कविता – जगत के कुचले हुए पथ पर भला कैसे चलूं मैं ? (लेखक – हरिशंकर परसाई)

अब घर बैठे हुए ही अपनी कठिन शारीरिक, मानसिक, आर्थिक समस्याओं के लिए तुरंत पाईये ऑनलाइन/टेलीफोनिक समाधान विश्वप्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” समूह के बेहद अनुभवी एक्सपर्ट्स द्वारा, इसी लिंक पर क्लिक करके



1hqdefaultकिसी के निर्देश पर चलना नहीं स्वीकार मुझको
नहीं है पद चिह्न का आधार भी दरकार मुझको
ले निराला मार्ग उस पर सींच जल कांटे उगाता
और उनको रौंदता हर कदम मैं आगे बढ़ाता

शूल से है प्यार मुझको, फूल पर कैसे चलूं मैं?

बांध बाती में हृदय की आग चुप जलता रहे जो
और तम से हारकर चुपचाप सिर धुनता रहे जो
जगत को उस दीप का सीमित निबल जीवन सुहाता
यह धधकता रूप मेरा विश्व में भय ही जगाता

प्रलय की ज्वाला लिए हूं, दीप बन कैसे जलूं मैं?

जग दिखाता है मुझे रे राह मंदिर और मठ की
एक प्रतिमा में जहां विश्वास की हर सांस अटकी
चाहता हूँ भावना की भेंट मैं कर दूं अभी तो
सोच लूँ पाषान में भी प्राण जागेंगे कभी तो

पर स्वयं भगवान हूँ, इस सत्य को कैसे छलूं मैं?

कृपया हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कृपया हमारे यूट्यूब चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कृपया हमारे ट्विटर पेज से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कृपया हमारे ऐप (App) को इंस्टाल करने के लिए यहाँ क्लिक करें


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण से संबन्धित आवश्यक सूचना)- विभिन्न स्रोतों व अनुभवों से प्राप्त यथासम्भव सही व उपयोगी जानकारियों के आधार पर लिखे गए विभिन्न लेखकों/एक्सपर्ट्स के निजी विचार ही “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट पर विभिन्न लेखों/कहानियों/कविताओं आदि के तौर पर प्रकाशित हैं, लेकिन “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट, इस वेबसाइट के द्वारा और किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा, दी गयी किसी भी जानकारी की सत्यता, प्रमाणिकता व उपयोगिता का किसी भी प्रकार से दावा, पुष्टि व समर्थन नहीं करतें हैं, इसलिए कृपया इन जानकारियों को किसी भी तरह से प्रयोग में लाने से पहले, प्रत्यक्ष रूप से मिलकर, उन सम्बन्धित जानकारियों के दूसरे एक्सपर्ट्स से भी परामर्श अवश्य ले लें, क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं ! अतः किसी को भी, “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट के द्वारा और इससे जुड़े हुए किसी भी लेखक/एक्सपर्ट द्वारा, किसी भी माध्यम से प्राप्त हुई, किसी भी प्रकार की जानकारी को प्रयोग में लाने से हुई, किसी भी तरह की हानि व समस्या के लिए “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट जिम्मेदार नहीं होंगे !