गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 39 (सकाम से निष्काम साधना)

· June 5, 2015

cropped-gayatribannerश्री पं. रामस्वरुप जी चाचोदिया, राठ का कहना है सामान्यतया मनुष्य तत्काल के लाभ को देखता है। तात्कालिक लोभ के लिए वह भविष्य की भारी हानि का खतरा भी उठाता है।

इसके विपरीत यदि किसी काम मे तुरन्त लाभ न हो किन्तु भविष्य में किसी बड़े सुख की सम्भावना हो तो भी उसे करने का उत्साह नहीं होता। तुरन्त का लाभ लोगों का प्रधान एकमात्र दृष्टिकोण बना हुआ है। ऐसे कोई विरले ही हैं जो भविष्य के स्थाई लाभ के लिए आज के लाभों कों छोड़ने का साहस कर पाते हैं।

आध्यात्मिक साधना में तत्काल कोई लाभ नहीं होता, बल्कि समय खर्च करना पड़ता है एक नीरस कर्मकाण्ड की नियमित साधना का बन्धन अपने ऊपर लेना पड़ता है, हवन, दान पुण्य आदि में कुछ खर्च भी पड़ता है, यह सब तात्कालिक हानियाँ ही हैं।

व्रत, उपवास, तीर्थ यात्रा, संयम, नियम आदि का झंझट और मित्र मंडली में उपहास यह सब बातें भी हानि में ही गिनी जा सकती हैं। भविष्य में इससे कोई लाभ होगा या नहीं, इसका भी निश्चय नहीं, इन सब कारणों से कोई विरले ही आध्यात्मिकता के मार्ग को अपनाते हैं।

जो अपनाते हैं वे सरल-सा कार्यक्रम पूरा करते हैं, दान, तीर्थ, यात्रा, कथा ब्रह्मïभोज, हवन आदि के लिए एक दिन कुछ पैसा खर्च करके ही उनकी नजर में पुण्य हो जाता है, रोज- रोज का झंझट नहीं रखते। कथा प्रवचन सुनने या कीर्तन की स्वर लहरी में सहयोग देने का कार्य भी सुगम है, पर नित्य नियत समय पर मन मार का जप, ध्यान, भजन,  पूजन के लिए बैठना और उसे देर तक निभाये रहना सामान्यत: बड़ा अरुचिकर होता है। लोग अरुचिकर कार्यों के लिए प्राय: तैयार नहीं होते।

उपरोक्त दृष्टिकोण वाले असंख्यों मनुष्यों में से ही एक मैं भी था। मेरी रुचि जप, तप में जरा भी न होती थी, परन्तु भगवान की कृपा बड़ी विलक्षण है, जिस पर वे कृपा करते हैं उसकी बुद्धि फेरते भी उन्हें देर नहीं लगती। एक दिन मुझे एक मित्र से गायत्री सम्बन्धी पुस्तकें पढऩे को मिलीं।

उनमें से गायत्री द्वारा अनेक सांसारिक लाभ होने का भी वर्णन था, साथ ही ऐसे कुछ उदाहरण भी दिये हुए थे जिनसे विदित होता था कि अमुक व्यक्ति ने इस साधना द्वारा अमुक लाभ उठाये हैं। मेरा मन भी ललचाया। तात्कालिक लाभ सभी का इष्ट है, मुझे भी इसी की आवश्यकता थी।

अपना लाभ या स्वार्थ जिस तरह से भी पूरा होता है वही मार्ग ठीक है चाहे वह गायत्री उपासना हो, चाहे व्यापार, चाहे नौकरी या चाहे और कुछ।

साधना से मुझे वस्तुत: कोई प्रेम न था। अपना प्रयोग सिद्ध करने के लिए गायत्री की परीक्षा कर देखने की इच्छा हुई। लाभ के लोभ से मैंने गायत्री को अपनाया व जानकारों से पूछकर जप, ध्यान, हवन आदि की विधियाँ मालूम कीं और नियमित रुप से उन्हें करने लगा। जीवन में पहली बार यह पथ चुना इसलिये इस सम्बन्ध में उत्साह और कौतूहल विशेष था।

