कुछ विशेष योगासन व प्राणायाम से अपनी किडनी को फेल होने से बचाईये

आंकड़ों के अनुसार अकेले भारत में हर 5 मिनट में, 2 मौत सिर्फ किडनी की बीमारी से हो रही है और इन आकड़ों में अधिकता शहरों में रहने वाले ऐसे लोगों की है जो डायबिटिज या हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं !

आईये सबसे पहले जानने की कोशिश करतें हैं उन सभी कारणों के बारें में विस्तार से, जो किसी भी स्त्री / पुरुष की किडनी ख़राब कर सकतें हैं !

सभी संभावित कारणों को जानना इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि इनमें से जितने अधिक कारणों से मरीज जितना ज्यादा बचाव करेगा उसे उतना ही जल्दी लाभ मिलेगा !

किडनी खराब होने के मुख्यतः निम्नलिखित 4 कारण है-

1 – पहला कारण है ऐसी चीजों को अक्सर खाना या पीना जो आसानी से नहीं पच पाती है ! इसमें मुख्यतः आजकल के अधिकाँश रिफाइंड आयल हैं जिनके बारे में अधिकतर बड़ी से बड़ी कंपनियां भी यह सच्चाई जानबूझकर छुपाती हैं कि उनके रिफाइंड आयल आसानी से पच नहीं सकते क्योंकि यही देखने को मिलता है कि इन रिफाइंड आयल्स मे से कोलेस्ट्राल (cholesterol) निकालने की कृत्रिम रासायनिक प्रक्रिया अपनाने की वजह से ये बहुत हानिकारक हो जातें है जिनका सीधा बुरा असर पड़ सकता है लीवर, किडनी व हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर !

स्वर्गवासी क्रांतिकारी भाई राजीव दीक्षित (rajiv dixit) जी ने भी अपने अथक परिश्रम से यही पहलू खोज निकाला था कि बाजार में बिकने वाले महंगे से महंगे रिफाइंड आयल से भी देर सवेर कोई ना कोई हृदय रोग (जैसे ब्लड प्रेशर, ब्लोकेज आदि) होना तय है, इसलिए इन रिफाइंड आयल्स के इमोशनल व साइंटिफिक दिखने वाले टीवी एडवरटीजमेन्ट्स से प्रभावित होकर इन्हें खाने की भूल करना ठीक उसी तरह है जैसे बढियां शानदार पैकिंग के अंदर बंद स्लो पाइजन को खाना ! अतः वास्तविक भलाई इसी में है कि आज के इम्मेच्योर मॉडर्न मेडिकल साइंस की सलाह को ना मानते हुए, केवल अनंत वर्ष पुराने हिन्दू धर्म के आयुर्वेद ग्रन्थ की सलाह अनुसार शुद्ध सरसों के तेल या देशी गाय माता के दूध से बने घी का ही इस्तेमाल, खाना पकाने के लिए करना चाहिए !

रिफाइंड आयल के अलावा ज्यादा मसालेदार, ज्यादा तीता या ज्यादा खट्टा या ज्यादा मीठा (अधिक शूगर लेवल युक्त), किसी भी तरह का नशा (जैसे शराब, बियर, तम्बाखू, सिगरेट, बीड़ी, चरस आदि), ज्यादा गरिष्ठ (जैसे ज्यादा घी, तेल, मक्खन आदि का इस्तेमाल जो ब्लडप्रेशर बढ़ा सकता है), ज्यादा नमक, चाय कॉफ़ी जैसे उत्तेजक पदार्थों का अति सेवन, कोल्ड ड्रिंक्स, पेस्टिसाइडस युक्त सब्जियां फल या मिलावटी खाद्य पदार्थ आदि खाने से भी किडनी खराब हो सकती है !

जरूरत से कम पानी पीने से भी किडनी ख़राब होती है !

