बहुतों को हॉस्पिटल पहुँचाने वाले डायबिटीज का आज ही खात्मा करिये आयुर्वेद से

· November 1, 2016

आईये सर्वप्रथम सामान्य भाषा में जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर डायबिटीज (diabetes) है क्या और क्या हैं इसके प्रथम द्रष्टया लक्षण-


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डायबिटीज (जिसको मधुमेह या शुगर भी कहते है) एक ऐसी बीमारी है जो कंट्रोल में है तो आदमी को कोई समस्या नहीं पर लम्बे समय तक बिगड़ी रहे तो शरीर में सैकड़ो छोटी बड़ी बीमारी पैदा कर सकती है क्योकि ये शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत को ही कमजोर कर देती है। इसलिए इसे अगर सही वक़्त पर रोका ना जाये तो इसका परिणाम खतरनाक भी हो सकते है।

देखते देखते आज भारत में लगभग 7 करोड़ व्यक्ति डायबिटीज के शिकार हो गए हैं। डायबिटीज एक चयापचय (metabolism) विकृति या रोग है जिसमें ब्लड शुगर की मात्रा बहुत बढ़ जाती है, क्योंकि शरीर में ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाले इंसुलिन हार्मोन (insulin hormone) का बनना कम हो जाता है या इंसुलिन अपने कार्य को ठीक से नहीं कर पाता है।

डायबिटीज होने का जो सबसे बड़ा कारण है वो है तनाव, तनाव और सिर्फ तनाव (आज कल के बड़े – बड़े डॉक्टर्स का बहुत प्रसिद्ध सजेशन है, जो वो अपने मरीजों को देते है – स्ट्रेस इज कॉज ऑफ आल डिसिस (stress is the causes of all diseases) मतलब तनाव ही सारी बीमारियो की जड़ है) | ये बात इस तरह से भी सही साबित होती है जब अक्सर देखने को मिलता है कि कुछ डायबिटीज के मरीज जो एकदम नियम से खाने पीने का परहेज करते है, रेग्युलर मॉर्निंग वाक भी करते है और डायबिटीज की दवा (diabetes mellitus treatment) लेना भी कभी नहीं भूलते है लेकिन इतना सब करने के बावजूद भी उनका शूगर लेवल (sugar levels) बार बार बढ़ जाता है जिससे उन्हें अक्सर हॉस्पिटल में एडमिट तक होना भी पड़ता है !

तो ऐसा क्यों होता है ?

ऐसा होने के पीछे प्रथम द्रष्टया दो मुख्य कारण हो सकते है- पहला कारण कि उन्होंने खाने पीने का परहेज तो किया पर जो सबसे ज्यादा जरूरी परहेज है तनाव ना करने का, वो उन्होंने नहीं किया होगा मतलब अधिक से अधिक हँसने मुस्कुराने की बजाय वे हर समय ऊपर से गंभीर व अंदर से तनाव में रहे होंगे या उन्होंने मांस मछली अंडा खाया होगा क्योकि निर्दोष जानवरो को खाने के लिए की जाने वाली उनकी हत्या के दौरान उन निर्दोष जानवरों के दिल से जो भयंकर श्राप निकलता है वो श्राप उनका मांस खाने वाले का एक ना एक दिन, किसी ना किसी रूप में जीना मुश्किल कर ही देता है !

तनाव व मांसाहार के अलावा जो अन्य संभावित कारण डायबिटीज (Symptoms & Causes of Diabetes) होने के हैं, वे हैं,- नियमित उटपटांग बाजारू खानपान, मोटापा, शारीरिक मेहनत की कमी या वंशानुगत (junk food, obesity, lack of physical activity) इसी कारण यह रोग हमारे देश में बड़ी तेजी से बढ़ रहा है | इस बीमारी का प्रमुख लक्षण ब्लड ग्लूकोस लेवल बढ़ना, ब्लड कोलेस्ट्रॉल और वसा के अवयव (blood glucose level, blood cholesterol level) असमान्य होना हैं | डायबिटीज के मरीजों में आंखों, गुर्दो, स्नायु, मस्तिष्क, दिल के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है (diseases of eye sight, kidney, nerve, brain, heart) !

डायबिटीज होने पर ये लक्षण रोगी को अनुभव होते है (symptoms of diabetes in hindi) –

– बार-बार पेशाब (frequent urination) आते रहना एवं अधिक मात्रा में होना तथा मूत्र त्यागने के स्थान पर मूत्र की मिठास के कारण चीटियां लगना।
– आंखों से धुंधला (Dim Vision, Dull Eyesight) दिखना !
– थकान और कमजोरी (Tiredness and fatigue) महसूस करना !
– पैरों का सुन्न होना (Numbness in Fingers and Feet) !
– प्यास (diabetes thirst) अधिक लगना !
– घाव भरने में समय लगना या शरीर में फोड़े-फुंसी होने पर उसका घाव जल्दी न भरना !
– हमेशा भूख महसूस करना (frequent Hunger and Appetite) !
– वजन कम होना (weight loss) !
– त्वचा में संक्रमण होना (Skin Fungal Infection) !
– शरीर पर फोड़े-फुंसियां बार-बार निकलना !
– शरीर में निरन्तर खुजली रहना एवं दूरस्थ अंगों का सुन्न पड़ना !

डायबिटीज कंट्रोल के जबरदस्त आयुर्वेदिक उपाय (ayurvedic medicine for diabetes in hindi)-

डायबिटीज को कंट्रोल (diabetes cure) करने के लिए यहाँ पर कुछ बहुत जबरदस्त उपाय बताये जा रहे है जिनको करने पर आपको डायबिटीज में निश्चित ही बहुत फायदा मिलेगा (home remedies for diabetes in hindi) | अगर आप अग्रेजी दवा (allopathic) का प्रयोग कर रहे है तो एक दम न बंद करे बस जैसे जैसे आराम मिलता जाय वैसे वैसे और धीरे -धीरे चिकित्सक की सलाह से अग्रेजी दवा (allopathic medicines for diabetes) कम करते जाए-

