ये शरीर मरा तो, कारण शरीर जूझ गया (युग पुरुष के अथक प्रयास की महा गाथा)

· December 13, 2015

cimagesयुग पुरुष के पञ्च तत्वों का बना शरीर अपनी अन्तिम साँसे गिन रहा था ! समय था 2 जून 1990 (गायत्री जयंती) सुबह 8 बजे, गुरु माता जी का दाहिना हाथ अपने हाथ में लेकर अपना अंतिम सन्देश अपने उत्तराधिकारी को दिया –


आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! हमारे सम्पर्क सूत्र (ईमेल, फोन नम्बर्स, फेसबुक, ट्विटर, पोस्टल एड्रेस आदि) जानने के लिए, कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें ! और कृपया इस लेख के नीचे दिए गए अपने मनपसन्द विकल्पों से जुड़कर, ना केवल अपने निजी जीवन का बल्कि पूरे समाज के महान कायाकल्प के परम पुण्यवर्धक कर्मयोग के भागीदार बनें (“Svyam Bane Gopal” Organization requests to all its respected viewers spread across more than 169 countries to ask their queries regarding Yoga and Spirituality without any hesitation, by clicking here. And also, Please Join with the options given at the bottom of this article, to get Positive Radical Changes in your entire life altogether leading to the Reformation of Whole Society)

“मेरी अस्सी वर्ष लम्बी सोद्देश्य शरीर यात्रा पूरी हुई ! इस अवधि में परमात्मा को हर पल अपने हृदय और अंतःकरण में प्रतिष्ठित मान एक- एक क्षण का पूरा उपयोग किया है ! शरीर अब विद्रोह कर रहा है ! यूँ तो उसे कुछ दिन और घसीटा भी जा सकता है, पर जो कार्य परोक्ष मार्गदर्शक सत्ता ने सौंपे हैं, वे सूक्ष्म और कारण शरीर से ही सम्पन्न हो सकते हैं ! ऐसी स्थिति में कृशकाय शरीर से मोह का कोई औचित्य भी नहीं है !

ज्योति बुझ गई यह कदापि नहीं समझा जाना चाहिए ! अब तक के जीवन में जितना कार्य इस स्थूल शरीर ने किया है, उससे सौ गुना सूक्ष्म अंतःकरण से सम्भव हुआ है ! आगे का लक्ष्य विराट है ! संसार भर के छह अरब मनुष्यों की अन्तश्चेतना को प्रभावित और प्रेरित करने, उनमें आध्यात्मिक प्रकाश और ब्रह्मवर्चस जगाने का कार्य पराशक्ति से ही संभव है ! जीवन की अंतिम घड़ियाँ उसी उपक्रम में बीती हैं !

इसके उपरान्त वे सभी परिजन, जिन्हें हमने ममत्व के सूत्रों से बांधकर परिवार के रूप में विस्तृत रूप दे दिया है, संभवतः स्थूल नेत्रों से हमारी इस शरीर को नहीं देख पायेंगे, पर हम उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि इस शताब्दी के अंत तक, जब तक सूक्ष्म शरीर कारण के स्तर तक न पहुँच जाय, हम शांतिकुंज परिसर के अन्तःकरण में विद्यमान रहकर अपने बालकों में नवजीवन और उत्साह भरते रहेंगे ! उनकी समस्या का समाधान उसी प्रकार निकलता रहेगा जैसा कि हमारी उपस्थिति में उन्हें उपलब्ध होता था !

हमारे आपसी सम्बन्ध अब और भी प्रगाढ़ हो जायेंगे, क्योंकि हम कभी बिछुड़ने के लिये नहीं जुड़े थे ! अब हमें एक क्षण के लिये भी भुला पाना आत्मीय परिजनों के लिये कठिन हो जायेगा ! ब्रह्मकमल के रूप में हम तो खिल चुके, किन्तु उसकी शोभा और सुगन्धि के विस्तार हेतु ऐसे अगणित ब्रह्म बीज देवमानव उत्पन्न करने जा रहे हैं, जो खिलकर समूचे संस्कृति सरोवर को सौंदर्य सुवास से भर सकें, मानवता को निहाल कर सकें !

ब्रह्मनिष्ठ आत्माओं का उत्पादन, प्रशिक्षण एवं युग परिवर्तन के महान कार्यों में उनका नियोजन बड़ा कार्य है ! यह कार्य हमारे उत्तराधिकारियों को करना है ! शक्ति हमारी काम करेगी तथा प्रचण्ड शक्ति प्रवाह अगणित देवात्माओं को मिशन से अगले दिनों जोड़ेगा ! उन्हें संरक्षण, स्नेह देने और सवॉरने का कार्य माताजी सम्पन्न करेंगी ! हम सतयुग की वापसी के संरजाम में जुट जायेंगे ! जो भी संकल्पनाएँ नवयुग के संबंध में हमने की थी, वे साकार होकर ही रहेंगी ! इसी निमित्त इस काया पिंजर का सीमित परिसर छोड़ कर हम विराट घनीभूत प्राण ऊर्जा के रूप में विस्तृत होने जा रहे हैं !”

