Author: gopalp

लेख – जंजाल तोड़ो – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

दुनिया-भर के साधुओं-संन्‍यासियों ने ”गृहकारज नाना जंजाला” कह उसे तोड़कर बाहर आने की शिक्षा दी है। यदि घुमक्कड़ के लिए भी उसका तोड़ना आवश्‍यक है, तो यह न समझना चाहिए कि घुमक्कड़ का ध्‍येय...

लेख – स्‍त्री घुमक्कड़ – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

घुमक्कड़-धर्म सार्वदैशिक विश्‍वव्‍यापी घर्म है। इस पंथ में किसी के आने की मनादी नहीं है, इसलिए यदि देश की तरुणियाँ भी घुमक्कड़ बनने की इच्‍छा रखें, तो यह खुशी की बात है। स्‍त्री होने...

लेख – लेखनी और तूलिका – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

मानव-मस्तिष्‍क में जितनी बौद्धिक क्षमतायें होती है, उनके बारे में कितने ही लोग समझते हैं कि ”ध्‍यानावस्थित तद्गत मन” से वह खुल जाती हैं। किंतु बात ऐसी नहीं है। मनुष्‍य के मन में जितनी...

लेख – विद्या और वय पीछे – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

यदि सारा भारत घर-बार छोड़कर घुमक्कड़ हो जाय, तो भी चिंता की बात नहीं है। लेकिन घुमकक्‍ड़ी एक सम्‍मानित नाम और पद है। उसमें, विशेषकर प्रथम श्रेणी के घुमक्कड़ों में सभी तरह के ऐरे-गैरे...

लेख – धर्म और घुमक्कड़ी – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

किसी-किसी पाठक को भ्रम हो सकता है, कि धर्म और आधुनिक घुमक्कड़ी में विरोध है। लेकिन धर्म से घुमक्कड़ी का विरोध कैसे हो सकता है, जबकि हम जानते हैं कि प्रथम श्रेणी के घुमक्कड़...

लेख – निरुद्देश्‍य – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

निरुद्देश्‍य का अर्थ है उद्देश्‍यरहित, अर्थात् बिना प्रयोजन का। प्रयोजन बिना तो कोई मंदबुद्धि भी काम नहीं करता। इसलिए कोई समझदार घुमक्कड़ यदि निरुद्देश्‍य ही बीहड़पथ को पकड़े तो यह विचित्र-सी बात है। निरुद्देश्‍य...

लेख – स्वावलंबन – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

घुमक्कड़ी का अंकुर किसी देश, जाति या वर्ग में सीमित नहीं रहता। धनाढ्य कुल में भी घुमक्कड़ पैदा हो सकता है, लेकिन तभी जब कि उस देश का जातीय जीवन उन्‍मुख हो। पतनशील जाति...

लेख – प्रेम – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

घुमक्कड़ को दुनिया में विचरना है, उसे अपने जीवन को नदी के प्रवाह की तरह सतत प्रवाहित रखना है, इसीलिए उसे प्रवाह में बाधा डालने वाली बातों से सावधान रहना है। ऐसी बाधक बातों...

लेख – स्‍मृतियाँ – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

घुमक्कड़ असंग और निर्लेप रहता है, यद्यपि मानव के प्रति उसके हृदय में अपार स्‍नेह है। यही अपार स्‍नेह उसके हृदय में अनंत प्रकार की स्‍मृतियाँ एकत्रित कर देता है। वह कहीं किसी से...

लेख – शिल्‍प और कला – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

घुमक्कड़ के स्वावलंबी होने के लिए उपसुक्त कुछ बातों को हम बतला चुके हैं। क्षौरकर्म, फोटोग्राफी या शारीरिक श्रम बहुत उपयोगी काम हैं, इसमें शक नहीं; लेकिन वह घुमक्कड़ की केवल शरीर-यात्रा में ही...

लेख – देशज्ञान – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

आज जिस प्रकार के घुमक्कड़ों की दुनिया को आवश्‍यकता है, उन्‍हें अपनी यात्रा केवल ”स्वांत: सुखाय” नहीं करनी है। उन्‍हें हरेक चीज इस दृष्टि से देखनी है, जिसमें कि घर बैठे रहनेवाले दूसरे लाखों...

लेख – पिछड़ी जातियों में – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

बाहरवालों के लिए चाहे वह कष्‍ट, भय और रूखेपन का जीवन मालूम होता हो, लेकिन घुमक्कड़ी जीवन घुमक्कड़ के लिए मिसरी का लड्डू है, जिसे जहाँ से खाया जाय वहीं से मीठा लगता है...

लेख – तिब्बत में प्रवेश – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

अब तो मैं तीसरी बार तिब्बत में प्रवेश कर रहा था, इस रास्ते यह दूसरी बार जा रहा था। पहले प्रवेश में मुझे उतना ही कष्टों का सामना करना पड़ा था, जितना कि हनुमानजी...

लेख – ऐनम् – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

अभी हम जंगल और वनस्पति की भूमि में ही थे, लेकिन कुछ ही मीलों बाद उसका साथ चिरकाल के लिए छूटने वाला था। तातपानी से यहाँ तक, भोटकाशी के दोनों किनारों के पहाड़ हरे-भरे...

लेख – तिड्‍़री की ओर – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

एक अपैल के नौ बजे हम आगे के लिए रवाना हुए। हमारे और अभयसिंह के अतिरिक्त चार नेपाली सवार साथी हुए, जिनमें शि-गर्-चे के नेपाली फोटोग्राफर तेजरत्न तथा उनकी तिब्बती स्त्री भी थी। जोड़्...

लेख – स-स्क्या की ओर – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

2 मई को चाय-सत्तू (प्रातराश) करके आठ बजे हम तिड्‍रि से रवाना हुए। चार घंटे में नेमू गाँव में पहुँचे। आजकल यहाँ खेतों में जुताई का काम हो रहा था। आसपास के पहाड़ों पर...