“स्वयं बनें गोपाल” समूह पूरे विश्व में पहली बार खुलासा कर रहा है “एंटी यूनिवर्स” (प्रति ब्रह्मांड) से सम्बन्धित कुछ दुर्लभ पहलुओं का

अब घर बैठे हुए ही अपनी कठिन शारीरिक, मानसिक, आर्थिक समस्याओं के लिए तुरंत पाईये ऑनलाइन/टेलीफोनिक समाधान विश्वप्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह के बेहद अनुभवी एक्सपर्ट्स द्वारा, इसी लिंक पर क्लिक करके



(लम्बे समय से ब्रह्मांड सम्बंधित सभी पहलुओं पर रिसर्च करने वाले “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े कुछ शोधकर्ताओं के निजी विचार)-

वैसे तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी ब्रह्मांड व एलियंस से सम्बन्धित आर्टिकल्स में व्यक्त दुर्लभ जानकारियों के मुख्य खोजकर्ता श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय जी रहें हैं, लेकिन निम्नलिखित आर्टिकल में दी जाने वाली जानकारियों को खोजने के लिए प्रेरणा डॉक्टर सौरभ उपाध्याय जी, को “स्वयं बनें गोपाल” समूह के एक स्वयं सेवक के जीवन में हुई अद्भुत घटना से प्राप्त हुई !

उन स्वयं सेवक ने डॉक्टर सौरभ को अपने जीवन में घटी उस आश्चर्यजनक घटना के बारे इस प्रकार बताया कि एक बार उन्होंने अपने जीवन की अंतहीन तकलीफों, समस्याओं से आखिरी परेशान व असंतुष्ट होकर अपनी किस्मत व भगवान को खूब कोसा !

और अंततः जब कोसते – कोसते वो स्वयं सेवक थक गये तो सोने चले गये ! अचानक उनकी नीद खुली तो उन्होंने देखा कि वो कड़ी धूप में अपने शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर पैदल टहल रहें है !

उन्हें बिल्कुल नहीं समझ में आ रहा था कि वो अचानक अपने बेडरूम से उस चौराहे पर कैसे पहुँच गये ! और उस समय वो इस बात से भी परेशान थे कि आज यह चौराहा उन्हें इतना अजनबी क्यों लग रहा है !

अजनबी से मतलब कि वह चौराहा दिखने में तो ठीक पहले ही जैसा था लेकिन उस चौराहे पर उपस्थित भीड़ में कोई भी आदमी औरत परिचित नहीं थे ! अर्थात वह चौराहा और वहां उपस्थित सभी दुकाने बिल्कुल वैसे ही थी जैसे वो पिछले कई सालों से देखते आ रहे थे, लेकिन उन दुकानों व उसके आस पास घूमने वाले सभी आदमी औरत एकदम अपरचित थे !

और साथ ही साथ ना जाने कैसे उन स्वयं सेवक को यह भी पता था कि अब इस शहर में उनका कोई भी परिचित नहीं बचा है लेकिन वो इस बात का बैठकर 1 मिनट शोक तक नहीं मना सकते क्योकि उन्हें बहुत ढेर सारे ऑफिशियल काम दिए गए है निपटाने के लिए !

अर्थात उस समय एक तरफ तो उन स्वयं सेवक का दिल जल से बाहर निकली मछली की तरह तड़प रहा था ये बात सोच – सोच कर कि अब वो आजीवन अपने परिवार से कभी नही मिल पायेंगे, वही दूसरी तरफ उन्हें एक मिनट की भी फुर्सत नही थी इस दुःख पर दुखी होने के लिए क्योकि उन्हें कई आवश्यक ऑफिशियल काम निपटाने थे !

वो स्वयं सेवक उस चौराहे से तेजी से पैदल जाते हुए हर दुकान, शोरूम व भीड़ की तरफ आशाभरी निगाह से देख रहें हैं कि कही कोई एक व्यक्ति भी परिचित मिल जाए पर अफ़सोस वहा कोई भी परिचित नहीं था ! उस चौराहे पर बहुत से लोग खुश प्रसन्न होकर अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे लेकिन किसी को भी उन स्वयं सेवक के मन में चल रहे भीषण अंतरद्वन्द की परवाह नहीं थी !