तो ये था महा मना श्री राम शर्मा आचार्य जी के स्थूल शरीर के ठीक पहले का अन्तिम सन्देश ! मृत्यु से पहले देखा गया है की अच्छे से अच्छे बहादुर, बलवान आदमी भी, या तो अचेत रहते हैं या रोते बिलखते हैं, पर ऐसा सामर्थ्य की मरने से पहले मरने के बाद का भविष्य और जीते समय जीवन के उददेश्य की पूर्ण जानकारी उसी मानव को पता होती है जिसका जन्म असंख्य दूसरों के जीवन को तारने के लिए हुआ होता है !

श्री राम शर्मा आचार्य जी की संस्था पुर जोर से दिन रात अपने मिशन अर्थात समाज के बीच व्याप्त सैकड़ों बुराईयों को मिटाने में लगी है पर खुद गुरु जी अपने पञ्च तत्व के शरीर के अन्त के बावजूद अन्य सभी दिव्य विभूतियों की तरह, प्रति क्षण सभी जीवों के अन्तः चेतना में व्याप्त मलिनता के नाश में लगे हैं क्योंकि इस धरा पर पाप अधर्म इतना ज्यादा बढ़ गया है की यदि इसे समय रहते इस अराजकता को नहीं रोका गया तो वसुंधरा ऐसे पापियों के बोझ उठाने से इंकार कर देगी जिससे प्रकृत का रौद्र ताण्डव शुरु हो सकता है !

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य भारत के एक युगद्रष्टा मनीषी थे जिन्होने अखिल भारतीय गायत्री परिवार की स्थापना की। उन्होंने अपना पूरा जीवन सिर्फ समाज की भलाई तथा सांस्कृतिक व चारित्रिक उत्थान के लिये समर्पित कर दिया। उन्होने आधुनिक व प्राचीन विज्ञान व धर्म का समन्वय करके आध्यात्मिक नवचेतना को जगाने का कार्य किया ताकि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना किया जा सके। उनका व्यक्तित्व एक साधू पुरुष, आध्यात्म विज्ञानी, योगी, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, लेखक, सुधारक, मनीषी व द्रष्टा का समन्वित रूप था।

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य का जन्म आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (20 सितम्बर 1911) को उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के आँवलखेड़ा ग्राम में (जो जलेसर मार्ग पर आगरा से पन्द्रह मील की दूरी पर स्थित है) हुआ था। उनका बाल्यकाल व कैशोर्य काल ग्रामीण परिसर में ही बीता। वे जन्मे तो थे एक जमींदार घराने में, जहाँ उनके पिता श्री पं. रूपकिशोर जी शर्मा आस-पास के, दूर-दराज के राजघरानों के राजपुरोहित, उद्भट विद्वान, भगवत् कथाकार थे, किन्तु उनका अंतःकरण मानव मात्र की पीड़ा से सतत् विचलित रहता था। साधना के प्रति उनका झुकाव बचपन में ही दिखाई देने लगा, जब वे अपने सहपाठियों को, छोटे बच्चों को अमराइयों में बिठाकर स्कूली शिक्षा के साथ-साथ सुसंस्कारिता अपनाने वाली आत्मविद्या का शिक्षण दिया करते थे।

छटपटाहट के कारण हिमालय की ओर भाग निकलते व पकड़े जाने पर उन्होंने संबंधियों को बताया कि हिमालय ही उनका घर है एवं वहीं वे जा रहे थे। किसे मालूम था कि हिमालय की ऋषि चेतनाओं का समुच्चय बनकर आयी यह सत्ता वस्तुतः अगले दिनों अपना घर वहीं बनाएगी। जाति-पाँति का कोई भेद नहीं। जातिगत मूढ़ता भरी मान्यता से ग्रसित तत्कालीन भारत के ग्रामीण परिसर में अछूत वृद्ध महिला की जिसे कुष्ठ रोग हो गया था, उसी के टोले में जाकर सेवा कर उन्होंने घरवालों का विरोध तो मोल ले लिया पर अपना व्रत नहीं छोड़ा। उन्होने किशोरावस्था में ही समाज सुधार की रचनात्मक प्रवृत्तियाँ चलाना आरंभ कर दी थीं। औपचारिक शिक्षा स्वल्प ही पायी थी। किन्तु, उन्हें इसके बाद आवश्यकता भी नहीं थी क्योंकि, जो जन्मजात प्रतिभा सम्पन्न हो वह औपचारिक पाठ्यक्रम तक सीमित कैसे रह सकता है।