बाजार में बिकने वाले लगभग सभी मांस व अंडे (chicken, flesh, lamb, meat, fish, mutton, pork, ham, egg) ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की वजह से जल्दी जल्दी बड़े हुए जानवरों का होता है इसलिए इससे भी किडनी बहुत तेज ख़राब होती है ! अण्डों से खासकर किडनी में इन्फेक्शन पैदा होते हुए देखा गया है !

आजकल लगभग हर पानी का नेचुरल स्रोत (जैसे नदी, समुद्र, नहर, तालाब आदि) इतना ज्यादा विषाक्त हो चुका है कि कोई भी इन्सान अगर इनका पानी बिना वाटर फ़िल्टर से साफ़ किये हुए डायरेक्ट पी ले तो उसकी तबियत तुरंत ख़राब हो सकती है, अतः ऐसे ही जल स्रोत के पानी का निरंतर सेवन करने वाली मछलियों को खाने से भी किडनी खराब होती है !

बाजार में बिकने वाले फास्ट फ़ूड (जैसे पिज्जा, बर्गर, चिप्स, ब्रेड, स्नेक्स, नमकीन, चोकलेट्स, टॉफी, नूडल्स, समोसे, जलेबी, पकोड़े आदि) का रेगुलर सेवन के अलावा डिब्बा बंद खाने पीने का सामान (जैसे फ्रोजेन मील आदि, जिसमें लम्बे समय तक सड़ने से बचाने के लिए केमिकल युक्त प्रेजर्वेटिव मिलाया जाता है) को भी बार बार खाने से किडनी खराब हो सकती है !

नियमित रूप से बासी खाने या गंदगी युक्त खाना खाने से भी किडनी खराब हो सकती है क्योंकि बासी खाने में कई तरह के हानिकारक जीवाणु पनपने लगतें हैं जिन्हें नंगी आँख से तो नहीं देखा जा सकता है, लेकिन ऐसे जीवाणु युक्त बासी खाना शरीर में जाकर विभिन्न तरह के इन्फेक्शन पैदा करता है !

ज्यादा मेकअप करने से भी किडनी ख़राब हो सकती है क्योंकि जैसे जड़ीबूटी युक्त तेल या घी की शरीर पर मालिश करने से शरीर की असाध्य बीमारियों में लाभ मिलता है, ठीक उसी तरह केमिकल युक्त विभिन्न कॉस्मेटिक्स (जैसे पाउडर, लिपस्टिक, क्रीम, साबुन, शैम्पू आदि) को शरीर पर रोज लगाने से, उनकी सूक्ष्म मात्रा पसीने की ग्रंथियों के माध्यम से शरीर के अंदर जाती रहतीं है जो देर सवेर किडनी को क्षति पंहुचा सकती है !

जो स्त्री पुरुष कपड़ों को साफ़ करने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल युक्त डिटर्जेंट (चाहे वो कितने भी नामी गिरामी कंपनी के महंगे डिटर्जेंट हों) को पानी से अच्छे से धोकर कपड़े से बाहर नहीं निकाल देते हैं, उनके कपड़ों से पसीना घुलकर हानिकारक टोक्सिंस को लगातार शरीर के अंदर सोखता रहता है, जिसका देर सवेर किडनी पर बुरा असर पड़ता ही है ! अतः इसी लिए कहा जाता है कि सिर्फ प्राकृतिक चीजों से बनी सामग्री (जैसे बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी का डिटर्जेंट) का ही इस्तेमाल कपड़े धोने के लिए करना चाहिए !

ठीक इसी तरह बर्तन धोने के लिए भी सिर्फ नेचुरल चीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए ताकि अगर बर्तन की सफाई ठीक से ना हो पाई हो तो डिटर्जेंट का सूक्ष्म अंश खाने में घुलकर पेट में पहुच कर विभिन्न तरह के इन्फेक्शन पैदा ना करे !

प्लास्टिक व एलुमिनियम के बर्तन में भी गर्म खाने पीने का सामान रख कर खाने से लीवर व किडनी पर बुरा असर पड़ता है !

