निबंध – कुली-प्रथा : शैतान बपतिस्मा ले रहा है (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

· December 22, 2012

download (3)1792 के पहले यूरोप तथा अमेरिका में गुलामों का निर्बाध व्‍यापार होता था। हब्शियों और नीग्रो लोगों को पकड़-पकड़कर यूरोपियन व्‍यापारी यूरोप तथा अमेरिका के रईसों और जमींदारों के हाथ बेचा करते थे। इन गुलामों की हालत क्‍या थी इसके कहने की आवश्‍यकता नहीं। उनसे हर तरह से मालिक लोग काम लेते थे और यूरोप और अमेरिका की सभ्‍य सरकारों ने इस व्‍यापार को कानूनों द्वारा सुरक्षित बना रखा था। गुलाम किसी तरह से भी भाग नहीं सकते थे। मनुष्य जाति के इतिहास में सभ्‍य मनुष्‍यों के नाम पर गुलाम व्‍यापार से अधिक कलंक की बात दूसरी कोई भी नहीं है। अठारहवीं शताब्दि के आरंभ में इस व्‍यापार के विरुद्ध कुछ उदार आत्‍माएँ उठीं। इस भयंकर व्‍यापार के विरुद्ध थामस क्‍लाकर्न, फोबेल व वसटन, शार्प ग्राविल तथा टामसपेन आदि उदारहृदय पुरुषों ने घोर आंदोलन उठाया। इंग्‍लैंड में इसके संबंध में सबसे पहले काम हुआ। 1792 ई. में यूरोप से यह भयंकर व्‍यापार उठने लगा। धीरे-धीरे अमेरिकन राज्‍यों ने भी 1834 में गुलामों को मुक्‍त कर दिया।

(2)

1834 के बाद व्‍यापारियों और जमींदारों ने जिनके हाथों में सरकरों की नकेले थीं, गुलामी की प्रथा संशोधित रूप में फिर से जारी कर दिया। इसका नाम था ”कुली प्रथा” लोगों की नजरें भारतवर्ष की ओर गयीं। सबसे पहले ‘मिरच के टापू’ की सरकार ने भारत सरकार से प्रार्थना की कि शर्तबंदी प्रथा जारी करके भारतीय मजदूर वहाँ भेजे जाएँ। भारत सरकार सदा से परोपकारिणी रही है। वह दूसरों के कष्‍टों को न देख सकी। और अपने भारतीय मजदूरों के भेजने के संबंध में मिरच के टापू की सरकार द्वारा पेश की गयी लगभग सभी शर्तें स्‍वीकार कर लीं। 1834 में 7000 अभागे भारतवासी मिरच के टापू भेजे गये। फिर तो अन्‍य उपनिवेशों को भी भारतीय मजदूरों की आवश्‍यकता पड़ी। जमेका, ट्रिनीडाड, सेंट लूसिया ग्रेनेड, नैटाल और फीजी आदि में भी भारतीय कुली भेजे जाने लगे। इस प्रकार गुलामों के व्‍यापार का यह नया रूप खूब फला-फूला। इन भारतीय कुलियों की कष्‍ट-कहानी समस्‍त भारतवासियों पर प्रकट है। इस कुली-प्रथा के कारण संसार में भारतवर्ष का जितना अपमान हुआ उतना अपमान सभ्‍य संसार के इतिहास में शायद ही किसी जाति को सहना पड़ा हो। विदेशों में भारतीयों के अनादर का एक मात्र कारण यह कुली-प्रथा ही थी और इस समस्‍त अपमान का दायित्‍व है। भारत सरकार की उस नीति पर जिसके द्वारा उपनिवेशों की भलाई और भारत की बुराई होती है।

(3)

दक्षिण अफ्रीका के आंदोलन तथा फीजी के भारतीयों की कष्‍ट-कथा के कारण भारतीय जनता ने 1904 में होश सँभाला। यदि वह आंदोलन न उठता और म. गाँधी सरीखे साहसी नेता घोर अमानुषित यंत्रणाएँ सह कर गुलामों के इस व्‍यापार की असलियत प्रकट न करते तो कुली-प्रथा अब भी जीती-जागती बनी रहती। इसलिए कुली-प्रथा के उठ जाने का श्रेय हम भारतवासियों के सिवा किसी को भी देने के लिए तैयार नहीं हैं।

