निबंध – दीपमाला (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

· December 15, 2012

download (3)अंधकारमय निशा में दूर-दूर तक शुभ्र ज्‍योत्‍सना छिटकाने वाली दीपावली की दीपमाला! तेरा और तेरी रश्मियों का स्‍वागत। स्‍वागत इसलिये नहीं कि तेरी श्री, श्री की श्री है, संपन्‍नता की द्योतक और वैभव का रूप है, धनराशियों का प्रतिबिंब और सुख-क्रीड़ाओं की सूचना है। सुख और समृद्धि, आनंद और आहलाद की भावनाओं में वह शक्ति नहीं जो बुझे हुए मन और दबे हुए हृदयों को तेरी अभ्‍यर्थना, मेरे अभिवादन के लिये उत्‍कंठित कर सके। काल-चक्र की कुटिल गति के कारण आज भू-मंडल के इस भाग में जहाँ उत्‍सुकता तेरी बाट जोहती और पसरे हुए बाहु तेरा स्‍वागत करते, सुषमा की वह आभा जो तेरे अंतरतर में निहित है और आहलाद की वह छटा जिसे सर्वत्र छिटकाती हुई आती है, हृदयों को उठाने, उन्‍हें आगे बढ़ाने, उन्‍हें कुछ सुनाने और उनसे कुछ कहलाने में अशक्‍त-नितांत असमर्थ है। बात यह नहीं कि तुझमें बल नहीं रहा, तुझमें तत्‍व नहीं। तुझमें शक्ति है और विभूति है और इसका सबूत यह है कि अंधकार से ढकी हुई गिरी पड़ी दरिद्रता और रोग के आक्रमणों से जर्जरित झोंपड़ियों के सिरों पर निश्चिंतता और गर्व से मुस्‍कराती हुई अट्टालिकाएँ तेरी माला को मुकुट के रूप में धारण किये आज भी भारतीय आकाश से बातें करती दिखायी देती हैं। उन्‍हें मतलब नहीं कि जननी के किस अंचल में छेद हो गया। उन्‍हें सरोकार नहीं कि किस झोंपड़े की दीवारें अब गिरीं और तब गिरीं। वे जानना नहीं चाहतीं कि जिस घड़ी उनके यहाँ दीवाली है, उसी घड़ी दूसरों के यहाँ, उन्‍हीं के-से दूसरे, उन्‍हीं की-सी मिट्टी के बने दूसरे, और दूसरे भी नहीं, किंतु अपने ही के यहाँ दीवाला है। उनके यहाँ यदि, दीपमाला, तेरा प्रकाश है तो उन दूसरों के यहाँ आग लगी हुई। एक ओर यदि सुख और संपत्ति का प्रवाह है तो दूसरी ओर दरिद्रता और कष्‍ट की बाढ़। एक ओर संतोष और निश्चितंता की बाढ़ है तो दूसरी ओर क्‍लेश और अन्‍याय का राज्‍य। तेरी शक्ति का यह कैसा अच्‍छा परिचय है! तेरी महत्‍ता का यह कैसा प्रदर्शन! तो भी तेरा स्‍वागत है। स्‍वागत हृदय से, रोम-रोम से, आत्‍मा के अंतर-तर से। दीपावली के नाम पर नहीं, दीपकों के नाम पर। मिट्टी के पात्रो! तेल और बत्‍ती से सुसज्जित वस्‍तुओं! दीपावली के नाम पर नहीं, अपने गुणों के नाम पर, केवल उस प्रकाश के नाम पर, जो तुम उस समय भी देते जबकि तुम दीपावली को छोड़ कर और किसी अवसर पर प्रज्‍वलित किये जाते। अपना प्रकाश दूर तक, दूर-दूर तक फेंको, जहाँ तक फेंक सको वहाँ तक फेंको। तुम्‍हारा प्रकाश अंधे की आँखों की ज्‍योति का सहारा बने। वे आँखें खुल जायें जो बंद है और जो बंद कर ली गयी है। देश की भूली-भटकी मोह-माया के पाश में जकड़ी-रगड़ी आत्‍मा उठ बैठे, उसे दिखाई पड़े कि इने-गिने महलों के चारों ओर देश के असंख्‍य झोंपड़े टूटी हुई छतों और फटी हुई दीवारों को अपने अंक में लिये अपने रूप और गुण के बल से बघिर कानों तक में पहुँच सकने वाली ध्‍वनि के साथ कह रहे हैं कि देश की कुछ मखमली गद्दियों और षटरस-व्‍यंजन-युक्‍त थालियों पर मुग्‍ध होकर करोड़ों प्राणियों की व्‍यथा से आँखें मत चुराओ, तुम्‍हारे ही रक्त-मांस से बने हुए जीवों की हड्डियाँ और आत्‍मा मधुर मुरली की इस ध्‍वनि पर, कि देश का धन बढ़ता जा रहा है और भारतवासी अमीर होते जा रहे हैं, तुम्‍हारी मंद-बुद्धि शुष्‍कता और क्रूरता का उपहास करती है और कहती है कि दूसरों की बातों की अपेक्षा अपनी आँख और अपने हृदय पर अधिक विश्‍वास करना सीखो। दीपमाला! तेरे प्रकाश में, सुख और समृद्धि स्‍वरूपा इस ज्‍योति में देश की आत्‍मा, दरिद्रता के साथ, अपनी अशक्‍तता और असमर्थता का चित्र पूरे हृदय के साथ देखे। वह देखे भारतवासी कीट-पतंग की मौत मर रहे हैं। वह देखे भारतवासी घर और बाहर पिसे और पीसे जा रहे हैं। वह देखे, मार्ग, बंद है, मनुष्यता का पंचमांश न सही तो मनुष्‍यों के पंचमांश के हाथ-पैर बँधे हुए है, विकास और उन्‍नति रूक रही है। वह देखे कि अलापने वाली जिह्वाओं के न्‍याय और स्‍वाधीनता के रागों में कपट और क्रूरता की रागिनी घुसी हुई है, सांसारिक उन्‍नति के क्षेत्र में दूसरों के सिरों ही पर पैर रखकर दौड़ लगाने की होड़ लग रही है। और वह यह सब देखे, और भलीभाँति देखे और फिर दीपमाला! निर्जीव दीपकों की दैदीप्‍यवान लड़ी! तेरा काम समाप्‍त होता है। तेरे दिखाये दृश्‍य को देखकर भी मनुष्य की सजीव शक्ति, ईश्‍वर की अगम्‍य शक्ति का सहारा लेते हुए यदि आगे न बढ़े तो, दीपावली, फिर तेरी जागती ज्‍योति का दोष न होगा। समझा जायेगा कि मनुष्य में, मनुष्य कहलाते हुए भी देखने और समझने की शक्ति नहीं रही।