एलोपैथिक दवाओं के सेवन से भी किडनी ख़राब हो सकती है ! कुछ एलोपैथिक दवाएं तो इतनी ज्यादा तेज और खतरनाक होतीं हैं कि उनके सिर्फ एक या दो बार ही सेवन करने से किडनी में भयंकर इन्फेक्शन होते हुए देखा गया है !

लगभग हर छोटे से छोटी और महंगे से महंगी एलोपैथिक टेबलेट, कैप्सूल, सिरप आदि (चाहे वो एलोपैथिक दवा शूगर कण्ट्रोल के लिए हो या ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल के लिए, चाहे वो एलोपैथिक दवा गर्भ निरोध के लिए हो या यौन शक्ति बढ़ाने के लिए, चाहे वो एलोपैथिक दवा कैंसर जैसी बड़ी बीमारी के लिए हो या जुकाम जैसी छोटी बिमारी के लिए, चाहे वो शरीर की प्रोटीन विटामिन्स आयरन कैल्शियम आदि बढ़ाने वाली सिरप टॉनिक व टेबलेट्स हों या कोई प्रसिद्ध पेन किलर हो, चाहे वह कोई फेमस कंपनी का माउथ फ्रेशनर, टूथ पेस्ट हो या पेट कब्ज गैस के लिए रोज खाने वाली दवा, चाहे वो थायराइड के लिए ली जाने वाली रोज की टेबलेट हो या किसी एलर्जी के लिए जाने वाली रोज की दवा) के साइड इफेक्ट्स तुरंत गूगल (Google) पर सर्च कर आसानी से देखा जा सकता है, और सच्चाई पता लगने पर एक बार तो पैर तले जमीन खिसक सकती है (इसी वजह से एलोपैथी के साइड इफेक्ट्स से त्रस्त जनता अब इसे शैतानी पैथी कहने लगी है) !

जैसे प्राप्त जानकारी अनुसार आजकल महिलाओं में संतानोत्पादन में आ रही समस्या के पीछे एक मुख्य वजह गर्भ निरोध के लिए ली जाने वाली एलोपैथिक दवाएं भी हैं जिनका रेगुलर सेवन महिलाओं में आंशिक या पूर्ण बांझपन (barrenness, sterility, infertility) के दोष उत्पन्न कर सकता है इसलिए हर बुद्धिमान व्यक्ति यही सलाह देता है कि जब तक कोई आकस्मिक समस्या (जैसे हार्ट अटैक, एक्सीडेंट, कोई तेज दर्द आदि) ना हो तब तक अपनी हर बिमारी का इलाज सिर्फ योग आयुर्वेद से ही खोजने का प्रयास करना चाहिए (और दुनिया में कौन सी बीमारी ऐसी है जिसका योग आयुर्वेद में इलाज ना हो, बशर्ते कि योग आयुर्वेद के सही जानकार से मरीज की मुलाक़ात हो पाए) !

कुल मिलाकर किडनी की बिमारी के रेफेरेंस में निष्कर्ष यही है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी चीजों को रोज खा या पी रहा हैं जिन्हें पचाने के लिए शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है तो निश्चित रूप से वह अपनी किडनी को रोज कमजोर ही कर रहा है !

2 – किडनी खराब होने का दूसरा मुख्य कारण है – अनियमित दिनचर्या मतलब खाने, पीने, एक्सरसाइज, सोने, जागने, मल त्यागने आदि का समय रोज बदलते रहना | वास्तव में मानव शरीर की मूलभूत अनिवार्य आवश्यकताओं (जैसे – खाने, पीने, एक्सरसाइज, सोने, जागने, मल त्यागने आदि) का समय रोज रोज बदलने से मानव शरीर की पूरी रोग प्रतिरोधक क्षमता ही धीरे धीरे कमजोर पड़ने लगती है जिसकी वजह से किडनी, लीवर, हार्ट, ब्रेन, फेफड़े (important organs like heart liver kidney brain lungs disease) जैसे अहम अंगों पर बुरा असर पड़ता है !