– श्री बाबा रामदेव जी ने डायबिटीज के कंट्रोल के लिए बहुत जबरदस्त दवा बनायीं है जिसका नाम है “मधु नाशिनी वटी” (baba ramdev patanjali products Divya Madhunashini Vati for Diabetes cure) | इस दवा में बहुत सी शक्तिशाली जड़ीबूटियों का मिश्रण है जो खून में शुगर लेवल जरूर कम करती है पर इस दवा के फायदा करने में जो चीज सबसे मुख्य है कि आप इस दवा की कितनी गोली और कितने बार खाते है क्योकि कई बार लोगो को उनकी डायबिटीज की गंभीरता के हिसाब से 2 – 2 गोली करके एक दिन में 10 गोली तक मधु नाशिनी वटी की खाते हुए देखा गया है जबकि कई लोग एलोपैथिक की कड़ी से कड़ी दवा शुगर कंट्रोल के लिए ले लेते है पर मधुनाशिनी 4 गोली से ऊपर लेने में हिचकते है तो ऐसे में यही बेहतर होता है की किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से मिलकर अपनी दवा की मात्रा तय कर लेना चाहिए और हाँ मधुनाशिनी को जब भी खाए एक बार में 2 गोली से ज्यादा ना खाए मतलब अगर आपको ज्यादा गोलियां खानी हो तो आप 2 – 2 गोलिया कुछ कुछ घंटों के गैप पर खा लें | मधुनाशिनी को हमेशा खाने या नाश्ते के कम से कम 10 – 15 मिनट पहले खाना चाहिए या चिकित्सक की सलाह पर मधुनाशिनी को एकदम सुबह खाली पेट भी लिया जा सकता है (क्योंकि ज्यादातर आयुर्वेदिक दवायें सुबह सुबह एकदम बासी मुंह लेने पर सबसे तेज फायदा करती है) !

– नार्मल आदमी की तरह रोज अन्न खाने वाले डायबिटिज मरीजों को सिर्फ किसी दवा के बल पर लम्बे समय तक शूगर लेवल कण्ट्रोल करना मुश्किल होता है इसलिए उन्हें प्रतिदिन हार्ड फिजिकल एक्सरसाइज (जैसे 2 – 4 किलोमीटर मॉर्निंग वाक, जॉगिंग, पी टी, जिम कसरत आदि) करना नितांत जरूरी है | एक्सरसाइज ना सिर्फ एक्स्ट्रा कैलोरी को खर्च करती है बल्कि स्ट्रेस को भी खर्च करती है मतलब नियमित एक्सरसाइज तनाव से मुक्ति भी दिलाती है जिससे शूगर लेवल, बी. पी. आदि बढ़ने नहीं पाता है |

अगर कोई गृहस्थ व्यक्ति, सच्चे योगी (Indian Yogi, Sadhu, Sant, sanyasi) की तरह सिर्फ फलाहार करने की बजाय, अन्न भी रोज खाता है व कोई विशेष शारीरिक मेहनत भी नहीं करता है और साथ ही साथ प्राकृतिक वातावरण से अधिकांश समय दूर रहकर एक कृत्रिम माहौल (जैसे एयर कंडीशन घर) में रहकर रोज बहुत तनाव (negative thoughts like stress, depression etc) भी झेलता है तो बहुत संभव है कि वो सिर्फ ना तो किडनी, लीवर, हार्ट सम्बंधित अंगों का शीघ्र मरीज हो जाए बल्कि असमय आंशिक या पूर्ण रूप से नपुंसक (Impotent or eunuch) भी हो जाए क्योंकि बिना विशेष शारीरिक मेहनत के गरिष्ठ भोजन का नियमित सेवन वो भी पञ्च तत्वों से युक्त प्राकतिक वातावरण (शुद्ध पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, अग्नि) से दूर रहकर करने पर, मानव शरीर के शुक्राणुओं की गतिशीलता धीरे धीरे समाप्त होती जाती है जिससे संतान पैदा होने में बाधा उत्पन्न होती है (शारीरिक मेहनत की कमी से उत्पन्न इस तरह की आंशिक नपुंसकता को, वापस शारीरिक मेहनत बढ़ाकर व कुछ योगासनों व आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाओं (herbal medicines or homeopathic medicines) के कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक सेवन कर निश्चित दूर किया जा सकता है) |

अन्न के बारे में आयुर्वेद महाग्रन्थ में एक संस्कृत श्लोक (in sanskrit documents) दिया गया है जिसका हिंदी में अर्थ होता है कि अगर “अन्न” को सही दिनचर्या के तहत खाया जाए तो वह आदमी के द्वारा खाया जाता है, लेकिन अगर दिनचर्या गलत हो तो “अन्न” खुद मानव को ही खाने लगता है अर्थात शरीर में कई तरह के रोग उत्पन्न करने लगता है | अन्न निश्चित रूप से कंद, मूल, फलों की तुलना में ज्यादा शारीरिक ताकत (physical strength) प्रदान करता है लेकिन उस ज्यादा ताकत को लेने के बावजूद, 24 घंटा सिर्फ कुर्सी पर बैठकर या बिस्तर पर लेटकर ही नहीं बिता देना चाहिए, बल्कि उस ताकत को किसी भी तरह की शारीरिक मेहनत में खर्च भी करना चाहिए | इसलिए अन्न खाने वालों सभी मानवों को रोज कम से कम आधा घंटा ऐसी कोई भी हार्ड एक्सरसाइज (hard gym exercise) अनिवार्य रूप से करनी चाहिए जिससे उनका पूरा शरीर पसीने से नहा जाए (लेकिन शरीर बीमार या कमजोर हो तो बिना चिकित्सक की सलाह के हार्ड एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए) |

यहाँ पर एक बात फिर से ध्यान से समझने वाली है कि अगर कोई व्यक्ति रोज गरिष्ठ अन्न खाता है तो उसके लिए सिर्फ योग प्राणायाम ध्यान (yoga pranayama meditation) करना ही पर्याप्त नहीं होता है क्योंकि सिर्फ योग प्राणायाम ध्यान (yog pranayam meditation) के दम पर सिर्फ वही सच्चे योगी (Indian Yogi, Sadhu, Sant, sanyasi) अपने शरीर को स्वस्थ (healthy) रख सकतें है जो अन्न बिल्कुल नहीं खाते हैं और सिर्फ कन्द, मूल, फल (condyle, roots, fruits) आदि खाकर गुफाओं में तपस्या करतें हैं इसलिए जो गृहस्थ अन्न खातें उनके लिए यह अनिवार्य है कि वो 24 घंटे में कम से कम एक बार ऐसी कड़ी मेहनत करें कि उनका शरीर पसीने से नहा जाए और इस अनिवार्य हार्ड एक्सरसाइज को करने के बाद, अगर उनकी इच्छा दिव्य मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति (अर्थात ईश्वरत्व) की प्राप्ति से अपने पूर्ण कायाकल्प की हो तो उन्हें कम से कम रोज आधा घंटा योग प्राणायाम ध्यान (yoga pranayama meditation) भी जरूर करना चाहिए पर हार्ड फिजिकल एक्सरसाइज व योग प्राणायाम ध्यान (yog pranayam meditation) के बीच में कम से कम 7 मिनट का गैप होना चाहिए !

