निबंध – जिहाद की जरूरत (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

· December 18, 2012

download (3)अब हालत इतनी नाजुक हो गई है कि बिना जिहाद के काम चलता नहीं दिखाई देता। धर्म का नाम लेकर घृणित पाप के गड्ढे खोदने वालों की संख्‍या घृणित रक्‍त-बीज की तरह बढ़ रही है। पहले भी समाज में धर्मढोंगी रहे हैं। हमेशा से वे रहते आये हैं। मनुष्‍य न तो कभी पूर्ण निर्भ्रांत था और न अभी शायद बहुत दिनों तक वह इस अवस्‍था को प्राप्‍त होगा ही, लेकिन समाज में कुछ ऐसे युग आते हैं, जिनमें मिथ्‍या धर्म और परिपाटी की भावना बहुत बलवती और देशव्‍यापिनी हो जाती है। ऐसे ही अवसरों पर हाथ में तलवार लेकर निकल पड़ने की जरूरत होती है। जब तक लोग धर्म की दुहाई दे-दे कर पाप की खड्ड-खाई जीवन की, व्‍यक्तिगत जीवन की, सँकरी गलियों में खोदते रहते हैं, तब तक तो समाज के विचारशील पुरुष विशेष चिंता नहीं करते, परंतु जब सामाजिक और राष्‍ट्रीय जीवन के राजमार्ग पर धर्म की कुदाली, पाप और पामरता के गर्त खोदने लगती है, तब देश के कुछ हृदय अधिक व्‍याकुल और चिंतित हो जाते हैं।

जीवन अनमिल एवं विच्छिन्‍न भेदभावों की पिटारी नहीं है, जो बात आज व्‍यक्गित जीवन में घटित होती है, वही कल समाज के तरल वक्षस्‍थल पर उतराने लगती है। भारतवर्ष का विशाल इतिहास इसका साक्षी है। वैदिकी हिंसा की भावना पहले व्‍यक्तिगत यज्ञ-यागादिक क्रियाओं में सनिनविष्‍ट थी, धीरे-धीरे वह समाज-व्‍यापिनी हो गयी। गंगा, यमुना, सरस्‍वती और पंचनद की भूमि एक विशाल हत्‍यागृह में परिणत हो गयी, जिसे कुछ व्‍यक्ति परसों तक अपनी वैयक्तिक हैसियत से करते रहे, उसे कल सारा का सारा समाज करने लग गया। इस समय जिहाद की जरूरत महसूस हुई। समाज की आत्‍मा काँपी। पाखंड का विच्‍छेद करने के लिये एक खड्ग-हस्‍त महात्‍मा की माँग हुई और न जाने किस उदारदानी ने देश की वह मुँहमाँगी मुराद पूरी की, भगवान बुद्धदेव का अवतार हुआ। मानों हत्‍या और हिंसा की ज्‍वाला को बुझाने के लिये नील जलद का हृदय फट पड़ा। फिर इसी प्रकार सदियाँ गुजरीं। आत्‍मा के मंथन की जो क्रिया भगवान बुद्धदेव ने बतलाई थी, वह मंद हो चली। खाँड़े की धार कुंद हो गयी। उस पर जंग चढ़ गया। और खड्ग को कुंद होता देख पाप ने अपने बीज बोये और उसका पौधा उगा और उसकी बेल फैली और फिर जिहाद जरूरत महसूस हुई। वही क्रिया। कैसा अद्भुत चक्र! फिर-फिर कर उसकी परिधि में पैर पड़ने लगता है। कुछ बौद्ध भिक्षु, पहले चोरी-चुपके वासना-तृप्ति का साधन ढूँढने लगे। व्‍याधि फैली। एक संघ से दूसरे संघ में और दूसरे से तीसरे में और फिर सारे देश भर में धर्म के नाम पर पाप के गड्ढे खोदे जाने लगे। फिर समाज कुनमुनाया। जिहाद हुआ। स्‍वामी शंकराचार्य पधारे। वेदांत धर्म का रूप स्‍थापित किया गया। पर, समाज स्थिर नहीं रहता। जीवेश्‍वरेक्‍य के सिद्धांत की छीछालेदर की गयी। ‘अहंब्रह्मास्मि’ का दुरुपयोग होने लगा। उच्‍चतम आध्‍यात्मिक सत्‍यता और साधना का व्‍यवहार में ऐसा निकृष्‍ट उपयोग हुआ कि समाज फिर तिलमिलाया।। तब, विशिष्‍टाद्वैत, द्वैत आदि मन का प्रतिपादन हुआ। सूखा ज्ञान भक्ति के रंग में रँगा। उदाहरण कहाँ तक दें? भारतवर्ष के इतिहास का यह अत्‍यंत विस्‍तृत पृष्‍ठ जो चाहे खोल के देख ले। प्राणांत की बेला में जिस तरह प्राणों का पुन: संचार हमारे समाज के अस्थिपंजर में किया गया है, वह प्रत्‍येक अन्‍वेषक की निगाह में पड़ जायेगा। नानकदेव, कबीर, गुरू गोविंदसिंह और इनके पहले रामानुज, मध्‍वाचार्य, वल्‍लभ आदि आचार्यों का आविर्भाव इसी एक आवश्‍यकता की पूर्ति के लिये हुआ। इस युग में राममोहन और दयानंद अपने खाँड़ों की धार का प्राबल्‍य आज तक हमें दिखा रहे हैं। य‍ह सच है। पर, इस समय हमारी आवश्‍यकताएँ एक विशेष प्रकार की हैं। हम अपनी धार्मिक चहारदीवारी में बँधे हुए अपने आसपास के तमाम संसार को भुलाये बैठे है।

