कविता – जन्म खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल )

· April 10, 2014

RamChandraShukla_243172चंपावति जो रूप सँवारी । पदमावति चाहै औतारी॥

भै चाहै असि कथा सलोनी । मेटि न जाइ लिखी जस होनी॥

 

सिंघलदीप भए तब नाऊँ । जो अस दिया बरा तेहि ठाऊँ॥

 

प्रथम सो जोति गगन निरमई । पुनि सो पिता माथे मनि भई॥

 

पुनि वह जोति मातु घट आई । तेहि ओदर आदर बहु पाई॥

 

जस अवधाान पूर होइ मासू । दिन दिन हिये होइ परगासू॥

 

जस अंचल महँ छिपै न दीया । तस उँजियार दिखावै हीया॥

 

सोने मँदिर सँवारहिं, औ चंदन सब लीप।

 

दिया जो मनि सिवलोक महँ, उपना सिंघलद्वीप॥1॥

 

भए दस मास पूरि भइ घरी । पदमावति कन्या औतरी॥

 

जानौ सूर किरिन हुति काढ़ी । सूरज कला घाटि, वह बाढ़ी॥

 

भा निसि महँ दिन कर परकासू । सब उजियार भएउ कबिलासू॥

 

इते रूप मूरति परगटी । पूनौ ससी छीन होइ घटी॥

 

घटतहि घटत अमावस भई । दिन दुइ लाज गाड़ि भुइँ गई॥

 

पुनि जो उठी दुइज होइ नई । निहकलंक ससि विधिा निरमई॥

 

पदुमगंधा बेधाा जग बासा । भौंर पतंग भए चहुँ पासा॥

 

इते रूप भै कन्या, जेहि सरि पूज न कोइ।

 

धानि सो देस रूपवंता, जहाँ जन्म अस होइ॥2॥

 

भै छठि राति छठीं सुख मानी । रहस कूद सौं रैनि बिहानी॥

 

भा बिहान पंडित सब आए । काढ़ि पुरान जनम अरथाए॥

 

उत्तिाम घरी जनम भा तासू । चाँद उआ भुइ, दिपा अकासू॥

 

कन्यारासि उदय जग कीया । पदमावती नाम अस दीया॥

 

सूर प्रसंसै भएउ फिरीरा । किरिन जामि, उपना नग हीरा॥

 

कहेन्हि जनमपत्राी जो लिखी । देइ असीस बहुरे जोतिषी॥

 

पाँच बरस महँ भय सो बारी । दीन्ह पुरान पढ़ै बैसारी॥

 

भै पदमावति पंडित गुनी । चहूँ खंड के राजन्ह सुनी॥

 

सिंघलदीप राजघर बारी । महा सुरूप दई औतारी॥

 

एक पदमावति औ पंडित पढ़ी । दहुँ केहि जोग गोसाईं गढ़ी॥

 

जा कहँ लिखी लच्छि घर होनी । सो असि पाव पढ़ी औ लोनी॥

 

सात दीप के बर जो ओनाहीं । उत्तार पावहिं, फिरि फिरि जाहीं॥

 

राजा कहै गरब कै, अहौं इंद्र सिवलोक।

 

सो सरवरि है मोरे, कासौं करौं बरोक॥4॥

 

बारह बरस माँह भै रानी । राजै सुना सँजोग सयानी॥

 

सात खंड धाौराहर तासू । सो पदमावति कहँ दीन्हनिवासू॥

 

औ दीन्हीं सँग सखी सहेली । जो सँग करैं रहसि रस केली॥

 

सबै नवल पिउ संग न सोईं । कँवल पास जनु बिगसी कोईं॥

 

सुआ एक पदमावति ठाऊँ । महा पँडित हीरामन नाऊँ॥

 

दई दीन्ह पंखिहि अस जोती । नैन रतन, मुख मानिक मोती॥

 

कंचन बरन सुआ अति लोना । मानहुँ मिला सोहागहिं सोना॥

 

रहहिं एक सँग दोउ, पढ़हिं सासतर वेद।

 

बरम्हा सीस डोलावहीं, सुनत लाग तस भेद॥5॥

 

भै उनंत पदमावत बारी । रचि रचि विधिा सब कला सँवारी॥

 

जग बेधाा तेहि अंग सुबासा । भँवर आइ लुबुधो चहुँ पासा॥

 

बेनी नाग मलयगिरि पैठी । ससि माथे होइ दूइज बैठी॥

 

भौंह धानुक साधो सर फेरै । नयन कुरंग भूलि जनु हेरै॥

 

नासिक कीर, कँवल मुख सोहा । पदमिनि रूप देखि जग मोहा॥

 