आप चाहें तो इस गैप का सदुपयोग ध्यान करने में कर सकतें हैं (सभी योग प्राणायाम ध्यान की क्रिया विधि व सावधानियां आप इस लेख के नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक कर जान सकतें हैं) !

– थोड़ी देर सूरज की रोशनी में बैठने से आपको अच्छी मात्रा में विटामिन डी मिलता है (vitamin d from sunlight) जो आपके शरीर में प्राकृतिक इन्सुलिन (natural insulin) बनाता है अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है तो इन्सुलिन का लेवल कम हो जायेगा | ये एक आसान उपाय है डायबिटीज को कण्ट्रोल रखने में। पर जरुरत से ज्यादा सूरज में रहने से नुकसान हो सकता है।

– दालचीनी इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारने के साथ-साथ ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को भी बेहद कारगर तरीके से कम करता है। अगर सिर्फ आधी चम्मच दालचीनी रोज़ ली जाए तो इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारा और अपने वज़न को भी जरूर नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ह्रदय संबंधी रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है | लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे ब्लड शुगर लेवल को कम करने में निश्चित मदद मिलेगी।

– तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इजिनॉल, मेथिल इजिनॉल और कैरियोफ़ैलिन बनता है। ये सारे तत्व मिलकर इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते हैं। इससे इन्सुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है। एक और फ़ायदा ये है कि पत्तियों में मौजूद ऐन्टीआक्सिडन्ट आक्सिडेटिव स्ट्रेस संबंधी कुप्रभावों को दूर करते हैं | शुगर लेवल को कम करने के लिए रोज 5-7 तुलसी की पत्तियां खाली पेट लें।

– नीम के पत्ते स्वाद में कडवे होते हैं पर इनमें बहुत सी खासियतें हैं। नीम इन्सुलिन रिसेप्टर सेंसिटिविटी बढाने के साथ साथ शिराओं व धमनियों में रक्त प्रवाह को ठीक करता है और हाइपो ग्लाय्केमिक ड्रग्स पर निर्भर होने से बचाता है। 7 नीम के पत्ते या इनका जूस रोज़ सुबह खाली पेट लें। इससे डायबिटीज कंट्रोल में निश्चित ही बहुत मदद मिलती है। नीम का पेड़ जितना पुराना और पत्ती जितनी ज्यादा कड़वी होती है उतना ज्यादा फायदा करती है।

– बेल के पत्तों को पीस कर पानी में मिला और छलनी से छानकर पीने से शुगर और ब्लड प्रेशर (blood pressure) में निश्चित ही बहुत फायदा है। ये कई बार का कई लोगो पर आजमाया हुआ है।

– काला जामुन और इसके बीज का चूर्ण ब्लड-शुगर को कम करने में बहुत ज्यादा मदद करता है और ह्रदय संबंधी बीमारियों से शरीर को दूर रखता है।

– कपाल भांति प्राणायाम (kapalbhati pranayama) से ज्यादा विश्वसनीय और गारंटीड, डायबिटीज में फायदा करने वाली कोई चीज दुनिया में दूसरी नहीं है कपाल भांति प्राणायाम को रोज करने से नाभि में स्थित अदृश्य और परम रहस्यमय मणिपूरक चक्र (mysterious manipura chakra awakening) धीरे -धीरे जागने लगता है और हमारे आयुर्वेद के ग्रन्थ (Grantha Ayurveda Books) कहते है की इसी मणिपूरक चक्र में अमृत (Amrit, nectar) का वास होता है जिसके सूक्ष्म स्राव से डायबिटीज क्या, पूरे शरीर की हर बीमारी का धीरे – धीरे निश्चित ही नाश होने लगता है |

प्राणायाम (Pranayam) का लाभ अंग्रेजी दवा की तुलना में थोड़ा धीरे मिलता है लेकिन इसका लाभ टिकाऊ होता है | प्राणायाम को हमेशा सही तरीके से करना चाहिए क्योकि अच्छे से अच्छे पढ़े लिखे लोगों को भी प्राणायाम में छोटी बड़ी गलती करते देखा गया है जिससे प्राणायाम फायदा के बजाय नुकसान भी कर सकता है। प्राणायाम में अक्सर होने वाली गलतियों और सही विधि की जानकारी आप इसी वेबसाइट में प्राणायाम (Pranayama) सेक्शन में पा सकते है।

– डायबिटीज के रोगियों के लिए अलसी (या तीसी) एक आदर्श और अमृत तुल्य भोजन है क्योंकि यह जीरो कार्ब भोजन है | अलसी (तीसी) ब्लड शुगर नियंत्रित रखती है, डायबिटीज के शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों को कम करती हैं | चिकित्सक डायबिटीज के रोगी केा कम शर्करा और ज्यादा फाइबर लेने की सलाह देते हैं। अलसी में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इस कारण अलसी सेवन से लंबे समय तक पेट भरा हुआ रहता है, देर तक भूख नहीं लगती है | यह बी. एम. आर. को बढ़ाती है, शरीर की चर्बी कम करती है और हम ज्यादा कैलोरी खर्च करते हैं |

