Online Consultation

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम,

यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि विश्व के 188 देशों के 6041 शहरों में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के आदरणीय पाठकों की शुभकामनाओं से, “स्वयं बनें गोपाल” समूह फिर से शुरू कर रहा है राष्ट्रव्यापी अभियान “ऑनलाइन कंसल्टेशन सर्विस” (Online Consultation Service) जिसकी मेन थीम (मुख्य उद्देश्य) है एक “सुखी राष्ट्र का निर्माण करना इसलिए अब आप इस अभियान से जुड़े हुए हमारे विश्वस्तरीय एक्सपर्ट्स से सीधे टेलीफोनिक बातचीत करके अपने जीवन की कठिन से कठिन बीमारियों एवं समस्याओं का अत्यंत लाभकारी समाधान तुरंत प्राप्त कर सकते हैं-

सभी शारीरिक व मानसिक बीमारियों के निदान के लिए परामर्श

कोई भी बीमारी चाहे कितना भी खतरनाक रूप पकड़ ले लेकिन ये तीन काम करने से उसे निश्चित ठीक किया जा सकता है– सही इलाज का चुनाव, उचित परहेजों को नियमित करना, और बीमारी से जीत जाने की तीव्र इच्छा का मन में होना !

ये तीनों काम बराबर के महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना परहेज के सही इलाज अपना फुल रिजल्ट नहीं दे पाता है और सिर्फ परहेज करने से बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाए यह भी जरूरी नहीं है लेकिन किसी मरीज का मन यदि पहले से ही हार मान बैठा हो तो उस निराशा की वजह से शरीर में बहुत से हानिकारक हारमोंस पैदा होने लगतें है जो उस बिमारी को और ज्यादा उग्र होने में मदद करते हैं (इसलिए जो कहावत है कि “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत” एकदम सही है) !

सही इलाज का चुनाव भी आसान काम नहीं है क्योंकि जब कोई व्यक्ति किसी बड़ी बीमारी से ग्रसित हो जाता है तो घबराहट में वह अक्सर सही निर्णय नहीं ले पाता है और जो जैसा समझा देता है वैसा ही करने लगता है !

किसी भी काम का सही फल पाने में सिर्फ मेहनत और त्याग ही जरूरी नहीं होते बल्कि बुद्धि की भी सख्त जरूरत होती है और बुद्धि भी कैसी होनी चाहिए– सिर्फ शुद्ध तार्किक बुद्धि होनी चाहिए, ना कि बहकावे या भीड़ से प्रभावित होने वाली बुद्धि !

इसलिए इस शाश्वत सत्य को कभी नहीं भूलना चाहिए कि भगवान द्वारा वेरी साइंटिफिकली डिज़ाइन की हुई मानवों के शरीर में पैदा हो सकने वाली कठिन बीमारियों का इलाज भी, शरीर के अंदर ही हमेशा मौजूद रहता है, अतः जटिल – पुराने रोगों को भी बिना किसी बाहरी मदद (यानी दवाओं) के, योग की इन चार मुख्य शाखाओं {(1) हठ योग- मतलब अलग अलग रोगों के लिए अलग अलग तरह के आसन, प्राणायाम, मुद्राएं, चिकित्सीय ध्यान, मर्म या मर्दन चिकित्सा (एक्यूप्रेशर) आदि (2) राज योग- मतलब मुनियों की तरह मनन, भाव समाधि आदि (3) भक्ति योग- मतलब ईश्वर आराधना, भजन आदि (4) कर्म योग- मतलब अलग अलग रोगों से मुक्ति पाने के लिए अलग अलग तरह की सेवा या परोपकार द्वारा प्रायश्चित आदि} का बुद्धिमानी पूर्ण तरीके से सतत इस्तेमाल करके भी हमेशा के लिए ठीक किया जा सकता है !

आपको सुनकर शायद आश्चर्य हो लेकिन वास्तव में शरीर से हर तरह के टोक्सिंस को बाहर निकालकर, जुकाम से लेकर कैंसर तक की बीमारियों को जड़ से समाप्त कर सकना, योग के केवल साधारण फायदे हैं जबकि योग के असली फायदे जानना हो तो हिमालय के उन योगियों से मिलना चाहिए जिन्होंने गुफाओं में बैठकर, केवल योग के सतत अभ्यास से ही साक्षात मृत्युंजय भगवान शिव का परम् दुर्लभ दर्शन पाया है !

इसलिए अब आप हमारे बेहद जानकार योग एक्सपर्ट्स से तुरंत जान सकतें हैं कि, आपके किसी भी कठिन शारीरिक या मानसिक रोगों के निदान लिए आप कब, कैसे, कितना, कौन सी योग की क्रियाएं करें जिससे आप अपनी वर्षों पुरानी तकलीफों से भी जल्दी मुक्ति पा सकें !

एक्सपर्ट्स से कंसल्टेशन पाने के लिए कृपया इस लिंक (बटन) पर क्लिक करें-