भविष्य घोर अन्धकार में देख अवसरवादी नेताओं को अब मोदी की शरण में आने में ही लगती भलाई

भारत तेजी से कैश लेस ट्रांजेक्शन की तरफ बढ़ रहा है और कैश लेस ट्रांजेक्शन की सबसे बड़ी ख़ास बात होती है कि इसमें एक रूपए का भी लेन देन, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से बिल्कुल भी छुपाया नहीं जा सकता है क्योंकि कैश लेस ट्रांजेक्शन में पैसे के लेने देन का हर छोटे सा छोटा रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाता है |

ये अलग बात है कि भारत में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के कर्मचारियों की संख्या काफी कम है, इसलिए पैसों के हर संशयपूर्ण व विवादास्पद लेन देन पर वे तुरंत इन्क्वायरी नहीं कर पाते हैं लेकिन यह तय है कि अगर मोदी जी शासन में बने रहे तो देर सवेर ऐसे हर संशयपूर्ण व विवादास्पद पैसो के लेन देन करने वालों को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नोटिस जरूर जायेगी (legal notice of Indian Income Tax Department) !

ऐसा नहीं है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नोटिस प्राप्त करने वाला हर नागरिक दोषी ही हो, क्योंकि कई बार आयकर विभाग अपने रूटीन वर्क के तहत ऐसे लोगो से भी पूछताछ करता है जिनका सारा हिसाब किताब एकदम ईमानदार और शुद्धतापूर्ण होता है इसलिए किसी भी नागरिक को अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आता है तो उसके बारे में तुरंत यह गलत राय नहीं बना लेनी चाहिए कि उसने जरूर कोई इललीगल पैसा रखा होगा तभी उसे नोटिस मिला है !

इनकम टैक्स के ऐसे हर तरह के लफड़े से बचने के लिए कोई व्यक्ति ज्यादा समझदारी दिखाते हुए यह सोचे कि आखिर हमें कैश लेस ट्रांजेक्शन करने की जरूरत है ही क्या ? हम तो कैश लेस ट्रांजेक्शन की बजाय उसी तरह नोटों की गड्डियों को घर की गुप्त तिजोरी में छुपा कर रखेंगे जैसे कि हम वर्षों से करते आ रहें हैं !

तो ऐसे लोगों के लिए बुरी सूचना यह है कि घर में अधिकतम कैश रखने की लिमिट के क़ानून के तहत, उनका पूरा कैश और साथ ही साथ घर में रखे हुए सोना, चादी, हीरा, जवाहरात आदि सब अघोषित संपत्ति भी खतरे में पड़ सकता है अगर उन्होंने एक लिमिट से ज्यादा कैश घर में रखा है तो क्योंकि अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट वालों को खबर मिल गयी कि घर में लिमिट से ज्यादा, कैश पैसा रखा हुआ है तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के छापे में उस पैसे पर तो कानूनी कार्यवाही होगी ही, साथ ही साथ कैश पैसे के साथ तिजोरी में रखा हुआ सोना, चादी, हीरा, जवाहरात आदि के बारे में भी संतोषजनक उत्तर ना मिलने पर वो भी जब्त हो सकता है !

अब इस पर कुछ लोग यह प्रश्न पूछ सकतें है कि आखिर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को पता ही कैसे चलेगा कि हमारे घर में सरकार द्वारा तय की गयी सीमा से ज्यादा रुपये छुपा कर रखे गएँ हैं ?

इस प्रश्न का कोई ऑफिशियल उत्तर तो नहीं है लेकिन नोट बंदी के बाद यह जरूर कई बार देखने को मिला था कि जो लोग अपने काले धन को, नए छपे हुए दो हजार के नोट से अवैध तरीके से बदल कर अपने घर की गुप्त तिजोरियों में छुपा छुपा कर रख रहे थे, उनके घर ना जाने कैसे आई टी डिपार्टमेंट वालों का छापा पड़ जा रहा था और इस छापे की ख़ास बात यह सुनने को मिली थी कि आई टी डिपार्टमेंट वालों को पहले से ही पता होता था कि ऐसे ब्लैक मनी वालों की गुप्त तिजोरी घर के किस गुप्त तहखाने में बंद है !

