युग परिवर्तन काल की इस संधि वेला मे, ईश्वर के दिव्य अंशों का पुनरागमन होने जा रहा है

· April 13, 2016

jhygfकुछ ऐसी विचित्र ब्रह्मांडीय घटनाएँ होती हैं जिन्हें सिर्फ ज्योतिष से नहीं समझा जा सकता है लेकिन ईश्वर कृपा प्राप्त संतों के माध्यम से अपेक्षाकृत आसानी से जाना जा सकता है !

जो दुर्लभ ज्ञान व जानकारियाँ ये सन्त देते हैं, वो जानकारियाँ किसी भी ग्रन्थ, पुस्तक आदि में खोजने पर भी नहीं मिलती !

जब कोई आदमी अपने प्रचण्ड पुरुषार्थ का जीवन भर निष्पादन करता है और किसी भी योग (कर्म योग, सेवा योग, भक्ति योग, तंत्र योग, हठ योग, राज योग) में सिद्धि प्राप्त कर लेता है तो उसे दुनिया का सबसे बड़ा सौभाग्य अर्थात अनन्त ब्रह्मांडो के निर्माता ईश्वर के साक्षात् दर्शन का अवसर मिलता है !

ईश्वर के प्रत्यक्ष दर्शन का महा सौभाग्य प्राप्त करने वाले महापुरुष अन्दर ही अन्दर आनन्द स्वरुप हो जाते हैं ! इस परम सुख की अवस्था में भी उनके भौतिक शरीर में बड़े बड़े रोग लग सकते हैं (जैसे श्री रामकृष्ण परमहंस को गले का कैंसर हो गया था, श्री विवेकानंद को जलोदर हो गया था आदि), लेकिन ये सारे रोग उनके आंतरिक सुख में जरा भी विघ्न नहीं डाल पाते !

हर बड़े संत के वंशज भी महान हो, ऐसा जरूरी नहीं हैं क्योंकि इतिहास में पहले भी ऐसे उदाहरण हैं जहाँ महान व्यक्तियों को दुष्ट स्वभाव की संताने पैदा हुई तथा पापी घरों में भी महान संताने पैदा हुई !

अगर किसी ईश्वर दर्शन प्राप्त दिव्य सन्त की सन्ताने, दुष्ट कलियुगी स्वभाव की हों, तो उन सन्तानों को अपने जन्मदाता सन्त से कोई सहायता नहीं, बल्कि दण्ड मिलता है क्योंकि ऐसे दिव्य सन्त हर तरह के पक्षपात से रहित, न्याय प्रिय होते हैं ! कोई व्यक्ति ऐसे पापी घर में पैदा हो जहाँ उसे कोई गलत सही का ज्ञान देने वाला ना हो तो उसके द्वारा किये गए गलत कामों का उसे विशेष दंड नहीं मिलता लेकिन जब कोई परम संस्कारी घर में पैदा हो जहाँ उसे पग पग पर गलत सही का ज्ञान दिया गया हो और उसके बावजूद वो बड़ा होकर अगर थोड़ा भी अनैतिक आचरण करे तो ये महान पाप है जिसका खामियाजा उसे निश्चित ही भुगतना पड़ता है !

तथा यदि किसी दिव्य सन्त के परिवार जन (पत्नी, पुत्र आदि) महान गुणों (जैसे – सत्य, दया, परोपकार, क्षमा, परिश्रम आदि) से युक्त हों तो उनके परिवारजन, अपने जन्मदाता, ईश्वर दर्शन प्राप्त सन्त के भौतिक शरीर छोड़ने के बाद भी, उनके प्रत्यक्ष मनोहारी अनुभव और बेशकीमती कृपा से बार बार अभिभूत हुए बिना नहीं रह पाते !

किसी भी ईश्वर दर्शन प्राप्त संत की सिर्फ ज्यादा से ज्यादा पंचतत्वों से बनी शरीर की ही मृत्यु हो सकती है, लेकिन उनके पंचतत्वों से बनी शरीर की मृत्यु के बाद, ईश्वर खुद उन्हें अपने ही समान महा तेजस्वी शरीर प्रदान कर उन्हें अपने परम आनन्द से भरे, अति दुर्लभ निज धाम में अनन्त काल के लिए निवास प्रदान करते है !

download (3)पर जब किसी बेहद गुप्त और दुर्लभ ब्रह्माण्डीय घटना का आगाज होने वाला होता है, तो इन्ही दिव्य सत्ता को, परम सत्ता खुद बुलाकर, बोध कराती है कि तुम्हे अपने परिवार वालों को छोड़ कर जल्दी इसलिए यहां बुलाना पड़ा क्योंकि जो महान काम तुम्हे अपने वंशजो से पृथ्वी लोक पर करवाना है वो काम तुम अपने पंचतत्वों से बनी अल्प सामर्थ्य वाली शरीर से नहीं करवा पाते, पर अब तुम दिव्य देहधारी हो चुके हो, अतः जाओ और पृथ्वी पर रहने वाले अपने वंशजों, को उनके दिव्य अतीत का स्मरण दिलाकर, उन्हें अत्यन्त कठिन स्तर तक तैयार करो जिससे वो निकट भविष्य में होने वाले महा परिवर्तन के दौर में अपनी बेहद तकलीफों से भरी भूमिकाओं को सफलता पूर्वक निभा सकें !