अतः मोटापे के रोगी के लिये अलसी उत्तम आहार है। संतुलित भोजन में अलसी का समावेश आसान, सस्ता और दूरदर्शी कदम है, लेकिन इसके परिणाम बड़े चमत्कारी मिलते हैं। यदि आप ज्यादा फाइबर लेने के आदी नहीं हैं तो अलसी को कम मात्रा से शुरू करें और फिर धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं | अलसी का सेवन करने से पहले इसे पीसना जरूरी है। इसे मिक्सर के ड्राई ग्राइंडर में दरदरा पीसें। इसे सब्जी, दलिया, सलाद, रोटी आदि के साथ भी लिया जा सकता है। पानी भी ज्यादा पीयें। डायबिटीज के रोगी को पूरा फायदा लेने के लिए रोजाना 30 से 60 ग्राम अलसी खाना चाहिये। अलसी के बारे में पुराने वैद्यों के दोहे है –
(तड़का छोड़ कर नित घूमन को जाय,
मधुमेह का नाश हो जो जन अलसी खाय।
नित भोजन के संग में , मुट्ठी अलसी खाय।
अपच मिटे, भोजन पचे, कब्जियत मिट जाये।।
घी खाये मांस बढ़े, अलसी खाये खोपड़ी।
दूध पिये शक्ति बढ़े, भुला दे सबकी हेकड़ी।।
धातुवर्धक, बल-कारक, जो प्रिय पूछो मोय।
अलसी समान त्रिलोक में, और न औषध कोय।।
जो नित अलसी खात है, प्रात पियत है पानी।
कबहुं न मिलिहैं वैद्यराज से, कबहुँ न जाई जवानी।।
अलसी तोला तीन जो, दूध मिला कर खाय।
रक्त धातु दोनों बढ़े, नामर्दी मिट जाय।।)

– गिलोय, गुड़मार, कुटकी,बिल्व पत्र, जामुन की गुठली, हरड़, चिरायता, आंवला, काली जीरी, तेज पत्र, बहेड़ा नीम पत्र एवं अन्य जड़ी बूटियों को एक निश्चित अनुपात में लेकर पाउडर बनाया जाता है जो की डायबिटीज में बहुत फायदेमंद साबित होता है ! समय समय पर शुगर चैक करते रहना चाहिए !

– आयुर्वेद में बसंत कुसुमाकर रस (vasant kusumakar ras), शिलाजत्वादि वटी (Shilajitwadi Vati), चन्द्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati), शुद्ध शिलाजीत (Shilajit) तथा अन्य अनेक दवाओं का प्रयोग किया जाता है ये दवाइयाँ डायबिटीज में बहुत फायदेमंद होती हैं लेकिन इन्हे चिकित्सक की राय से ही सेवन करना चाहिए l

– दिन में एक बार 2 चम्मच करेले के रास का सेवन करें।

– दिन में दो बार 1 चम्मच मेथी के पाउडर का सेवन पानी के साथ अवश्य करें।

– दिन में एक बार 2 चम्मच कड़वी लौकी (बिना इंजेक्शन वाली) के रस को एक चम्मच आंवला के रास के साथ मिलकर कर सेवन करें।

– पटसन के बीज ले क्युकि इसमें फाइबर सामग्री बहुल मात्रा में पाई जाती है जो पाचन में तो मदद करते ही हैं साथ ही फैट और शुगर के अवशोषण में भी सहायक होते हैं। पटसन के बीज खाने से मधुमेह से ग्रसित मरीजों में शुगर की मात्रा 28 प्रतिशततक कम होती है।

– नीलबदरी के पत्ते खाने से मधुमेह को रोकने का एक कारगर उपाय है इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से हो रहा है। इसकी पत्तियों में एंथोसियानीडीनस भारी मात्रा में मौजूद होते हैं जो चयापचय की प्रक्रिया और ग्लूकोज़ को शरीरके विभिन्न भागों में पहुंचाने की प्रक्रिया को समृद्ध करता है। अपने इस ख़ास गुण के कारण नीलबदरी के पत्ते ब्लड शुगर लेवल को कम करने में काफी कारगर होते हैं।

– सहजन के पत्ते, कुछ लोग इसे मोरिंगा भी कहते हैं, इसके पत्तों में इसमें दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन (calcium protein) पाया जाता है। मधुमेह के मामलों में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप (High blood pressure) को कम करने में मदद मिलती है।

– पानी में मिलने के बाद इसबगोल की भूसी ‘जेल’ जैसा तत्व बनाती है (Isabgol ke bhusi) जिसका सेवन ब्लड ग्लूकोज़ के अवशोषण और भोजन के पाचन को सुगम बनाता है। ये अल्सर और एसिडिटी से भी बचाता है।

– सदाबहार की तीन – चार कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से मधुमेह रोग से राहत मिलती है | सदाबहार के पौधे के चार पत्तों को साफ़ धोकर सुबह खाली पेट चबाएं और ऊपर से दो घूंट पानी पी लें | इससे मधुमेह मिटता है | यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक करना चाहिए | आधे कप गरम पानी में सदाबहार के तीन ताज़े गुलाबी फूल 5 मिनिट तक भिगोकर रखें | उसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह ख़ाली पेट पियें | यह प्रयोग 8 से 10 दिन तक करें | अपनी शुगर की जाँच कराएँ यदि कम आती है तो एक सप्ताह बाद यह प्रयोग पुनः दोहराएँ |

– 10 मिग्रा आंवले के जूस को 2 ग्राम हल्दी के पावडर में मिला लीजिए। इस घोल को दिन में दो बार लीजिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।

 

इन्हे भी जरूर जानें और करें (Precautions For Diabetics) –

– डायबिटीज जैसी बीमारी में अपने वजन को कंट्रोल (weight control) में रखना बहुत जरुरी है क्योंकी डायबिटीज मोटापे (fatness) की वजह से भी होती है।

– सही समय पर सही खाना, योग प्राणायाम ध्यान सुबह टहलना (physical exercise like yoga, pranayama, meditation, morning walk) जरूर करें, इससे शरीर में ताकत बढ़ेगी और बुढ़ापा देर से आएगा | अध्ययन बताते है की रोज़ एक्सरसाइज करने से हमारा मेटाब्लॉजिम भी अच्छा रहता है जो की डायबिटीज के रिस्क को भी कम करता है।

– ट्रांस फैट (trans fat) शरीर में प्रोटीन को ग्रहण करने की क्षमता को कम करता है। जिसकी वजह से शरीर में इन्सुलिन की कमी हो जाती है। और हमारे शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है।

– अपने खाने में शुगर यानी चीनी का कम से कम इस्तमाल करे इससे शरीर में इन्सुलिन को संतुलित करना आसान है।

