लेख – ‘अभ्युदय’ पर विपत्ति (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

· April 23, 2013

download (3)‘अभ्‍युदय’ के जीवन-मरण का प्रश्‍न

हिंदी संसार इस समाचार को सुनकर चकित और खिन्‍न होगा कि उसके प्रतिष्ठित और उपयोगी पत्र ‘अभ्‍युदय’ पर इन प्रांतों की सरकार की भस्‍म कर देने वाली तीखी दृष्टि पड़ी है। प्रेस एक्‍ट के अनुसार ‘अभ्‍युदय’ से पूरे ढाई हजार की जमानत माँगी गयी है। इस कड़े जमाने में, जबकि भारतीय समाचार पत्रों की स्‍वाधीनता का गला घोंट देने के लिए कड़े से कड़े शिकंजों का जन्‍म होता जा रहा है, किसी पत्र पर जमानत की बिजली का गिरना कोई आश्‍चर्य या अपूर्व घटना नहीं है, परंतु हमें स्‍वप्‍न में भी इस बात की शंका नहीं थी कि ‘अभ्‍युदय’ का गला इस फाँसी में फँसेगा। हमारी यह धारणा केवल इसलिये न थी कि हमें ‘अभ्‍युदय’ के संचालकों की धीरता और बुद्धि पर विश्‍वास था, परंतु इसलिये भी थी कि उस घड़ी से, जबकि ‘अभ्‍युदय’ का जन्‍म हुआ, आज तक-हाँ, हम पूर्ण विश्‍वास के साथ कह सकते हैं कि आज तक-उसने अपने विचारों और अपनी कार्यशैली से राजा की उतनी ही सेवा की, जितना कि प्रजा की। देश के प्रति उसने भक्ति दर्शायी और भक्ति दर्शायी उसने सम्राट और शासन के प्रति भी। भूलने पर भी वे दिन नहीं भूलते, जब भारत में – ‘अभ्‍युदय’ उन दिनों नन्‍हें पौदे के रूप में प्रकट ही हुआ था – गरमागरमी और उथल-पुथल के भावों की लहर बह रही थी। अत्‍यंत उत्‍तेजना के समय में भी पूरी धीरता, शांति और देश-भक्ति के साथ जिन थोड़े से पत्रों ने गालियाँ खाते और बुराइयाँ सुनते हुए भी, राजा और प्रजा दोनों की यथेष्‍ट सेवा की थी, उनमें ‘अभ्‍युदय’ का एक विशेष स्‍थान था। उसके बाद, जब आवश्‍यकता पड़ी, ‘अभ्‍युदय’ उसी कर्मण्‍यता के साथ आगे बढ़ा और सर्वदा नियमबद्ध आंदोलनों का पक्ष लेते हुए उसने देश और अधिकारियों को यथोचित सलाहें दीं। अंत तक उसकी यही गति रही। हाल में उसका दैनिक संस्‍करण निकला था। दैनिक ‘अभ्‍युदय’ ने देश की सेवा की और देश की सेवा से बढ़कर की सरकार की सेवा। महीनों घाटा सहकर उसने वह काम किया, जो सरकारी प्रेस ब्‍यूरो के दस पत्र भी न कर सकते थे। बाजारी गप्‍पों और लोगों के भ्रम को दूर करने में उसने अधिकारियों का पूरा साथ दिया। परंतु आज उसकी धीरता, उसकी शांति, नियमबद्धता, उसकी कर्मण्‍यता और हितैषिता, उसकी देश-सेवा और उसकी राज-सेवा का यह गहरा ‘पुरस्‍कार’ मिलता है। ‘पुरस्‍कार’ की माया अगम्‍य है। बेचारा पृथ्‍वी पर चलने वाला प्राणी उसे क्‍या जाने!