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

यदि आप भी इस वैश्विक परिवर्तन के महा आन्दोलन में, अपना प्रचंड योगदान देने का बेशकीमती जज्बा रखते हो तो निःसंकोच अभी तुरंत जुड़िये “स्वयं बनें गोपाल” समूह से और वो भी पूरी तरह से अपनी सुविधानुसार (अर्थात अपने मनपसन्द तरीके व समयानुसार) ! मनपसन्द तरीके से तात्पर्य है कि आपकी चाहे जिस भी क्षेत्र में रूचि हो (जैसे- कला, विज्ञान, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, रंगमंच, संगीत, अभिनय, सुरक्षा, कृषि, रिसर्च (शोध), लेखन, भक्ति, योग, सेवाधर्म या किसी भी अन्य तरह के क्षेत्र में रूचि हो, या श्रमदान करने की इच्छा हो), उसी क्षेत्र से सम्बन्धित कोई भी छोटा से लेकर बड़ा उचित प्रेरणास्पद कार्य करें तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह आपके उस कार्य को पूरे विश्व के सामने उजागर कर, अन्य सभी के मन में भी ऐसा प्रेरणायुक्त कार्य करने की इच्छा को जगाकर, विश्व परिवर्तन की इस महा क्रांति का जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक संक्रामक रूप से प्रसार करेगा ! अगर आपको स्वयं समझ में ना आ रहा हो कि आप कब, कैसे और क्या - क्या कर सकतें हैं तब भी आप तुरंत “स्वयं बनें गोपाल” समूह से निःसंकोच सम्पर्क कर सकतें हैं क्योंकि इसके विशेषज्ञों की सलाह से आप निश्चित रूप से अपने में छिपी हुई अपार संभावनाओं व गुणों को पहचान करके इस विश्व के लिए महान परोपकारी साबित हो सकतें हैं (अर्थात स्वयं गोपाल बनकर श्री कृष्ण राज रुपी स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना में अत्यंत सहायक हो सकते हैं) ! इसके अतिरिक्त यदि आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या “स्वयं बनें गोपाल” समूह से किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो भी हमसे जुड़ें ! हमसे जुड़ने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

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यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने गाँव/शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में भारतीय देशी गाय माता से सम्बन्धित कोई व्यवसायिक/रोजगार उपक्रम {जैसे- अमृत स्वरुप सर्वोत्तम औषधि माने जाने वाले, सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के गोमूत्र, दूध, घी, मक्खन, दही, छाछ आदि का निर्माण व विक्रय केंद्र तथा गोबर सम्बन्धित उपक्रम जैसे- गोबर गैस प्लांट, गोबर खाद व गोबर निर्मित पूजा अगरबत्तियां, मूर्तियां, गमले, पूजा की थालियां, मच्छर भगाने की क्वाइल आदि} {या मात्र सेवा केंद्र (जैसे- बूढी बीमार उपेक्षित गाय माता के भोजन, आवास व इलाज हेतु प्रबन्धन)} खोलने में सहायता लेकर साक्षात कृष्ण माता अर्थात गाय माता का अपरम्पार बेशकीमती आशीर्वाद के साथ साथ अच्छी आमदनी भी कमाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

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