Author: gopalp

निबंध – हिंदू-मुस्लिम विद्वेष और भारत सरकार (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

उत्‍तुंग शिमला शैल के होटल सेसील में भारत के नये वायसराय लार्ड इरविन ने गत सप्‍ताह, हिंदू-मुस्लिम विद्वेष के संबंध में बड़े मार्के का भाषण दिया। वह वायसराय महोदय की प्रथम सार्वजनिक वक्‍तृता थी।...

डायरी – जेल-डायरी (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

”आज लखनऊ जिला जेल में यह डायरी प्राप्‍त हुई। चार डायरियाँ थी, तीन बँट गईं, एक का इस्‍तेमाल मैं करूँगा।” यह पंक्तियाँ गणेशशंकर विद्यार्थी ने 31 जनवरी 1922 को लिखी थीं। उक्‍त जेलयात्रा विद्यार्थीजी...

उपन्यास – अधखिला फूल – समर्पण (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

श्रील श्रीयुत मानोन्नत अखिलगुण गौरवालंकृत सी.ई. क्राफोर्ड साहब बहादुर मुहतमिम बन्दोबस्त आजमगढ़ बिबुधबृन्दविभूषणेषु! प्रभुवर! बालार्कअरुणरागरंजित प्रफुल्ल पाटलप्रसून, परिमलविकीर्णकारी मन्दवाही प्रभात समीरण, अतसीकुसुमदलोपमेयकान्ति नवजलधरपटल, पीयूषप्रवर्षणकारी सुपूर्ण शुभ्र शारदीय शशांक, रविकिरणोद्भासित वीचिविक्षेपणशीला तरंगिणी, श्यामलतृणावरण- परिशोभित उतुंग...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 2 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

वैशाख का महीना, दो घड़ी रात बीत गयी है। चमकीले तारें चारों ओर आकाश में फैले हुए हैं, दूज का बाल सा पतला चाँद, पश्चिम ओर डूब रहा है, अंधियाला बढ़ता जाता है, ज्यों-ज्यों...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 3 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

जिस खेत में यह टूटा हुआ तारा गिरा, उसमें देखते-ही-देखते एक भीड़ सी लग गयी, लोग पर लोग चले आते थे, और सब यही चाहते थे, किसी भाँत भीड़ चीरकर उस तारे तक पहुँचें,...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 4 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

एक बहुत ही सजा हुआ घर है, भीतों पर एक-से-एक अच्छे बेल-बूटे बने हुए हैं। ठौर-ठौर भाँति-भाँति के खिलौने रक्खे हैं, बैठकी और हांड़ियों में मोमबत्तियाँ जल रही हैं, बड़ा उँजाला है, बीच में...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 5 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

चाँद कैसा सुन्दर है, उसकी छटा कैसी निराली है, उसकी शीतल किरणें कैसी प्यारी लगती हैं! जब नीले आकाश में चारों ओर जोति फैला कर वह छवि के साथ रस की वर्षा सी करने...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 6 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

बासमती जाने से कुछ ही पीछे हरलाल को ले कर लौट आयी। हरलाल छड़ी से टटोल-टटोल कर पाँव रखते हुए घर में आया। उसके आते ही पारबती और देवहूती वहाँ से हटकर कुछ आड़...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 7 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

भोर के सूरज की सुनहली किरणें धीरे-धीरे आकाश में फैल रही हैं, पेड़ों की पत्तियों को सुनहला बना रही हैं, और पास के पोखरे के जल में धीरे-धीरे आकर उतर रही हैं। चारों ओर...

कविता – वैदेही-वनवास – सती सीता ताटंक (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

प्रकृति-सुन्दरी विहँस रही थी चन्द्रानन था दमक रहा। परम-दिव्य बन कान्त-अंक में तारक-चय था चमक रहा॥ पहन श्वेत-साटिका सिता की वह लसिता दिखलाती थी। ले ले सुधा-सुधा-कर-कर से वसुधा पर बरसाती थी॥1॥ नील-नभो मण्डल...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 8 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

चमकता हुआ सूरज पश्चिम ओर आकाश में धीरे-धीरे डूब रहा है। धीरे-ही-धीरे उसका चमकीला उजला रंग लाल हो रहा है। नीले आकाश में हलके लाल बादल चारों ओर छूट रहे हैं। और पहाड़ की...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 9 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

फूल तोड़ने के लिए देवहूती नित्य जाती, नित्य उसका जी कामिनीमोहन की ओर खींचने के लिए बासमती उपाय करती। कामिनीमोहन भी उसको अपनाने के लिए कोई जतन उठा न रखता, बनाव सिंगार, सज धज...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 10 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

कहा जाता है, दिन फल अपने हाथ नहीं, करम का लिखा हुआ अमिट है, हम अपने बस भर कोई बात उठा नहीं रखते, पर होता वही है, जो होना है, जतन उपाय ब्योंत सब...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 11 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

चारों ओर आग बरस रही है-लू और लपट के मारे मुँह निकालना दूभर है-सूरज बीच आकाश में खड़ा जलते अंगारे उगिल रहा है और चिलचिलाती धूप की चपेटों से पेड़ तक का पत्ता पानी...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 12 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

देवहूती और उसकी मौसी के घर के ठीक पीछे भीतों से घिरी हुई एक छोटी सी फुलवारी है। भाँत-भाँत के फूल के पौधे इसमें लगे हुए हैं, चारों ओर बड़ी-बड़ी क्यारियाँ हैं, एक-एक क्यारी...

उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 13 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)

पहाड़ों में जाकर नदियों को देखो, दूर तक कहीं उनका कुछ चिह्न नहीं मिलता। आगे बढ़ने पर थोड़ा सा पानी सोते की भाँति झिर झिर बहता हुआ देख पड़ता है और आगे बढ़ने पर...