दुनिया की सबसे ताकतवर दवा जो करे हर रोग का नाश

charanयहाँ पर जिस दवा के बारे में बताया जा रहा है, उस दवा को रोज रोज विधि विधान से ग्रहण करने पर दुनिया के हर रोग में धीरे – धीरे निश्चित ही फायदा मिलता है और इस बात की गारंटी हमारे धर्म शास्त्र देते है।

इस दवा को रोज रोज बनाने और खाने का तरीका भी बहुत ही आसान है !

इस दवा को बनाने के लिए, भगवान विष्णु की जिस भी मूर्ति या तस्वीर की आप पूजा करते है उस मूर्ति या तस्वीर के चरणों को रोज आदरपूर्वक साफ जल से धोकर, उस पानी को खुद पीना है।

आप अन्दाजा नहीं लगा सकते की भगवान विष्णु के चरणो को धो कर तैयार होने वाला यह चरणामृत आपको क्या क्या और कितना फायदा पंहुचा सकता है !

तो सुनिए हमारे धर्म ग्रन्थो में इस अति साधारण दिखने वाले चरणामृत के बारे में क्या बताया गया है –

अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्।
विष्णो: पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते ।।

अर्थात भगवान विष्णु के चरणों को धो कर प्राप्त होने वाला अमृत रूपी जल सारे रोग – बीमारियो और अकाल मौत का नाश करता है और बार बार के जन्म – मरण के बंधन से भी मुक्त करता है मतलब बेहद दुर्लभ और कीमती मोक्ष प्रदान करता है ।

तो ऐसी अपार महिमा है भगवान के चरणामृत की !! कोई भी आदमी जो तामसिक खाना (मांस, मछली, अंडा, शराब, सिगरेट आदि) ना खाता हो, वो भगवान के चरण धो कर तैयार चरणामृत को पी कर देख सकता है, उसको निश्चित लाभ मिलेगा।

चरण धोने के लिए एक बूँद जल से लेकर जितना जल चढाने की आपकी इच्छा हो आप कर सकते है क्योकि भगवान विष्णु के चरण से जितना भी जल स्पर्श करेगा चाहे वह एक बूँद हो या एक लोटा जल, सब अमृत के समान गुणकारी हो जायेगा। जल तब तक जल ही रहता है जब तक भगवान के चरणों से नहीं लगता, जैसे ही भगवान के चरणों से लगा तो अमृत रूप हो जाता है और चरणामृत बन जाता है।

इस पूरे प्रयोग में जो चीज सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, वो है कि आप जिस तस्वीर (प्लास्टिक की पन्नी चढ़ी हुई या लैमिनेटेड) या मूर्ति के चरण धोतें है उस मूर्ति या तस्वीर में आपको बहुत गहरी भावना करनी चाहिए की वो सिर्फ तस्वीर या मूर्ति नहीं बल्कि साक्षात भगवान विष्णु है और उसी हिसाब से उस मूर्ति या तस्वीर का 24 घंटा बहुत ज्यादा आदर, सम्मान और देखभाल करना चाहिए। आप जितना ज्यादा उस मूर्ति या तस्वीर को भगवान विष्णु के समान आदर और देखभाल करेंगे उतना ज्यादा उस मूर्ति या तस्वीर का चरणामृत जल्दी फायदा करेगा।

पुराणों में लिखा है की जब भगवान ने वामन अवतार लिया, और वे राजा बलि की यज्ञ शाला में दान लेने गए तब उन्होंने तीन पग में तीन लोक नाप लिए। उन्होंने पहले पग में नीचे के लोक नाप लिए और दूसरे में ऊपर के लोक नापने लगे तो जैसे ही ब्रह्म लोक में उनका चरण गया तो ब्रह्मा जी ने अपने कमंडलु में से जल लेकर भगवान के चरण धोए और फिर चरणामृत को वापस अपने कमंडल में रख लिया। वह चरणामृत ही माँ गंगा जी बन गई, जो आज भी सारी दुनिया के पापों को धोती है, ये शक्ति उनके पास कहाँ से आई, ये शक्ति है भगवान के चरणों की, जिस पर ब्रह्मा जी ने जल चढाया था पर चरणों का स्पर्श होते ही बन गई गंगा जी।

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