मानिक अधार, दसन जनु हीरा । हिय हुलसे कुच कनक गँभीरा॥

 

केहरि लंक, गवन गज हारे । सुरनर देखि माथ भुइँ धाारे॥

 

जग कोइ दीठि न आवै, आछहिं नैन अकास।

 

जोगी जती संन्यासी, तप साधाहिं तेहि आस॥6॥

 

एक दिवस पदमावत रानी । हीरामन तइँ कहा सयानी॥

 

सुनु हीरामनि कहौं बुझाई । दिन दिन मदन सतावै आई॥

 

पिता हमार न चालै बाता । त्राासहि बोलि सकै नहिं माता॥

 

देस देस के बर मोहिं आवहिं । पिता हमार न ऑंख लगावहिं॥

 

जोबन मोर भयउ जस गंगा । देह देह हम्ह लाग अनंगा॥

 

हीरामन तब कहा बुझाई । विधिाकर लिखा मेटि नहिं जाई॥

 

अज्ञा देउ देखौं फिरि देसा । तोहि जोग बर मिलै नरेसा॥

 

जौ लगि मैं फिरि आवौं, मन चित धारहु निवारि।

 

सुनत रहा कोइ दुरजन, राजहि कहा बिचारि॥7॥

 

राजा सुना दीठि भै आना । बुधिा जो देहि सँग सुआ सयाना॥

 

भएउ रजायसु मारहु सूआ । सूर सुनाव चाँद जहँ ऊआ॥

 

सत्राु सुआ कै नाऊ बारी । सुनि धााए जस धााव मँजारी॥

 

तब लगि रानी सुआ छपावा । जब लगि ब्याधा न आवै पावा॥

 

पिता के आयसु माथे मोरे । कहहु जाय बिनवौं कर जोरे॥

 

पंखि न कोई होइ सुजानू । जाने भुगुति कि जान उड़ानू॥

 

सुआ जो पढ़ै पढ़ाए बैना । तेहि कत बुधिा जेहि हिये न नैना॥

 

मानिक मोती देखि वह, हिये न ज्ञान करेइ।

 

दारिउँ दाख जानि कै, अबहिं ठोर भरि लेइ॥8॥

 

वै तो फिरे उतरअस पावा । बिनवा सुआ हिए डर खावा॥

 

रानी तुम जुग जुग सुख पाऊ । होइ अज्ञा वनवास तौ जाऊँ॥

 

मोतिहिं मलिन जो होइ गइ कला । पुनि सो पानि कहाँ निरमला?॥

 

ठाकुर अंत चहै जेहि मारा । तेहि सेवक कर कहाँ उबारा?॥

 

जेहि घर काल मजारी नाचा । पखिहिं नाउँ जीउ नहिं बाँचा॥

 

मैं तुम्ह राज बहुत सुख देखा । जौ पूछहि देइ जाइ न लेखा॥

 

जो इच्छा मन कीन्ह सो जेंवा । यह पछिताव चल्यों बिनु सेवा॥

 

मारै सोइ निसोगा, डरै न अपने दोस।

 

केरा केलि करै का, जौ भा बैरि परोस॥9॥

 

रानी उतर दीन्ह कै माया। जौ जिउ जाइ रहै किमि काया?॥

 

हीरामन! तू प्रान परेवा। धाोख न लाग करत तोहिं सेवा॥

 

तोहिं सेवा बिछुरन नहिं आखौं। पींजर हिये घालि कै राखौं॥

 

हौं मानुष, तू पंखि पियारा। धारम क प्रीति तहाँ केइ मारा?॥

 

का सो प्रीत तन माँह बिलाई? सोइ प्रीति जिउ साथ जो जाई॥

 

प्रीति मार लै हिये न सोचू। ओहि पंथ भल होइ कि पोचू॥

 

प्रीति पहार भार जो काँधाा। सो कस छुटै, लाइ जिउ बाँधाा॥

 

सुअटा रहै खुरुक जिउ, अबहिं काल सो आव।

 

सत्राु अहै जो करिया, कबहुँ सो बोरै नाव॥10॥

 

(1) उपना=उत्पन्न हुआ।

 

(2) बिहान=सबेरा।

 

तेहि तें अधिाक पदारथ करा । रतन जोग उपना निरमरा॥

 

सिंहलदीप भए औतारू । जंबूदीप जाइ जमबारू॥

 

राम अजुधया ऊपने, लछन बतीसो संग।

 

रावन रूप सौं भूलिहि, दीपक जैस पतंग॥3॥

 