इस घुटनपूर्ण स्थिति में उनका दिल बैठा जा रहा था लेकिन पता नही क्यों उनका अंतर्मन उन्हें आज्ञापूर्वक बार बार कह रहा था कि तुम्हे रुकने की अनुमति नहीं है क्योकि तुम्हे कई जरुरी काम निपटाने हैं !

इस विचित्र स्थिति को झेलते झेलते कब अचानक उनकी आँख खुली, तो उन्हें पता चला कि ये केवल सपना था ! लेकिन जागने के बाद अब स्थिति और ज्यादा विचित्र हो गयी क्योकि उन स्वयं सेवक का मन मस्तिष्क यह मानने के लिए तैयार ही नहीं था कि ये अजीब अनुभव केवल एक सपना था क्योकि उन्होंने उस सपने वाली अजनबी दुनिया को उसी गंभीरता से जीया था जिस गंभीरता से वो आँख खुलने के बाद वर्तमान दुनिया को जी रहें हैं !

उन्हें सपने में दिखे अनुभव, तथा भीड़ में उपस्थित स्त्री पुरुषों के चेहरे आज 4-5 साल बीत जाने के बाद भी एकदम जीवंत याद हैं ! उन स्वयं सेवक ने अपने इसी अनुभव के बारे में डॉक्टर सौरभ उपाध्याय जी से भी पूछा !

तो डॉक्टर सौरभ उपाध्याय ने इस अनुभव के बारे में गहन रिसर्च किया जिसके बाद प्राप्त उनकी फाइंडिंग्स चौकाने वाली थी ! डॉक्टर उपाध्याय के अनुसार वो स्वयं सेवक उस समय कुछ देर के लिए एंटी यूनिवर्स (प्रति ब्रह्मांड; जिसे कुछ शोधकर्ता पैरलल यूनिवर्स या समानांतर ब्रह्मांड भी कहते हैं; Anti or Parallel Universe) में पहुँच गये थे !

डॉक्टर उपाध्याय के अनुसार हमारे इस ब्रह्मांड का एक ठीक विपरीत ब्रह्मांड भी मौजूद है, जिसे एंटी यूनिवर्स कहते हैं और इस एंटी यूनिवर्स में होने वाली बहुत सी चीजे, हमारे इस ब्रह्मांड के ठीक उल्टी हैं आईये जानते हैं कैसे-

जैसे- हमारे ब्रह्मांड के हमारे इस ग्रह अर्थात पृथ्वी पर जब कोई बच्चा पैदा होता है तो पैदा होते समय उसकी बुद्धि और चेतना का विकास सबसे कम होता है जबकि मरते समय बुद्धि और चेतना का विकास सबसे ज्यादा होता है (मतलब कोई जीव जितनी कम उम्र का होता है उसकी बुद्धि व चेतना उतनी ही कम होती है जबकि जैसे जैसे उम्र ज्यादा होती जाती है वैसे बुद्धि व चेतना का विकास बढ़ता जाता है) जबकि ठीक इसके विपरीत एंटी यूनिवर्स में किसी जीव के पैदा होते समय उसकी बुद्धि व चेतना का विकास सबसे ज्यादा होता है जबकि मरते समय सबसे कम होता है ! अर्थात सारांश रूप में कहें तो एंटी यूनिवर्स में समय का प्रवाह, हमारे यूनिवर्स से उल्टी दिशा में हैं !

डॉक्टर सौरभ के अनुसार एंटी यूनिवर्स के इस अजीब कांसेप्ट को हॉलीवुड की प्रसिद्ध मूवी “द क्यूरियस केस ऑफ बेंजामिन बटन” (The Curious Case of Benjamin Button) में भी आंशिक रूप से दिखाया गया है ! इस मूवी में एंटी यूनिवर्स के बारे में तो नहीं, लेकिन अपने इसी यूनिवर्स के ग्रह पृथ्वी पर दिखाया गया है कि कैसे एक बच्चा जो पैदा होते समय एकदम बूढा रहता है लेकिन मरते समय एकदम बच्चा हो जाता है !