जो होना था सो तो हो गया, अब क्‍या होना चाहिए? ‘अभ्‍युदय’ देश-सेवा के लिए निकला। उसने जो सेवा की, उसे सब जानते हैं, पत्रों के पाठक जानते हैं और जानता है हिंदी संसार। यह भी जानी हुई बात है कि उसे सालों घाटा सहना पड़ा और उसका दैनिक संस्‍करण घाटे ही के कारण बंद हुआ। हमें मालूम है कि ‘अभ्‍युदय’ की आर्थिक दशा अच्‍छी नहीं और उसके संचाक जमानत का रूपया सरकारी खजाने में नहीं पहुँचा सकते, परंतु जमानत का रूपया खजाने में न पहुँचना एक बड़ा ही भयंकर अर्थ रखता है। उसका अर्थ है कि ‘अभ्‍युदय’ बंद हो जायेगा, ‘मर्यादा’ बंद हो जायेगी, अभ्‍युदय प्रेस से उच्‍च और अच्‍छा साहित्‍य निकालना बंद हो जायेगा। उसके अर्थ हैं कि हिंदी साहित्‍य-क्षेत्र का एक बड़ा ही उपयोगी खंड विध्‍वंस हो जायेगा और हिंदी-संसार के माथे पर एक टीका लग जायेगा, किसी यश का नहीं, कृतघ्‍नता और कलंक का। उसके अर्थ हैं कि उच्‍च भावों और नवीन जीवन का एक स्रोत बंद हो जायेगा और उसको चुपचाप बंद होते देखने पर निश्‍चेष्‍ट बैठे रहने वालों पर कोई शाप नहीं लगेगा, परंतु उसी क्षण से, अकर्मण्‍यता की उसी घड़ी से उनके हृदय पर एक छाप लग जायेगी- नपुंसकता की और निर्जीवता की और क्रूरता और मूर्खता की। हम हिंदी संसार से पूछते हैं कि ऐसे अवसर पर वह क्‍या करना चाहता है? यदि वह चुप रहा, यदि उसने अकर्मण्‍यता का पल्‍ला पकड़ा तो उसे मालूम होना चाहिये कि न केवल उसने ‘अभ्‍युदय’ और अपने हृदय की हत्‍या कर दी, परंतु हम कहेंगे और पूरे जोर के साथ कि उसने अपने भविष्‍यत् की भी हत्‍या कर दी। कोई नहीं कहता कि हमारी जेबें अपने धन से भर दो, कोई नहीं कहता कि हमारी पूजा और अर्चा करो, परंतु यदि हृदय है तो यह तो समझ लो कि जब हमारे प्राण तुम्‍हारी सेवा में जाते हों, तो उनके बचाने का उपाय करना तुम्‍हारा कर्तव्‍य है। यदि इस बात के समझने के लिए भी हृदय नहीं है तो, कर्तव्‍यशून्‍यता और कृतघ्‍नता के देवता, बताओ तो सही, किस बिरते पर कोई तुम्‍हारे चरणों को चापे!