हाट-बाजारों में जाकर स्वास्थ्य-शिक्षा प्रधान परिपत्र बाँटना, पशुधन को कैसे सुरक्षित रखें तथा स्वावलम्बी कैसे बनें, इसके छोटे-छोटे पैम्पलेट्स लिखने, हाथ की प्रेस से छपवाने के लिए उन्हें किसी शिक्षा की आवश्यकता नहीं थी। वे चाहते थे, जनमानस आत्मावलम्बी बने, राष्ट्र के प्रति स्वाभिमान उसका जागे, इसलिए गाँव में जन्मे। इस लाल ने नारी शक्ति व बेरोजगार युवाओं के लिए गाँव में ही एक बुनताघर स्थापित किया व हाथ से कैसे कपड़ा बुना जाय, अपने पैरों पर कैसे खड़ा हुआ जाय, यह सिखाया।

पंद्रह वर्ष की आयु में वसंत पंचमी की वेला में सन् 1926 में उनके घर की पूजा स्थली में, जो उनकी नियमित उपासना का तब से आधार थी, जब से महामना पं. मदनमोहन मालवीय जी ने उन्हें काशी में गायत्री मंत्र की दीक्षा दी थी, उनकी गुरुसत्ता का आगमन हुआ। अदृश्य छायाधारी सूक्ष्म रूप में। उन्होंने प्रज्ज्वलित दीपक की लौ में से स्वयं को प्रकट कर उन्हें उनके द्वारा विगत कई जन्मों में सम्पन्न क्रिया-कलापों का दिग्दर्शन कराया तथा उन्हें बताया कि वे दुर्गम हिमालय से आये हैं एवं उनसे अनेकानेक ऐसे क्रियाकलाप कराना चाहते हैं, जो अवतारी स्तर की ऋषि सत्ताएँ उनसे अपेक्षा रखती हैं। चार बार, कुछ दिन से लेकर एक साल तक की अवधि तक हिमालय आकर रहने, कठोर तप करने का भी उन्होंने संदेश दिया एवं उन्हे तीन आदेश दिए –

1- गायत्री महाशक्ति के चौबीस-चौबीस लक्ष्य के चौबीस महापुरश्चरण जिन्हें आहार के कठोर तप के साथ पूरा करना था।

2- अखण्ड घृत दीप की स्थापना एवं जन-जन तक इसके प्रकाश को फैलाने के लिए अपना समय लगाकर ज्ञानयज्ञ अभियान चलाना, जो बाद में अखण्ड ज्योति पत्रिका के 1938 में प्रथम प्रकाशन से लेकर विचार-क्रान्ति अभियान के विश्वव्यापी होने के रूप में प्रकट हुआ।

3- चौबीस महापुरश्चरणों के दौरान युगधर्म का निर्वाह करते हुए राष्ट्र के निमित्त भी स्वयं को खपाना, हिमालय यात्रा भी करना तथा उनके संपर्क से आगे का मार्गदर्शन लेना।

यह कहा जा सकता है कि युग निर्माण मिशन, गायत्री परिवार, प्रज्ञा अभियान, पूज्य गुरुदेव जो सभी एक-दूसरे के पर्याय हैं, जीवन यात्रा का यह एक महत्त्वपूर्ण मोड़ था, जिसने भावी रीति-नीति का निर्धारण कर दिया। पूज्य गुरुदेव अपनी पुस्तक हमारी वसीयत और विरासत में लिखते हैं कि प्रथम मिलन के दिन ही समर्पण सम्पन्न हुआ। दो बातें गुरुसत्ता द्वारा विशेष रूप से कही गई, संसारी लोग क्या करते हैं और क्या कहते हैं, उसकी ओर से मुँह मोड़कर निर्धारित लक्ष्य की ओर एकाकी साहस के बलबूते चलते रहना एवं दूसरा यह कि अपने को अधिक पवित्र और प्रखर बनाने की तपश्चर्या में जुट जाना- जौ की रोटी व छाछ पर निर्वाह कर आत्मानुशासन सीखना। इसी से वह सार्मथ्य विकसित होगी जो विशुद्धतः परमार्थ प्रयोजनों में नियोजित होगी। वसंत पर्व का यह दिन गुरु अनुशासन का अवधारण ही हमारे लिए नया जन्म बन गया। सद्गुरु की प्राप्ति हमारे जीवन का अनन्य एवं परम सौभाग्य रहा।

भारत के परावलम्बी होने की पीड़ा भी उन्हे उतनी ही सताती थी जितनी कि गुरुसत्ता के आनेदशानुसार तपकर सिद्धियों के उपार्जन की ललक उनके मन में थी। उनके इस असमंजस को गुरुसत्ता ने ताड़कर परावाणी से उनका मार्गदर्शन किया कि युगधर्म की महत्ता व समय की पुकार देख-सुनकर तुम्हें अन्य आवश्यक कार्यों को छोड़कर अग्निकाण्ड में पानी लेकर दौड़ पड़ने की तरह आवश्यक कार्य भी करने पड़ सकते हैं। इसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाते संघर्ष करने का भी संकेत था। 1927 से 1933 तक का समय उनका एक सक्रिय स्वयं सेवक- स्वतंत्रता सेनानी के रूप में बीता, जिसमें घरवालों के विरोध के बावजूद पैदल लम्बा रास्ता पार कर वे आगरा के उस शिविर में पहुँचे, जहाँ शिक्षण दिया जा रहा था, अनेकानेक मित्रों-सखाओं-मार्गदर्शकों के साथ भूमिगत हो कार्य करते रहे तथा समय आने पर जेल भी गये।