“स्वयं बनें गोपाल” समूह ने अपने पूर्व के लेखों में इस बात का वर्णन किया है कि कैसे सुपर नेचुरल पावर्स (जैसे कि एलियंस) किसी फिल्म प्रोडक्शन यूनिट के डिसिजन मेकर्स को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रेरणा देकर उसकी फिल्म की स्टोरी द्वारा जाने – अनजाने ऐसी सच्चाई का पूर्ण या आंशिक रूप रूप से खुलासा कर सकते हैं जिसका अंदाजा बड़े – बड़े वैज्ञानिको को भी नहीं होता है !

वैसे अब इस सच्चाई को दबी जबान से कई लोग स्वीकारने लगे हैं कि हमारे इस पृथ्वी के कई वर्तमान बड़े अविष्कारों के पीछे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एलियंस द्वारा प्रदत्त ज्ञान ही है जिसके सबसे प्रसिद्ध उदाहरण थे विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक श्री रामानुजन (जिनके बारे में आज भी पश्चिमी देशों के विद्वान कहतें है कि,- The Man Who Knew Infinity) ! श्री रामानुजन खुद बताते थे कि अक्सर उन्हें “नामगिरी” देवी (जो कि आदिशक्ति देवी दुर्गा का ही रूप हैं) आकर कठिन मैथमेटिकल फार्मुले के बारे में बताती थी !

वैसे एलियंस का हस्तक्षेप सिर्फ हाई लेवल के ऑपरेशन्स में हो यह जरूरी नहीं है क्योकि जैसा कि “स्वयं बनें गोपाल” समूह ने अपने पूर्व के लेखो में खुलासा किया है कि; भले ही कोई माने या ना माने, लेकिन हमारे इस दुनिया के लगभग सारे कार्यकलापो का मैनेजमेंट, सीनियर एलियंस की लीडरशिप के हाथो में हैं !

वास्तव में हम मानवो की स्थिति उन छोटे बच्चो की तरह है जिन्हें यह भ्रम हो जाता है कि वे जो कुछ भी काम कर रहें अपने दम पर कर रहें है मतलब जैसे किसी बच्चे को भ्रम हो जाए कि वो स्कूल जाना, विडियो गेम खेलना, खाना खाना, घूमना फिरना आदि इसलिए कर पा रहा है क्योकि उसके अंदर ऐसा कर पाने की क्षमता है जबकि वास्तविकता सिर्फ इतनी ही नहीं है क्योकि वो ऐसा कर पा रहा है तो इसके पीछे मुख्य कारण है उस बच्चे की क्षमता के साथ साथ उसके माता पिता का फाइनेंशियल, फिजिकल व मेंटल सपोर्ट !

डॉक्टर सौरभ उपाध्याय ने यह भी बताया है अंतहीन ईश्वर ने अंतहीन ब्रह्मांड बनाए है और यह जरूरी है कि सभी ब्रह्मांडों का एंटी ब्रह्मांड भी मौजूद हों क्योकि तभी वे स्थिर रह पायेंगे !

ब्रह्मा जी के द्वारा बनाये हुए हमारे इस ब्रह्मांड में नियम है कि जो भी जीव इस ब्रह्मांड में पैदा होगा, ठीक वही जीव उसी समय ब्रह्मा जी के द्वारा बनाये हुए एंटी ब्रह्मांड में भी पैदा होगा !

हांलाकि ब्रह्मांडीय सरंचना में केवल ब्रह्मा जी का हस्तक्षेप हो ऐसा जरूरी नही क्योकि जैसा कि सभी को पता है महाऋषि विश्वामित्र जी ने अपने तपोबल से राजा त्रिशंकु के लिए एक नए आर्टिफिशियल स्वर्ग का निर्माण कर दिया था ! आखिर विश्वामित्र जी के अंदर इतनी ताकत आई कैसे कि वे स्वयं विधाता ब्रह्मा जी के बनाये हुए नियमो में भी परिवर्तन कर सकें ! इसका पूर्ण रहस्य सिर्फ परम आदरणीय हिन्दू धर्म में ही वर्णित है जिसमें कहा गया है कि कोई भी साधारण पुरुष, लगातार अच्छे कर्म करके पुरुष से महापुरुष और अंततः परम पुरुष अर्थात स्वयं ईश्वर के ही समान सामर्थ्यवान बन सकता है (अर्थात स्वयं को गोपाल बना सकता है) !