कुली-प्रथा मर चुकी है। पर अभी उसके जन्‍मदाता उसे उजले कपड़े पहिना कर खड़ी करने के प्रयत्‍न में लगे हुए हैं। उपनिवेशों की सरकारें अमानुषिक अत्‍याचारों का चुपचाप सह लेने वाले और कानून-फरेब में पड़कर रोटी के टुकड़ों के लिए अपनी स्‍वाधीनता को बेच देने वाले भारतीय कुलियों के वियोग से छटपटा रही हैं। इंग्‍लैंड के औपनिवेशक मंत्री पुरानी प्रथा के लिए फिर से जारी कर दिए जाने के लिए उपनिवेशों की सरकारों से परामर्श करने और उन्‍हें नेक सलाहें देने के लिए हरदम तैयार रहते हैं। गत वर्ष कई डेपूटेशन भी उनके बहुत कुछ कहने सुनने के बाद आजकल भारत में आया हुआ है। बा. सुरेंद्रनाथ बनर्जी के प्रस्‍ताव करने पर वायसराय की कौंसिल के दस सदस्‍यों की एक कमेटी, जिसमें आठ भारतीय और दो यूरोपियन सदस्‍य हैं। इस डेपूटेशन की बातें सुनने के लिए संगठित की गयी है।

गत 10 फरवरी को उक्‍त कमेटी ने ब्रिटिश गाइना से आए हुए डेपूटेशन से बातचीत की और उसकी स्‍कीम सुनी। डेपूटेशन में इने-गिने दो आदमी थे। एक डॉ. ननेन जो कि यूरोपियन हैं और गाइना सरकार के अवटार्नी जनरल तथा व्‍यवस्‍थापक कौंसिल के मेंबर हैं। दूसरे मि. लक्‍खू। मि. लक्‍खू ब्रिटिश गाइना की व्‍यवस्‍थापक कौंसिल के एकमात्र भारतीय सदस्‍य है। साथ ही वह वहाँ के ईस्‍ट-इंडियन एसोसिएशन के सभापति भी हैं।

दिल्‍लगी यह है कि गाइना सरकार की तरफ से यह डेपूटेशन न भेजा जाकर वहाँ की व्‍यवस्‍थापक कौंसिल की तरफ से भेजा गया है। उसकी कौंसिल में सब मिलकर 21 सदस्‍य रहते हैं। जिसमें 7 मनोनीत और 14 निर्वाचित किए जाते हैं। 21 सदस्‍यों में सिफ एक भारतीय सदस्‍य रहता है। जबकि वहाँ की 2990044 की जनसंख्‍या में 129389 भारतीय है। समान प्रतिनिधित्‍व की पोल तो इसी बात से खुल जाती है। डेपूटेशन का यह भी कहना है कि हमारी यह स्‍कीम सस्‍ते मजदूर प्राप्‍त करने के लिए नहीं है। वरन् हमारी सरकार की इच्‍छा है कि ब्रिटिश गाइना भारतीयों का उपनिवेश बना दिया जाए। बात तो इतनी अच्‍छी है कि भारतीय जनता के मुँह में पानी भर आना चाहिए। पर पुराना अनुभव यह संदेश उत्‍पन्‍न कर रहा है कि कहीं नमक के ऊपर मिश्री की वार्निस तो नहीं की गयी है। डेपूटेशन का यह भी कहना है कि हमारी स्‍कीम को समस्‍त भारतीय प्रवासियों ने स्‍वीकार कर लिया है। और ईस्‍ट इंडियन एसोसिएशन ने इस पर स्‍वीकृति की मुहर कर दी है। वह बात बिल्‍कुल झूठ है। भले ही एसोसिएशन के सभापति मि. लक्‍खू इस स्‍कीम के पूरे समर्थक हों। पर एसोसिएशन ने 30 सितंबर, 1919 की बैठक में इस स्‍कीम को धोखा देने वाली और अव्‍यवहारिक बतलाया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि डेपूटेशन के मैंबरों ने एसोसिएशन के नाम से इसे प्रकाशित करके संसार को धोखे में डालना चाहा है।

(4)