इन ताबड़तोड़ छापों के बाद ऐसी काली कमाई करने वाले शातिर लोग अच्छे से समझ गए कि सरकार भले ही लाख नकारे, लेकिन हो ना हो इस नए नोट में कोई ना कोई ऐसी चिप जरूर छिपी हुई है जिसे सैटेलाईट से डायरेक्ट ट्रैक (खोज) किया जा सकता है !

और अब तो सरकार द्वारा, सौ रूपए के और उससे छोटे नोटों को भी नए रूप में लाने की बात सुनने को मिल रही है तो ऐसे में किसी भी नए नोट के रूप में काला धन रखना भी उतना ही रिस्की है जितना नए दो हजार के नोट के रूप में रखना !

इस कैशलेस लेन देन के बढ़ते प्रभाव की वजह से निश्चित रूप से काले धन का अब गोरा होने का समय आ गया है !

वास्तव में जितने भी भ्रष्ट राजनेता हैं उनकी सारी राजनीति ही काले धन पर टिकी हुई थी, जिसका पुरजोर विरोध और खुलासा समय समय पर कुछ देशभक्त नेतृत्वों (जैसे श्री सुब्रमणियम स्वामी जी, श्री बाबा रामदेव जी, “स्वदेश चेतना” मीडिया ग्रुप के प्रमुख सम्पादक श्री डॉक्टर किसलय उपाध्याय जी आदि) द्वारा बार बार किया जाता रहा है और अब यही बात अंततः एकदम सही साबित होते हुए स्पष्ट दिखाई भी दी, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड विधान सभा चुनावों में (पंजाब व गोवा में पिछली बार की तुलना में बी जे पी के पीछे रह जाने के विशेष कारणों को जानने के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें) !

भारत में मौजूद सैकड़ों भ्रष्ट पार्टियों के ये सारे भ्रष्ट राजनेता अब तक यही तो करते आ रहे थे कि, 5 साल तक देश की जनता के कीमती टैक्स से जमा पैसे को पहले बल भर चूसो और फिर जब दुबारा चुनाव होने वाला हो तो उसी कमाए गए इफरात करोड़ो अरबो रूपए में से कुछ पैसे, गरीब भूखी जनता को देकर उनका वोट खरीद लो !

पर अब चूकी मोदी जी के द्वारा उठाये गए नोट बंदी (Demonetization done by Indian Prime Minister Mr. Narendra Modi) के भीषण वार से काला धन कमाना और रखना दोनो प्रक्रिया के रास्ते धीरे धीरे बंद होने लगे हैं, जिसकी वजह से भ्रष्ट पार्टी के बड़े बड़े नेताओं से लेकर छुट भईये नेताओं तक में भीषण खौफ भर गया है कि इस तरह तो उनका पूरा पोलिटिकल कैरियर ही समाप्त हो जाएगा |

ऊपर से बी जे पी शासित सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में इतना जबरदस्त विकास का काम कर रहें हैं कि उन प्रदेशों की जनता, अब किसी दूसरी पार्टी को वोट देने के बारे में सोच तक नहीं रही है, जिसका बड़ा उदाहरण हैं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात जैसे प्रदेश जहाँ पिछले कई कई सालों से सिर्फ बी जे पी की ही सरकार लगातार बनती जा रही है तथा अब एक बड़ा उदाहरण योगी आदित्यनाथ जी भी प्रस्तुत कर रहें हैं उत्तर प्रदेश में, जहाँ उनकी जुनूनी मेहनत, शीशे के समान पारदर्शी कार्यशैली और बेहद विनम्रतापूर्ण व्यवहार की वजह से, ना केवल वे उत्तर प्रदेश की जनता के असली चहेते नायक बनते जा रहें हैं बल्कि विपक्ष के नेता भी अब उनके आगे धीरे धीरे नतमस्तक होते जा रहें हैं !

