मांसपेशी के खिचाव, गठिया, नस चढ़ना, साल पड़ना, तनाव आदि के दर्द का आसान घरेलू उपाय

· January 14, 2018

arthritis sprain rheumatism strain wrick Muscle muscular pain gout pod crick rick subluxation Treatment Yoga Asana Pranayama Ayurveda Homeopathy Natural Remedy cure herbal jadibuti“स्वयं बनें गोपाल” समूह से अक्सर कई आदरणीय पाठकगण पूछते रहतें हैं, गर्दन में आये खिचाव, तनाव (जिसे साल पड़ना, नस चढ़ना या नस खीचना आदि भी कहतें हैं) या कमर पीठ घुटने पिंडली में आये खिचाव या शरीर के किसी भी अन्य अंग की मांसपेशी में हुए आकस्मिक खिचाव व गठिया के प्राकृतिक इलाज के बारे में !

कहने को ये समस्यायें बड़ी नहीं है लेकिन जिन्हें होती है, वही इसका असली दर्द समझ पातें हैं क्योंकि इनमें से किसी भी समस्या के होने की वजह से आदमी को अपने मामूली निजी कार्य (जैसे बाथरूम जाना) भी, पहाड़ चढ़ने जैसा कठिन लगने लग सकता है !

आज की अस्त व्यस्त व उटपटांग दिनचर्या की वजह से, लगभग दुनिया का हर व्यक्ति अपने जीवन में अक्सर इस तरह के मांसपेशियों के खिचाव से रूबरू होता रहता है (खासकर शीतकाल अर्थात ठण्ड के मौसम में) इसलिए इन बिमारियों के इलाज के बारे में सभी को जानकारी जरूर होनी चाहिए !

आईये जानतें हैं “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े विभिन्न मूर्धन्य स्वयं सेवी विशेषज्ञों के अनुसार, हर तरह के खिचाव (व गठिया के दर्द) के यौगिक, आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक इलाज के बारे में-

अगर दर्द ज्यादा हो तो, जल्दी आराम पाने के लिए एक साथ तीनो तरह के इलाज अर्थात यौगिक, आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक इलाजों को करना चाहिए !

यौगिक इलाज में रामबाण औषधि है,- अनुलोम विलोम प्राणायाम क्योंकि अनंत वर्ष पुराने परम आदरणीय हिन्दू धर्म का योग विज्ञान कहता है कि शरीर के अंदर स्थित हड्डियों के ढांचे के ठीक ऊपर से प्राण वायु की, एक इतनी ज्यादा पतली पर्त हमेशा बहती रहती है जिसे कभी भी नंगी आखों से या आज के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किये गए सेन्सर्स से देख पाना संभव नहीं है और जब कभी यह प्राण वायु के बहने का प्रवाह किन्ही कारणों से बाधित होता है तो उसी संधि पर दर्द होना शुरू हो जाता है !

यह प्रवाह रोकने वाले कई कारण हो सकतें हैं जैसे गलत खान पान (जैसे ज्यादा मसालेदार, ज्यादा तलाभुना, ज्यादा खट्टा, ज्यादा तीखा, अक्सर भूखे रहना या अक्सर बहुत ज्यादा खाना, रोज बासी खाना गर्म करके खाना, लम्बे समय तक चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थ मतलब घी तेल दूध दही मक्खन आदि से बने खाद्य पदार्थों को एकदम ना खाना या बहुत कम मात्रा में खाना, कोई भी नशा जैसे शराब बियर तम्बाखू सिगरेट बीड़ी भांग आदि करना, निर्दोष जीवों के मांस अंडा आदि खाकर उनके भीषण श्राप का भागीदार बनना आदि) या गलत दिनचर्या (जैसे देर रात में सोना, सुबह देर तक सोना, कब्ज होना, पेट में बार बार गैस बनना, प्राकृतिक माहौल की बजाय कृत्रिम माहौल मतलब एयर कंडीशनर की हवा में रहना, अक्सर एलोपैथिक दवा खाना, बहुत ज्यादा मेकअप करना, ज्यादा देर तक बैठ कर काम करना, ज्यादा देर तक सोना, गलत समय सोना जैसे शाम के समय सोना, रोज एक्सरसाइज ना करना या अचानक से ज्यादा एक्सरसाइज कर देना, यौन उच्छश्रृंखलता आदि) या कोई भारी सामान उठा लेना या अचानक से बेढंगे मुड़ना व झुकना या ठण्ड लग जाना आदि आदि !