और केवल विश्वामित्र जी ने ही नही बल्कि इतिहास में ऐसे कई उदाहरण भी देखने को मिलते हैं जब शक्तिशाली लोगों ने सही या गलत तरीके से ब्रह्मांड के स्ट्रक्चर के साथ छेड़छाड़ की है जैसे असुर राज हिरण्यकश्यप का भाई हिरण्याक्ष जिसने रसातल में एक नए आर्टिफीशियल सोलर सिस्टम की स्थापना कर पृथ्वी को स्थापित कर दिया लेकिन हिरण्याक्ष द्वारा बनाये गये आर्टिफीशियल सूर्य की किरणे उतनी पावरफुल नहीं थी इस वजह से पृथ्वी स्थित मानव कमजोर व निस्तेज होने लगे थे ! हिरण्याक्ष को देवताओं ने बहुत समझाया कि पृथ्वी को वापस असली सोलर सिस्टम स्थापित कर दो लेकिन जब वह नही माना तब भगवान् ने वाराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष को मार डाला और वापस पृथ्वी को सही जगह स्थापित किया !

तो जहा तक बात ब्रह्मा जी के द्वारा बनाये गए एंटी यूनिवर्स के नियम की है तो इसी वजह से हम सभी मानवो के बिना जानकारी के हमारा एक प्रतिरूप, एंटी यूनिवर्स में भी जिन्दा है जिसे हम ठीक उसी तरह कभी भी अपनी आँखों से देख नही पाते जिस तरह हम एक साथ कभी भी किसी सिक्के के दोनों पहलुओ (हेड व टेल) को नहीं देख पाते !

लेकिन अगर हम किसी टेक्नोलॉजी (जैसे विडियो कैमरा) का सहारा लें तो हम सिक्के के दोनों पहलुओं को एक साथ देख सकतें है ठीक उसी तरह हम विशेष टेक्नोलॉजी का सहारा लें तो हम एंटी यूनिवर्स स्थित अपने प्रतिरूप को भी देख सकतें हैं ! एंटी यूनिवर्स देखने के लिए जिस टेक्नोलॉजी की जरूरत होती ही वह कुछ और नही बल्कि दिव्य दृष्टि ही होती है, जिसे प्राप्त करने का सबसे आसान तरीका है कि आप जितना अधिक दूसरे जरूरतमन्दो की उचित सहायता करते जायेंगे उतना ही ज्यादा आपकी अंतर्दृष्टि का विकास होता जाएगा !

लेकिन इतिहास में ऐसी कई घटनाएं भी देखने को मिली हैं जब कभी किन्ही विशेष परिस्थतियो में (जैसे- जब कोई व्यक्ति बहुत भावोन्मादी अवस्था में हो या व्यक्ति जाने अनजाने किसी इंटरडाईमेंश्नल पोर्टल के पास पहुच गया हो या कोई पूर्व जन्म का प्रारब्ध हो या ईश्वर कोई विशेष सीख देना चाहते हों आदि) कोई व्यक्ति अपने एंटी यूनिवर्स स्थित रूप की झलक देख पाता है या स्वयं ही अपने एंटी यूनिवर्स में पहुच जाता है (और ऐसा ही कुछ हुआ ऊपर वर्णित स्वयं सेवक के साथ) !

लेकिन ऐसी घटनाए बहुत दुर्लभ होती हैं क्योकि आम तौर पर बिना दिव्य दृष्टि के एंटी यूनिवर्स की झलक देख पाना संभव नहीं है ! लेकिन इस पर कुछ लोग यह भी पूछ सकते है कि इसका क्या प्रमाण है कि दिव्य दृष्टि प्राप्त लोगों को एंटी यूनिवर्स दीखता ही है !

तो इसके प्रत्युत्तर में डॉक्टर सौरभ ने फिर एक दुर्लभ खोज की है, जो “स्वयं बनें गोपाल” समूह के द्वारा बार – बार दोहराई गयी इस बात का भी सत्यापन करती ही कि भारत के सच्चे संत समाज ऐसे अनगिनत दुर्लभ रहस्यों को सदियो से जानते आ रहें हैं जिनके बारे में आज के वैज्ञानिक हजारो करोड़ रूपए खर्च करके भी नही जान पाए हैं !

