Monthly Archive: September 2014

कविताएँ – दर्शन सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 वह चंद्रहीन थी एक रात,   जिसमें सोया था स्वच्छ प्रात   उजले-उजले तारक झलमल,   प्रतिबिंबित सरिता वक्षस्थल,     धारा बह जाती बिंब अटल,   खुलता था धीरे पवन-पटल   चुपचाप...

कहानी – दो कब्रें – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

अब न वह यौवन है, न वह नशा, न वह उन्माद। वह महफिल उठ गई, वह दीपक बुझ गया, जिससे महफिल की रौनक थी। वह प्रेममूर्ति कब्र की गोद में सो रही है। हाँ,...

कविताएँ – ईर्ष्या सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 पल भर की उस चंचलता ने   खो दिया हृदय का स्वाधिकार,   श्रद्धा की अब वह मधुर निशा   फैलाती निष्फल अंधकार     मनु को अब मृगया छोड नहीं   रह...

कहानी – कजाकी – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मेरी बाल-स्मृतियों में ‘कजाकी’ एक न मिटने वाला व्यक्ति है। आज चालीस साल गुजर गये; कजाकी की मूर्ति अभी तक आँखों के सामने नाच रही है। मैं उन दिनों अपने पिता के साथ आजमगढ़...

कविताएँ – वासना सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 चल पड़े कब से हृदय दो,   पथिक-से अश्रांत,   यहाँ मिलने के लिये,   जो भटकते थे भ्रांत।     एक गृहपति, दूसरा था   अतिथि विगत-विकार,   प्रश्न था यदि एक,...

कहानी – मृतक-भोज – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

सेठ रामनाथ ने रोग-शय्या पर पड़े-पड़े निराशापूर्ण दृष्टि से अपनी स्त्री सुशीला की ओर देखकर कहा, ‘मैं बड़ा अभागा हूँ, शीला। मेरे साथ तुम्हें सदैव ही दुख भोगना पड़ा। जब घर में कुछ न...

कविताएँ – आनंद सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 चलता था-धीरे-धीरे   वह एक यात्रियों का दल,   सरिता के रम्य पुलिन में   गिरिपथ से, ले निज संबल।     या सोम लता से आवृत वृष   धवल, धर्म का प्रतिनिधि,...

कहानी – दारोगाजी – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

कल शाम को एक जरूरत से तांगे पर बैठा हुआ जा रहा था कि रास्ते में एक और महाशय तांगे पर आ बैठे। तांगेवाला उन्हें बैठाना तो न चाहता था, पर इनकार भी न...

श्री राधा रहस्य, कौन जानता है ?

ब्रज धाम में किसी राजा का नहीं बल्कि रानी का राज चलता है ! और ये रानी कोई और नहीं, हमारी प्यारी लाडली सरकार श्री राधा रानी जी हैं ! श्री राधा जी को...

कविताएँ – स्वप्न सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 संध्या अरुण जलज केसर ले   अब तक मन थी बहलाती,   मुरझा कर कब गिरा तामरस,   उसको खोज कहाँ पाती     क्षितिज भाल का कुंकुम मिटता   मलिन कालिमा के...

गणपति बाप्पा मोरया

आदिशक्ति माँ पार्वती को अपनी बाल लीलाओं से हँसाने वाले, श्री महादेव के परम लाडले, भगवान कार्तिकेय के परम आज्ञाकारी छोटे भाई, लड्डू को बहुत पसंद करने वाले, चूहे पर बैठ कर पूरा ब्रह्माण्ड...

कहानी – आगा-पीछा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

रूप और यौवन के चंचल विलास के बाद कोकिला अब उस कलुषित जीवन के चिह्न को आँसुओं से धो रही थी। विगत जीवन की याद आते ही उसका दिल बेचैन हो जाता और वह...

कविताएँ – काम सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 “मधुमय वसंत जीवन-वन के,   बह अंतरिक्ष की लहरों में,   कब आये थे तुम चुपके से   रजनी के पिछले पहरों में?     क्या तुम्हें देखकर आते यों   मतवाली कोयल...

कहानी – सत्याग्रह – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

हिज एक्सेलेंसी वाइसराय बनारस आ रहे थे। सरकारी कर्मचारी, छोटे से बड़े तक, उनके स्वागत की तैयारियाँ कर रहे थे। इधर काँग्रेस ने शहर में हड़ताल मनाने की सूचना दे दी थी। इससे कर्मचारियों...

कविताएँ – रहस्य सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 उर्ध्व देश उस नील तमस में,   स्तब्ध हि रही अचल हिमानी,   पथ थककर हैं लीन चतुर्दिक,   देख रहा वह गिरि अभिमानी,     दोनों पथिक चले हैं कब से,  ...

कहानी – प्रेरणा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मेरी कक्षा में सूर्यप्रकाश से ज्यादा ऊधामी कोई लड़का न था, बल्कि यों कहो कि अध्यापन-काल के दस वर्षों में मुझे ऐसी विषम प्रकृति के शिष्य से साबका न पड़ा था। कपट-क्रीड़ा में उसकी...