छह-छह माह की उन्हें कई बार जेल हुई। जेल में भी जेल के निरक्षर साथियों को शिक्षण देकर व स्वयं अँग्रेजी सीखकर लौटै। आसनसोल जेल में वे पं. जवाहरलाल नेहरू की माता श्रीमती स्वरूपरानी नेहरू, श्री रफी अहमद किदवई, महामना मदनमोहन मालवीय जी, देवदास गाँधी जैसी हस्तियों के साथ रहे व वहाँ से एक मूलमंत्र सीखा जो श्री मालवीय जी ने दिया था कि जन-जन की साझेदारी बढ़ाने के लिए हर व्यक्ति के अंशदान से, मुट्ठी फण्ड से रचनात्मक प्रवृत्तियाँ चलाना। यही मंत्र आगे चलकर एक घंटा समय दान, बीस पैसा नित्य या एक दिन की आय एक माह में तथा एक मुट्ठी अन्न रोज डालने के माध्यम से धर्म घट की स्थापना का स्वरूप लेकर लाखों-करोड़ों की भागीदारी वाला गायत्री परिवार बनता चला गया, जिसका आधार था – प्रत्येक व्यक्ति की यज्ञीय भावना का उसमें समावेश।

स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान कुछ उग्र दौर भी आये, जिनमें शहीद भगत सिंह को फाँसी दिये जाने पर फैले जन आक्रोश के समय श्री अरविन्द के किशोर काल की क्रान्तिकारी स्थिति की तरह उन्होंने भी वे कार्य किये, जिनसे आक्रान्ता शासकों प्रति असहयोग जाहिर होता था। नमक आन्दोलन के दौरान वे आततायी शासकों के समक्ष झुके नहीं, वे मारते रहे परन्तु, समाधि स्थिति को प्राप्त राष्ट्र देवता के पुजारी को बेहोश होना स्वीकृत था पर आन्दोलन के दौरान उन्होंने झण्डा छोड़ा नहीं जबकि, फिरंगी उन्हें पीटते रहे, झण्डा छीनने का प्रयास करते रहे। उन्होंने मुँह से झण्डा पकड़ लिया, गिर पड़े, बेहोश हो गये पर झण्डे का टुकड़ा चिकित्सकों द्वारा दाँतों में भींचे गये टुकड़े के रूप में जब निकाला गया तक सब उनकी सहन शक्ति देखकर आश्चर्य चकित रह गये। उन्हें तब से ही आजादी के मतवाले उन्मत्त श्रीराम मत्त नाम मिला। अभी भी भी आगरा में उनके साथ रहे या उनसे कुछ सीख लिए कई व्यक्ति उन्हें मत्त जी नाम से ही जानते हैं।

लगान बन्दी के आकड़े एकत्र करने के लिए उन्होंने पूरे आगरा जिले का दौरा किया व उनके द्वारा प्रस्तुत वे आँकड़े तत्कालीन संयुक्त प्रान्त के मुख्यमंत्री श्री गोविन्द वल्लभ पंत द्वारा गाँधी जी के समक्ष पेश किये गये। बापू ने अपनी प्रशस्ति के साथ वे प्रामाणिक आँकड़े ब्रिटिश पार्लियामेन्ट भेजे, इसी आधार पर पूरे संयुक्त प्रान्त के लगान माफी के आदेश प्रसारित हुए। कभी जिन्होंने अपनी इस लड़ाई के बदले कुछ न चाहा, उन्हें सरकार ने अपने प्रतिनिधि के साथ सारी सुविधाएँ व पेंशन दिया, जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री राहत फण्ड के नाम समपित कर दी। वैरागी जीवन का, सच्चे राष्ट्र संत होने का इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है ?

1935 के बाद उनके जीवन का नया दौर शुरू हुआ जब गुरुसत्ता की प्रेरणा से वे श्री अरविन्द से मिलने पाण्डिचेरी गये। सांस्कृतिक, आध्यात्मिक मंचों पर राष्ट्र को कैसे परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त किया जाय, यह र्निदेश लेकर अपना अनुष्ठान यथावत् चलाते हुए उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया, जब आगरा में ‘सैनिक’ समाचार पत्र के कार्य वाहक संपादक के रूप में श्रीकृष्णदत्त पालीवाल जी ने उन्हें अपना सहायक बनाया।