पाठको, तुमसे हमारी एक प्रार्थना है और यह प्रार्थना है, विशेषकर उन पाठकों से जो युवक हैं, जिनके हृदय किसी तुषार की मार से मर नहीं गये, जो देश से प्रेम और उसका सम्‍मान करना जानते हैं और साहस और दृढ़ता के साथ कठिनाइयों का सामना करना अपना कर्तव्‍य मानते हैं। प्रिय युवक! यदि ‘अभ्‍युदय’ का अंत हो गया, तो याद रखो, उसकी मृत्‍यु का कलंक तुम्‍हारे ही सिर रहेगा, क्‍योंकि गये-गुजरे मिट्टी और पत्‍थर उत्‍तरदायित्‍व के समय बेजबान होने का ढोंग रचेंगे, परंतु तुम-तुम, जिनके हृदय में नवजीवन की लहर हिलोरें मारती है – कोई भी ऐसा बहाना पेश न करोगे और न कर ही सकते हो। नवजीवन और कर्मण्‍यता का पवित्र संदेश सुनाने वाली एक शक्ति का ह्रास हो जाय और तुम चुप बैठे रहो! कर्तव्‍यपरायणता तुम्‍हें अवकाश दे और तुम उसकी अवहेलना करो! तुमसे ऐसी निर्जीवता की आशंका नहीं, क्‍योंकि सारी आशाएँ तुम्‍हीं पर केंद्रित हैं और दुर्भाग्‍य है उस देश का जो मुरदों से कुछ और कोई आशा करे। इस अवसर पर तुम तनिक भी निश्‍चेष्‍ट नहीं होगे, नहीं, निश्‍चेष्‍ट नहीं रह सकते और यह न केवल इसलिए कि तुम अपने भावों के स्रोत की रक्षा करोगे, किंतु इसलिए कि ऐसे अवसर की चूक तुम्‍हारे नैतिक बल को ऐसा गहरा धक्‍का मारेगी- तुम्‍हें इतना नीचे गिरा देगी कि उससे पनपने के लिए तुम्‍हें कितनी ही शताब्दियों की आवश्‍यकता पड़ेगी। तो, बतलाओ, कौन-सा मार्ग तुम चुनते हो? ऊपर उठने का, या नीचे गिरने का? अपने मुहल्‍ले में भीख माँग कर, अपने मित्रों से चंदा लेकर, अपने हितैषियों से रकमें लेकर ‘अभ्‍युदय’ की जमानत की रकम पूरी करने का पूरा प्रयत्‍न करके अपनी उन्‍नति का, या अल्‍प कठिनाइयों के सामने पूरी नीचता के साथ गर्दन झुकाकर लोगों को अपने भाव, अपनी दृढ़ता और अपने बल पर कहकहा लगाने का अवसर देने का? मुस्लिम पत्र मुस्लिम भावों की अपील करके अपने मित्रों से इतना चंदा पा लें कि उनकी बड़ी से बड़ी जमानत दी जा सके और तुम-तुम जो राष्‍ट्रीयता का दम भरते हो और उच्‍च और महान् भविष्‍य के स्‍वप्‍न देखने वाले हो – अपने भावों के लिए उतनी सच्‍चाई, उतना प्रेम और त्‍याग भी न प्रकट कर सको। आह! यदि तुम ऐसे हो, तो तुम पर देश गर्व नहीं कर सकता! आह! यदि तुम ऐसे हो, तो मातृभूमि उस घड़ी को बड़ी ही अशुभ समझेगी, जब तुम ऐसे कृत्रिमता-प्रेमी उसकी कोख में आये थे। परंतु नहीं, हम नहीं समझते कि तुम ऐसे हो और हम उस समय तक यह भी नहीं कह सकते कि तुम कैसे हो, जब तक तुम इन शब्‍दों के पढ़ते ही हमें सूचित न करो कि तुमने ‘अभ्‍युदय’ के लिए क्‍या विचार और किस प्रकार अपना कार्य आरम्‍भ कर दिया?