डेपूटेशन ने ब्रिटिश गाइना में भारतीयों को भेजने के संबंध में बड़े विकट प्रलोभन रखे हैं। उनका कहना है कि हमारी सरकार ने संसार में खाद्य सामग्री के अभाव को मिटाने तथा नवीन साम्राज्‍यगत सहयोग नीति को बढ़ाने के लिए ही इस स्‍कीम को स्‍वीकार किया है। उसने यह भी निश्चित किया है कि आरंभिक 5 वर्ष के भीतर जो भारतीय वहाँ जाएँगे उन्‍हें जहाज तैयार मिलेंगे और किराये का एक टका भी न देना पड़ेगा। सरकार ने नौ हजार रुपये इसीलिए अलग रख छोड़े हैं। गाइना पहुँच कर भारतीय लोग चाहें तो स्‍वतंत्र खेती करें और चाहें तो मजदूरी करें। खेती के लिए उन्हें भूमि दी जाएगी और मजदूरी करने पर तीन रुपये रोज की मजदूरी। भारतीय औरतों को हलका काम भी मिल सकेगा और डेढ़ रुपये रोज की मजदूरी भी दी जाया करेगी। खाद्य पदार्थों के महँगे होने पर वेतन वृद्धि की जाएगी और इस काम के लिए एक सरकारी दफ्तर खोला जाएगा। मजदूरों को मकान दिए जाएँगे और जो लोग भारत आकर अपने स्‍त्री-बच्‍चों को ले जाना चाहेंगे उन्‍हें यात्रा के लिए सस्‍ते दामों पर टिकट दिला दिये जाया करेंगे। तीन वर्ष तक रहने के बाद भारतीयों को तराई की भूमि खेती के लिए मिल सकेगी। जो भारतीय भारत लौटना चाहेंगे, यदि भारत सरकार की तरफ से नियुक्‍त किए गये निरीक्षक गण सिफारिश करेंगे, तो उन्‍हें जहाज का किराया दिया जाएगा। वैसे भी तीन वर्ष रहने के बाद लौटने पर आधा किराया, 5 वर्ष के बाद लौटने पर पौन किराया और 7 वर्ष के बाद लौटने पर पूरा किराया मिला करेगा। इतने पर भी उनकी जो भूमि ब्रिटिश गाइना में होगी वह उनकी ही बनी रहेगी। भारत से जो धार्मिक उपदेशक, धर्मोपदेश करने के लिए जाया करेंगे। उन्‍हें आने-जाने का किराया मुफ्त में ही मिला करेगा। हिंदू अपने साथ अपने पाधा-पुरोहित और मुसलमान अपने काजियों को ले जा सकेंगे। उनके लिए मंदिर और मस्जिदें भी बन सकेंगी। डेपूटेशन म. गाँधी द्वारा प्रकट किए गये विचारों के आधार पर यह भी स्‍वीकार करने के लिए तैयार है कि एक निश्चित अवधि के बाद एक भारतीय नेता वहाँ की स्थिति की जाँच करने के लिए जाएँ। अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करें और उसका खर्चा भी गाइना सरकार के मत्‍थे रहेगा। इस स्‍कीम की पूर्ति की जांच करने के लिए भारत सरकार तीन आदमियों की एक ऐसी टीम भेजें। जिसमें एक सरकारी एक मनोनीत गैर-सरकारी सदस्‍य तथा मिस्‍टर एंड्रयूज रहें। जब सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने ब्रिटिश गाइना के भारतीय कुलियों की मुक्ति का समाचार सुनाया तब डेपूटेशन ने कहा कि पारस्‍परिक समता और सहयोग के लिए ब्रिटिश गाइना से कुली प्रथा उठा दिया जाना तो आवश्‍यक ही था। डेपूटेशन ने अपनी बातों की गारंटी करने के संबंध में कहा था कि औपनिवेशिक मंत्री द्वारा ब्रिटिश गाइना में भारतीयों की राजनैतिक तथा व्‍यापारिक समता को कानूनी व्‍यवस्‍था दिलायी जा सकती है और उसके बाद हमारी सरकार उस पर दृढ़ रहने के लिए एक घोषणा भी करने के लिए तैयार है।

(5)

सुरेंद्र कमेटी ने उक्‍त डेपूटेशन को अपनी कोई राय नहीं दी है। उसने निश्चित किया है कि तीन सदस्‍यों का एक डेपूटेशन वहाँ की स्थिति देखने और रिपोर्ट लिखने के लिए जाए।