आज हमें जिहाद करना है-इस धर्म के ढोंग के खिलाफ, इस धार्मिक तुनुकमिजाजी के खिलाफ। जातिगत झगड़े बढ़ रहे हैं। खून की प्‍यास लग रही है। एक-दूसरे को फूटी आँखों भी हम देखना नहीं चाहते। अविश्‍वास, भयातुरता और धर्माडंबर के कीचड़ में फँसे हुए हम नारकी जीव यह समझ रहे हैं कि हमारी सिर-फुड़ौवल की लीला से धर्म की रक्षा हो रही है। हमें आज शंख उठाना है उस धर्म के विरुद्ध जो तर्क, बुद्धि और अनुभव की कसौटी पर ठीक नहीं उतर सकता। सहारनपुर में झगड़े का आसन्‍न कारण क्‍या था? यही न कि पीपल की एक डाली अलम के झंडे में अड़ती थी। पामर! ढोंगी! पशु! किस धर्म कके किस तर्क और बुद्धि के बल पर हम पीपल की डाली को अकाट्य और अछेद्य समझें? क्‍या किसी धर्म में ऐसा लिखा है? और यह परिपाटी, यह बाबा वाक्‍य ही क्‍या धर्म है? ऐसे धर्म का नाश, सर्वनाश, होना चाहिये। मूर्ख जाहिल मुसलमान अलम के झंडे को जब तक एक हजार फीट का-इतना ऊँचा कि वह सातवें आसमान की छत से जाकर टकराए-न बनायेंगे, तब तक उनका धर्म नहीं निभेगा, क्‍यों? इस बेहूदगी का, इस नीचता का भी कुछ ठिकाना है? और इन्‍हीं बातों में सिर फूटें! हमें क्‍या हो गया है? हिंदू लोग अपनी छाती पर दकियानूसी रस्‍मो-रिवाज का पत्‍थर रखे बैठे हैं। वे समझते हैं कि हम धर्म की रक्षा कर रहे हैं। यदि आज साक्षात् भगवान श्रीकृष्‍ण भी आकर हम धर्मढोंगियों को समझायें कि जो कुछ हम कर रहे हैं – विधवाओं, अछूतों, विवाहादि संस्‍कारों, जाति-पाँति के पाशविक अस्‍वाभाविक बंधनों आदि को अलंध्‍य संस्‍थाओं का रूप देकर हम जिस धर्म की रक्षा का पाखंड रचते रहे हैं-वह वास्‍तव में धर्म नहीं, अधर्म और महान अधर्म है, तो भी हमें विश्‍वास है कि हम उनकी बात न मानेंगे। उसके प्रतिकूल हम अपनी छाती पर रखे हुए पत्‍थर को इस रूढि़-पूजा की शिला को और अधिक दुलार से चिकाएँगे और शायद रोकर कहेंगे, ‘अरे, मेरे अच्‍छे शिलाधर्म! मैं तुझे न छोडूँगा।’ जब अवस्‍था ऐसी हो रही है तब भला धर्म के ढोंग के विरुद्ध जिहाद न छेड़ा जाये तो और क्‍या हो! मस्जिदों के सामने बाजा न बजाओ, क्‍योंकि इबादत में खलल पड़ता है। बंगाल में ऐसा कभी नहीं हुआ। मस्जिदों के सामने न तो कोई ‘हरि बोल’ की ध्‍वनि कर सकता है और न ‘रामनाम’ की। वहाँ यह रिवाज है। मिस्‍टर गजनवी अब यह एक नया शिगूफा छोड़ रहे हैं। हम पूछना चाहते हैं कि यह सब जो हो रहा है, अथवा बंगाल में, यह मानकर भी कि उनका कथन सत्‍य है, जो कुछ होता रहा है, क्‍या वह धर्म की रू से जायज है? क्‍या इस बाजे-गाजे और हरि बोल रोकने-रूकवाने ही में धर्म? हम इस धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध जिहाद छेड़ना चाहते हैं। हम न तो ऐसे धर्म को धर्म कहते हैं और न ऐसी मूर्खता को धर्म-स्‍नेह के नाम से पुकारने को तैयार हैं। चाहे हिंदू हों या मुसलमान, यदि वे अपने वाक्‍यों को तर्क, बुद्धि और अनुभव-ज्ञान के बल पर पुष्‍ट नहीं कर सकते तो हम उन कार्यों को ढकोसला कहेंगे।

