अरे सुनिए सर ……. कहीं आप पिछड़ तो नहीं रहें हैं ?

· December 29, 2016

कहतें हैं कि गरीबों का कोई सम्मान नहीं होता है ……………………… और यह भी कहते हैं कि अमीरों की एक अदा भी लाखों की होती है !

यही हाल हुआ हमारी प्यारी भारत माँ के साथ !

एक जमाने में सोने की चिड़िया कहलाने वाले देश को पहले कई सौ साल तक क्रूर मुगलों ने लूटा फिर जाहिल अंग्रेजों ने लूटा ……………………… और जब अंततः देश आजाद हुआ तो कई साल तक खानदानी लोगों ने चूसा ……………….. जिसका नतीजा है आज का ऐसा भारत, जहां की 70 प्रतिशत आबादी सिर्फ दाल रोटी के लिए ही रोज जूझती रहती है !

कम से कम आजादी के बाद ही देश अगर किसी 100 प्रतिशत शुद्ध देशभक्त शासक के हाथों में लम्बे समय के लिए आ गया होता तो आज देश इस हाल में कत्तई ना होता …………………….. किन्तु देश वासियों ने शायद आचार्य चाणक्य की यह सलाह नहीं याद रखी कि, ‘कभी भी ऐसे व्यक्ति को देश का शासक नहीं बनाना चाहिए जिसकी पत्नी विदेशी हो’ !

भगवान का शुक्र है कि कम से कम पिछले दो साल से तो मोदी जी गर्त के अंधे कुएं में जाते देश की दिशा, अपने प्रचंड बाहुबल से बदलने में सफल हो गएँ हैं ……………………….. लेकिन अभी भी बहुत ही लम्बा सफर तय करना बाकी है क्योंकि देश को पिछले कई सौ सालों में एकदम तोड़ कर रख दिया गया था !

आज से दो साल पहले तक भारत को एक गरीब देश की श्रेणी में रखा जाता था और इस वजह से भारत से जुडी हर चीज पर भी गरीबी का ठप्पा लगा हुआ था !

हिंदी भाषा, विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है पर उसके बावजूद इसे बोलने में खुद कई भारतियों को आज भी शर्म आती है ……………. जबकि अमीर देश अमेरिका की भाषा अंग्रेजी को बोलने में उन्हें बहुत गर्व और आंतरिक संतुष्टि महसूस होती है !

पर अब ये कांसेप्ट काफी तेजी से बदल रहा है क्योंकि जब से स्वयं देशभक्त प्रधानमंत्री मोदी जी, अपनी मातृ भाषा गुजराती को छोड़कर, राष्ट्रभाषा हिंदी का प्रचार अमेरिका आदि देशों में पूरे गर्व से कर रहें हैं तब से भारत में हिंदी को गरीबों की भाषा समझने वालों की मानसिकता में भी परिवर्तन आने लगा है !

राष्ट्र भाषा का सम्मान और राष्ट्र प्रेम कोई अलग अलग चीज नहीं होती है ………………… इसका बड़ा उदाहरण है चीन, जापान आदि जैसे देश जहाँ की सारी शिक्षा दीक्षा, वहीँ की मूल भाषा (अर्थात चीनी भाषा, जापानी भाषा) में ही होती है और ये देश ना केवल आर्थिक, बल्कि तकनीकी रूप में भी विश्व के टॉप टेन देशों में गिने जाते हैं !

हिंदी की क्रेज अब इस कदर बढ़ती जा रही है कि अब तो मानों जैसे नियम सा हो गया है कि किसी भी हॉलीवुड मूवी को अगर अपना प्रॉफिट बढ़ाना है तो उसे अपनी मूवी को हिंदी में भी ट्रांसलेट करके भारत में प्रसारित करनी होती है !

इतना ही नहीं, अब तो हिंदी टेलीविजन चैनल्स, हिंदी अखबार, हिंदी मैगजींस, हिंदी वेबसाइटस की संख्या भी दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है !

यह सब देखकर “स्वयं बनें गोपाल” समूह जैसे सभी देशभक्तों को बहुत ही प्रसन्नता होती है जब भारत माँ से जुडी हर धरोहर अपने खोये हुए सम्मान को पुनः प्राप्त करने की ओर अग्रसर होने लगती हैं !