भ्रष्ट पार्टी के अध्यक्ष लोगों में भी खलबली मची हुई है जब उनके ही पार्टी के बड़े और छुट भईये नेता भी अक्सर मोदी जी और उनकी टीम के सदस्यों की कर्मठता की तारीफ़ कर देते हैं !

अपनी पार्टी को किसी भी तरह के फूट से बचाने के लिए कई पार्टी के अध्यक्ष अब अपनी शर्मनाक हार का ठीकरा, इवीएम (वोटिंग मशीन) में धांधली या अन्य तरह की काल्पनिक अफवाहों पर फोड़ रहें हैं, हालांकि कई उत्साही देशभक्त नागरिकों ने “स्वयं बनें गोपाल” समूह से स्पष्ट किया है कि वे अब इस बात का भी पुरजोर विरोध करने के लिए एकदम सतर्क और तैयार हैं कि,- अपनी शर्मनाक चुनावी हार का ठीकरा ई. वी. एम्. में धांधली की मनगढ़ंत अफवाह पर ठोकने वाले नेता अब अपने इस आरोप को किसी ना किसी रूप में सही साबित करने के लिए किसी बड़े स्तर की ख़ुफ़िया साजिश का सहारा भी ले सकतें है, जिसे बिकाऊ मीडिया के सहयोग से खूब हवा देकर मोदी जी की ईमानदार छवि को धूमिल करने का एक और विफल प्रयास किया जा सकता है !

मोदी जी के खिलाफ अपनी आज तक की हर छोटी बड़ी साजिश को हमेशा विफल होते हुए देखने वाले नेता, चाहे वे पुराने घुटे हुए नेता हों या मेढ़क की तरह उछल कूद मचाने वाले नौसीखिए नेता, यह अच्छे से समझ गएँ हैं कि काले धन के खात्मे की वजह से अब वे पूरी तरह से बेबस हो चुके हैं और चाह कर भी पुराने तरीके से (अर्थात नोट के बदले वोट या जाति मजहब के नाम पर वोट) इलेक्शन नहीं जीत सकते हैं (मतलब सारांश तौर पर कहें तो, ऐसे भ्रष्ट नेता ना तो घर के रहे और ना घाट के), इसलिए अगर उन्हें राजनीति में बड़ा कैरियर बनाने की उम्मीद कायम रखनी है तो उनकी मजबूरी है कि उन्हें मोदी जी के समर्थन वाली पार्टी की शरण में ही जल्द से जल्द से जाना होगा क्योंकि जनता अब यह सीधा सीधा सन्देश दे रही है इलेक्शन के रिजल्ट के माध्यम से कि, जो वाकई में हमारे लिए विकास का काम करेगा अब सिर्फ और सिर्फ वही हमारे ऊपर शासन करेगा !

इलेक्शन के बाद जनता का रूख भांप चुके ऐसे परम अवसर वादी नेताओं को अब मोदी जी की समर्थन वाली पार्टी में शामिल होने में सबसे बड़ा डर यही महसूस हो रहा है कि कहीं अब वो जगहसाई का पात्र ना बन जाएँ क्योंकि अभी कुछ दिन पहले तक जिस मुंह से मोदी जी की आखिरी बुराई कर रहे थे (जिसकी वजह जनता ने कई बार उन्हें टोका कि क्यों मोदी जी जैसे तपस्वी आदमी को गाली देकर अपना मुंह काला कर रहे हो) अब उसी मुंह से कैसे मोदी जी की तारीफ़ करें ?