– यदि आप अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित करना चाहते हैं तो, सफेद चावल, पास्ता, पॉपकॉर्न, राइस पफ और वाइट फ्लौर से बचें। मधुमेह के दौरान शरीर कार्बोहाइड्रेट्स को पाता नहीं पता है। जिस की वजह से शुगर आपके शरीर में तेज़ी से जमा होने लगती है।

– फाइबर युक्त आहार ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। अवशोषित फाइबर ब्लड में शुगर की अधिक मात्रा को अब्ज़ोर्ब कर लेता है और इन्सुलिन को नार्मल करके मधुमेह को नियंत्रित करता है।

– लम्बे समय तक धूम्रपान (chewing tobacco smoking cigarettes bidi) करने से हृदय रोग और हार्मोन प्रभावित होने शुरू हो जाते है। धूम्रपान की आदत छोड़ देने से आपका स्वास्थ्य तो अच्छा रहेगा ही साथ ही डायबिटीज भी कंट्रोल रहेगी।

– फलो में प्राकृतिक चीनी बहुत अच्छी मात्रा में पाई जाती है जो की आपकी मिनरल्स और विटामिन्स (Diseases Caused by a Lack of Essential Vitamins and Minerals Deficiencies) की कमी को पूरा करतें हैं साथ ही शुगर को भी कंट्रोल करती है।

– ताज़ा सब्जियों में आयरन, जिंक, पोटेशियम, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक (nutritions like zinc iron potassium calcium) तत्व पाए जाते है। जो हमारे शरीर को पोषक तत्व प्रदान करते है। जिसे हमारा हृदय और नर्वस सिस्टम (healthy heart nervous system) भी स्वस्थ रहता है। इससे आपका शरीर आवश्यक इंसुलिन बनाता है।

– थोड़े-थोड़े देर में भोजन करने से पोषक तत्व ज्यादा अब्ज़ोर्ब होते है और फैट शरीर में कम जमा (absorb less fat) होता है। जिसे इन्सुलिन नार्मल (insulin normal range) हो जाती है।

– मधुमेह की शुरुवात के साथ सबसे पहले हृदय पर बुरा प्रभाव पढ़ता है। इसलिए डायबिटीज को चेक करने साथ साथ अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर नजर रखने की जरूरत है।

– लाल मांस में पोलिफेनोल्स (red meat polyphenols) पाया जाता है जो की ब्लड में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा देता है (blood cholesterol test) | लाल मांस में जटिल प्रोटीन पाया जाता है, जो बहुत धीरे से पचता है इसलिए लाल मांस मेटाब्लॉजिम को धीमा करता है जिसकी वजह से इंसुलिन के बहाव पर असर पढ़ता है।

– खाने को स्वादिष्ट बनाने के अलावा दालचीनी पाउडर आपका ब्लड शुगर भी कंट्रोल करता है।

– ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए उन्हें फ़ास्ट फ़ूड और जंक फ़ूड (fast food & junk food) से दूर रहना चाहिए।

– एक ब्लड ग्लूकोस मोनिटर (sugar testing machine, blood glucose monitor, sugar check machine) खरीद ले जिससे आप घर पर ही अपने शुगर लेवल को जान सकते है | इसमें आपके रक्त की सिर्फ एक बूंदे (blood test of diabetes) चाहिए होती है जिससे आप ये जान सकते है की आपका ब्लड शुगर नार्मल है या नहीं | मधुमेह के रोगियों के ब्लड शुगर लेवल की नियम से चेकअप की जरुरत होती है।

– एक वयस्क इन्सान को हर रात 7-8 घंटे की नींद (sound sleep) लेनी चाहिए इसे उनमें डायबिटीज होना का खतरा कम रहता है उन लोगों से जो कम सोते है। इसके पीछे का विज्ञान यह है कि नींद मस्तिष्क को शांत (peaceful mind) और हर्मोनोस को बैलेंस (Balance Hormones Naturally) रखता है जबकि कम नींद से हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है।

– मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए नमक कम खाए | नमक आसमाटिक बैलेंस (osmotic balance) को शरीर में बनाये रखता है और अगर बैलेंस बिगड़ जाये तो ये हार्मोनल डिसऑर्डर पैदा करने लग जाता है।

– मधुमेह में प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम कमज़ोर (weak immunity symptoms) हो जाता है जिसकी वजह से चोट (wound, injury) जल्दी ठीक नहीं होती है। इस लिए चोट या घाव हो जाये तो उसका तुरंत इलाज करे।

– पानी शरीर में हाई शुगर कंटेंट को रोकता है। रोज़ 2.5 लीटर पानी पीने से ना केवल शरीर अच्छे से काम करता है बल्कि हृदय और मधुमेह रोगों के होने की संभावना को भी कम करता है।

– हम कैल्शियम रोज़ अपनी भोजन में ले तो हम काफी हद तक मधुमेह होने की संभावना कम कर सकते है।

– सिरका को अगर आप अपने खाने के साथ खाते है तो ये आपके ब्लड शुगर लेवल को कम रखने में मदद करता है।

– सारे तरह की कोल्ड ड्रिंक्स (side effects of cold drinks)से दूर रहे क्यों की ये ब्लड में शुगर लेवल को बढ़ा देती है। इनमें जो शुगर पाई जाती है उनमें सिर्फ कैलोरीज (high calories) होती है जो डायबिटीज के रोगियों के लिए खतरनाक साबित होती है। शराब, बियर (harmful whisky, wine, beer, rum, shampain) भी बहुत नुकसानदायक है।

