कई महान आश्चर्यों को अपने में समेटा है पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर

images (4)वैसे तो उड़ीसा के पुरी मंदिर को कलियुग का साक्षात मोक्षदायिनी तीर्थ कहा गया है और जहा साक्षात जगन्नाथ भगवान कृष्ण विराजते हो उस स्थल पर अनगिनत दृश्य – अदृश्य आश्चर्य होंगे जिनके बारे में बहुत से लोग जानते या नहीं जानते होंगे।

यहाँ पर हम उन कुछ चन्द लेकिन अदभुत आश्चर्य के बारे में चर्चा कर रहे है जो कोई भी सामान्य व्यक्ति मंदिर में जाकर महसूस कर सकता है। वे अनोखी बाते है-

 

मन्दिर के ऊपर झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराते हुए दीखता है।

पुरी में किसी भी जगह से आप मन्दिर के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र को देखेगे तो वह आपको सामने ही लगा दिखेगा।

सामान्य दिन के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है, और शाम के दौरान इसके विपरीत, लेकिन पूरी में इसका उल्टा होता है |

पक्षी या विमानों को कभी भी मंदिर के ऊपर उड़ते हुए नहीं पायेगें।.

मुख्य गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य है।

मंदिर के अंदर पकाने के लिए भोजन की मात्रा पूरे वर्ष के लिए रहती है। प्रसाद की थोड़ी सी भी मात्रा, कभी भी व्यर्थ नहीं जाती है, चाहे कुछ हजार लोगों खाएं या 20 लाख लोग।

मंदिर में रसोई (प्रसाद) पकाने के लिए 7 बर्तन एक दूसरे पर रखा जाता है और लकड़ी पर पकाया जाता है, इस प्रक्रिया में शीर्ष बर्तन में सामग्री पहले पकती है फिर क्रमश: नीचे की तरफ एक के बाद एक पकते जाती है।

मन्दिर के सिंहद्वार में पहला कदम प्रवेश करने पर (मंदिर के अंदर से) आप सागर द्वारा निर्मित किसी भी ध्वनि नहीं सुन सकते पर आप (मंदिर के बाहर से) एक ही कदम को पार करें तब आप इसे सुन सकते हैं, इसे शाम को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

प्रति दिन सांयकाल मन्दिर के ऊपर लगी ध्वजा को मानव द्वारा उल्टा चढ़ कर बदला जाता है। जगन्नाथ मन्दिर का क्षेत्रफल चार लाख वर्ग फिट में है। मन्दिर की ऊंचाई 214 फिट है।

मन्दिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोइ घर है। विशाल रसोई घर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाने वाले महाप्रसाद को बनाने 500 रसोईये एवं 300 उनके सहयोगी काम करते है।

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