Monthly Archive: January 2015

कहानी – दुस्साहस- (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

लखनऊ के नौबस्ते मोहल्ले में एक मुंशी मैकूलाल मुख्तार रहते थे। बड़े उदार, दयालु और सज्जन पुरुष थे। अपने पेशे में इतने कुशल थे कि ऐसा बिरला ही कोई मुकदमा होता था जिसमें वह...

कहानी – रक्षा – (लेखक – वृंदावनलाल वर्मा)

मुहम्मदशाह औरंगजेब का परपोता और बहादुरशाह का पोता था। 1719 में सितंबर में गद्दी पर बैठा था। सवाई राजा जयसिंह के प्रयत्न पर मुहम्मदशाह ने गद्दी पर बैठने के छह वर्ष बाद जजिया मनसूख...

लेख – संग्राम – भाग -1 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पहला दृश्य प्रभात का समय। सूर्य की सुनहरी किरणें खेतों और वृक्षों पर पड़ रही हैं। वृक्षपुंजों में पक्षियों का कलरव हो रहा है। बसंत ऋतु है। नई-नई कोपलें निकल रही हैं। खेतों में...

कहानी – थोड़ी दूर और – (लेखक – वृंदावनलाल वर्मा)

जब मुहमूद गजनवी (सन 1025-26 में) सोमनाथ का मंदिर नष्ट-भ्रष्ट करके लौटा तब उसे कच्छ से होकर जाना पड़ा। गुजरात का राजा भीमदेव उसका पीछा किए चल रहा था। ज्यों-ज्यों करके महमूद गजनवी कच्छ...

लेख – संग्राम – भाग -2 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पहला दृश्य स्थान : चेतनदास की कुटी, गंगातट।   समय : संध्या।   सबल : महाराज, मनोवृत्तियों के दमन करने का सबसे सरल उपाय क्या है ?   चेतनदास : उपाय बहुत हैं, किंतु...

कहानी – खजुराहो की दो मूर्तियाँ – (लेखक – वृंदावनलाल वर्मा)

चंद्रमा थोड़ा ही चढ़ा था। बरगद की पेड़ की छाया में चाँदनी आँखमिचौली खेल रही थी। किरणें उन श्रमिकों की देहों पर बरगद के पत्तों से उलझती-बिदकती सी पड़ रहीं थीं। कोई लेटा था,...

लेख – संग्राम – भाग -3 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

प्रथम दृश्य स्थान : कंचनसिंह का कमरा।   समय : दोपहर, खस की टट्टी लगी हुई है, कंचनसिंह सीतलपाटी बिछाकर लेटे हुए हैं, पंखा चल रहा है।   कंचन : (आप-ही-आप) भाई साहब में...

कहानी – ‘कंजूस और सोना – (लेखक – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)

एक आदमी था, जिसके पास काफी जमींदारी थी, मगर दुनिया की किसी दूसरी चीज से सोने की उसे अधिक चाह थी। इसलिए पास जितनी जमीन थी, कुल उसने बेच डाली और उसे कई सोने...

लेख – संग्राम – भाग – 4 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पहला दृश्य   स्थान: मधुबन। थानेदार, इंस्पेक्टर और कई सिपाहियों का प्रवेश।   इंस्पेक्टर : एक हजार की रकम एक चीज होती है।   थानेदार : बेशक !   इंस्पेक्टर : और करना कुछ...

कहानी – रामशास्त्री की निस्पृहता – (लेखक – वृंदावनलाल वर्मा)

दो सौ वर्ष के लगभग हो गए, जब पूना में रामशास्त्री नाम के एक महापुरुष थे। न महल, न नौकर-चाकर, न कोई संपत्ति। फिर भी इस युग के कितने बड़े मानव! भारतीय संस्कृति की...

लेख – संग्राम – भाग – 5 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पहला दृश्य स्थान : डाकुओं का मकान।   समय : ढाई बजे रात। हलधर डाकुओं के मकान के सामने बैठा हुआ है।   हलधर : (मन में) दोनों भाई कैसे टूटकर गले मिले हैं।...

कहानी – ‘भेड़िया, भेड़िया’ – (लेखक – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)

एक चरवाहा लड़का गाँव के जरा दूर पहाड़ी पर भेड़ें ले जाया करता था। उसने मजाक करने और गाँववालों पर चड्ढी गाँठने की सोची। दौड़ता हुआ गाँव के अंदर आया और चिल्‍लाया, ”भेड़िया, भेड़िया!...

कहानी – नाग पूजा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

प्रातःकाल था। आषाढ़ का पहला दौंगड़ा निकल गया था। कीट-पतंग चारों तरफ रेंगते दिखायी देते थे। तिलोत्तमा ने वाटिका की ओर देखा तो वृक्ष और पौधे ऐसे निखर गये थे जैसे साबुन से मैले...

कहानी – पत्थर की पुकार (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

नवल और विमल दोनों बात करते हुए टहल रहे थे। विमल ने कहा- ”साहित्य-सेवा भी एक व्यसन है।”   ”नहीं मित्र! यह तो विश्व भर की एक मौन सेवा-समिति का सदस्य होना है।”  ...

कहानी – लोकमत का सम्मान – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

बेचू धोबी को अपने गाँव और घर से उतना ही प्रेम था, जितना प्रत्येक मनुष्य को होता है। उसे रूखी-सूखी और आधे पेट खाकर भी अपना गाँव समग्र संसार से प्यारा था। यदि उसे...

कहानी – अनबोला (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

उसके जाल में सीपियाँ उलझ गयी थीं। जग्गैया से उसने कहा-”इसे फैलाती हूँ, तू सुलझा दे।” जग्गैया ने कहा-”मैं क्या तेरा नौकर हूँ?”   कामैया ने तिनककर अपने खेलने का छोटा-सा जाल और भी...