बाबू गुलाब राय व पालीवाल जी से सीख लेते हुए सतत स्वाध्यायरत रहकर उनने ‘अखण्ड ज्योति’ नामक पत्रिका का पहला अंक 1938 की वसंत पंचमी पर प्रकाशित किया। प्रयास पहला था, जानकारियाँ कम थीं अतः पुनः सारी तैयारी के साथ विधिवत् 1940 की जनवरी से उन्होंने परिजनों के नाम पाती के साथ अपने हाथ से बने कागज पर पैर से चलने वाली मशीन से छापकर अखण्ड ज्योति पत्रिका का शुभारंभ किया, जो पहले तो दो सौ पचास पत्रिका के रूप में निकली, किन्तु क्रमशः उनके अध्यवसाय, घर-घर पहुँचाने, मित्रों तक पहुँचाने वाले उनके हृदयस्पर्शी पत्रों द्वारा बढ़ती-बढ़ती नवयुग के मत्स्यावतार की तरह आज दस लाख से भी अधिक संख्या में विभिन्न भाषाओं में छपती व करोड़ से अधिक व्यक्तियों द्वारा पढ़ी जाती है।

धन्य है यह धरा जो समय समय पर ऐसे युग पुरुष को जन्म देती है जिनकी हर सांस का यही उददेश्य होता है की कैसे और कितना अधिक दूसरों का दुःख समाप्त किया जा सके !

जय श्री गुरु देव, जय श्री गुरु माता !

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 40 (समस्त उलझनों की एक हल-माँ गायत्री)

यदि आप भी इस वैश्विक परिवर्तन के महा आन्दोलन (जिसका नेतृत्व मुख्य संस्थापक सदस्य, श्री परिमल पराशर जी कर रहें हैं) में अपना प्रचंड योगदान देने का बेशकीमती जज्बा रखते हो तो निःसंकोच अभी तुरंत जुड़िये “स्वयं बनें गोपाल” समूह से और वो भी पूरी तरह से अपनी सुविधानुसार (अर्थात अपने मनपसन्द तरीके व समयानुसार) ! मनपसन्द तरीके से तात्पर्य है कि आपकी चाहे जिस भी क्षेत्र में रूचि हो (जैसे- कला, विज्ञान, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, रंगमंच, संगीत, अभिनय, सुरक्षा, कृषि, रिसर्च (शोध), लेखन, भक्ति, योग, सेवाधर्म या किसी भी अन्य तरह के क्षेत्र में रूचि हो, या श्रमदान करने की इच्छा हो), उसी क्षेत्र से सम्बन्धित कोई भी छोटा से लेकर बड़ा उचित प्रेरणास्पद कार्य करें तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह आपके उस कार्य को पूरे विश्व के सामने उजागर कर, अन्य सभी के मन में भी ऐसा प्रेरणायुक्त कार्य करने की इच्छा को जगाकर, विश्व परिवर्तन की इस महा क्रांति का जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक संक्रामक रूप से प्रसार करेगा ! अगर आपको स्वयं समझ में ना आ रहा हो कि आप कब, कैसे और क्या - क्या कर सकतें हैं तब भी आप तुरंत “स्वयं बनें गोपाल” समूह से निःसंकोच सम्पर्क कर सकतें हैं क्योंकि इसके विशेषज्ञों की सलाह से आप निश्चित रूप से अपने में छिपी हुई अपार संभावनाओं व गुणों को पहचान करके इस विश्व के लिए महान परोपकारी साबित हो सकतें हैं (अर्थात स्वयं गोपाल बनकर श्री कृष्ण राज रुपी स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना में अत्यंत सहायक हो सकते हैं) ! इसके अतिरिक्त यदि आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या “स्वयं बनें गोपाल” समूह से किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो भी हमसे जुड़ें ! हमसे जुड़ने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें (If you have a great passion to make such radical change in entire world so that again Golden Era (full of divine peace, affection, benevolence and all other ethical & moral values) could be established, please join immediately this Social Reform Movement started by “Svyam Bane Gopal” Organization and led by Principal Founder Member Mr. Parimal Parashar)

real alien foot print ufo crop circle india nasa pyramid truth evidenceयदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अब लुप्त हो चुके अति दुर्लभ विज्ञान के प्रारूप {जैसे- प्राचीन गुप्त हिन्दू विमानों के वैज्ञानिक सिद्धांत, ब्रह्मांड के निर्माण व संचालन के अब तक अनसुलझे जटिल रहस्यों का सत्य (जैसे- ब्लैक होल, वाइट होल, डार्क मैटर, बरमूडा ट्रायंगल, इंटर डायमेंशनल मूवमेंट, आदि जैसे हजारो रहस्य), दूसरे ब्रह्मांडों के कल्पना से भी परे आश्चर्यजनक तथ्य, परम रहस्यम एलियंस व यू.ऍफ़.ओ. की दुनिया सच्चाई (जिन्हें जानबूझकर पिछले कई सालों से विश्व की बड़ी विज्ञान संस्थाएं आम जनता से छुपाती आ रही हैं) तथा अन्य ऐसे सैकड़ों सत्य (जैसे- पिरामिड्स की सच्चाई, समय में यात्रा, आदि) के विभिन्न अति रोचक, एकदम अनछुए व बेहद रहस्यमय पहलुओं के उजागर सम्बन्धित अभियान (जिसका नेतृत्व विश्वस्तरीय शोधकर्ता श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय जी कर रहे हैं) का नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, इन दुर्लभ ज्ञानों से अनभिज्ञ समाज को परिचित करवाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Know real truth and most unique theories of several unsolved & hidden mysteries of Universe and Aliens (like- Ancient Hindu Vimana’s scientific principles, exact theory of orientation and way of working of our universe and as well as of some other universes, Black hole, White hole, Dark matter, Bermuda triangle, Inter Dimensional Movement, lots of other secrets of other Universes, Who are Real Aliens and how their UFOs (Unidentified flying objects) work, exact reality of Pyramids, Time Travel and many many more, etc.) Discovered and Published first time in Entire World by Very Knowledgeable, Famous Expert & Researcher, Doctor Saurabh Upadhyay}