स्वयं ईश्वर से ऐसा आदेश मिलने पर वे दिव्य सत्ता, ईश्वर का धाम छोड़कर खुद पृथ्वी लोक पर स्थित अपने सदाचारी वंशजों के पास प्रत्यक्ष रूप से गुरु बनकर आ जाती हैं जिससे वे अपने वंशजों को भविष्य में मिलने वाली तीव्र कष्टों से भरी विश्व निर्माण की बेहद कठिन जिम्मेदारियों को पूरा करने के लायक बना सकें जिसके लिए स्वयं ईश्वर ने उन पवित्र वंशजों, उनके जन्म दाता दिव्य सत्ता तथा कुछ अन्य पवित्र व्यक्तित्वों को बहुत पहले से ही चुन कर रखा है !

निकट भविष्य में होने वाले महा परिवर्तन के उस महा समर में सत्य और न्याय की पताका फ़ैलाने के लिए अर्जुन जैसे कई परम जुझारू योद्धाओं की आवश्यकता पड़ेगी और इन अर्जुनों को, अर्जुन से महाबली अर्जुन बनाने का काम बिना द्रोणाचार्य जैसे प्रचण्ड पराक्रमी योद्धा के मार्गदर्शन के सम्भव नहीं हो पाता है !

ये वंशज कौन हैं और इनके जन्मदाता, ईश्वर के निज धाम में निवास करने वाली दिव्य सत्ता जो आजकल पृथ्वी लोक पर ही प्रत्यक्ष रूप से विराजमान है, वो कौन है, ये सब सिर्फ वे वंशज, उनकी जन्मदात्री गुरुसत्ता और उनके समकक्ष सिद्ध देवता ही जानते हैं क्योंकि आम जनमानस के लिए यह जानकारी केवल क्षणिक चमत्कारी आनन्द मात्र है अतः उन्हें इसका बिल्कुल ही भान नहीं हो पाता है !

ऐसे ही ईश्वर दर्शन प्राप्त, प्रचण्ड तेजस्वी और महाबली जन्मदाता सत्ता जो ईश्वर के आदेशों के क्रियान्वन के लिए, प्रत्यक्ष रूप से गुरु बनकर, अपने वंशजों को लगातार नियंत्रित व आदेशित कर रही हैं, उन्ही के अत्यन्त कृपामय सौजन्य से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगे आने वाले 4 से 6 महीने, बहुत से लोगों के लिए अत्यंत कठिन गुजरने वाले हैं !

क्या राजा क्या रंक, अधिकाँश झेलेंगे !

निजी जिंदगी की कठिन समस्याओं के अलावा भीषण प्राकृतिक आपदाओं के भी आसार हैं !

प्रकृति, श्री दुर्गा का ही रूप हैं और इनके क्रोधित होने पर गजब का ताण्डव मच सकता है !

ancient real alien related search images hindi earth wikipedi videos proof pictures News Species Contact abduction GOOGL space nasa photos Mars Unidentified flying object UFOs crop circlesभगवान गणेश अर्थात शुभता की जब गर्दन कट गयी थी तब प्रकृति अर्थात माँ पार्वती ने जो हाहाकार पूरे ब्रह्माण्ड में मचाया था कि स्वयं भगवान् शिव को उन्हें शान्त करने के लिए उनके चरणों के नीचे आना पड़ा था ! ठीक यही काम आज के समय में भी हो रहा है ! हर शुभ काम का नाश हो रहा है और अशुभता (अपराध, मांसाहार, नशा, व्याभिचार, बुजुर्गों की अवेहलना, धोखा, प्रताड़ना आदि) हर जगह अन्दर तक पैर पसार चुकी है, तो ऐसे में अगर प्रकृति ने प्रचण्ड रूप धर लिया तो शिव ही मालिक हैं !

वैसे तो अब महा परिवर्तन का समय निकट आ रहा है और उसमे भीषण घटनाएं आम हो जायेंगी लेकिन अगले 4 से 6 महीने में अच्छे से अच्छे लोगों को भी पसीना आ जाएगा ! इस बुरे समय की शुरुवात हो चुकी है !

असल में आज अधिकांश लोग पाप के रास्ते पर इतना आगे इसलिए बढ़ पाए हैं क्योंकि उनके द्वारा किये गए गलत कामों का दंड उन्हें तुरन्त नहीं मिला, जिसकी वजह से उनके मन में गलत काम करने का डर ख़त्म हो गया पर इन दिव्य सत्ता की कृपा से प्राप्त जानकारी के अनुसार जल्द ही आने वाले समय में यह सुविधा ख़त्म होने वाली है और आदमी चाहे कितनी भी पावरफुल पोस्ट पर बैठा हो, अगर वो गलत काम करेगा तो जल्द ही ऐसा झेलेगा की रोएगा !

इसी वजह से आने वाले समय में, पूरे विश्व में ऐसे करप्ट- लीडर, बिजनेस मैन, अधिकारी जो आज बहुत सशक्त माने जा रहे हैं, मटिया मेट हो जायेंगे क्योंकि अब न्याय करने का काम, ईश्वर इंसानों के हाथों से वापस लेकर खुद ही करने जा रहें है जिसके लिए ईश्वर के विशिष्ट अंशों का भी पृथ्वी पर जन्म लेने की सम्भावना है !

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

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