3 – तीसरा कारण अलग से मेंशन करना इसलिए जरूरी है क्योंकि अच्छे से अच्छे पढ़े लिखे लोगों तक को भी नहीं पता होता है कि प्रतिदिन सिर्फ एक्सरसाइज ना करने से किडनी भी खराब हो सकती है !

एक्सरसाइज ना सिर्फ एक्स्ट्रा कैलोरी को खर्च करती है बल्कि स्ट्रेस को भी खर्च करती है मतलब नियमित एक्सरसाइज तनाव से मुक्ति भी दिलाती है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने नहीं पाता है जो कि किडनी खराब होने का एक अहम कारण भी है !

अगर कोई गृहस्थ व्यक्ति, सच्चे योगी (Indian Yogi, Sadhu, Sant, sanyasi) की तरह सिर्फ फलाहार करने की बजाय, अन्न भी रोज खाता है व कोई विशेष शारीरिक मेहनत भी नहीं करता है और साथ ही साथ प्राकृतिक वातावरण से अधिकांश समय दूर रहकर एक कृत्रिम माहौल (जैसे एयर कंडीशन घर) में रहकर रोज बहुत तनाव (negative thoughts like stress, depression etc) भी झेलता है, तो बहुत संभव है कि वो सिर्फ ना तो किडनी, लीवर, हार्ट सम्बंधित अंगों का शीघ्र मरीज हो जाए बल्कि असमय आंशिक या पूर्ण रूप से नपुंसक (Impotent or eunuch) भी हो जाए !

क्योंकि बिना विशेष शारीरिक मेहनत के गरिष्ठ भोजन का नियमित सेवन वो भी पञ्च तत्वों से युक्त प्राकतिक वातावरण (शुद्ध पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, अग्नि) से दूर रहकर करने पर, मानव शरीर के शुक्राणुओं की गतिशीलता धीरे धीरे समाप्त होती जाती है, जिससे संतान पैदा होने में बाधा उत्पन्न होती है (शारीरिक मेहनत की कमी से उत्पन्न इस तरह की आंशिक नपुंसकता को, वापस शारीरिक मेहनत बढ़ाकर व कुछ योगासनों व आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाओं (herbal medicines or homeopathic medicines) के कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक सेवन कर निश्चित दूर किया जा सकता है) !

अन्न के बारे में आयुर्वेद महाग्रन्थ में एक संस्कृत श्लोक (in sanskrit documents) दिया गया है जिसका हिंदी में अर्थ होता है कि अगर “अन्न” को सही दिनचर्या के तहत खाया जाए तो वह आदमी के द्वारा खाया जाता है, लेकिन अगर दिनचर्या गलत हो तो “अन्न” खुद मानव को ही खाने लगता है अर्थात शरीर में कई तरह के रोग उत्पन्न करने लगता है !

अन्न निश्चित रूप से कंद, मूल, फलों की तुलना में ज्यादा शारीरिक ताकत (physical strength) प्रदान करता है लेकिन उस ज्यादा ताकत को लेने के बावजूद, 24 घंटा सिर्फ कुर्सी पर बैठकर या बिस्तर पर लेटकर ही नहीं बिता देना चाहिए, बल्कि उस ताकत को किसी भी तरह की शारीरिक मेहनत में खर्च भी करना चाहिए इसलिए अन्न खाने वालों सभी मानवों को रोज कम से कम आधा घंटा ऐसी कोई भी हार्ड एक्सरसाइज (hard gym exercise) अनिवार्य रूप से करनी चाहिए जिससे उनका पूरा शरीर पसीने से नहा जाए (लेकिन शरीर बीमार या कमजोर हो तो बिना चिकित्सक की सलाह के हार्ड एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए)!

यहाँ पर एक बात फिर से ध्यान से समझने वाली है कि अगर कोई व्यक्ति रोज गरिष्ठ अन्न खाता है तो उसके लिए सिर्फ योग प्राणायाम ध्यान (yoga pranayama meditation) करना ही पर्याप्त नहीं होता है क्योंकि सिर्फ योग प्राणायाम ध्यान के दम पर सिर्फ वही सच्चे योगी (Indian Yogi, Sadhu, Sant, sanyasi) अपने शरीर को स्वस्थ (healthy) रख सकतें है जो अन्न बिल्कुल नहीं खाते हैं और सिर्फ कन्द, मूल, फल (condyle, roots, fruits) आदि खाकर गुफाओं में तपस्या करतें हैं !