इसने मुझे अधिक जानने के लिए प्रेरित किया मैंने गायत्री सम्बन्धी अनेकों पुस्तकें पढ़ डालीं। जिस छोटे प्रयोजन को लेकर मैंने अनुष्ठान प्रारम्भ किया था वह सफल हो गया जो आशंकाएँ और बाधाएँ दिखाई पड़ती थीं वे एक भी बाधक नहीं हुई और परिणाम सुखद रहा।

साधारणतया स्वार्थ सिद्ध हो जाने पर साधन वस्तुओं का छोड़ दिया जाता है, पर वैसा न कर सका। क्योंकि उपासना में एक आन्तरिक रस भी आने लगा था। इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी प्राप्त करने की रुचि ने आध्यात्मिक ज्ञान को इतना बढ़ा दिया कि संसारिक लाभों की तुलना में आत्मलाभ का महत्व अनेक गुना अधिक मालूम होने लगा।

माता के प्रति अगाध भक्ति बढ़ती गई और साधना द्वारा लाभ उठाने की अपेक्षा स्वयं साधना ही एक महान लाभ प्रतीत होने लगी। अब मैं पूर्ण निष्काम भाव से उपासना करता हूँ और उसका वह प्रतिफल पाता हूँ जो बड़ी से बड़ी कामना पूर्ण होने की अपेक्षा अधिक सरस है। साकाम उपासना अन्तत: निष्काम मातृ श्रद्धा में बदल जाती है।

ऐसा मैंने कई अन्य व्यक्तियों के उदाहरणों से भी देखा है। परन्तु यह ध्यान रखने की बात है कि प्रारम्भ में छोटी से छोटी ही कामना करनी चाहिए।

प्रारम्भिक साधक की श्रद्धा और साधना अत्यंत निर्बल होती है। जो लोग रत्ती भर श्रम का लाख मन फल पाने का अमर्यादित लोभ करते हैं और प्रबल कर्म भोगों को एक माला फेर कर ही हटाना चाहते हैं उनकों निराशा ही होती है। फिर भी जितना शुभ प्रयत्न कर लेते हैं व किसी न किसी रूप में उनके लिए सहायक ही होता है।

अपने को असफल समझने वाले गायत्री साधकों का प्रयत्न भी कभी व्यर्थ नहीं जाता, मनोकामना पूर्ण न होने पर भी किसी न किसी प्रकार सत्परिणाम अवश्य मिल ही जाता है।

(सौजन्य – पं० श्रीराम शर्मा आचार्य वांग्मय – 11)

