कविता – रत्नसेन जन्म खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल )

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RamChandraShukla_243172चित्रासेन चितउर गढ़ राजा । कै गढ़ कोट चित्रा सम साजा॥

तेहि कुल रतनसेन उजियारा । धानि जननी जनमा अस बारा॥

 

पंडित गुनि सामुद्रिक देखा । देखि रूप औ लखन बिसेखा॥

 

रतनसेन यह कुल निरमरा । रतन जोति मन माथे परा॥

 

पदुम पदारथ लिखी सो जोरी । चाँद सुरुज जस होइ ऍंजोरी॥

 

जस मालति कहँ भौंर बियोगी । तस ओहि लागि होइ यह जोगी॥

 

सिंघलदीप जाइ यह पावै । सिध्द होइ चितउर लेइ आवै॥

 

मोग भोज जस माना, विक्रम साका कीन्ह।

 

परखि सो रतन पारखी, सबै लखन लिखि दीन्ह॥1॥

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