(3) फिरीरा भएउ=फिरेरे के समान चक्कर लगाता हुआ। रतन=राजा रतनसेन की ओर लक्ष्य है! निरमरा=निर्मल। जमबारू=यमद्वार।

 

(4) बैसारि दीन्ह=बैठा दिया। बरोक=(बर$रोक) बरच्छा।

 

(5) कोई=कुमुदिनी।

 

(6) उनंत=ओनंत, भार से झुकी (यौवन के), ‘बारी’ शब्द के कुमारी और बगीचा दो अर्थ लेने से इसकी संगति बैठती है।

 

(8) मँजारी=मार्जारी, बिल्ली।

 

(9) पानि=आव, आभा, चमक। जेंवा=खाया। बैरि=बेर का पेड़।

 

(10) आखों=(सं. आकांक्षा) चाहती हूँ, अथवा (सं. आख्यान, पंजाबी-आखन) कहती हूँ। करिया=कर्णधाार, मल्लाह।

(आवश्यक सूचना- विश्व के 169 देशों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों से हमारा अति विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आपके द्वारा पूछे गए योग, आध्यात्म से सम्बन्धित किसी भी लिखित प्रश्न (ईमेल) का उत्तर प्रदान करने के लिए, कृपया हमे कम से कम 6 घंटे से लेकर अधिकतम 72 घंटे (3 दिन) तक का समय प्रदान किया करें क्योंकि कई बार एक साथ इतने ज्यादा प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हो जातें हैं कि सभी प्रश्नों का उत्तर तुरंत दे पाना संभव नहीं हो पाता है ! वास्तव में “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने से पूछे जाने वाले हर छोटे से छोटे प्रश्न को भी बेहद गंभीरता से लेता है इसलिए हर प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर प्रदान करने के लिए, हम सर्वोत्तम किस्म के विशेषज्ञों की सलाह लेतें हैं, इसलिए हमें आपको उत्तर देने में कभी कभी थोड़ा विलम्ब हो सकता है, जिसके लिए हमें हार्दिक खेद है ! कृपया नीचे दिए विकल्पों से जुड़कर अपने पूरे जीवन के साथ साथ पूरे समाज का भी करें निश्चित महान कायाकल्प)-