पर वहीँ एक तरफ यह भी देखकर दुःख होता है कि आज भी कई लोग ऐसे हैं जो चाह कर भी हिंदी में टाइप नहीं कर पाते क्योंकि कई कारणों में से एक कारण यह भी होता है कि उन्हें पता ही नहीं होता है कि वे कैसे सुगमता पूर्वक हिंदी टाइप कर सकतें है ?

ऐसा नहीं है कि इंग्लिश में टाइप करना कोई बुरी बात है क्योंकि कुछ मुद्दे ऐसे होतें हैं जिन्हें गैर हिंदी भाषी लोगों को तुरंत समझाने के लिए इंग्लिश का प्रयोग करना पड़ता है ! इसी पालिसी के तहत “स्वयं बनें गोपाल” समूह ने भी ऋषि मुनियों के ब्रह्मांड व एलियंस सम्बंधित सत्य ज्ञान का विश्वव्यापी प्रचार प्रसार करने के लिए, इस ज्ञान से सम्बंधित आर्टिकल्स को हिंदी के साथ साथ इंग्लिश भाषा में भी ट्रांसलेट करके प्रस्तुत किया जिसे सैकड़ों अमेरिकन और यूरोपियन नागरिकों द्वारा पसंद किया गया !

विदेशी मूल के कई अंजान, अपरिचित नागरिकों द्वारा अपने अनंत वर्ष पुराने हिन्दू सनातन धर्म के ज्ञान की तारीफ़ सुनकर हमें बहुत ही ख़ुशी मिलती है पर इन सभी प्रशंसाओं तारीफों के बावजूद हमारा दृढ़ रूप से मानना है कि जब तक ऐसी विशेष जरूरत ना आ पड़े तब तक तो कम से कम अनिवार्य रूप से भारत में सिर्फ हिंदी के ही प्रयोग का राष्ट्र धर्म तो सभी भारतीयों को निभाना ही चाहिए !

संस्कृत इस ब्रह्माण्ड की सबसे पुरानी भाषा है और सीखने में यह बहुत सरल भी है ! संस्कृत भाषा में कई ऐसी दिव्य खूबियाँ है जो विश्व की किसी भी अन्य भाषा में नहीं है, जिसकी वजह से आज नासा जैसे सर्वोच्च वैज्ञानिक संस्थान में भी संस्कृत भाषा को मुख्य भाषा के रूप में अपनाया जा रहा है !

स्थिति तो यहाँ तक आ चुकी है कि नासा में हर महीने 15 दिनों तक बाकायदा वैज्ञानिकों को संस्कृत भाषा पढाई जाती है जिससे वे हमारे ऋषि मुनियों द्वारा लिखे गए प्राचीन हिन्दू धर्म के ग्रन्थों को ठीक से पढ़कर समझ सकें (विस्तृत जानकारी के लिए इस लिंक को खोलें –
http://www.patrika.com/news/jodhpur/nasa-looks-at-a-15-day-sanskrit-class-1162436/ ) !

हिंदी और संस्कृत दोनों भाषाओं की वर्णमाला एक ही है और इसके अलावा बहुत सी बातें एकदूसरे से एकदम मिलती जुलती हैं इसलिए हिंदी भाषा को, संस्कृत भाषा का एक सरल, आम बोलचाल का वर्जन (रूप) कहा जा सकता है !

असंख्य तकलीफों से भरी मिथ्या चकाचौंध की तरफ बढ़ चुके मानव जगत को वापस शाश्वत सुख प्रदान करने वाले वैदिक युग की तरफ फिर से तभी मोड़ा जा सकता है …………………. जब पूरे विश्व के अधिक से अधिक मानव पहले हिंदी भाषा में सक्षम हों और फिर इन्ही हिंदी वर्णमाला को आधार बनाकर संस्कृत भाषा में सक्षम हों सकें !

वास्तव में संस्कृत भाषा ही चाभी है उस दुर्लभ और अनंत वैदिक ज्ञान की, जिस पर चोरी छुपे बड़े पैमाने पर अमेरिका व यूरोप में रिसर्च हो रहा है !