भारतवासियों! एक बात सदा ध्‍यान में रखो। धार्मिक कट्टरता का युग चला गया। आज से 500 वर्ष पूर्व यूरोप जिस अंधविश्‍वास, दम्‍भ और धार्मिक बर्बरता के युग में था, उस युग में भारतवर्ष को घसीट कर मत ले जाओ। जो मूर्खताएँ अ‍ब तक हमारे व्‍यक्तिगत जीवन का नाश कर रही थीं, वे अब राष्‍ट्रीय प्रांगण में फैल कर हमारे बचे-खुचे मानव-भावों का लोप कर रही हैं। जिनके कारण हमारा व्‍यक्तित्‍व पतित होता गया, अब उन्‍हीं के कारण हमारा देश तबा‍ह हो रहा है। हिंदू-मुसलमानों के झगड़ों और हमारी कमजोरियों को दूर करने का केवल एक यही तरीका है कि समाज के कुछ सत्‍यनिष्‍ठ और सीधे दृढ़ विश्‍वासी पुरुष धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध जिहाद शुरू कर दें। जब तक यह मूर्खता नष्‍ट न होगी, तब तक देश का कल्‍याण न होगा। समझौते कर लेने, नौकरियों का बँटवारा कर लेने और अस्‍थायी सुलहनामों को लिखकर हाथ काले करने से देश को स्‍वतंत्रता न मिलेगी। हाथ में खड़ग लेकर, तर्क और ज्ञान की प्रखर करवाल लेकर, आगे बढ़ने की जरूरत है। जिन हाथों में शक्ति है, उनसे हम यह पुण्‍य कार्य आरंभ करने का अनुरोध करते हैं। एक ऐसे संघ के बनने की आवश्‍यकता है जो किसी की लगी-लिपटी न कहे, जो सदा सत्‍य पर अटल रहे। मुक्ति का मार्ग यही है। पाप के गड्ढे राष्‍ट्र के राजमार्ग पर खोदना चाहिये, क्‍योंकि भारत की राष्‍ट्रीयता का रथ उस पर होकर गुजर रहा है। हम चाहते हैं कि कुछ आदमी ऐसे निकल आवें जिनमें हिंदू भी हों और मुसलमान भी जो कि इन सब मूर्खताओं को, जिनके हिंदू और मुसलमान दोनों शिकार हो रहे हैं, तीव्र निंदा करें। यह निश्‍चय है कि पहले-पहल इनकी कोई न सुनेगा। इन पर पत्‍थर फेंके जायेंगे। ये प्रताड़ित और निंदा-भाजन होंगे। पर, अपने सिर पर सारी निंदा और सारी कटुता को लेकर जो आगे आना चाहते हैं, उन्‍हीं को राष्‍ट्र यह निमंत्रण दे रहा है। सीस उतारै भुइँ, ता पर राखै पाँव, ऐसे जो हों, वे ही आवें।