यदि आप भी इस वैश्विक परिवर्तन के महा आन्दोलन (जिसका नेतृत्व मुख्य संस्थापक सदस्य, श्री परिमल पराशर जी कर रहें हैं) में अपना प्रचंड योगदान देने का बेशकीमती जज्बा रखते हो तो निःसंकोच अभी तुरंत जुड़िये “स्वयं बनें गोपाल” समूह से और वो भी पूरी तरह से अपनी सुविधानुसार (अर्थात अपने मनपसन्द तरीके व समयानुसार) ! मनपसन्द तरीके से तात्पर्य है कि आपकी चाहे जिस भी क्षेत्र में रूचि हो (जैसे- कला, विज्ञान, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, रंगमंच, संगीत, अभिनय, सुरक्षा, कृषि, रिसर्च (शोध), लेखन, भक्ति, योग, सेवाधर्म या किसी भी अन्य तरह के क्षेत्र में रूचि हो, या श्रमदान करने की इच्छा हो), उसी क्षेत्र से सम्बन्धित कोई भी छोटा से लेकर बड़ा उचित प्रेरणास्पद कार्य करें तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह आपके उस कार्य को पूरे विश्व के सामने उजागर कर, अन्य सभी के मन में भी ऐसा प्रेरणायुक्त कार्य करने की इच्छा को जगाकर, विश्व परिवर्तन की इस महा क्रांति का जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक संक्रामक रूप से प्रसार करेगा ! अगर आपको स्वयं समझ में ना आ रहा हो कि आप कब, कैसे और क्या - क्या कर सकतें हैं तब भी आप तुरंत “स्वयं बनें गोपाल” समूह से निःसंकोच सम्पर्क कर सकतें हैं क्योंकि इसके विशेषज्ञों की सलाह से आप निश्चित रूप से अपने में छिपी हुई अपार संभावनाओं व गुणों को पहचान करके इस विश्व के लिए महान परोपकारी साबित हो सकतें हैं (अर्थात स्वयं गोपाल बनकर श्री कृष्ण राज रुपी स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना में अत्यंत सहायक हो सकते हैं) ! इसके अतिरिक्त यदि आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या “स्वयं बनें गोपाल” समूह से किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो भी हमसे जुड़ें ! हमसे जुड़ने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें (If you have a great passion to make such radical change in entire world so that again Golden Era (full of divine peace, affection, benevolence and all other ethical & moral values) could be established, please join immediately this Social Reform Movement started by “Svyam Bane Gopal” Organization and led by Principal Founder Member Mr. Parimal Parashar)

real alien foot print ufo crop circle india nasa pyramid truth evidenceयदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अब लुप्त हो चुके अति दुर्लभ विज्ञान के प्रारूप {जैसे- प्राचीन गुप्त हिन्दू विमानों के वैज्ञानिक सिद्धांत, ब्रह्मांड के निर्माण व संचालन के अब तक अनसुलझे जटिल रहस्यों का सत्य (जैसे- ब्लैक होल, वाइट होल, डार्क मैटर, बरमूडा ट्रायंगल, इंटर डायमेंशनल मूवमेंट, आदि जैसे हजारो रहस्य), दूसरे ब्रह्मांडों के कल्पना से भी परे आश्चर्यजनक तथ्य, परम रहस्यम एलियंस व यू.ऍफ़.ओ. की दुनिया सच्चाई (जिन्हें जानबूझकर पिछले कई सालों से विश्व की बड़ी विज्ञान संस्थाएं आम जनता से छुपाती आ रही हैं) तथा अन्य ऐसे सैकड़ों सत्य (जैसे- पिरामिड्स की सच्चाई, समय में यात्रा, आदि) के विभिन्न अति रोचक, एकदम अनछुए व बेहद रहस्यमय पहलुओं के उजागर सम्बन्धित अभियान (जिसका नेतृत्व विश्वस्तरीय शोधकर्ता श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय जी कर रहे हैं) का नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, इन दुर्लभ ज्ञानों से अनभिज्ञ समाज को परिचित करवाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Know real truth and most unique theories of several unsolved & hidden mysteries of Universe and Aliens (like- Ancient Hindu Vimana’s scientific principles, exact theory of orientation and way of working of our universe and as well as of some other universes, Black hole, White hole, Dark matter, Bermuda triangle, Inter Dimensional Movement, lots of other secrets of other Universes, Who are Real Aliens and how their UFOs (Unidentified flying objects) work, exact reality of Pyramids, Time Travel and many many more, etc.) Discovered and Published first time in Entire World by Very Knowledgeable, Famous Expert & Researcher, Doctor Saurabh Upadhyay}

डॉक्टर किसलय उपाध्याय स्वराज जन चेतना doctor kislaya upadhyay swaraj jan chetna 0यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा (अत्यंत लोकप्रिय समाजसेवी श्री डॉक्टर किसलय उपाध्याय जी के नेतृत्व में) अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक आदर्श समाज की सेवा योग की असली परिचायक भावना अर्थात “वसुधैव कुटुम्बकम” की अलख ना बुझने देने वाला युद्ध "मिशन डिफिट द हंगर" (भूख को हराने का युद्ध) तथा प्रचंड देशभक्ति पूर्ण, समाज के चहुमुखी विकास व जागरूकता पूर्ण, पर्यावरण सरंक्षण, सौहार्द पूर्ण, शिक्षाप्रद, महिला सशक्तिकरण, नशा एवं कुरीति उन्मूलन, अनाथ गरीब व दिव्यांगो के भोजन वस्त्र शिक्षा रोजगार आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन, मोटिवेशनल (उत्साहवर्धक व प्रेरणास्पद) एवं परोपकार पर आधारित कार्यक्रमों (चैरिटी इवेंट्स, चैरिटी शो व फाईलेन्थ्रोपी इवेंट्स) का आयोजन करवाकर ऐसे वास्तविक परम पुण्य प्रदाता महायज्ञ में अपनी आहुति देना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Please Join Mission “Defeat The Hunger” led by Doctor Kislaya Upadhyay through several Philanthropic, Charity, Amicable or Camaraderie, Patriotic, Civil Society Development, Social awareness, Environment conservation, Educational (academic, scholastic, library, schools Improvement for better teaching, study, learning for poor students), Adult Literacy, Uneducated & money less Family residence free provisions, Women's empowerment, Food Clothes Dwelling (house, quarters, inhabitation) Employment (like all essential needs) availability for poor handicapped (physically challenged), Motivational (enthusiastic & inspiring) Programs, Projects, Events, Show, Function, Conferences, Seminars, Public meetings etc.}

