुत साइंटिफिक त्यौहार है और इसका महत्व समझना आज के वैज्ञानिकों के लिए मुश्किल काम हैं क्योंकि वे भगवान सूर्य को आज भी एक सिर्फ आकाशीय पिण्ड मानकर उस पर रिसर्च कर रहें हैं !

भगवान सूर्य की असली महिमा हमारे सबसे प्राचीन वैज्ञानिक ऋषियों ने समझी इसलिए उन्होंने सूर्य को प्रत्यक्ष शिव (भगवान्) कहा मतलब ऐसे भगवान् जिन्हें हम देख सकतें हैं !

वैसे तो भगवान सूर्य के फायदे गिनाने शुरू किया जाय तो ना जाने कितने वर्ष बीत जाएँ इसलिए यहाँ हम बात करते हैं सिर्फ डाला छठ के पर्व पर निकलने वाली किरणों की विशेषता की !

हमारे धर्म ग्रन्थ कहते हैं की डाला छठ के पर्व पर भगवान सूर्य से जो किरणें पृथ्वी पर आती हैं वो इतनी विशेष होती हैं कि अगर उन्हें आधे घन्टे मानव शरीर, श्रद्धा और भक्ति भाव से सोखे तो उसका बहुत ही भला होता है क्योंकि ये रश्मियाँ शरीर में जाने के बाद शरीर में अदभुत दवा की तरह लगातार काम करती हुई शरीर के कई छोटे बड़े रोगों का नाश करती हैं !

ये दिव्य किरणे डाला छठ के तीन दिन पहले और तीन दिन बाद तक ही केवल पृथ्वी पर आती हैं ! तो ऐसे में हर व्यक्ति को इस मुफ्त के पर बेहद चमत्कारी इलाज का जरूर फायदा उठाना चाहिए !

आपके जो अपने भी परेशान हों, उन्हें भी ये जानकारी बता कर परोपकार का पुण्य कमाईये !

सिर्फ आधा घंटा धूप में बैठें, दोपहर की धूप सबसे ज्यादा फायदेमंद है, कम से कम कपड़े पहन कर अधिक से अधिक किरणों को शरीर तक पहुचनें दें पर खुली ठण्डी हवा से बचें !

धूप में बैठकर भगवान् सूर्य से यह प्रार्थना जरूर करिए कि, हे प्रभु कृपया आपकी दिव्य किरणों से मेरे शरीर के सभी रोगों का नाश हो और साथ ही साथ मेरे मन के सभी अपवित्र गन्दे विचारों का भी नाश हो जिससे मै आपकी कृपा का अधिक से अधिक सुपात्र बन सकूं !

(नोट – मांस, मछली, अंडा खाने वालों को इन निर्दोष जानवरों की हत्या का जो श्राप लगता है तथा दूसरों का हक मारकर अपनी तिजोरी भरने वालों को जो श्राप लगता है, उन श्रापों से देर सवेर उत्त्पन होने वाली किसी भी बीमारी या किसी अन्य समस्या में भगवान भी तब तक मदद नहीं करते हैं जब तक कि ऐसे गलत काम करने वाले, दुबारा ऐसे गलत कामों को ना करने का सच्चे मन से दृढ़ संकल्प नहीं ले लेतें हैं) !

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