व्‍यवसथापक कौंसिल में माननीय मालवीयजी ने इस कमेटी के संगठन का यह कहकर विरोध किया था कि यदि समस्‍त उपनिवेशों में रहने वाले भारतीयों का दायित्‍व इसको न सौंपा जाएगा तो इसके संगठित करने से लाभ ही क्‍या होगा? इसी कारण से वे कमेटी से अलग भी हो गये थे। बात भी ठीक है। यदि ब्रिटिश गाइना में स्‍वतंत्र रूप से परिश्रम और मजदूरी करने वाले भारतीयों के जाने की बात मान ली जाए तो वह 1834 वाली हालत सामने आ जाएगी। फौजी नेटाल ट्रिनीडाड आदि भी भारतीय कुलियों के लिए माँग करेंगे और उस समय बहुत बड़ी संभावना है कि सुरेंद्र कमेटी की स्‍वीकृति के अनुसार यदि उसने ब्रिटिश गाइना वाली शर्त मान ली तो भारत सरकार अपनी परोपकारिणी प्रवृति से प्रेरित होकर अन्‍य उपनिवेशों में भी भारतीयों के भेजे जाने पर जोर देगी। उस समय भारतीय जनता कुछ भी न कर सकेगी क्‍योंकि सुरेंद्र कमेटी आठ भारतीय और गैर-सरकारी सदस्‍य हैं और नए सुधारों की उदारता के प्रमाणस्‍वरूप उसका सभापति भी एक भारतीय है। इस प्रकार कमेटी का निर्णय भारतीय जनता का निर्णय माना जाएगा। फल वही होगा जो कुली-प्रथा का हुआ। अनुभव हमें हथ बढ़ाने से रोकता है और साम्राज्‍य गत सहयोग की नीति हमें सशंकित बनाए हुए है। खतरे की जगह में हम तब तक जाने के लिए तैयार नहीं है जब तक हमारी रक्षा का भार दूसरों के हाथों से निकल कर हमारे हाथों में नहीं आ जाता। ब्रिटिश गाइना अब भले ही मीठी-मीठी बातें करे पर हमें वहाँ पर भारतीयों के साथ होने वाले अत्‍याचार भूले नहीं है। हिंदू विवाह को कानूनी करार न देना, भारतीय संतानों को गैर-कानूनी ठहराना और भारतीय मजदूरों पर पुलिस द्वारा गोली छुड़वा देना आदि अब भी हमें याद हैं। हमें यह भी मालूम है कि ब्रिटिश गाइना से आब-हवा की खराबी तथा मजदूरी की कमी के कारण उसके आदि निवासी और चीनी तथा यूरोपियन मजदूर ट्रेनीडाड, वेस्‍टइंडीज तथा अमेरिका की तरफ चले गये है और इस कमी की पूर्ति के लिए ही भारतीयों के उपनिवेश की रचना का स्‍वांग रचा जा रहा है।

इस बेबसी और दीनता की हालत में भी हमारे प्रवासी भारतीय भाइयों के लिए देश में ही रूखी-सूखी रोटी मिल सकती है। भारत माता की गोद में उनके लिए उतना ही स्‍थान है जितना कि हमारे लिए।

