ज्यादातर गुजराती मोटे नहीं होते, क्यों ?

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fat_boy_by_white_briefs-d4sjqdqजी हाँ, आप गुजरात घूम आईये और देखिये हजार में एक दो आदमी आपको मोटे मिलेंगे जबकि भारत के किसी अन्य प्रदेश जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि में चले जाईये तो आपको बहुतायत की संख्या में मोटे लोग मिलेंगे !

तो ऐसा कोई संयोग की वजह से नहीं है बल्कि इसके पीछे छुपा है एक अति सामान्य और साधारण सा फार्मूला जिसके बारे में बहुत से लोगो को पता ही नहीं की ये भी मोटापा होने नहीं देता और अगर मोटापा है भी तो आसानी से उस मोटापे को गला भी देता है !

लगभग हर गुजराती भाई बहन अपने खाने में नियमित तौर पर छाछ का प्रयोग करते हैं और बस यही तो है साधारण पर सीक्रेट फार्मूला !

छाछ का मोटापे से सम्बंधित पूरा फायदा लेने के लिए दोपहर और सायं, दोनों खाना खाते समय छाछ पीना चाहिए और इस छाछ में एक चुटकी – सेंधा नमक, काली मिर्च और जीरे का मिश्रण मिला कर ही पीना चाहिए नहीं तो एसिडिटी हो जाएगी |

ये जो एक चुटकी सेंधा नमक, काली मिर्च और जीरा का चूर्ण छाछ में मिलाना है, उसमे 2 हिस्सा सेंधा नमक और 1 – 1 हिस्सा काली मिर्च और जीरा होना चाहिए |

ये छाछ बार बार अनावश्यक परेशान करने वाली बढ़ी भूख को भी ठीक करती है |

भोजन के समय छाछ पीने से जीवन में कभी भी कोलेस्ट्राल सम्बंधित प्रॉब्लम नहीं आती है और जिंदगी भर शरीर छरहरा, फुर्तिला बना रहता है।

वैसे तो देशी गाय माता का छाछ जब भी पिया जाय फायदा ही है लेकिन, अगर आप पहले से मोटे हो चुके हों तो दोनों वक्त खाना खाने (लंच और डिनर) के ठीक तुरन्त पहले छाछ पीने से चर्बी ज्यादा प्रभावी तरीके से गलने लगती है।

इसी छाछ को अगर दोपहर के खाने के बाद और दोपहर के विश्राम से ठीक पहले पिया जाय तो मसूढ़े के रोगों में बहुत ही फायदा है !

हाँलाकि आजकल गुजरात में भी कई लोग जो आधुनिकता की दौड़ में अपने परम्परागत खाने पीने के तरीकों को छोड़कर पश्चिमी सभ्यता के खान पान को अपना रहे है और कई महिला पुरुष जो अपनी किसी शारीरिक समस्या या पसन्द नापसन्द के चलते छाछ का सेवन करना छोड़ चुके हैं तथा नयी पीढ़ी के बच्चे जो पिज़्ज़ा बर्गर की तरफ ज्यादा इंटरेस्टेड हो रहें है, ऐसे लोगो में मोटापा बढ़ रहा है !

[नोट – छाछ को कभी भी सूर्य अस्त होने के बाद नहीं लेना चाहिए इसलिए अगर आप रात वाले खाने के साथ भी छाछ पीना चाहते हों तो आपको रात को खाना खाने के बजाय शाम को ही खाना खाना होगा क्योंकि आयुर्वेद में सूर्य अस्त होने के बाद दही और छाछ के सेवन को बहुत नुकसान दायक कहा है ! यहाँ पर दिए गए सारे फायदे सिर्फ और सिर्फ भारतीय देशी गाय माता से प्राप्त होने वाले सभी अमृत तुल्य वस्तुओं (जैसे- गोबर, मूत्र, दूध, दही, छाछ, मक्खन आदि) के हैं, ना कि भैंस के या वैज्ञानिकों द्वारा सूअर के जीन्स से तैयार जर्सी गाय से प्राप्त होने वाली वस्तुओं के]     

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण से संबन्धित आवश्यक सूचना)- विभिन्न स्रोतों व अनुभवों से प्राप्त यथासम्भव सही व उपयोगी जानकारियों के आधार पर लिखे गए विभिन्न लेखकों/एक्सपर्ट्स के निजी विचार ही “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट पर विभिन्न लेखों/कहानियों/कविताओं आदि के तौर पर प्रकाशित हैं, लेकिन “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट, इस वेबसाइट के द्वारा और किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा, दी गयी किसी भी जानकारी की सत्यता, प्रमाणिकता व उपयोगिता का किसी भी प्रकार से दावा, पुष्टि व समर्थन नहीं करतें हैं, इसलिए कृपया इन जानकारियों को किसी भी तरह से प्रयोग में लाने से पहले, प्रत्यक्ष रूप से मिलकर, उन सम्बन्धित जानकारियों के दूसरे एक्सपर्ट्स से भी परामर्श अवश्य ले लें, क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं ! अतः किसी को भी, “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट के द्वारा और इससे जुड़े हुए किसी भी लेखक/एक्सपर्ट द्वारा, किसी भी माध्यम से प्राप्त हुई, किसी भी प्रकार की जानकारी को प्रयोग में लाने से हुई, किसी भी तरह की हानि व समस्या के लिए “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट जिम्मेदार नहीं होंगे !