शरीर में चाहे किसी भी कारण से इस प्राण वायु का प्रवाह बाधित हो, तो उसे पुनः शुरू करने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी दवा निश्चित रूप से कोई और नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ अनुलोम विलोम प्राणायाम ही है !

arthritis sprain rheumatism strain wrick Muscle muscular pain gout pod crick rick subluxation Treatment Yoga Asana Pranayama Ayurveda Homeopathy Natural Remedy cure herbal jadibuti इसलिए मांसपेशियों के हर तरह के खिचाव की ही नहीं बल्कि हर तरह के गठिया (चाहे गठिया किसी भी अंग का क्यों ना हो व गठिया की स्थिति कितनी ही ज्यादा बिगड़ी हुई क्यों ना हो) की सर्वोत्तम दवा भी अनुलोम विलोम प्राणायाम ही है !

दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक अर्थात परम आदरणीय ऋषियों द्वारा अन्वेषित योग विज्ञान के इस गुप्त पहलू के बारे में आजकल के मॉडर्न साइंस में पढ़े लिखे, डॉक्टर्स व शरीर वैज्ञानिक, भी बिल्कुल नहीं जानते कि गठिया में भी दर्द, प्राणवायु के प्रवाह बाधित होने की वजह से ही होता है इसलिए अनुलोम विलोम प्राणायाम को नियमित करने से गठिया में निश्चित चमत्कारी लाभ मिलता है !

“स्वयं बनें गोपाल” समूह ने खुद कई बार गठिया व अन्य मस्कुलर खिचाव से परेशान मरीजों को मात्र 5 मिनट अनुलोम विलोम प्राणायाम करवाकर आराम पाते हुए देखा है !

ऐसी बिमारियों में कई बार अनुलोम विलोम प्राणायाम को किसी भी पेन किलर इंजेक्शन या टेबलेट से भी तेज फायदा अर्थात मात्र 5 से 10 मिनट में आराम पहुचाते हुए देखा गया है और कई बार कुछ दिनों में फायदा मिलते हुए देखा गया है !

यह तो 100 परसेंट तय है कि इस प्राणायाम को करने से लाभ निश्चित मिलेगा ही मिलेगा, लेकिन लाभ किसको, कितने समय में मिलेगा, यह कुछ मुख्य बातों पर निर्भर करता है जैसे,- ऊपर लिखी हुई समस्यायें किसके शरीर में कितनी गम्भीर अवस्था में हैं, और कौन कितने देर तक नियम से इस प्राणायाम को कर रहा है, और कौन इन समस्याओं के उपजने की वजह अर्थात ऊपर लिखे कारणों से कितना अधिक बचाव (अर्थात परहेज) कर रहा है !

अगर दर्द ज्यादा हो तो चार बार अर्थात सुबह, दोपहर, शाम, रात में कम से कम 100 बार अनुलोम विलोम प्राणायाम करें ! पालथी मार कर बैठने में दिक्कत हो तो कुर्सी पर बैठकर भी अनुलोम विलोम कर सकतें हैं | अगर कुर्सी पर भी बैठने में सक्षम ना हों तो सीधे पीठ के बल लेटकर भी कर सकतें हैं |

पर हर हाल में प्राणायाम करने के दौरान, गर्दन व रीढ़ की हड्डी सीधी रखना अनिवार्य है (ध्यान रहे कि अक्सर लोग गर्दन सीधा करने के चक्कर में, या तो गर्दन थोड़ा ऊपर आसमान की ओर उठा देतें हैं या थोड़ा जमीन की ओर नीचे झुका देतें हैं, जो कि गलत है) !

Anulom Vilom Pranayama kapalbhati bhastrika yoga meditation yog pranayam bandha asana dhyana bandhअनुलोम विलोम प्राणायाम, कपालभाति व भस्त्रिका की तुलना में काफी सौम्य प्राणायाम है और इसको करने में पेट पर ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ता है इसलिए इसको करने से, मात्र आधा से पौन घंटे पहले तक कोई तरल खाद्य पदार्थ (जैसे चाय, पानी आदि) और 2 से 3 घंटे पहले तक कोई सॉलिड खाद्य पदार्थ (जैसे लंच, डिनर आदि) नहीं खाना पीना चाहिए ! इस प्राणायाम को करने के 15 – 20 मिनट बाद ही कुछ भी खाना पीना चाहिए !