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़कर अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में विश्वस्तरीय योग/आध्यात्म सेंटर खोलकर सुख, शान्ति व निरोगता का प्रचार प्रसार करना चाहतें हैं, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में योग, प्राणायाम, आध्यात्म, हठयोग (अष्टांग योग) राजयोग, भक्तियोग, कर्मयोग, कुण्डलिनी शक्ति व चक्र जागरण, योग मुद्रा, ध्यान, प्राण उर्जा चिकित्सा (रेकी या डिवाईन हीलिंग), आसन, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर, नेचुरोपैथी एवं महा फलदायी "स्वयं बनें गोपाल" प्रक्रिया (जो कि एक अतिदुर्लभ आध्यात्मिक साधना है) का शिविर, ट्रेनिंग सेशन्स, शैक्षणिक कोर्सेस, सेमीनार्स, वर्क शॉप्स, प्रोग्राम्स (कार्यक्रमों), कांफेरेंसेस आदि का आयोजन करवाकर समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना चाहतें हैं, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप विश्व प्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह से योग, आध्यात्म से सम्बन्धित शैक्षणिक कोर्स करके अपने व दूसरों के जीवन को भी रोगमुक्त बनाना चाहतें हैं, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अब लुप्त हो चुके अति दुर्लभ विज्ञान के प्रारूप {जैसे- प्राचीन गुप्त हिन्दू विमानों के वैज्ञानिक सिद्धांत, ब्रह्मांड के निर्माण व संचालन के अब तक अनसुलझे जटिल रहस्यों का सत्य (जैसे- ब्लैक होल, वाइट होल, डार्क मैटर, बरमूडा ट्रायंगल, इंटर डायमेंशनल मूवमेंट, आदि जैसे हजारो रहस्य), दूसरे ब्रह्मांडों के कल्पना से भी परे आश्चर्यजनक तथ्य, परम रहस्यम एलियंस व यू.ऍफ़.ओ. की दुनिया सच्चाई (जिन्हें जानबूझकर पिछले कई सालों से विश्व की बड़ी विज्ञान संस्थाएं आम जनता से छुपाती आ रही हैं) तथा अन्य ऐसे सैकड़ों सत्य (जैसे- पिरामिड्स की सच्चाई, समय में यात्रा, आदि) के विभिन्न अति रोचक, एकदम अनछुए व बेहद रहस्यमय पहलुओं से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, इन दुर्लभ ज्ञानों से अनभिज्ञ समाज को परिचित करवाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अति पवित्र व मोक्षदायिनी धार्मिक गाथाएं, प्राचीन हिन्दू धर्म के वेद पुराणों व अन्य ग्रन्थों में वर्णित जीवन की सभी समस्याओं (जैसे- कष्टसाध्य बीमारियों से मुक्त होकर चिर यौवन अवस्था प्राप्त करने का तरीका) के समाधान करने के लिए परम आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी व उपयोगी साधनाएं व ज्ञान आदि से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, पूरी तरह से निराश लोगों में फिर से नयी आशा की किरण जगाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक आदर्श समाज की सेवा योग की असली परिचायक भावना अर्थात “वसुधैव कुटुम्बकम” की अलख ना बुझने देने वाले विभिन्न सौहार्द पूर्ण, देशभक्ति पूर्ण, समाज के चहुमुखी विकास व जागरूकता पूर्ण, पर्यावरण सरंक्षण, शिक्षाप्रद, महिला सशक्तिकरण, अनाथ गरीब व दिव्यांगो के भोजन वस्त्र शिक्षा रोजगार आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन, मोटिवेशनल (उत्साहवर्धक व प्रेरणास्पद) एवं परोपकार पर आधारित कार्यक्रमों (चैरिटी इवेंट्स, चैरिटी शो व फाईलेन्थ्रोपी इवेंट्स) का आयोजन करवाकर ऐसे वास्तविक परम पुण्य प्रदाता महायज्ञ में अपनी आहुति देना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने गाँव/शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में भारतीय देशी गाय माता से सम्बन्धित कोई व्यवसायिक/रोजगार उपक्रम (जैसे- अमृत स्वरुप सर्वोत्तम औषधि माने जाने वाले, सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के दूध व गोमूत्र का विक्रय केंद्र, गोबर गैस प्लांट, गोबर खाद आदि) {या मात्र सेवा केंद्र (जैसे- बूढी बीमार उपेक्षित गाय माता के भोजन, आवास व इलाज हेतु प्रबन्धन)} खोलने में सहायता लेकर साक्षात कृष्ण माता अर्थात गाय माता का अपरम्पार बेशकीमती आशीर्वाद के साथ साथ अच्छी आमदनी भी कमाना, चाहतें हैं तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या हमसे किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

जानिये “स्वयं बनें गोपाल” समूह और इसके प्रमुख स्वयं सेवकों के बारे में

धन्यवाद,
(“स्वयं बनें गोपाल” समूह)

हमारा सम्पर्क पता (Our Contact Address)-
“स्वयं बनें गोपाल” समूह,
प्रथम तल, “स्वदेश चेतना” न्यूज़ पेपर कार्यालय भवन (Ground Floor, “Swadesh Chetna” News Paper Building),
समीप चौहान मार्केट, अर्जुनगंज (Near Chauhan Market, Arjunganj),
सुल्तानपुर रोड, लखनऊ (Sultanpur Road, Lucknow),
उत्तर प्रदेश, भारत (Uttar Pradesh, India).

हमारा सम्पर्क फोन नम्बर (Our Contact No)– 91 - 0522 - 4232042, 91 - 07607411304

हमारा ईमेल (Contact Mail)– info@svyambanegopal.com

हमारा फेसबुक (Our facebook Page)- https://www.facebook.com/Svyam-Bane-Gopal-580427808717105/

हमारा ट्विटर (Our twitter)- https://twitter.com/svyambanegopal

आपका नाम *

आपका ईमेल *

विषय

आपका संदेश



ये भी पढ़ें :-



[ajax_load_more preloaded="true" preloaded_amount="3" images_loaded="true"posts_per_page="3" pause="true" pause_override="true" max_pages="3"css_classes="infinite-scroll"]