डॉक्टर किसलय उपाध्याय स्वराज जन चेतना doctor kislaya upadhyay swaraj jan chetna 0यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा (अत्यंत लोकप्रिय समाजसेवी श्री डॉक्टर किसलय उपाध्याय जी के नेतृत्व में) अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक आदर्श समाज की सेवा योग की असली परिचायक भावना अर्थात “वसुधैव कुटुम्बकम” की अलख ना बुझने देने वाला युद्ध "मिशन डिफिट द हंगर" (भूख को हराने का युद्ध) तथा प्रचंड देशभक्ति पूर्ण, समाज के चहुमुखी विकास व जागरूकता पूर्ण, पर्यावरण सरंक्षण, सौहार्द पूर्ण, शिक्षाप्रद, महिला सशक्तिकरण, नशा एवं कुरीति उन्मूलन, अनाथ गरीब व दिव्यांगो के भोजन वस्त्र शिक्षा रोजगार आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन, मोटिवेशनल (उत्साहवर्धक व प्रेरणास्पद) एवं परोपकार पर आधारित कार्यक्रमों (चैरिटी इवेंट्स, चैरिटी शो व फाईलेन्थ्रोपी इवेंट्स) का आयोजन करवाकर ऐसे वास्तविक परम पुण्य प्रदाता महायज्ञ में अपनी आहुति देना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Please Join Mission “Defeat The Hunger” led by Doctor Kislaya Upadhyay through several Philanthropic, Charity, Amicable or Camaraderie, Patriotic, Civil Society Development, Social awareness, Environment conservation, Educational (academic, scholastic, library, schools Improvement for better teaching, study, learning for poor students), Adult Literacy, Uneducated & money less Family residence free provisions, Women's empowerment, Food Clothes Dwelling (house, quarters, inhabitation) Employment (like all essential needs) availability for poor handicapped (physically challenged), Motivational (enthusiastic & inspiring) Programs, Projects, Events, Show, Function, Conferences, Seminars, Public meetings etc.}

ngo svyam bane gopal process Indian Hindi Hindu spirituality religion religious temple यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह के निष्णात योग प्रशिक्षकों द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक ऐसी महान दुर्लभ यौगिक प्रक्रिया {जो परम आदरणीय ऋषि सत्ता के दिव्य आशीर्वाद स्वरुप प्राप्त हुई है और जिसका निरंतर अभ्यास करने पर, कोई भी आम इंसान (चाहे वह कितना भी बड़ा पापी हो या पुण्यात्मा, गरीब हो या अमीर, स्त्री हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध) निश्चित रूप से दिन ब दिन बढ़ती हुई अपने अंदर ईश्वरत्व की अनुभूति को महसूस करते हुए स्वयं, गोपाल अर्थात ईश्वर बनने की प्रक्रिया की ओर बढ़ने लगता है ! जिसके फलस्वरूप धीरे धीरे उसके शरीर की सभी बीमारियों का नाश होकर, वह चिर युवावस्था की ओर बढ़ता है और तदनन्तर उचित समय आने पर ईश्वर के दर्शन पाने का महा सौभाग्य भी उसे अवश्य प्राप्त होता है, जिसके बाद की उसके जीवन की बागडोर स्वयं गोपाल अर्थात ईश्वर संभाल लेतें हैं ! इस अमृत स्वरुप प्रक्रिया (जिसे रोज करने में मात्र एक घंटा ही समय लगता है) का नाम है “स्वयं बनें गोपाल” योग} का शिविर, ट्रेनिंग सेशन, शैक्षणिक कोर्स, सेमीनार, वर्क शॉप, प्रोग्राम (कार्यक्रम), कांफेरेंस आदि का आयोजन करवाकर समाज में पुनः श्री कृष्ण राज अर्थात स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना के महायज्ञ में अपनी भी पवित्र आहुति देना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Know Extreme Rare Knowledge of Steps (Poses & Processes) of Svyam Bane Gopal Yoga in Hindi and English}