ngo svyam bane gopal process Indian Hindi Hindu spirituality religion religious temple यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह के निष्णात योग प्रशिक्षकों द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक ऐसी महान दुर्लभ यौगिक प्रक्रिया {जो परम आदरणीय ऋषि सत्ता के दिव्य आशीर्वाद स्वरुप प्राप्त हुई है और जिसका निरंतर अभ्यास करने पर, कोई भी आम इंसान (चाहे वह कितना भी बड़ा पापी हो या पुण्यात्मा, गरीब हो या अमीर, स्त्री हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध) निश्चित रूप से दिन ब दिन बढ़ती हुई अपने अंदर ईश्वरत्व की अनुभूति को महसूस करते हुए स्वयं, गोपाल अर्थात ईश्वर बनने की प्रक्रिया की ओर बढ़ने लगता है ! जिसके फलस्वरूप धीरे धीरे उसके शरीर की सभी बीमारियों का नाश होकर, वह चिर युवावस्था की ओर बढ़ता है और तदनन्तर उचित समय आने पर ईश्वर के दर्शन पाने का महा सौभाग्य भी उसे अवश्य प्राप्त होता है, जिसके बाद की उसके जीवन की बागडोर स्वयं गोपाल अर्थात ईश्वर संभाल लेतें हैं ! इस अमृत स्वरुप प्रक्रिया (जिसे रोज करने में मात्र एक घंटा ही समय लगता है) का नाम है “स्वयं बनें गोपाल” योग} का शिविर, ट्रेनिंग सेशन, शैक्षणिक कोर्स, सेमीनार, वर्क शॉप, प्रोग्राम (कार्यक्रम), कांफेरेंस आदि का आयोजन करवाकर समाज में पुनः श्री कृष्ण राज अर्थात स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना के महायज्ञ में अपनी भी पवित्र आहुति देना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Know Extreme Rare Knowledge of Steps (Poses & Processes) of Svyam Bane Gopal Yoga in Hindi and English}

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में योग, प्राणायाम, आध्यात्म, हठयोग (अष्टांग योग) राजयोग, भक्तियोग, कर्मयोग, कुण्डलिनी शक्ति व चक्र जागरण, योग मुद्रा, ध्यान, प्राण उर्जा चिकित्सा (रेकी या डिवाईन हीलिंग), आसन, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर आदि का शिविर, ट्रेनिंग सेशन्स, शैक्षणिक कोर्सेस, सेमीनार्स, वर्क शॉप्स, प्रोग्राम्स (कार्यक्रमों), कांफेरेंसेस आदि का आयोजन करवाकर समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व सचेत करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Please Get organized by "Svyam Bane Gopal" group various Training Sessions, Work Shops, Programs, Events, Conferences, Seminars, Public meetings of All kind of Yoga, Spirituality practices {like- Hatha Yoga or Ashtanga Yoga, Raja Yoga, Bhakti Yoga, Karma Yoga, Kundalini yoga and Chakras Kundalini Shakti, different Mudras Bandha Yaugik kriya, Meditation or Dhyana, Prana Energy Treatment or Pranic Healing (Reiki or Divine Healing), Asanas (Yogasana), Pranayama, Acupressure etc. at your premises}

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़कर अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में विश्वस्तरीय योग/आध्यात्म सेंटर खोलकर सुख, शान्ति व निरोगता का प्रचार प्रसार करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Please Click here to know, How a Yoga, Meditation and Spirituality Retreat (centres) of World Famous Organization "Svyam Bane Gopal” could be opened in your City/Town/Area

यदि आप विश्व प्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह से योग, आध्यात्म से सम्बन्धित शैक्षणिक कोर्स करके अपने व दूसरों के जीवन को भी रोगमुक्त बनाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें (To get maximum and realistic knowledge of all aspects of Indian Yoga and Spirituality, please Join YOGA & SPIRITUALITY COURSE conducted by "Svyam Bane Gopal" Organization as per your convenience)

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अति पवित्र व मोक्षदायिनी (स्वर्ग/नर्क से भी परे शाश्वत सुखदायिनी) धार्मिक गाथाएं, प्राचीन हिन्दू धर्म के वेद पुराणों व अन्य ग्रन्थों में वर्णित जीवन की सभी समस्याओं (जैसे- कष्टसाध्य बीमारियों से मुक्त होकर चिर यौवन अवस्था प्राप्त करने का तरीका) के समाधान करने के लिए परम आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी व उपयोगी आध्यात्मिक अभ्यास व ज्ञान आदि से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, पूरी तरह से निराश लोगों में फिर से नयी आशा की किरण जगाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Please Get organized by "Svyam Bane Gopal" group various Training Sessions, Programs, Events, Conferences, Seminars, Public meetings of all problems removing (like painful diseases and others) and complete body & life changing (like Rejuvenation, feel better younger & inner mental peace) spiritual processes and Real & truthful information of Hindu Godly knowledge (Dharmik Katha or historical & mythological stories of religion) based programs of Vedas, Puranas, Granthas (like- Ramayana, Mahabharata, Bhagavad Gita, Hanuman Chalisa, Shrimad Bhagwat Mahapuran), Ancient Indian holy sacred and religious Books, famous & divine temples of Ishwar (Bhagwan, Devi Devta or Deities) incarnation like Radha Krishna, Braj (Vrindavan, Barsana, Gokul, Mathura), Shiva, Parvathi (Parwati), Ganesha, Kartikeya (Murugan), Durga, Sarswati, Kali, Laxmi (Lakshmi), Vishnu, Venkateshwar, Narayana, Surya (Lord Sun), Tirupati Balaji, Shri Ram, Laxman, Ayyappa, Rudra, Kashi (Varanasi), Mahakaleshwar Jyotir Shivlinga (Shankar idol or Statue), Amrit (nectar), Om (Omkar or Onkar & Gayatri mantr), Mrityunjaya Mahadev Mantra, Moksha, Swarg Narka (Heaven Hell), Pilgrimage (Tirtha Yatra), Lord Jagannath of Puri Dham, Devotees’ Devotion & worship processes (puja path), Bhakti, Shakti, Bhajan Kirtan (Chanting devotional songs) etc., at your premises (in Hindi and English language)}