“स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े स्वयंसेवी गण भी एकदम योजनाबद्ध तरीके से सभी समस्याओं के शाश्वत हल अर्थात अपनी वैदिक संस्कृति की पुनर्स्थापना के मिशन में युद्ध स्तर पर अपना हर संभव व न्यायोचित प्रयास कर रहें हैं ………………………. और हमारे इन प्रयासों को आप सभी आदरणीयों का कितना ज्यादा समर्थन मिल रहा है इसका अंदाजा हमें इस बात से भी लगता है जब ………….. आप में से ही कई आदरणीयों ने हमें बताया कि, जब वे अपनी सोच, ज्ञान और जरूरत (जैसे – प्राणायाम, योगासन, एक्यूप्रेशर, आयुर्वेदिक उपचार, भारतीय देशी गाय, गोमूत्र से सभी बिमारियों का इलाज, धार्मिक सामाजिक व राजनैतिक पहलू, एलियन आदि) से जुड़ी कुछ जानकारियों को गूगल (Google) पर हिंदी भाषा में टाइप करके सर्च कर रहे थे तो उन्हें गूगल के प्रथम पेज पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह का भी लिंक (www.svyambanegopal.com) मिला जिसके माध्यम से वे “स्वयं बने गोपाल” समूह की वेबसाइट पर पहुचें ……………………….. और इस वेबसाइट का अध्ययन करके वे इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत हमारे समूह से सम्पर्क करके अपनी विभिन्न भावनाओं, विचारों व शंकाओं आदि को साझा किया !

वास्तव में गूगल जानकारियों के अथाह समन्दर में तब्दील होता जा रहा है क्योंकि गूगल का पूरा प्रयास यही रहता है कि आपके द्वारा खोजी गयी जानकारियों को बेस्ट रिजल्ट्स के आधार पर पूरे विश्व में खुल चुकी लगभग 100 करोड़ वेबसाइटस में से खोज कर आपके सामने तुरंत प्रस्तुत कर सके !

जो जानकारी जितना ज्यादा जनता द्वारा देखी जाती है और जितना ज्यादा यूनिक (अनोखी या दुर्लभ) होती है, वो जानकारी गूगल में उतना ही ज्यादा हाई रैंक पर होती है !

ऐसे में किसी जानकारी को गूगल पर खोजने में उस जानकारी से सम्बंधित वेबसाइट का गूगल के प्रथम पेज पर आना, निश्चित रूप से यही प्रदर्शित करता है कि उस वेबसाइट के उस लेख को बहुत ज्यादा पसंद किया जा रहा है !

आज भी कई ऐसे सज्जन हैं जिनकी तीव्र आंतरिक इच्छा होती है कि देश में अमूल चूक परिवर्तन की बहार लाने में सक्षम सोशल मीडिया में वे भी पूर्ण रूप से हिंदी में ही सक्रीय होकर अपनी राष्ट्रभाषा के खोये हुए सम्मान की पुनः प्राप्ति के राष्ट्रधर्म में भी भागीदार बन सकें, पर दुर्भाग्य से उन्हें पता नहीं होता कि हिंदी में सुगमता पूर्वक टाइप कैसे करें …………… ऐसे सभी भारत माँ के पुत्रों/पुत्रियों से हम बेहद विनम्रतापूर्वक प्रार्थना करतें हैं कि हिंदी में टाइप करना उतना ही आसान होता है जितना इंग्लिश में टाइप करना !

हिंदी में टाइप करने के लिए या तो आप गूगल इनपुट टूल्स की वेबसाइट खोलकर उसमे तुरंत टाइप कर लें या गूगल इनपुट टूल्स को परमानेंट अपने कंप्यूटर में इनस्टॉल कर लें जिससे आप बिना इन्टरनेट कनेक्शन के भी हिंदी में टाइप कर सकतें हैं !

गूगल इनपुट टूल्स की वेबसाईट खोलने के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें –

https://www.google.com/inputtools/try/

इसे इंस्टाल करने के लिए कृपया इस पर क्लिक करें –

https://www.google.com/inputtools/windows/

वैसे तो इसे इंस्टाल करना बहुत आसान और मात्र 5 मिनट का काम है पर किसी सीनियर सिटीजन को अगर इसे इंस्टाल करना समझ में ना आ रहा हो तो वे कम से कम इस गूगल इनपुट टूल्स की वेबसाईट को अपने सिस्टम में बुकमार्क कर लें जिससे उन्हें बार बार इसे खोलने में दिक्कत ना हो (बुकमार्क करने में मात्र 10 सेकेंड लगते हैं) !

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