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यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़कर अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में विश्वस्तरीय योग/आध्यात्म सेंटर खोलकर सुख, शान्ति व निरोगता का प्रचार प्रसार करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Please Click here to know, How a Yoga, Meditation and Spirituality Retreat (centres) of World Famous Organization "Svyam Bane Gopal” could be opened in your City/Town/Area

यदि आप विश्व प्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह से योग, आध्यात्म से सम्बन्धित शैक्षणिक कोर्स करके अपने व दूसरों के जीवन को भी रोगमुक्त बनाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें (To get maximum and realistic knowledge of all aspects of Indian Yoga and Spirituality, please Join YOGA & SPIRITUALITY COURSE conducted by "Svyam Bane Gopal" Organization as per your convenience)

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अति पवित्र व मोक्षदायिनी (स्वर्ग/नर्क से भी परे शाश्वत सुखदायिनी) धार्मिक गाथाएं, प्राचीन हिन्दू धर्म के वेद पुराणों व अन्य ग्रन्थों में वर्णित जीवन की सभी समस्याओं (जैसे- कष्टसाध्य बीमारियों से मुक्त होकर चिर यौवन अवस्था प्राप्त करने का तरीका) के समाधान करने के लिए परम आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी व उपयोगी आध्यात्मिक अभ्यास व ज्ञान आदि से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, पूरी तरह से निराश लोगों में फिर से नयी आशा की किरण जगाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें {Please Get organized by "Svyam Bane Gopal" group various Training Sessions, Programs, Events, Conferences, Seminars, Public meetings of all problems removing (like painful diseases and others) and complete body & life changing (like Rejuvenation, feel better younger & inner mental peace) spiritual processes and Real & truthful information of Hindu Godly knowledge (Dharmik Katha or historical & mythological stories of religion) based programs of Vedas, Puranas, Granthas (like- Ramayana, Mahabharata, Bhagavad Gita, Hanuman Chalisa, Shrimad Bhagwat Mahapuran), Ancient Indian holy sacred and religious Books, famous & divine temples of Ishwar (Bhagwan, Devi Devta or Deities) incarnation like Radha Krishna, Braj (Vrindavan, Barsana, Gokul, Mathura), Shiva, Parvathi (Parwati), Ganesha, Kartikeya (Murugan), Durga, Sarswati, Kali, Laxmi (Lakshmi), Vishnu, Venkateshwar, Narayana, Surya (Lord Sun), Tirupati Balaji, Shri Ram, Laxman, Ayyappa, Rudra, Kashi (Varanasi), Mahakaleshwar Jyotir Shivlinga (Shankar idol or Statue), Amrit (nectar), Om (Omkar or Onkar & Gayatri mantr), Mrityunjaya Mahadev Mantra, Moksha, Swarg Narka (Heaven Hell), Pilgrimage (Tirtha Yatra), Lord Jagannath of Puri Dham, Devotees’ Devotion & worship processes (puja path), Bhakti, Shakti, Bhajan Kirtan (Chanting devotional songs) etc., at your premises (in Hindi and English language)}