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

यदि आप भी इस वैश्विक परिवर्तन के महा आन्दोलन में, अपना प्रचंड योगदान देने का बेशकीमती जज्बा रखते हो तो निःसंकोच अभी तुरंत जुड़िये “स्वयं बनें गोपाल” समूह से और वो भी पूरी तरह से अपनी सुविधानुसार (अर्थात अपने मनपसन्द तरीके व समयानुसार) ! मनपसन्द तरीके से तात्पर्य है कि आपकी चाहे जिस भी क्षेत्र में रूचि हो (जैसे- कला, विज्ञान, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, रंगमंच, संगीत, अभिनय, सुरक्षा, कृषि, रिसर्च (शोध), लेखन, भक्ति, योग, सेवाधर्म या किसी भी अन्य तरह के क्षेत्र में रूचि हो, या श्रमदान करने की इच्छा हो), उसी क्षेत्र से सम्बन्धित कोई भी छोटा से लेकर बड़ा उचित प्रेरणास्पद कार्य करें तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह आपके उस कार्य को पूरे विश्व के सामने उजागर कर, अन्य सभी के मन में भी ऐसा प्रेरणायुक्त कार्य करने की इच्छा को जगाकर, विश्व परिवर्तन की इस महा क्रांति का जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक संक्रामक रूप से प्रसार करेगा ! अगर आपको स्वयं समझ में ना आ रहा हो कि आप कब, कैसे और क्या - क्या कर सकतें हैं तब भी आप तुरंत “स्वयं बनें गोपाल” समूह से निःसंकोच सम्पर्क कर सकतें हैं क्योंकि इसके विशेषज्ञों की सलाह से आप निश्चित रूप से अपने में छिपी हुई अपार संभावनाओं व गुणों को पहचान करके इस विश्व के लिए महान परोपकारी साबित हो सकतें हैं (अर्थात स्वयं गोपाल बनकर श्री कृष्ण राज रुपी स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना में अत्यंत सहायक हो सकते हैं) ! इसके अतिरिक्त यदि आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या “स्वयं बनें गोपाल” समूह से किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो भी हमसे जुड़ें ! हमसे जुड़ने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़कर अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में विश्वस्तरीय योग/आध्यात्म सेंटर खोलकर सुख, शान्ति व निरोगता का प्रचार प्रसार करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक ऐसी महान दुर्लभ यौगिक प्रक्रिया {जो हमें परम आदरणीय ऋषि सत्ता के दिव्य कृपा प्रसाद स्वरुप प्राप्त हुई है और जिसका निरंतर अभ्यास करने पर, कोई भी आम इंसान (चाहे वह कितना भी बड़ा पापी हो या पुण्यात्मा, गरीब हो या अमीर, स्त्री हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध) निश्चित रूप से दिन ब दिन बढ़ती हुई अपने अंदर ईश्वरत्व की अनुभूति को महसूस करते हुए स्वयं, गोपाल अर्थात ईश्वर बनने की प्रक्रिया की ओर बढ़ने लगता है ! जिसके फलस्वरूप धीरे धीरे उसके शरीर की सभी बीमारियों का नाश होकर, वह चिर युवावस्था की ओर बढ़ता है और तदनन्तर उचित समय आने पर ईश्वर के दर्शन पाने का महा सौभाग्य भी उसे अवश्य प्राप्त होता है, जिसके बाद की उसके जीवन की बागडोर स्वयं गोपाल अर्थात ईश्वर संभाल लेतें हैं ! इस अमृत स्वरुप प्रक्रिया (जिसे रोज करने में मात्र एक घंटा ही समय लगता है) का नाम है “स्वयं बनें गोपाल” योग} का शिविर, ट्रेनिंग सेशन, शैक्षणिक कोर्स, सेमीनार, वर्क शॉप, प्रोग्राम (कार्यक्रम), कांफेरेंस आदि का आयोजन करवाकर समाज में पुनः श्री कृष्ण राज अर्थात स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना के महायज्ञ में अपनी भी पवित्र आहुति देना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप विश्व प्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह से योग, आध्यात्म से सम्बन्धित शैक्षणिक कोर्स करके अपने व दूसरों के जीवन को भी रोगमुक्त बनाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में योग, प्राणायाम, आध्यात्म, हठयोग (अष्टांग योग) राजयोग, भक्तियोग, कर्मयोग, कुण्डलिनी शक्ति व चक्र जागरण, योग मुद्रा, ध्यान, प्राण उर्जा चिकित्सा (रेकी या डिवाईन हीलिंग), आसन, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर, नेचुरोपैथी आदि का शिविर, ट्रेनिंग सेशन्स, शैक्षणिक कोर्सेस, सेमीनार्स, वर्क शॉप्स, प्रोग्राम्स (कार्यक्रमों), कांफेरेंसेस आदि का आयोजन करवाकर समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व सचेत करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अब लुप्त हो चुके अति दुर्लभ विज्ञान के प्रारूप {जैसे- प्राचीन गुप्त हिन्दू विमानों के वैज्ञानिक सिद्धांत, ब्रह्मांड के निर्माण व संचालन के अब तक अनसुलझे जटिल रहस्यों का सत्य (जैसे- ब्लैक होल, वाइट होल, डार्क मैटर, बरमूडा ट्रायंगल, इंटर डायमेंशनल मूवमेंट, आदि जैसे हजारो रहस्य), दूसरे ब्रह्मांडों के कल्पना से भी परे आश्चर्यजनक तथ्य, परम रहस्यम एलियंस व यू.ऍफ़.ओ. की दुनिया सच्चाई (जिन्हें जानबूझकर पिछले कई सालों से विश्व की बड़ी विज्ञान संस्थाएं आम जनता से छुपाती आ रही हैं) तथा अन्य ऐसे सैकड़ों सत्य (जैसे- पिरामिड्स की सच्चाई, समय में यात्रा, आदि) के विभिन्न अति रोचक, एकदम अनछुए व बेहद रहस्यमय पहलुओं से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, इन दुर्लभ ज्ञानों से अनभिज्ञ समाज को परिचित करवाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अति पवित्र व मोक्षदायिनी धार्मिक गाथाएं, प्राचीन हिन्दू धर्म के वेद पुराणों व अन्य ग्रन्थों में वर्णित जीवन की सभी समस्याओं (जैसे- कष्टसाध्य बीमारियों से मुक्त होकर चिर यौवन अवस्था प्राप्त करने का तरीका) के समाधान करने के लिए परम आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी व उपयोगी साधनाएं व ज्ञान आदि से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, पूरी तरह से निराश लोगों में फिर से नयी आशा की किरण जगाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक आदर्श समाज की सेवा योग की असली परिचायक भावना अर्थात “वसुधैव कुटुम्बकम” की अलख ना बुझने देने वाले विभिन्न सौहार्द पूर्ण, देशभक्ति पूर्ण, समाज के चहुमुखी विकास व जागरूकता पूर्ण, पर्यावरण सरंक्षण, शिक्षाप्रद, महिला सशक्तिकरण, नशा एवं कुरीति उन्मूलन, अनाथ गरीब व दिव्यांगो के भोजन वस्त्र शिक्षा रोजगार आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन, मोटिवेशनल (उत्साहवर्धक व प्रेरणास्पद) एवं परोपकार पर आधारित कार्यक्रमों (चैरिटी इवेंट्स, चैरिटी शो व फाईलेन्थ्रोपी इवेंट्स) का आयोजन करवाकर ऐसे वास्तविक परम पुण्य प्रदाता महायज्ञ में अपनी आहुति देना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने गाँव/शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में भारतीय देशी गाय माता से सम्बन्धित कोई व्यवसायिक/रोजगार उपक्रम {जैसे- अमृत स्वरुप सर्वोत्तम औषधि माने जाने वाले, सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के गोमूत्र, दूध, घी, मक्खन, दही, छाछ आदि का निर्माण व विक्रय केंद्र तथा गोबर सम्बन्धित उपक्रम जैसे- गोबर गैस प्लांट, गोबर खाद व गोबर निर्मित पूजा अगरबत्तियां, मूर्तियां, गमले, पूजा की थालियां, मच्छर भगाने की क्वाइल आदि} {या मात्र सेवा केंद्र (जैसे- बूढी बीमार उपेक्षित गाय माता के भोजन, आवास व इलाज हेतु प्रबन्धन)} खोलने में सहायता लेकर साक्षात कृष्ण माता अर्थात गाय माता का अपरम्पार बेशकीमती आशीर्वाद के साथ साथ अच्छी आमदनी भी कमाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

