हर तरह का सुप्रियारिटी काम्प्लेक्स सिर्फ तरक्की में बाधक

· March 5, 2016

opआगे बढ़ने के लिए हीन भावना या भय की भावना का भी थोड़ा बहुत होना जरूरी होता है क्योंकि ज्यादातर स्थितियों में हीन या भय की भावना की बेचैनी ही मानव के आलस्य के स्वभाव पर हावी होकर, उसे आगे बढ़ने के लिए मजबूर करती है !

बहुत ज्यादा निश्चिन्तता का भाव आदमी को कड़ी मेहनत करने से रोकता है और बिना कड़ी मेहनत के किसी भी क्षेत्र में टिकाऊ बड़ी सफलता मिलना असम्भव है !

आपको अपने आस पास रिश्तेदार मित्रों में बहुत से ऐसे लोग मिल जायेंगे जिनकी बुद्धिमानी की एक जमाने में उनके परचितों में बड़ी प्रसिद्धि थी और उन्हें खुद भी इस बात का बहुत गुरुर था की वो बहुत बुद्धिमान हैं पर उनकी बुद्धिमानी उनके लिए पूरी तरह से व्यर्थ साबित होती है क्योंकि वो अपनी लाख बुद्धिमानी के बाद भी जिन्दगी में बड़ी बड़ी बातें करने के अलावा कुछ विशेष कर नहीं पाये !

कारण बस एक ही है की इस दुनिया में भगवान् किसी का घमण्ड लम्बे समय तक चलने नहीं देते !

बहुत बारीक अन्तर है कॉन्फिडेंस और सुप्रियारिटी काम्प्लेक्स में, ठीक उसी तरह जैसे स्वाभिमान और अभिमान में !

कॉन्फिडेंस होना चाहिए लेकिन सुप्रियारिटी काम्प्लेक्स नहीं !

भगवान् जिन्हें प्यार करते हैं उन्हें बार बार अपनी बिना आवाज की लाठी से मार कर (भाग्य की मार) गलत मार्ग पर ज्यादा आगे बढ़ने से रोकते हैं पर ये इन्सान का गजब का जिद्दीपन है कि समझने को तैयार ही नहीं !

ये भी देखा गया है कि जिसने जिंदगी भर अपने आप को बहुत बुद्धिमान और दूसरों को मूर्ख समझा भगवान् ने उसकी सन्तान को ही हल्के दिमाग का बना दिया !

या जिसने काले रंग की शरीर वाले इंसानों से घृणा की, भगवान ने उसके घर ही काली सन्तान पैदा करा दी जिससे उसके मन में भी काले लोगों के प्रति सम्मान पैदा हो !

ऐसे भी लोग हैं दुनिया में जो दूसरों की हर बात में खी खी हंसकर या गम्भीरता वाले तरीके से मजाक उड़ाने की कोशिश करते हैं ! इन लोगों को भगवान् कुछ साल बाद ऐसी अपमान जनक स्थिति में पहुंचा देते हैं की वो दूसरों का मजाक उड़ाना तो दूर, दूसरों से नजर मिलाने में भी हिचकतें हैं !

जो लड़के अत्यधिक लाड प्यार की वजह से घर परिवार में राजा बने घूमते हैं और घर की औरतों, छोटे बच्चों पर धौंस जमाते फिरते हैं, वही लड़के जब पैसा कमाने के लिए फील्ड में उतरते हैं तो क्रूर दुनिया उनके राजा के सपने को तोड़कर उन्हें अति साधारण आदमी की तरह ट्रीट करती हैं !

जो लोग पहले बोलने में बहुत उजड्ड, बद्तमीज और उग्र हुआ करते थे, उन्हें पैसा कमाने के लिए अब अक्सर अपने मुंह में मिश्री घोल कर चाटुकारिता की जबान में अपने बॉस से बोलना पड़ रहा है !

जो अपने आप को बहुत दबंग बनते हैं और अपनी व्यर्थ की दबंगई दिखाकर दूसरों को अपने कण्ट्रोल में रखने की कोशिश करते हैं, उन्हें या तो ऐसे झंझट में फंसते देखा गया है की उनकी दबंगई ही उनके लिए मुसीबतों का कुंआ खोद देती है या उनकी संतान ही इतनी बद्तमीज निकल जाती है कि दूसरों के सामने बार बार उनको ही बेइज्जत करती है !

जो लोग दूसरों के संतानों की नौकरी या रोजगार पर बार बार फब्तियां कसते हैं की बहुत छोटी नौकरी है या बहुत कम तनख्वाह है आदि आदि, उनके खुद के लड़के एकदम नालायक और नाकारा निकल जाते हैं !

जिन्होंने अपने लड़कों के भविष्य के लिए अपने परिवार, खानदान के अन्य लोगों से सम्बन्धों में दूरी बना ली, अब वही लड़के उनसे दूरी बना कर बैठे हैं !

जो महिलायें बहुत बोलने वाली अर्थात वाचाल किस्म की होती हैं और उन्हें लगता है की वो हमेशा सही और अच्छी बातें करती हैं पर वास्तव में ऐसा होता हैं नहीं क्योंकि ये शाश्वत सत्य है की वाचाल लोग हमेशा सही नहीं बोल सकते और अक्सर उटपटांग, बोर करने वाली या चुभने वाली बातें भी बोलते हैं ! इनकी इसी वाचालता की वजह से ही ये औरतें कभी भी किसी की भी पूर्ण विश्वास पात्र नहीं हो पाती हैं इसलिये इनके पति और बच्चे इनके बहुत सगे नहीं हो पाते और हमेशा एक मानसिक दूरी बनाकर ही बात करते हैं ! अपने प्रति अपने पति और बच्चों के बेरुखीपन के लिए जिंदगी भर ये औरतें अपने पति और बच्चों के स्वभाव को ही कोसतीं रहती है लेकिन कभी अपने अन्दर झांककर नहीं देखती कि इन सारी समस्याओं की जड़ उनकी अति वाचालता में निकले उटपटांग, बोरिंग और चुभने वाले शब्द ही है !