indian cow urine krishna gomata radha braj vrindavan gomutra गोमूत्र भारतीय देशी गाय माता की नस्लयदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने गाँव/शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में भारतीय देशी गाय माता से सम्बन्धित कोई व्यवसायिक/रोजगार उपक्रम {जैसे- अमृत स्वरुप सर्वोत्तम औषधि माने जाने वाले, सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के गोमूत्र, दूध, घी, मक्खन, दही, छाछ आदि का निर्माण व विक्रय केंद्र तथा गोबर सम्बन्धित उपक्रम जैसे- गोबर गैस प्लांट, गोबर खाद व गोबर निर्मित पूजा अगरबत्तियां, मूर्तियां, गमले, पूजा की थालियां, मच्छर भगाने की क्वाइल आदि} {या मात्र सेवा केंद्र (जैसे- बूढी बीमार उपेक्षित गाय माता के भोजन, आवास व इलाज हेतु प्रबन्धन)} खोलने में सहायता लेकर साक्षात कृष्ण माता अर्थात गाय माता का अपरम्पार बेशकीमती आशीर्वाद के साथ साथ अच्छी आमदनी भी कमाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें ! इस सत्य को कभी नहीं भुलाना चाहिए कि गौमाता से सम्बन्धित खोले जाना हर उपक्रम भारत की बेरोजगारी, गरीबी व भुखमरी को दूर करने का बहुत ही आसान, दूरगामी व निश्चित सफलता देने वाला कदम साबित होगा क्योंकि अकेले गोबर व गोमूत्र के प्रयोग से ही खेती की पैदावार इतनी ज्यादा निश्चित बढ़ाई जा सकती है कि पूरे विश्व में कभी भी, किसी भी प्राणी को भूख की असहनीय अग्नि में जलने की नौबत ही ना आने पाए और साथ ही साथ शुद्ध देशी नस्ल की गाय माता का दूध व मूत्र हर बिमारी (जैसे- एड्स, किसी भी अंग का कैंसर, ट्यूबरक्लोसिस, दमा, नपुंसकता, शीघ्रपतन, वीर्य रज दोष, सफ़ेद दाग, कोढ, लकवा, पागलपन डिप्रेशन स्ट्रेस अलजाइमर रोग या कमजोर याददाश्त की समस्या जैसे सभी मानसिक रोग, अत्यधिक बढ़ी हुई डायबिटीज, शूगर लेवल व इन्सुलिन की अनियमितता, मोटापा, हाई या लो ब्लड प्रेशर, हार्ट ब्लोकेज, पीलिया, यकृत (जिगर, कलेजा या लिवर) की खराबी सूजन सिरोसिस या दर्द, पित्ताशय की बीमारी, प्रोस्टेट ग्लैंड की समस्या, मासिक धर्म सम्बन्धित तकलीफ, फ्लू, वायरस संक्रामक रोग, हृदय की अनियमित धड़कन, किडनी की खराबी, गंजापन, असमय सफदे बाल, नेत्र रोशनी में कमी, ग्लूकोमा, त्वचा की झुर्रियाँ व ग्लो की कमी, त्वचा का ढीलापन, शरीर में ताकत की कमी, सुस्ती, जोश उत्साह की कमी, गठिया, स्याटिका, सरवाईकल स्पोन्डिलाइटिस, अल्सर, बहुमूत्र, पथरी, बवासीर, भगन्दर, गिल्टी, कमजोर पाचन शक्ति, कमजोर मसूढ़े व दांत, पुरानी कब्ज, दस्त, गैस, एसिडिटी, पुराना नजला जुकाम, पुरानी खांसी, किसी भी क़िस्म की एलर्जी, पेट दर्द, फाइलेरिया, खुजली, हड्डी की कमजोरी आदि) में बहुत ही फायदा है {By the help of “Svyam Bane Gopal” organization open any Pure Indian breed Desi Cow mother based venture/employment/business/industry to earn sufficient money and priceless blessings because Gomutra (urine) is very beneficial Home Remedy For all diseases (like- hiv/aids, all type of cancers, tuberculosis, asthma, impotency or infertility or eunuchism, Semen sperm diseases, early or premature Ejaculation, Vitiligo, Leukoderma, Leprosy, Paralysis, Insanity mania psychosis madness Craziness Depression fear stress Alzheimer's disease like psychiatric disorder or Mental disorder illness or brain health related issues, Kidney Stones, baldness, Alopecia or Hair loss from the scalp, premature greying or white hair, Eye Disorders, Low Vision or Vision loss Blindness, eye cataract retina problem, glaucoma, jaundice, Hepatitis, Fatty Liver, Liver Inflammation pain damage cirrhosis, weakness, Gall bladder ailments, Skin Care to Prevent Wrinkles Aging Skin Dry Skin, loose skin Tighten Face Skin, Itching, physical weakness and loss of strength, Feeling Tired Weak Fatigued Lethargy, arthritis, rheumatism, Sciatica, cervical spondylosis, Stomach Ulcer, polyuria, Enlarged prostate gland, Type 2 & Type 1 Diabetes mellitus, high blood glucose (or blood sugar), inadequate insulin production, overweight or obesity (fatness), high blood pressure or low blood pressure, Blocked Arteries of heart, irregular palpitation, piles, fistula, Tumour (Tumor), lymph nodes (gilti), Indigestion (Dyspepsia), Irregular Painful Absence Menstruation (period) Cycle problem, Dental Problems, gum inflammation bleeding, swollen red gums toothache, cavities, constipation, loose motion, dysentery, cholera, abdomen or intestinal gas burping belching flatulence farting Bloating, acidity, Cold and Cough, Acute or Chronic Bronchitis, flu, allergy, crampy achy dull intermittent sharp Abdominal pain or stomachache, Filariasis, bones & Muscles weaken joints tendons ligaments cartilage, etc.). And Bharatiya desi cow ma milk, curd, butter, butter milk, ghee (ghi), paneer (cheese), khoa (khoya or mawa), are use full in treatment and cure of many different diseases {depends on various Symptoms, Signs & Treatment Functions, diseases, and tests (means in hindi bimari rog ka Ilaj lakshan gharelu upay shujhav)}. Pure Indian breed desi cow mother Gobar (dung) is extreme useful in maximization of cultivation harvest crop & manufacturing of herbal (jadibuti, jadibooti) fertilizers, pesticides (complete irrigation solution) and in other household businesses, so that hunger, starvation of poor people could be defeated}

जानिये “स्वयं बनें गोपाल” समूह के बारे में

जानिये "स्वयं बनें गोपाल" समूह के प्रमुख स्वयं सेवकों के बारे में (A Brief Introduction to “Svyam Bane Gopal” Organization’s Key Volunteers )

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