indian cow urine krishna gomata radha braj vrindavan gomutra गोमूत्र भारतीय देशी गाय माता की नस्लयदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने गाँव/शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में भारतीय देशी गाय माता से सम्बन्धित कोई व्यवसायिक/रोजगार उपक्रम {जैसे- अमृत स्वरुप सर्वोत्तम औषधि माने जाने वाले, सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के गोमूत्र, दूध, घी, मक्खन, दही, छाछ आदि का निर्माण व विक्रय केंद्र तथा गोबर सम्बन्धित उपक्रम जैसे- गोबर गैस प्लांट, गोबर खाद व गोबर निर्मित पूजा अगरबत्तियां, मूर्तियां, गमले, पूजा की थालियां, मच्छर भगाने की क्वाइल आदि} {या मात्र सेवा केंद्र (जैसे- बूढी बीमार उपेक्षित गाय माता के भोजन, आवास व इलाज हेतु प्रबन्धन)} खोलने में सहायता लेकर साक्षात कृष्ण माता अर्थात गाय माता का अपरम्पार बेशकीमती आशीर्वाद के साथ साथ अच्छी आमदनी भी कमाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें ! इस सत्य को कभी नहीं भुलाना चाहिए कि गौमाता से सम्बन्धित खोले जाना हर उपक्रम भारत की बेरोजगारी, गरीबी व भुखमरी को दूर करने का बहुत ही आसान, दूरगामी व निश्चित सफलता देने वाला कदम साबित होगा क्योंकि अकेले गोबर व गोमूत्र के प्रयोग से ही खेती की पैदावार इतनी ज्यादा निश्चित बढ़ाई जा सकती है कि पूरे विश्व में कभी भी, किसी भी प्राणी को भूख की असहनीय अग्नि में जलने की नौबत ही ना आने पाए और साथ ही साथ शुद्ध देशी नस्ल की गाय माता का दूध व मूत्र हर बिमारी (जैसे- एड्स, किसी भी अंग का कैंसर, ट्यूबरक्लोसिस, दमा, नपुंसकता, शीघ्रपतन, वीर्य रज दोष, सफ़ेद दाग, कोढ, लकवा, पागलपन डिप्रेशन स्ट्रेस अलजाइमर रोग या कमजोर याददाश्त की समस्या जैसे सभी मानसिक रोग, अत्यधिक बढ़ी हुई डायबिटीज, शूगर लेवल व इन्सुलिन की अनियमितता, मोटापा, हाई या लो ब्लड प्रेशर, हार्ट ब्लोकेज, पीलिया, यकृत (जिगर, कलेजा या लिवर) की खराबी सूजन सिरोसिस या दर्द, पित्ताशय की बीमारी, प्रोस्टेट ग्लैंड की समस्या, मासिक धर्म सम्बन्धित तकलीफ, फ्लू, वायरस संक्रामक रोग, हृदय की अनियमित धड़कन, किडनी की खराबी, गंजापन, असमय सफदे बाल, नेत्र रोशनी में कमी, ग्लूकोमा, त्वचा की झुर्रियाँ व ग्लो की कमी, त्वचा का ढीलापन, शरीर में ताकत की कमी, सुस्ती, जोश उत्साह की कमी, गठिया, स्याटिका, सरवाईकल स्पोन्डिलाइटिस, अल्सर, बहुमूत्र, पथरी, बवासीर, भगन्दर, गिल्टी, कमजोर पाचन शक्ति, कमजोर मसूढ़े व दांत, पुरानी कब्ज, दस्त, गैस, एसिडिटी, पुराना नजला जुकाम, पुरानी खांसी, किसी भी क़िस्म की एलर्जी, पेट दर्द, फाइलेरिया, खुजली, हड्डी की कमजोरी आदि) में बहुत ही फायदा है {By the help of “Svyam Bane Gopal” organization open any Pure Indian breed Desi Cow mother based venture/employment/business/industry to earn sufficient money and priceless blessings because Gomutra (urine) is very beneficial Home Remedy For all diseases (like- hiv/aids, all type of cancers, tuberculosis, asthma, impotency or infertility or eunuchism, Semen sperm diseases, early or premature Ejaculation, Vitiligo, Leukoderma, Leprosy, Paralysis, Insanity mania psychosis madness Craziness Depression fear stress Alzheimer's disease like psychiatric disorder or Mental disorder illness or brain health related issues, Kidney Stones, baldness, Alopecia or Hair loss from the scalp, premature greying or white hair, Eye Disorders, Low Vision or Vision loss Blindness, eye cataract retina problem, glaucoma, jaundice, Hepatitis, Fatty Liver, Liver Inflammation pain damage cirrhosis, weakness, Gall bladder ailments, Skin Care to Prevent Wrinkles Aging Skin Dry Skin, loose skin Tighten Face Skin, Itching, physical weakness and loss of strength, Feeling Tired Weak Fatigued Lethargy, arthritis, rheumatism, Sciatica, cervical spondylosis, Stomach Ulcer, polyuria, Enlarged prostate gland, Type 2 & Type 1 Diabetes mellitus, high blood glucose (or blood sugar), inadequate insulin production, overweight or obesity (fatness), high blood pressure or low blood pressure, Blocked Arteries of heart, irregular palpitation, piles, fistula, Tumour (Tumor), lymph nodes (gilti), Indigestion (Dyspepsia), Irregular Painful Absence Menstruation (period) Cycle problem, Dental Problems, gum inflammation bleeding, swollen red gums toothache, cavities, constipation, loose motion, dysentery, cholera, abdomen or intestinal gas burping belching flatulence farting Bloating, acidity, Cold and Cough, Acute or Chronic Bronchitis, flu, allergy, crampy achy dull intermittent sharp Abdominal pain or stomachache, Filariasis, bones & Muscles weaken joints tendons ligaments cartilage, etc.). And Bharatiya desi cow ma milk, curd, butter, butter milk, ghee (ghi), paneer (cheese), khoa (khoya or mawa), are use full in treatment and cure of many different diseases {depends on various Symptoms, Signs & Treatment Functions, diseases, and tests (means in hindi bimari rog ka Ilaj lakshan gharelu upay shujhav)}. Pure Indian breed desi cow mother Gobar (dung) is extreme useful in maximization of cultivation harvest crop & manufacturing of herbal (jadibuti, jadibooti) fertilizers, pesticides (complete irrigation solution) and in other household businesses, so that hunger, starvation of poor people could be defeated}

जानिये “स्वयं बनें गोपाल” समूह के बारे में

जानिये "स्वयं बनें गोपाल" समूह के प्रमुख स्वयं सेवकों के बारे में (A Brief Introduction to “Svyam Bane Gopal” Organization’s Key Volunteers )

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