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

यदि आप भी इस वैश्विक परिवर्तन के महा आन्दोलन में, अपना प्रचंड योगदान देने का बेशकीमती जज्बा रखते हो तो निःसंकोच अभी तुरंत जुड़िये “स्वयं बनें गोपाल” समूह से और वो भी पूरी तरह से अपनी सुविधानुसार (अर्थात अपने मनपसन्द तरीके व समयानुसार) ! मनपसन्द तरीके से तात्पर्य है कि आपकी चाहे जिस भी क्षेत्र में रूचि हो (जैसे- कला, विज्ञान, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, रंगमंच, संगीत, अभिनय, सुरक्षा, कृषि, रिसर्च (शोध), लेखन, भक्ति, योग, सेवाधर्म या किसी भी अन्य तरह के क्षेत्र में रूचि हो, या श्रमदान करने की इच्छा हो), उसी क्षेत्र से सम्बन्धित कोई भी छोटा से लेकर बड़ा उचित प्रेरणास्पद कार्य करें तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह आपके उस कार्य को पूरे विश्व के सामने उजागर कर, अन्य सभी के मन में भी ऐसा प्रेरणायुक्त कार्य करने की इच्छा को जगाकर, विश्व परिवर्तन की इस महा क्रांति का जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक संक्रामक रूप से प्रसार करेगा ! अगर आपको स्वयं समझ में ना आ रहा हो कि आप कब, कैसे और क्या - क्या कर सकतें हैं तब भी आप तुरंत “स्वयं बनें गोपाल” समूह से निःसंकोच सम्पर्क कर सकतें हैं क्योंकि इसके विशेषज्ञों की सलाह से आप निश्चित रूप से अपने में छिपी हुई अपार संभावनाओं व गुणों को पहचान करके इस विश्व के लिए महान परोपकारी साबित हो सकतें हैं (अर्थात स्वयं गोपाल बनकर श्री कृष्ण राज रुपी स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना में अत्यंत सहायक हो सकते हैं) ! इसके अतिरिक्त यदि आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या “स्वयं बनें गोपाल” समूह से किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो भी हमसे जुड़ें ! हमसे जुड़ने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़कर अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में विश्वस्तरीय योग/आध्यात्म सेंटर खोलकर सुख, शान्ति व निरोगता का प्रचार प्रसार करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक ऐसी महान दुर्लभ यौगिक प्रक्रिया {जो हमें परम आदरणीय ऋषि सत्ता के दिव्य कृपा प्रसाद स्वरुप प्राप्त हुई है और जिसका निरंतर अभ्यास करने पर, कोई भी आम इंसान (चाहे वह कितना भी बड़ा पापी हो या पुण्यात्मा, गरीब हो या अमीर, स्त्री हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध) निश्चित रूप से दिन ब दिन बढ़ती हुई अपने अंदर ईश्वरत्व की अनुभूति को महसूस करते हुए स्वयं, गोपाल अर्थात ईश्वर बनने की प्रक्रिया की ओर बढ़ने लगता है ! जिसके फलस्वरूप धीरे धीरे उसके शरीर की सभी बीमारियों का नाश होकर, वह चिर युवावस्था की ओर बढ़ता है और तदनन्तर उचित समय आने पर ईश्वर के दर्शन पाने का महा सौभाग्य भी उसे अवश्य प्राप्त होता है, जिसके बाद की उसके जीवन की बागडोर स्वयं गोपाल अर्थात ईश्वर संभाल लेतें हैं ! इस अमृत स्वरुप प्रक्रिया (जिसे रोज करने में मात्र एक घंटा ही समय लगता है) का नाम है “स्वयं बनें गोपाल” योग} का शिविर, ट्रेनिंग सेशन, शैक्षणिक कोर्स, सेमीनार, वर्क शॉप, प्रोग्राम (कार्यक्रम), कांफेरेंस आदि का आयोजन करवाकर समाज में पुनः श्री कृष्ण राज अर्थात स्वर्णिम युग की पुनर्स्थापना के महायज्ञ में अपनी भी पवित्र आहुति देना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप विश्व प्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह से योग, आध्यात्म से सम्बन्धित शैक्षणिक कोर्स करके अपने व दूसरों के जीवन को भी रोगमुक्त बनाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में योग, प्राणायाम, आध्यात्म, हठयोग (अष्टांग योग) राजयोग, भक्तियोग, कर्मयोग, कुण्डलिनी शक्ति व चक्र जागरण, योग मुद्रा, ध्यान, प्राण उर्जा चिकित्सा (रेकी या डिवाईन हीलिंग), आसन, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर, नेचुरोपैथी आदि का शिविर, ट्रेनिंग सेशन्स, शैक्षणिक कोर्सेस, सेमीनार्स, वर्क शॉप्स, प्रोग्राम्स (कार्यक्रमों), कांफेरेंसेस आदि का आयोजन करवाकर समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व सचेत करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अब लुप्त हो चुके अति दुर्लभ विज्ञान के प्रारूप {जैसे- प्राचीन गुप्त हिन्दू विमानों के वैज्ञानिक सिद्धांत, ब्रह्मांड के निर्माण व संचालन के अब तक अनसुलझे जटिल रहस्यों का सत्य (जैसे- ब्लैक होल, वाइट होल, डार्क मैटर, बरमूडा ट्रायंगल, इंटर डायमेंशनल मूवमेंट, आदि जैसे हजारो रहस्य), दूसरे ब्रह्मांडों के कल्पना से भी परे आश्चर्यजनक तथ्य, परम रहस्यम एलियंस व यू.ऍफ़.ओ. की दुनिया सच्चाई (जिन्हें जानबूझकर पिछले कई सालों से विश्व की बड़ी विज्ञान संस्थाएं आम जनता से छुपाती आ रही हैं) तथा अन्य ऐसे सैकड़ों सत्य (जैसे- पिरामिड्स की सच्चाई, समय में यात्रा, आदि) के विभिन्न अति रोचक, एकदम अनछुए व बेहद रहस्यमय पहलुओं से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, इन दुर्लभ ज्ञानों से अनभिज्ञ समाज को परिचित करवाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अति पवित्र व मोक्षदायिनी धार्मिक गाथाएं, प्राचीन हिन्दू धर्म के वेद पुराणों व अन्य ग्रन्थों में वर्णित जीवन की सभी समस्याओं (जैसे- कष्टसाध्य बीमारियों से मुक्त होकर चिर यौवन अवस्था प्राप्त करने का तरीका) के समाधान करने के लिए परम आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी व उपयोगी साधनाएं व ज्ञान आदि से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, पूरी तरह से निराश लोगों में फिर से नयी आशा की किरण जगाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक आदर्श समाज की सेवा योग की असली परिचायक भावना अर्थात “वसुधैव कुटुम्बकम” की अलख ना बुझने देने वाले विभिन्न सौहार्द पूर्ण, देशभक्ति पूर्ण, समाज के चहुमुखी विकास व जागरूकता पूर्ण, पर्यावरण सरंक्षण, शिक्षाप्रद, महिला सशक्तिकरण, नशा एवं कुरीति उन्मूलन, अनाथ गरीब व दिव्यांगो के भोजन वस्त्र शिक्षा रोजगार आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन, मोटिवेशनल (उत्साहवर्धक व प्रेरणास्पद) एवं परोपकार पर आधारित कार्यक्रमों (चैरिटी इवेंट्स, चैरिटी शो व फाईलेन्थ्रोपी इवेंट्स) का आयोजन करवाकर ऐसे वास्तविक परम पुण्य प्रदाता महायज्ञ में अपनी आहुति देना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