अब हम बात करतें हैं आयुर्वैदिक इलाज की ! वैसे तो आयुर्वेद के ग्रंथों में एक से बढ़कर एक औषधियों का वर्णन है पर उन औषधियों को बना पाना, अब सबके बस की बात नहीं रही, क्योंकि अब उनमे से अधिकाँश औषधियों को प्राप्त कर पाना बहुत ही मुश्किल है |

हम यहाँ वर्णन कर रहें है एक ऐसे बेहद आसान आयुर्वेदिक फार्मुले की जिसका हमारे भारतवर्षीय पूर्वज वर्षों से सफलता पूर्वक इस्तेमाल करते आ रहें हैं (Home Remedies For Mascular Pain In Hindi मसल्स पेन, मासपेशियों में खिचाव, मांसपेशियों में दर्द, माँस-पेशियों की ऐंठन, संधि शोथ अर्थराइटिस, के उपचार) |

इस आयुर्वेदिक फार्मूले को बनाने के लिए चाहिए सिर्फ दो चीज,- पहला लहसुन दूसरा शुद्ध देशी गाय माता का घी या शुद्ध सरसों का तेल ! शुद्ध घी या सरसों का तेल अगर आपको आसपास ना मिले तो आप बाबा रामदेव की पतंजली कंपनी का घी या सरसों तेल इस्तेमाल कर सकतें हैं क्योंकि यह भी अति शुद्ध होता है |

arthritis sprain rheumatism strain wrick Muscle muscular pain gout pod crick rick subluxation Treatment Yoga Asana lahsun garlicआधा लीटर घी या सरसों के तेल में, 125 ग्राम लहसुन की कलियों को पीसकर डालें, फिर धीमी आंच पर काफी देर तक गर्म करें | ठंडा होने पर छानकर, साफ शीशी में भर लें !

यह दवा आपके पूरे परिवार के हमेशा काम आएगी क्योंकि जब कभी किसी को, किसी भी तरह का खिचाव, नस चढ़ना, साल पड़ना, कमर दर्द, पीठ दर्द, गठिया दर्द आदि हो, तो इस दवा को हर 3 – 3 घंटे पर दर्द वाले स्थान पर हल्के से मलें, तो लाभ होगा !

होम्योपैथी में ऐसे किसी भी तरह के दर्द की रामबाण दवा है,- RHUS TOXICODENDRON

इस दवा की 30 पॉवर की एक छोटी शीशी भर के गोलियां, मार्केट से खरीद कर रख लेना चाहिए और सुबह दोपहर शाम रात 4 – 4 गोलियां खानी चाहिए !

अगर शरीर में कहीं खिचाव, चोट लगने की वजह से हुआ हो तो इस दवा के साथ साथ, Arnica Montana दवा की 30 पॉवर की भी 4 – 4 गोलियां खानी चाहिए ! मतलब ऐसी स्थिति में सुबह – शाम में RHUS TOXICODENDRON की 4 – 4 गोलियां खानी चाहिए और दोपहर – रात में Arnica Montana की 4 – 4 गोलियां खानी चाहिए |

होम्योपैथी दवा बिल्कुल साइड इफ़ेक्ट रहित होती है और काफी सस्ती भी होती है जिसकी वजह से एक छोटी शीशी दवा जो कि 3 से 4 दिन चल जाती है मात्र 10 से 15 रूपए में मार्केट से मिलती है ! होम्योपैथी दवाओं को अगर साफ़ सुथरे नमी रहित स्थान पर रखा जाए तो कई सालों तक असरदार बनी रहती है !