जानिये “स्वयं बनें गोपाल” समूह और इसके प्रमुख स्वयं सेवकों के बारे में

Click Here To View 'About Us / Contact Us' in English

धन्यवाद,
(“स्वयं बनें गोपाल” समूह)

हमारा सम्पर्क पता (Our Contact Address)-
“स्वयं बनें गोपाल” समूह,
प्रथम तल, “स्वदेश चेतना” न्यूज़ पेपर कार्यालय भवन (Ground Floor, “Swadesh Chetna” News Paper Building),
समीप चौहान मार्केट, अर्जुनगंज (Near Chauhan Market, Arjunganj),
सुल्तानपुर रोड, लखनऊ (Sultanpur Road, Lucknow),
उत्तर प्रदेश, भारत (Uttar Pradesh, India).

हमारा सम्पर्क फोन नम्बर (Our Contact No)– 91 - 0522 - 4232042, 91 - 07607411304

हमारा ईमेल (Contact Mail)– info@svyambanegopal.com

हमारा फेसबुक (Our facebook Page)- https://www.facebook.com/Svyam-Bane-Gopal-580427808717105/

हमारा ट्विटर (Our twitter)- https://twitter.com/svyambanegopal

आपका नाम *

आपका ईमेल *

विषय

आपका संदेश



ये भी पढ़ें :-



[ajax_load_more preloaded="true" preloaded_amount="3" images_loaded="true"posts_per_page="3" pause="true" pause_override="true" max_pages="3"css_classes="infinite-scroll"]