यदि आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने गाँव/शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में भारतीय देशी गाय माता से सम्बन्धित कोई व्यवसायिक/रोजगार उपक्रम {जैसे- अमृत स्वरुप सर्वोत्तम औषधि माने जाने वाले, सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के गोमूत्र, दूध, घी, मक्खन, दही, छाछ आदि का निर्माण व विक्रय केंद्र तथा गोबर सम्बन्धित उपक्रम जैसे- गोबर गैस प्लांट, गोबर खाद व गोबर निर्मित पूजा अगरबत्तियां, मूर्तियां, गमले, पूजा की थालियां, मच्छर भगाने की क्वाइल आदि} {या मात्र सेवा केंद्र (जैसे- बूढी बीमार उपेक्षित गाय माता के भोजन, आवास व इलाज हेतु प्रबन्धन)} खोलने में सहायता लेकर साक्षात कृष्ण माता अर्थात गाय माता का अपरम्पार बेशकीमती आशीर्वाद के साथ साथ अच्छी आमदनी भी कमाना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

जानिये “स्वयं बनें गोपाल” समूह और इसके प्रमुख स्वयं सेवकों के बारे में

Click Here To View 'About Us / Contact Us' in English

धन्यवाद,
(“स्वयं बनें गोपाल” समूह)

हमारा सम्पर्क पता (Our Contact Address)-
“स्वयं बनें गोपाल” समूह,
प्रथम तल, “स्वदेश चेतना” न्यूज़ पेपर कार्यालय भवन (Ground Floor, “Swadesh Chetna” News Paper Building),
समीप चौहान मार्केट, अर्जुनगंज (Near Chauhan Market, Arjunganj),
सुल्तानपुर रोड, लखनऊ (Sultanpur Road, Lucknow),
उत्तर प्रदेश, भारत (Uttar Pradesh, India).

हमारा सम्पर्क फोन नम्बर (Our Contact No)– 91 - 0522 - 4232042, 91 - 07607411304

हमारा ईमेल (Contact Mail)– info@svyambanegopal.com

हमारा फेसबुक (Our facebook Page)- https://www.facebook.com/Svyam-Bane-Gopal-580427808717105/

हमारा ट्विटर (Our twitter)- https://twitter.com/svyambanegopal

आपका नाम *

आपका ईमेल *

विषय

आपका संदेश



ये भी पढ़ें :-



[ajax_load_more preloaded="true" preloaded_amount="3" images_loaded="true"posts_per_page="3" pause="true" pause_override="true" max_pages="3"css_classes="infinite-scroll"]