जैसे बहुत से लोग अब इस सच्चाई के बारे में सुन चुके होंगे कि आज से 600 वर्ष पूर्व गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा में पृथ्वी से सूर्य की दूरी (युग सहस्त्र योजन पर भानु, लील्यो ताहि मधुर फल जानू; अर्थात 15 करोड़ किलोमीटर) बता दी थी, लेकिन शायद ही कोई जानता हो कि 15 वी सदी के प्रसिद्ध संत श्री कबीर दास जी (जिन्हें घोर रहस्यवादी कवि भी माना जाता है) ने अपने एक दोहा में एंटी यूनिवर्स के कांसेप्ट का इशारों में वर्णन किया है; और वो दोहा है-

“अम्बर बरसे धरती भीजे, ये जाने सब कोय !
धरती बरसे अम्बर भीजे, बूझे बिरला कोय !”

आमतौर पर इस दोहा का अन्य रहस्यवादी कवि अपनी – अपनी समझ के अनुसार व्याख्या करते है जिनमे से ज्यादातर व्याख्या को इन्टरनेट व सोशल मीडिया पर पढ़ा जा सकता है; जिनमे से दो मुख्य व्याख्या निम्नलिखित है-

पहली सर्वप्रचलित व्याख्या है कि- आम तौर पर बादल बरसता है और पृथ्वी भीगती है, लेकिन पृथ्वी बरसती है और अम्बर भी भीगने का मतलब है- धरती का जल ही सूर्य के ताप से वाष्प होकर बादल बनकर आकाश में छा जाता है !

दूसरी सर्वप्रचलित व्याख्या है कि- कबीरदास जी कहते हैं, भगवान बादल है उनकी कृपा बरसते सब देखते हैं लेकिन भक्त को तप के वाष्प से भगवान को भीगते कोई – कोई देख पाता है !

पर विश्व में पहली बार डॉक्टर सौरभ ये खुलासा करते हुए बता रहें हैं कि कबीरदास जी अपने इस दोहे में एक ऐसे जगत (ब्रह्माण्ड) की ओर इशारा कर रहे हैं जो है तो हमारे जगत के जैसा ही किन्तु वहाँ होने वाली घटनायें उलटी हैं ! कबीरदास जी ने बड़ी ही सुन्दरता से इस रहस्य की ओर इशारा किया है कि अम्बर यानी आकाश के बरसने पर धरती का भीगना हमारे जगत में एक बेहद सामान्य घटना है लेकिन कोई ऐसा भी जगत (ब्रह्माण्ड) है जहाँ धरती बरसती है और आकाश भीगता है ! डॉ सौरभ बताते हैं कि कबीर दास जी ने अपने इस दोहे में धरती और अम्बर को प्रतीकात्मक रूप में प्रयोग किया है यह बताने के लिए वहाँ सब कुछ उल्टा होता है ! यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह भी है कि एंटी यूनिवर्स में भीगने का कांसेप्ट तो हमारे यूनिवर्स जैसा ही है लेकिन बस भीगने व भीगाने वाले ऑब्जेक्ट आपस में बदल गए जो मुख्यतः यही प्रदर्शित करता है कि एंटी यूनिवर्स में सब समान होते हुए भी सब उल्टा है !

तो ऐसे में सबसे रोचक प्रश्न यह बनता है की जब दुनिया एक से बढ़कर अनोखे व अनदेखे रहस्यों से भरी पड़ी है तो क्यों हम मानव अपना छोटा सा जीवन सिर्फ रोटी, कपड़ा, मकान के पीछे भागते – भागते ख़त्म कर दें !