इसलिए जो गृहस्थ अन्न खातें उनके लिए यह अनिवार्य है कि वो 24 घंटे में कम से कम एक बार ऐसी कड़ी मेहनत करें कि उनका शरीर पसीने से नहा जाए और इस अनिवार्य हार्ड एक्सरसाइज को करने के बाद, अगर उनकी इच्छा दिव्य मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति (अर्थात ईश्वरत्व) की प्राप्ति से अपने पूर्ण कायाकल्प की हो तो उन्हें कम से कम रोज आधा घंटा योग प्राणायाम ध्यान भी जरूर करना चाहिए पर हार्ड फिजिकल एक्सरसाइज व योग प्राणायाम ध्यान (yog pranayam meditation) के बीच में कम से कम 7 मिनट का गैप होना चाहिए !

आप चाहें तो इस गैप का सदुपयोग ध्यान करने में कर सकतें हैं (सभी योग प्राणायाम ध्यान की क्रिया विधि व सावधानियां आप इस लेख के नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक कर जान सकतें हैं) !

4 – किडनी की बीमारी होने का चौथा कारण है अनुवांशिक अर्थात पूर्वजों के द्वारा इस बीमारी का जींस के माध्यम से वंशजों में ट्रान्सफर होना (genes carry genetic diseases) | इस तरह के मरीज रेयर देखने को मिलतें हैं और इस तरह की बिमारी को पैदा होने से रोका भी नहीं जा सकता है, पर हाँ इस कारण से या ऊपर लिखे किसी भी अन्य कारण से किडनी में उत्पन्न बीमारी को निश्चित ठीक करने के लिए प्रयास जरूर किया जा सकता है और उस प्रयास से सम्बंधित कार्य निम्नलिखित हैं –

भारतीय देशी गाय माता के दूध से बने छाछ का अधिक से अधिक सेवन करें ! अगर भारतीय देशी गाय माता के दूध से बने छाछ के मिलने की संभावना बिल्कुल ना हो तो भैंस के दूध की छाछ भी लिया जा सकता है ! पर जर्सी गाय के दूध के किसी भी सामग्री का इस्तेमाल ना करें क्योंकि यह बहुत हानिकारक है (butter milk of only indian deshi cow, or buffalo milk, but not of jarsi cow milk) !

वास्तव में छाछ किडनी के लिए साक्षात अमृत समान है जिसकी वजह से यह किडनी से सम्बंधित लगभग हर बीमारी में बहुत ही जबरदस्त फायदा पहुचाता है ! इसलिए घर पर दूध से दही जमाकर उसका मक्खन निकालकर, ताजा छाछ तुरंत मरीज को पीने के लिए दें ! छाछ में एक चुटकी काला नमक व जीरा मिला सकतें हैं और छाछ सिर्फ दिन में ही पीना चाहिए, सूरज ढ़लने के बाद नहीं पीना चाहिए ! सिर्फ घर का बना छाछ दें, ना कि बाजार में बिकने वाली छाछ क्योंकि इसमें सडन से बचाव के लिए केमिकल युक्त प्रिजर्वेटिव (chemical preservatives) की मिलावट होती है !

छाछ के अलावा कुछ ऐसे विशेष योगासन व प्राणायाम का भी अभ्यास रोज नियम से करना है जिनके अंदर इतनी ताकत होती है कि तेजी से ख़राब होती किडनी को भी पूरी तरह से फेल होने से बचा लेतें हैं और साथ ही साथ कुछ महीने से लेकर कुछ वर्षों तक में किडनी को वापस पहले की तरह ठीक भी कर देतें हैं !