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

यदि आप भी इस वैश्विक परिवर्तन के महा आन्दोलन में, अपना प्रचंड योगदान देने का बेशकीमती जज्बा रखते हो तो निःसंकोच अभी तुरंत जुड़िये “स्वयं बनें गोपाल” समूह से और वो भी पूरी तरह से अपनी सुविधानुसार (अर्थात अपने मनपसन्द तरीके व समयानुसार) ! मनपसन्द तरीके से तात्पर्य है कि आपकी चाहे जिस भी क्षेत्र में रूचि हो (जैसे- कला, विज्ञान, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, रंगमंच, संगीत, अभिनय, सुरक्षा, कृषि, रिसर्च (शोध), लेखन, भक्ति, योग, सेवाधर्म या किसी भी अन्य तरह के क्षेत्र में रूचि हो, या श्रमदान करने की इच्छा हो), उसी क्षेत्र से सम्बन्धित कोई भी छोटा से लेकर बड़ा उचित प्रेरणास्पद कार्य करें तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह आपके उस कार्य को पूरे विश्व के सामने उजागर कर, अन्य सभी के मन में भी ऐसा प्रेरणायुक्त कार्य करने की इच्छा को जगाकर, विश्व परिवर्तन की इस महा क्रांति का जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक संक्रामक रूप से प्रसार करेगा ! अगर आपको स्वयं समझ में ना आ रहा हो कि आप कब, कैसे और क्या - क्या कर सकतें हैं तब भी आप तुरंत “स्वयं बनें गोपाल” समूह से निःसंकोच सम्पर्क कर सकतें हैं क्योंकि इसके विशेषज्ञों की सलाह से आप निश्चित रूप से अपने में छिपी हुई अपार संभावनाओं व गुणों को पहचान करके इस विश्व के लिए महान परोपकारी साबित हो सकतें हैं (अर्थात स्वयं गोपाल बनकर श्री कृष्ण राज रुपी स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना में अत्यंत सहायक हो सकते हैं) ! इसके अतिरिक्त यदि आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या “स्वयं बनें गोपाल” समूह से किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो भी हमसे जुड़ें ! हमसे जुड़ने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़कर अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में विश्वस्तरीय योग/आध्यात्म सेंटर खोलकर सुख, शान्ति व निरोगता का प्रचार प्रसार करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक ऐसी महान दुर्लभ यौगिक प्रक्रिया {जो हमें परम आदरणीय ऋषि सत्ता के दिव्य कृपा प्रसाद स्वरुप प्राप्त हुई है और जिसका निरंतर अभ्यास करने पर, कोई भी आम इंसान (चाहे वह कितना भी बड़ा पापी हो या पुण्यात्मा, गरीब हो या अमीर, स्त्री हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध) निश्चित रूप से दिन ब दिन बढ़ती हुई अपने अंदर ईश्वरत्व की अनुभूति को महसूस करते हुए स्वयं, गोपाल अर्थात ईश्वर बनने की प्रक्रिया की ओर बढ़ने लगता है ! जिसके फलस्वरूप धीरे धीरे उसके शरीर की सभी बीमारियों का नाश होकर, वह चिर युवावस्था की ओर बढ़ता है और तदनन्तर उचित समय आने पर ईश्वर के दर्शन पाने का महा सौभाग्य भी उसे अवश्य प्राप्त होता है, जिसके बाद की उसके जीवन की बागडोर स्वयं गोपाल अर्थात ईश्वर संभाल लेतें हैं ! इस अमृत स्वरुप प्रक्रिया (जिसे रोज करने में मात्र एक घंटा ही समय लगता है) का नाम है “स्वयं बनें गोपाल” योग} का शिविर, ट्रेनिंग सेशन, शैक्षणिक कोर्स, सेमीनार, वर्क शॉप, प्रोग्राम (कार्यक्रम), कांफेरेंस आदि का आयोजन करवाकर समाज में पुनः श्री कृष्ण राज अर्थात स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना के महायज्ञ में अपनी भी पवित्र आहुति देना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप विश्व प्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह से योग, आध्यात्म से सम्बन्धित शैक्षणिक कोर्स करके अपने व दूसरों के जीवन को भी रोगमुक्त बनाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में योग, प्राणायाम, आध्यात्म, हठयोग (अष्टांग योग) राजयोग, भक्तियोग, कर्मयोग, कुण्डलिनी शक्ति व चक्र जागरण, योग मुद्रा, ध्यान, प्राण उर्जा चिकित्सा (रेकी या डिवाईन हीलिंग), आसन, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर, नेचुरोपैथी आदि का शिविर, ट्रेनिंग सेशन्स, शैक्षणिक कोर्सेस, सेमीनार्स, वर्क शॉप्स, प्रोग्राम्स (कार्यक्रमों), कांफेरेंसेस आदि का आयोजन करवाकर समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व सचेत करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अब लुप्त हो चुके अति दुर्लभ विज्ञान के प्रारूप {जैसे- प्राचीन गुप्त हिन्दू विमानों के वैज्ञानिक सिद्धांत, ब्रह्मांड के निर्माण व संचालन के अब तक अनसुलझे जटिल रहस्यों का सत्य (जैसे- ब्लैक होल, वाइट होल, डार्क मैटर, बरमूडा ट्रायंगल, इंटर डायमेंशनल मूवमेंट, आदि जैसे हजारो रहस्य), दूसरे ब्रह्मांडों के कल्पना से भी परे आश्चर्यजनक तथ्य, परम रहस्यम एलियंस व यू.ऍफ़.ओ. की दुनिया सच्चाई (जिन्हें जानबूझकर पिछले कई सालों से विश्व की बड़ी विज्ञान संस्थाएं आम जनता से छुपाती आ रही हैं) तथा अन्य ऐसे सैकड़ों सत्य (जैसे- पिरामिड्स की सच्चाई, समय में यात्रा, आदि) के विभिन्न अति रोचक, एकदम अनछुए व बेहद रहस्यमय पहलुओं से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, इन दुर्लभ ज्ञानों से अनभिज्ञ समाज को परिचित करवाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अति पवित्र व मोक्षदायिनी धार्मिक गाथाएं, प्राचीन हिन्दू धर्म के वेद पुराणों व अन्य ग्रन्थों में वर्णित जीवन की सभी समस्याओं (जैसे- कष्टसाध्य बीमारियों से मुक्त होकर चिर यौवन अवस्था प्राप्त करने का तरीका) के समाधान करने के लिए परम आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी व उपयोगी साधनाएं व ज्ञान आदि से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, पूरी तरह से निराश लोगों में फिर से नयी आशा की किरण जगाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक आदर्श समाज की सेवा योग की असली परिचायक भावना अर्थात “वसुधैव कुटुम्बकम” की अलख ना बुझने देने वाले विभिन्न सौहार्द पूर्ण, देशभक्ति पूर्ण, समाज के चहुमुखी विकास व जागरूकता पूर्ण, पर्यावरण सरंक्षण, शिक्षाप्रद, महिला सशक्तिकरण, नशा एवं कुरीति उन्मूलन, अनाथ गरीब व दिव्यांगो के भोजन वस्त्र शिक्षा रोजगार आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन, मोटिवेशनल (उत्साहवर्धक व प्रेरणास्पद) एवं परोपकार पर आधारित कार्यक्रमों (चैरिटी इवेंट्स, चैरिटी शो व फाईलेन्थ्रोपी इवेंट्स) का आयोजन करवाकर ऐसे वास्तविक परम पुण्य प्रदाता महायज्ञ में अपनी आहुति देना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने गाँव/शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में भारतीय देशी गाय माता से सम्बन्धित कोई व्यवसायिक/रोजगार उपक्रम {जैसे- अमृत स्वरुप सर्वोत्तम औषधि माने जाने वाले, सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के गोमूत्र, दूध, घी, मक्खन, दही, छाछ आदि का निर्माण व विक्रय केंद्र तथा गोबर सम्बन्धित उपक्रम जैसे- गोबर गैस प्लांट, गोबर खाद व गोबर निर्मित पूजा अगरबत्तियां, मूर्तियां, गमले, पूजा की थालियां, मच्छर भगाने की क्वाइल आदि} {या मात्र सेवा केंद्र (जैसे- बूढी बीमार उपेक्षित गाय माता के भोजन, आवास व इलाज हेतु प्रबन्धन)} खोलने में सहायता लेकर साक्षात कृष्ण माता अर्थात गाय माता का अपरम्पार बेशकीमती आशीर्वाद के साथ साथ अच्छी आमदनी भी कमाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