(ब्रह्माण्ड व एलियंस सम्बंधित हमारे अन्य हिंदी आर्टिकल्स एवं उन आर्टिकल्स के इंग्लिश अनुवाद को पढ़ने के लिए, कृपया नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें)-

इजराईल के टॉप मोस्ट पूर्व अधिकारी व अमेरिकन टॉप साइंटिस्ट का बयान भी समर्थन करता है हमारी एलियंस (Aliens & UFO) सम्बन्धित दुर्लभ खोजो का

ब्लैक होल्स के बारे में पूरी दुनिया के वैज्ञानिको से एकदम अलग खोज है “स्वयं बनें गोपाल” समूह के शोधकर्ताओ की

क्या चंद्रयान -2 के लैंडर ‘विक्रम’ से सम्पर्क टूटने के पीछे एलियंस का हाथ है

“स्वयं बनें गोपाल” समूह खुलासा कर रहा है भारत में हो सकने वाले एलिएंस के वर्तमान संभावित शहर की

यू एफ ओ, एलियंस के पैरों के निशान और क्रॉस निशान मिले हमारे खोजी दल को

वैज्ञानिकों के लिए अबूझ बनें हैं हमारे द्वारा प्रकाशित तथ्य

क्या एलियन से बातचीत कर पाना संभव है ?

ऋषि सत्ता की आत्मकथा (भाग – 1): पृथ्वी से गोलोक, गोलोक से पुनः पृथ्वी की परम आश्चर्यजनक महायात्रा

क्या वैज्ञानिक पूरा सच बोल रहें हैं बरमूडा ट्राएंगल के बारे में

एलियन्स कैसे घूमते और अचानक गायब हो जाते हैं

जानिये कौन हैं एलियन और क्या हैं उनकी विशेषताएं

यहाँ कल्पना जैसा कुछ भी नहीं, सब सत्य है

जानिये, मानवों के भेष में जन्म लेने वाले एलियंस को कैसे पहचाना जा सकता है

क्यों गिरने से पहले कुछ उल्कापिण्डो को सैटेलाईट नहीं देख पाते

आखिर एलियंस से सम्बन्ध स्थापित हो जाने पर कौन सा विशेष फायदा मिल जाएगा ?

सावधान, पृथ्वी के खम्भों का कांपना बढ़ता जा रहा है !

जिसे हम उल्कापिंड समझ रहें हैं, वह कुछ और भी तो हो सकता है

Our research group finds U.F.O. and Aliens’ footprints

The facts published by us are still the riddles for the scientists

Is it possible to interact with aliens?

The Autobiography of the Divine saint (Part – 1) The incredible journey from earth to Golok and Golok to earth

Are Scientists telling the complete truth about Bermuda Triangle ?

What we consider as meteorites, can actually be something else as well

How aliens move and how they disappear all of sudden

Who are real aliens and what their specialties are

Why satellites can not see some meteorites before they fall down

Know how to identify the aliens who are born in human form

There is nothing imaginary here, everything is true

Eventually what do we get benefited with if the actual contact with Aliens gets established

Beware, shaking of pillars of earth is increasing !

कृपया हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कृपया हमारे यूट्यूब चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कृपया हमारे ट्विटर पेज से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कृपया हमारे ऐप (App) को इंस्टाल करने के लिए यहाँ क्लिक करें


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण से संबन्धित आवश्यक सूचना)- विभिन्न स्रोतों व अनुभवों से प्राप्त यथासम्भव सही व उपयोगी जानकारियों के आधार पर लिखे गए विभिन्न लेखकों/एक्सपर्ट्स के निजी विचार ही “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट पर विभिन्न लेखों/कहानियों/कविताओं आदि के तौर पर प्रकाशित हैं, लेकिन “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट, इस वेबसाइट के द्वारा और किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा, दी गयी किसी भी जानकारी की सत्यता, प्रमाणिकता व उपयोगिता का किसी भी प्रकार से दावा, पुष्टि व समर्थन नहीं करतें हैं, इसलिए कृपया इन जानकारियों को किसी भी तरह से प्रयोग में लाने से पहले, प्रत्यक्ष रूप से मिलकर, उन सम्बन्धित जानकारियों के दूसरे एक्सपर्ट्स से भी परामर्श अवश्य ले लें, क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं ! अतः किसी को भी, “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट के द्वारा और इससे जुड़े हुए किसी भी लेखक/एक्सपर्ट द्वारा, किसी भी माध्यम से प्राप्त हुई, किसी भी प्रकार की जानकारी को प्रयोग में लाने से हुई, किसी भी तरह की हानि व समस्या के लिए “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट जिम्मेदार नहीं होंगे !