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़कर अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में विश्वस्तरीय योग/आध्यात्म सेंटर खोलकर सुख, शान्ति व निरोगता का प्रचार प्रसार करना चाहतें हैं, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में योग, प्राणायाम, आध्यात्म, हठयोग (अष्टांग योग) राजयोग, भक्तियोग, कर्मयोग, कुण्डलिनी शक्ति व चक्र जागरण, योग मुद्रा, ध्यान, प्राण उर्जा चिकित्सा (रेकी या डिवाईन हीलिंग), आसन, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर, नेचुरोपैथी एवं महा फलदायी "स्वयं बनें गोपाल" प्रक्रिया (जो कि एक अतिदुर्लभ आध्यात्मिक साधना है) का शिविर, ट्रेनिंग सेशन्स, शैक्षणिक कोर्सेस, सेमीनार्स, वर्क शॉप्स, प्रोग्राम्स (कार्यक्रमों), कांफेरेंसेस आदि का आयोजन करवाकर समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना चाहतें हैं, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप विश्व प्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह से योग, आध्यात्म से सम्बन्धित शैक्षणिक कोर्स करके अपने व दूसरों के जीवन को भी रोगमुक्त बनाना चाहतें हैं, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अब लुप्त हो चुके अति दुर्लभ विज्ञान के प्रारूप {जैसे- प्राचीन गुप्त हिन्दू विमानों के वैज्ञानिक सिद्धांत, ब्रह्मांड के निर्माण व संचालन के अब तक अनसुलझे जटिल रहस्यों का सत्य (जैसे- ब्लैक होल, वाइट होल, डार्क मैटर, बरमूडा ट्रायंगल, इंटर डायमेंशनल मूवमेंट, आदि जैसे हजारो रहस्य), दूसरे ब्रह्मांडों के कल्पना से भी परे आश्चर्यजनक तथ्य, परम रहस्यम एलियंस व यू.ऍफ़.ओ. की दुनिया सच्चाई (जिन्हें जानबूझकर पिछले कई सालों से विश्व की बड़ी विज्ञान संस्थाएं आम जनता से छुपाती आ रही हैं) तथा अन्य ऐसे सैकड़ों सत्य (जैसे- पिरामिड्स की सच्चाई, समय में यात्रा, आदि) के विभिन्न अति रोचक, एकदम अनछुए व बेहद रहस्यमय पहलुओं से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, इन दुर्लभ ज्ञानों से अनभिज्ञ समाज को परिचित करवाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, अति पवित्र व मोक्षदायिनी धार्मिक गाथाएं, प्राचीन हिन्दू धर्म के वेद पुराणों व अन्य ग्रन्थों में वर्णित जीवन की सभी समस्याओं (जैसे- कष्टसाध्य बीमारियों से मुक्त होकर चिर यौवन अवस्था प्राप्त करने का तरीका) के समाधान करने के लिए परम आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी व उपयोगी साधनाएं व ज्ञान आदि से सम्बन्धित नॉलेज ट्रान्सफर सेमीनार (सभा, सम्मेलन, वार्तालाप, शिविर आदि), कार्यक्रमों आदि का आयोजन करवाकर, पूरी तरह से निराश लोगों में फिर से नयी आशा की किरण जगाना चाहते हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) या अपने किसी भी सरकारी या प्राईवेट संस्थान/ऑफिस(कार्यालय) आदि में, एक आदर्श समाज की सेवा योग की असली परिचायक भावना अर्थात “वसुधैव कुटुम्बकम” की अलख ना बुझने देने वाले विभिन्न सौहार्द पूर्ण, देशभक्ति पूर्ण, समाज के चहुमुखी विकास व जागरूकता पूर्ण, पर्यावरण सरंक्षण, शिक्षाप्रद, महिला सशक्तिकरण, अनाथ गरीब व दिव्यांगो के भोजन वस्त्र शिक्षा रोजगार आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन, मोटिवेशनल (उत्साहवर्धक व प्रेरणास्पद) एवं परोपकार पर आधारित कार्यक्रमों (चैरिटी इवेंट्स, चैरिटी शो व फाईलेन्थ्रोपी इवेंट्स) का आयोजन करवाकर ऐसे वास्तविक परम पुण्य प्रदाता महायज्ञ में अपनी आहुति देना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप “स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा अपने गाँव/शहर/कॉलोनी(मोहल्ले) में भारतीय देशी गाय माता से सम्बन्धित कोई व्यवसायिक/रोजगार उपक्रम (जैसे- अमृत स्वरुप सर्वोत्तम औषधि माने जाने वाले, सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के दूध व गोमूत्र का विक्रय केंद्र, गोबर गैस प्लांट, गोबर खाद आदि) {या मात्र सेवा केंद्र (जैसे- बूढी बीमार उपेक्षित गाय माता के भोजन, आवास व इलाज हेतु प्रबन्धन)} खोलने में सहायता लेकर साक्षात कृष्ण माता अर्थात गाय माता का अपरम्पार बेशकीमती आशीर्वाद के साथ साथ अच्छी आमदनी भी कमाना, चाहतें हैं तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

क्या आप एक संस्था, विशेषज्ञ या व्यक्ति विशेष के तौर पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह से औपचारिक, अनौपचारिक या अन्य किसी भी तरह से जुड़कर या हमसे किसी भी तरह का उचित सहयोग, सहायता, सेवा लेकर या देकर, इस समाज की भलाई के लिए किसी भी तरह का ईमानदारी पूर्वक प्रयास करना चाहतें हों, तो कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

जानिये “स्वयं बनें गोपाल” समूह और इसके प्रमुख स्वयं सेवकों के बारे में

धन्यवाद,
(“स्वयं बनें गोपाल” समूह)

हमारा सम्पर्क पता (Our Contact Address)-
“स्वयं बनें गोपाल” समूह,
प्रथम तल, “स्वदेश चेतना” न्यूज़ पेपर कार्यालय भवन (Ground Floor, “Swadesh Chetna” News Paper Building),
समीप चौहान मार्केट, अर्जुनगंज (Near Chauhan Market, Arjunganj),
सुल्तानपुर रोड, लखनऊ (Sultanpur Road, Lucknow),
उत्तर प्रदेश, भारत (Uttar Pradesh, India).

हमारा सम्पर्क फोन नम्बर (Our Contact No)– 91 - 0522 - 4232042, 91 - 07607411304

हमारा ईमेल (Contact Mail)– info@svyambanegopal.com

हमारा फेसबुक (Our facebook Page)- https://www.facebook.com/Svyam-Bane-Gopal-580427808717105/

हमारा ट्विटर (Our twitter)- https://twitter.com/svyambanegopal

आपका नाम *

आपका ईमेल *

विषय

आपका संदेश



ये भी पढ़ें :-



[ajax_load_more preloaded="true" preloaded_amount="3" images_loaded="true"posts_per_page="3" pause="true" pause_override="true" max_pages="3"css_classes="infinite-scroll"]