तथा जो महिलायें वाचाल के साथ साथ उग्र व ड्रामे बाज भी होती हैं उनसे तो उनके घर के समझदार लोग ज्यादातर बहुत सम्भल कर बात करते हैं और कोशिश करते हैं की कम से कम उनसे आमना सामना हो क्योंकि ना जाने किस बात पर नाराज हो कर वो महिला जोर जोर से रोने धोने का ड्रामा करने लगे और घर का माहौल ख़राब कर दे !

हमारे शास्त्र कहते हैं की जो महिला अपनी निरीह सास ससुर से लड़ झगड़ कर उन्हें धमकाकर अपनी धौंस में रखना चाहती है वो इस जन्म में तो भोगेगी ही साथ ही अगले जन्म में निश्चित काटने वाली कुतिया बनती हैं !

हर समय अपने आप को फर्जी हाई फाई दिखा कर किसी से सीधे मुंह बात ना करने वाले लोग जल्द ही ऐसी स्थिति में भी घिर जाते हैं की उन्हें बार बार सबका हाथ पैर जोड़कर मदद मांगनी पड़ती है !

ऐसे लोग जो मुंह पर तो सबसे प्रेम से बात करें पर पीठ पीछे खूब बुराई करते हों, वे हमारे शास्त्रों के अनुसार उस घड़े के समान हैं जिनके मुंह पर तो दूध भरा है पर अन्दर विष ! ऐसे लोगों का कोई भी दिल से सगा नहीं होता है और मुसीबत पड़ने पर वे सहायता पाने के लिए तरसते हैं !

पर जिन लोगों के मुंह में तेज़ाब भरा हो मतलब जो मुंह पर और पीठ पीछे भी सिर्फ दूसरों से बिना मतलब कड़वा बोलें तो उनके पास सिर्फ वही रह सकता है जिसकी कोई विशेष मजबूरी हो या स्वार्थ ! ऐसे लोग जब बीमार पड़ते हैं तो कोई झाँकने भी नहीं आता की वो जी रहें की मर गएँ !

ईश्वर मेहरबान हो तो आदमी किसी घटना से झटका खाकर चेत जाता है और अपने स्वभाव में अपेक्षित सुधार लाता है पर इस कलियुग में ज्यादातर स्थितियों में दुर्भावना से ग्रसित लोगों का हाल उसी बन्दर की तरह होता है जिसने एक परोपकारी चिड़िया का घोसला तोड़ दिया था क्योंकि उस चिड़िया ने उस बन्दर को बारिश में भीगने से बचाने के लिए अपने घोसले के नीचे शरण दी थी तथा बन्दर को दुबारा बारिश से भीगने से बचने के लिए खुद का घोसला बनाने की नेक सलाह दे डाली थी !

यही बुजुर्गों का सर्वमान्य सुझाव है की अपनी इस छोटी सी जिंदगी में किस बात का घमण्ड !

ब्रह्मवैवर्त पुराण में श्री कृष्ण ने नन्द बाबा से कहा है कि मानव जीवन, पत्ते की नोक पर टिकी पानी की बूँद की तरह है जो ना जाने कब गिर जाय पता भी नहीं चलता है !

आत्मा भी परमात्मा की तरह अविनाशी है इसलिए हर एक आत्मा अब तक अनन्त शरीर धारण कर चुकी हैं और आगे भी कई शरीर धारण करेगी इसलिए यह जानते हुए भी जीवन की हर माया को एकदम सच समझ लेना और उसी में सुख दुःख भोगना ही मूर्खता है !

ये जो भव सागर अर्थात भावनाओं का सागर है, इसमें हमारे अन्दर की भावनाएं (काम, क्रोध, लोभ, मोह, माया, मत्सर आदि) ही हमारा परिणाम तय करती हैं इसलिए अपने मन की भावनाओं को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए !

मन की भावनाओं के उचित नियंत्रण का एक बढियां उदाहरण हैं भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी !

हर देशभक्त भारतीय को मोदी जी की असलियत बखूबी पता है पर उसके बावजूद भी जब कई देश द्रोही तत्व (जिनकी हराम की कमाई अब बंद हो चुकी है) और उनके ग्रुप, पार्टी से जुड़े हुए दलाल किस्म के छोट भईये नेता (जिन्हे हराम की कमाई में अपने आका लोगों से काफी पीछे रह जाने का हार्दिक अफ़सोस है) परम धूर्तता व चालाकी दिखाते हुए, भारतमाता की जय व जय हिन्द आदि देशभक्ति के नारे लगाकर अपने आप को भी देशभक्त दिखाने की साजिश करते हैं तथा अपने देशद्रोही दल के आकाओं (जो विदेशी षडयंत्रकारियों से अपार पैसा खाकर बैठे हुए हैं) की लोमड़ी जैसी चाटुकारिता वाली हाँ में हाँ मिलाते हुए मोदी जी की छवि धूमिल करने का रोज रोज बड़े उत्साह से प्रयास करते हैं, तो सच्चे देश भक्त नागरिकों को बहुत ही चिढ़ होती है पर खुद मोदी जी अपना धैर्य कभी नहीं खोते क्योंकि वे जानते हैं क्रोध की भावना के आवेग में आकर इस भव सागर में कार्य करने से व्यक्ति कर्तव्यच्युत हो सकता है !

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

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