इन योगासन व प्राणायाम (yogasana and pranayama) को अपनी किडनी की खराबी के गंभीरता के हिसाब से प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट से लेकर अधिकतम जितना देर तक चाहें उतनी देर तक कर सकतें हैं (किसी भी योगासन व प्राणायाम का अभ्यास धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए, नहीं तो शरीर में खिचाव आ सकता है) ! वे योगासन व प्राणायाम (yog asan and pranayam) हैं –

गोमुखासन (gomukhasana), वज्रासन (vajrasana), कपालभाति प्राणायाम (kapalbhati pranayama) व अनुलोमविलोम प्राणायाम (anulom vilom pranayama) !

इसमें से सिर्फ वज्रासन (vajrasana) को दोपहर और रात के खाने के तुरंत बाद करना चाहिए, बाकि सब योगासन व प्राणायाम (yoga asana and pranayama) को सुबह व शाम खाली पेट करना चाहिए !

इन सारे प्रयासों को करने से निश्चित रूप से चमत्कारी लाभ मिलता है बशर्ते इन्हें नियमित रूप से लम्बे समय तक निभाया जाए क्योंकि किडनी जैसे मजबूत अंग ख़राब होने में जैसे समय लगातें हैं ठीक उसी तरह इन्हें पूरी तरह से ठीक होने में भी काफी समय लग जाता है इसलिए बिना धैर्य खोये हुए और सभी परहेजों का सख्ती से पालन करते हुए इन प्रयासों को नियमित रूप से निभाना चाहिए जिससे सफलता मिलने की 100 प्रतिशत संभावना निश्चित बन जाती है !

कुछ किडनी के मरीज ऐसे भी होतें हैं जिन्हें पता होता है कि उनकी खाने पीने की गलत आदत की वजह से उनकी किडनी रोज पहले से ज्यादा ख़राब होती जा रही है लेकिन उसके बावजूद भी वे अपने जीभ के चटोरेपन की आदत के आगे बार बार हार मान जाते हैं और अक्सर ऐसी चीज खा या पी लेते हैं जो उनकी किडनी को बहुत नुकसान पहुचाती है इसलिए ऐसे बेबस लोगों को हम यहाँ हनुमान जी का ऐसा मन्त्र बता रहें हैं जिसका रोज अधिक से अधिक जप करने पर, निश्चित रूप से किसी भी आदमी का मन धीरे धीरे उसका गुलाम होने लगता है, जिससे वह व्यक्ति उन चीजों को कभी हाथ भी नहीं लगाता जो उसके शरीर के लिए हानिकारक है !

श्री हनुमान चालीसा में दिया गया, हनुमान जी का वह मन्त्र निम्नलिखित है –

“ जय जय जय हनुमान् गोसाई, कृपा करहुँ गुरु देव की नाई “

इस मन्त्र (mantra of shri hanuman chalisa) को जपने की पूर्ण विधि व पूर्ण लाभ जानने के लिए कृपया इस लिंक को क्लिक करें- झगड़ालू, बदतमीज स्वभाव बदलने और नशे की लत छुड़ाने का सबसे आसान तरीका

जानिये हर योगासन को करने की विधि

जानिये हर प्राणायाम को करने की विधि

(आवश्यक सूचना – “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट में प्रकाशित सभी जानकारियों का उद्देश्य, सत्य व लुप्त होते हुए ज्ञान के विभिन्न पहलुओं का जनकल्याण हेतु अधिक से अधिक आम जनमानस में प्रचार व प्रसार करना मात्र है ! अतः “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान अपने सभी पाठकों से निवेदन करता है कि इस वेबसाइट में प्रकाशित किसी भी यौगिक, आयुर्वेदिक, एक्यूप्रेशर तथा अन्य किसी भी प्रकार के उपायों व जानकारियों को किसी भी प्रकार से प्रयोग में लाने से पहले किसी योग्य चिकित्सक, योगाचार्य, एक्यूप्रेशर एक्सपर्ट तथा अन्य सम्बन्धित विषयों के एक्सपर्ट्स से परामर्श अवश्य ले लें क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं)



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