और सही भी बात है कि आखिर जनता ऐसे मौकापरस्त नेताओं का मजाक क्यों ना उड़ाए क्योंकि ऐसा तो है नहीं कि इन मौकापरस्त नेताओं को अपनी अपनी भ्रष्ट पार्टी के आकाओं के असंख्य कारनामों के बारे में पता नहीं था, बिल्कुल पता था क्योंकि भारत में 10 – 12 साल पहले तक जब तक सोशल मीडिया पूर्ण अस्तित्व में नहीं आया था तब तक तो इन भ्रष्ट पार्टी के आकाओं के बारे में भ्रम बना रहता था कि पता नहीं ये राजनेता सही में भ्रष्ट है या नहीं, पर जब से सोशल मीडिया फुल फॉर्म में आया और हर सफ़ेदपोश भ्रष्ट नेता के असंख्य कुकर्मों की असलियत हर एक एक नागरिक को पता चलने लगी, तब से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अन्य कई देशों की नागरिकों की आँखे ऐसा खुली कि वर्षों से सत्ता की रबड़ी मलाई खा रहे राजनेताओं का पूरा खानदान ही साफ़ होने लगा !

अतः वक्त का रुख समझने में सक्षम ऐसे अवसरवादी नेता जो गिरगिट से भी ज्यादा तेज होतें है रंग बदलने, मे इतनी व्यवहारिक समझ है कि तुरंत आतुर होकर मोदी जी की पार्टी ज्वाइन कर लेने पर समाज में उनका माखौल कुछ ज्यादा ही उड़ जाएगा इसलिए बेहतरी इसी में है कि बिना कोई आधिकारिक घोषणा किये हुए, पहले मोदी जी के कामों की तारीफ़ कर अनुकूल माहौल बनाया जाए, फिर अचानक से घोषणा कर दी जाए कि हम तो मोदी जी के सच्चे प्रशंसक शुरू से ही थे पर हमारी फलाने महाभ्रष्ट पार्टी ने अभी तक हमारी आँखों पर ही पर्दा डाल रखा था, जिसकी वजह से हम मोदी जी को अभी तक पहचान नहीं पाए थे !

इन अवसरवादी नेताओं की यह सोच एक अच्छा उदाहरण है उन अन्य भ्रष्ट पार्टी के नेताओं के लिए, जो आज भी जनता का मोदी जी के प्रति अखंड विश्वास की लहर को देखकर नहीं चेत रहें हैं और अनवरत मोदी जी के सभी देश कल्याण के किये गए कामों के बारे में मनगढ़ंत काल्पनिक अफवाह बनाकर जनता को गुमराह करने का लगातार विफल प्रयास कर रहें हैं |

ऐसे नेताओं को अब तो यह अच्छे से समझने की जरूरत है कि वे आज जितना अधिक से अधिक पाप कमाएंगे किसी सच्चे देशभक्त की बुराई करके, कल को उनका उतना ही बड़ा प्रायश्चित करना पड़ेगा जनता के बीच में अपना माखौल उड़वाकर, जैसा कि आज उन अवसरवादी नेताओं का हो रहा है जो इलेक्शन के ठीक पहले तक मोदी जी की बलभर बुराई कर रहे थे, पर इलेक्शन की अप्रत्याशित जीत के बाद अब दबी जबान में मोदी जी का गुणगान कर रहें हैं !

जीत अतंतः सत्य की ही होनी है, इसलिए जितना जल्द से जल्द बुराई का साथ छोड़कर, अच्छाई का साथ पकड़ लिया जाए, उतना ही कम प्रयाश्चित का दुःख झेलना पड़ता है !

(आवश्यक सूचना – “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट में प्रकाशित सभी जानकारियों का उद्देश्य, सत्य व लुप्त होते हुए ज्ञान के विभिन्न पहलुओं का जनकल्याण हेतु अधिक से अधिक आम जनमानस में प्रचार व प्रसार करना मात्र है ! अतः “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान अपने सभी पाठकों से निवेदन करता है कि इस वेबसाइट में प्रकाशित किसी भी यौगिक, आयुर्वेदिक, एक्यूप्रेशर तथा अन्य किसी भी प्रकार के उपायों व जानकारियों को किसी भी प्रकार से प्रयोग में लाने से पहले किसी योग्य चिकित्सक, योगाचार्य, एक्यूप्रेशर एक्सपर्ट तथा अन्य सम्बन्धित विषयों के एक्सपर्ट्स से परामर्श अवश्य ले लें क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं)



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