जानिये “स्वयं बनें गोपाल” समूह और इसके प्रमुख स्वयं सेवकों के बारे में

Click Here To View 'About Us / Contact Us' in English

धन्यवाद,
(“स्वयं बनें गोपाल” समूह)

हमारा सम्पर्क पता (Our Contact Address)-
“स्वयं बनें गोपाल” समूह,
प्रथम तल, “स्वदेश चेतना” न्यूज़ पेपर कार्यालय भवन (Ground Floor, “Swadesh Chetna” News Paper Building),
समीप चौहान मार्केट, अर्जुनगंज (Near Chauhan Market, Arjunganj),
सुल्तानपुर रोड, लखनऊ (Sultanpur Road, Lucknow),
उत्तर प्रदेश, भारत (Uttar Pradesh, India).

हमारा सम्पर्क फोन नम्बर (Our Contact No)– 91 - 0522 - 4232042, 91 - 07607411304

हमारा ईमेल (Contact Mail)– info@svyambanegopal.com

हमारा फेसबुक (Our facebook Page)- https://www.facebook.com/Svyam-Bane-Gopal-580427808717105/

हमारा ट्विटर (Our twitter)- https://twitter.com/svyambanegopal

आपका नाम *

आपका ईमेल *

विषय

आपका संदेश



ये भी पढ़ें :-



[ajax_load_more preloaded="true" preloaded_amount="3" images_loaded="true"posts_per_page="3" pause="true" pause_override="true" max_pages="3"css_classes="infinite-scroll"]