गॉल ब्लैडर की पथरी के भयंकर दर्द से मुक्ति आयुर्वेद से

· November 16, 2015

xxBlausen_0701_PancreaticTissueअगर आप के गॉल ब्लैडर की पथरी का दर्द ज्यादा सीरियस ना हो तो आप ऑपरेशन कराने से पहले, चिकित्सक की राय से इन आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट्स को भी आजमां सकते हैं !

गॉल ब्लैडर में पथरी बनना एक अति पीड़ादायक रोग है। इसे पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताशय में दो तरह की पथरी बनती है। पहली कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी और दूसरी पिग्मेन्ट से बनने वाली पथरी। जिसमें से लगभग अस्सी प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती है। यह रोग किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने की सम्भावना पुरुषों की तुलना में कम होती है। पित्त की पथरी को घरेलू उपचार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गॉल ब्लैडर में होता है। यह पित्त वसायुक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो पथरी निर्माण के लिये आदर्श स्थिति बन जाती है। यह बीमारी आमतौर पर तीस से साठ वर्ष के उम्र के लोगों में पाई जाती है और स्त्रियों की अपेक्षा पुरूषों में चार गुना अधिक पाई जाती है।

बच्चों और वृद्धों में मूत्राशय की पथरी ज्यादा बनती है, जबकि वयस्को में अधिकतर गुर्दो और मूत्रवाहक नली में पथरी बनती है। पथरी के जिन मरीजों को डायबिटीज की बीमारी होती उनको गुर्दे की बीमारी होने की काफी संभावनाएं रहती हैं। अगर किसी मरीज को रक्तचाप की बीमारी है तो उसे नियमित दवा से रक्त चाप को नियंत्रण करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि अगर रक्तचाप बढ़ता है, तो इस बिमारी से भी गुर्दे खराब हो सकते हैं।

प्रेग्नेन्सी, मोटापा, मधुमेह, अधिक बैठे रहने वाले लोगों, तेल घी अधिकता वाले भोजन और शरीर में खून की कमी से पित्त पथरी रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस समस्या को कुछ घरेलू उपचारों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रस्तुत है पित्त की पथरी के कुछ प्रभावी घरेलू उपाय (Ayurvedic treatment of Gall Stone in hindi, pitt ki pathri ka desi ilaj, Pittaashy stone herbal cure, Gallstones Causes Risks Symptoms herbal Treatments)-

– गाजर और ककड़ी के रस को सौ मिलिलिटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पित्त की पथरी में लाभ होता है।

– सुबह खाली पेट 1 नींबू का रस पानी में मिलाकर पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है।

– शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा चीनी युक्त पेय हानिकारक हैं। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।

– नाशपाती पित्त की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाये जाने वाले रसायनिक तत्वों से पित्ताशय के रोग दूर होते हैं।

– खट्टे फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन सी गॉल ब्लैडर की पथरी दूर करने के लिए काफी मददगार साबित होती है। विटामिन सी अर्थात एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रोल को पित्त में बदल देता है। इसलिए विटामिन सी युक्त फल जैसे आंवला, नीम्बू, संतरा तथा देशी गाय माता का दूध आदि का नियमित सेवन करें |

– पित्त पथरी के रोगी भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में हरी सब्जियां और फल लें। इनमें कोलेस्ट्रोल कम मात्रा में होता है और यह प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।

– तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतुलित भोजन ही करें।

– रोजाना एक चम्मच हल्दी का सेवन करने से पथरी क्षीण होती है।

(आवश्यक सूचना – “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट में प्रकाशित सभी जानकारियों का उद्देश्य, सत्य व लुप्त होते हुए ज्ञान के विभिन्न पहलुओं का जनकल्याण हेतु अधिक से अधिक आम जनमानस में प्रचार व प्रसार करना मात्र है ! अतः “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान अपने सभी पाठकों से निवेदन करता है कि इस वेबसाइट में प्रकाशित किसी भी यौगिक, आयुर्वेदिक, एक्यूप्रेशर तथा अन्य किसी भी प्रकार के उपायों व जानकारियों को किसी भी प्रकार से प्रयोग में लाने से पहले किसी योग्य चिकित्सक, योगाचार्य, एक्यूप्रेशर एक्सपर्ट तथा अन्य सम्बन्धित विषयों के एक्सपर्ट्स से परामर्श अवश्य ले लें क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं)





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