सभी एंडोक्राइन ग्लैंड्स (अन्तः स्रावी ग्रंथियां, जैसे थाइराइड आदि) का नियमन एक्यूप्रेशर से

आपने भारतीय नारियों को देखा होगा की माथे पर जहाँ बिंदी लगाती हैं तथा भारतीय पुरुष जहाँ पर तिलक लगाते हैं वही पॉइंट्स जिसे थर्ड आई (तृतीय नेत्र पॉइंट) पॉइंट भी कहते हैं, होता है पिट्यूटरी ग्लैंड को कण्ट्रोल करने का !

पुराने समय भारतीय नारियां बिंदी लगाना आदि प्रथाओं का बहुत सख्ती से पालन करती थी इस वजह से थाइराइड जैसी बीमारियां लोगों में कम देखने को मिलती थी पर जब से लोगों पर मॉडर्निटी और फ्रीडम का भूत शुरू हुआ और लोग ने मनमानी जिंदगियां जीना शुरू की है तब से किस्म किस्म की बीमारियाँ भी बढ़ गयी !

तृतीय नेत्र पॉइंट को हल्का प्रेशर देने से पिट्यूटरी ग्लैंड रेग्युलेट होती है और ऐसा माना जाता है की पिट्यूटरी ग्लैंड ही शरीर की सारी एंडोक्राइन ग्लैंड्स (अन्तः स्रावी ग्रंथियां) जैसे थाइराइड आदि को रेग्युलेट करती है इसलिए केवल एक पिट्यूटरी ग्लैंड को कण्ट्रोल करने से शरीर का उम्मीद से बढ़कर भला होता है !

पिट्यूटरी ग्लैंड को कण्ट्रोल करने के लिए सबसे ज्यादा प्रभावशाली सबसे तेज फायदा करने वाली शाम्भवी मुद्रा (जिसे अन्तः त्राटक भी कह सकते हैं) होती है ! शाम्भवी मुद्रा की जानकारी पाने के लिए इसी वेबसाइट में योगासन सेक्शन देखें !

कपाल भांति व अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से भी पिट्यूटरी ग्लैंड (acupressure points for endocrine glands system, acupressure points for thyroid) का नियमन बहुत तेज होता है !

कृपया हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

(आवश्यक सूचना – “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट में प्रकाशित सभी जानकारियों का उद्देश्य, सत्य व लुप्त होते हुए ज्ञान के विभिन्न पहलुओं का जनकल्याण हेतु अधिक से अधिक आम जनमानस में प्रचार व प्रसार करना मात्र है ! अतः “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान अपने सभी पाठकों से निवेदन करता है कि इस वेबसाइट में प्रकाशित किसी भी यौगिक, आयुर्वेदिक, एक्यूप्रेशर तथा अन्य किसी भी प्रकार के उपायों व जानकारियों को किसी भी प्रकार से प्रयोग में लाने से पहले किसी योग्य चिकित्सक, योगाचार्य, एक्यूप्रेशर एक्सपर्ट तथा अन्य सम्बन्धित विषयों के एक्सपर्ट्स से परामर्श अवश्य ले लें क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं)



You may also like...