जानिये हर प्राणायाम को करने की विधि

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

यदि आप भी इस वैश्विक परिवर्तन के महा आन्दोलन में, अपना प्रचंड योगदान देने का बेशकीमती जज्बा रखते हो तो निःसंकोच अभी तुरंत जुड़िये “स्वयं बनें गोपाल” समूह से और वो भी पूरी तरह से अपनी सुविधानुसार (अर्थात अपने मनपसन्द तरीके व समयानुसार) ! मनपसन्द तरीके से तात्पर्य है कि आपकी चाहे जिस भी क्षेत्र में रूचि हो (जैसे- कला, विज्ञान, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, रंगमंच, संगीत, अभिनय, सुरक्षा, कृषि, रिसर्च (शोध), लेखन, भक्ति, योग, सेवाधर्म या किसी भी अन्य तरह के क्षेत्र में रूचि हो, या श्रमदान करने की इच्छा हो), उसी क्षेत्र से सम्बन्धित कोई भी छोटा से लेकर बड़ा उचित प्रेरणास्पद कार्य करें तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह आपके उस कार्य को पूरे विश्व के सामने उजागर कर, अन्य सभी के मन में भी ऐसा प्रेरणायुक्त कार्य करने की इच्छा को जगाकर, विश्व परिवर्तन की इस महा क्रांति का जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक संक्रामक रूप से प्रसार करेगा ! अगर आपको स्वयं समझ में ना आ रहा हो कि आप कब, कैसे और क्या - क्या कर सकतें हैं तब भी आप तुरंत “स्वयं बनें गोपाल” समूह से निःसंकोच सम्पर्क कर सकतें हैं क्योंकि इसके विशेषज्ञों की सलाह से आप निश्चित रूप से अपने में छिपी हुई अपार संभावनाओं व गुणों को पहचान करके इस विश्व के लिए महान परोपकारी साबित हो सकतें हैं (अर्थात स्वयं गोपाल बनकर श्री कृष्ण राज रुपी स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना में अत्यंत सहायक हो सकते हैं) ! इसके अतिरिक्त यदि आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या “स्वयं बनें गोपाल” समूह से किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो भी हमसे जुड़ें ! हमसे जुड़ने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़कर अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में विश्वस्तरीय योग/आध्यात्म सेंटर खोलकर सुख, शान्ति व निरोगता का प्रचार प्रसार करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक ऐसी महान दुर्लभ यौगिक प्रक्रिया {जो हमें परम आदरणीय ऋषि सत्ता के दिव्य कृपा प्रसाद स्वरुप प्राप्त हुई है और जिसका निरंतर अभ्यास करने पर, कोई भी आम इंसान (चाहे वह कितना भी बड़ा पापी हो या पुण्यात्मा, गरीब हो या अमीर, स्त्री हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध) निश्चित रूप से दिन ब दिन बढ़ती हुई अपने अंदर ईश्वरत्व की अनुभूति को महसूस करते हुए स्वयं, गोपाल अर्थात ईश्वर बनने की प्रक्रिया की ओर बढ़ने लगता है ! जिसके फलस्वरूप धीरे धीरे उसके शरीर की सभी बीमारियों का नाश होकर, वह चिर युवावस्था की ओर बढ़ता है और तदनन्तर उचित समय आने पर ईश्वर के दर्शन पाने का महा सौभाग्य भी उसे अवश्य प्राप्त होता है, जिसके बाद की उसके जीवन की बागडोर स्वयं गोपाल अर्थात ईश्वर संभाल लेतें हैं ! इस अमृत स्वरुप प्रक्रिया (जिसे रोज करने में मात्र एक घंटा ही समय लगता है) का नाम है “स्वयं बनें गोपाल” योग} का शिविर, ट्रेनिंग सेशन, शैक्षणिक कोर्स, सेमीनार, वर्क शॉप, प्रोग्राम (कार्यक्रम), कांफेरेंस आदि का आयोजन करवाकर समाज में पुनः श्री कृष्ण राज अर्थात स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना के महायज्ञ में अपनी भी पवित्र आहुति देना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

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यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में योग, प्राणायाम, आध्यात्म, हठयोग (अष्टांग योग) राजयोग, भक्तियोग, कर्मयोग, कुण्डलिनी शक्ति व चक्र जागरण, योग मुद्रा, ध्यान, प्राण उर्जा चिकित्सा (रेकी या डिवाईन हीलिंग), आसन, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर, नेचुरोपैथी आदि का शिविर, ट्रेनिंग सेशन्स, शैक्षणिक कोर्सेस, सेमीनार्स, वर्क शॉप्स, प्रोग्राम्स (कार्यक्रमों), कांफेरेंसेस आदि का आयोजन करवाकर समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व सचेत करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

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यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने गाँव/शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में भारतीय देशी गाय माता से सम्बन्धित कोई व्यवसायिक/रोजगार उपक्रम {जैसे- अमृत स्वरुप सर्वोत्तम औषधि माने जाने वाले, सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के गोमूत्र, दूध, घी, मक्खन, दही, छाछ आदि का निर्माण व विक्रय केंद्र तथा गोबर सम्बन्धित उपक्रम जैसे- गोबर गैस प्लांट, गोबर खाद व गोबर निर्मित पूजा अगरबत्तियां, मूर्तियां, गमले, पूजा की थालियां, मच्छर भगाने की क्वाइल आदि} {या मात्र सेवा केंद्र (जैसे- बूढी बीमार उपेक्षित गाय माता के भोजन, आवास व इलाज हेतु प्रबन्धन)} खोलने में सहायता लेकर साक्षात कृष्ण माता अर्थात गाय माता का अपरम्पार बेशकीमती आशीर्वाद के साथ साथ अच्छी आमदनी भी कमाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

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