Monthly Archive: April 2014

कहानी – कैदी – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

चौदह साल तक निरन्तर मानसिक वेदना और शारीरिक यातना भोगने के बाद आइवन ओखोटस्क जेल से निकला; पर उस पक्षी की भाँति नहीं, जो शिकारी के पिंजरे से पंखहीन होकर निकला हो बल्कि उस...

लेख – मनुष्यता की उच्च भूमि – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

मनुष्य की चेष्टा और कर्मकलाप से भावों का मूल संबंध निरूपित हो चुका है और यह भी दिखाया जा चुका है कि कविता इन भावों या मनोविकारों के क्षेत्र को विस्तृत करती हुई उनका...

कहानी – दो बैलों की कथा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवकूफ है या उसके सीधेपन, उसकी...

लेख – सौंदर्य – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

सौंदर्य बाहर की कोई वस्तु नहीं है, मन के भीतर की वस्तु है। यूरोपीय कला समीक्षा की यह एक बड़ी ऊँची उड़ान या बड़ी दूर की कौड़ी समझी गई है। पर वास्तव में यह...

कहानी – मुफ्त का यश – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

उन दिनों संयोग से हाकिम-जिला एक रसिक सज्जन थे। इतिहास और पुराने सिक्कों की खोज में उन्होंने अच्छी ख्याति प्राप्त कर ली थी। ईश्वर जाने दफ्तर के सूखे कामों से उन्हें ऐतिहासिक छान-बीन के...

लेख – काव्य और व्यवहार – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

भावों या मनोविकारों के विवेचन में हम कह चुके हैं कि मनुष्य को कर्म में प्रवृत्त करने वाली मूल वृत्ति भावात्मिका है। केवल तर्क बुद्धि या विवेचना के बल से हम किसी कार्य में...

कहानी – रियासत का दीवान – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

महाशय मेहता उन अभागों में थे, जो अपने स्वामी को प्रसन्न नहीं रख सकते थे। वह दिल से अपना काम करते थे और चाहते थे कि उनकी प्रशंसा हो। वह यह भूल जाते थे...

लेख – मनोरंजन – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

प्राय: सुनने में आता है कि कविता का उद्देश्य मनोरंजन है। पर जैसा कि हम पहले कह आए हैं कविता का अंतिम लक्ष्य जगत् के मार्मिक पक्षों का प्रत्यक्षीकरण करके उनके साथ मनुष्य हृदय...

कहानी – जीवन का शाप – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

कावसजी ने पत्र निकाला और यश कमाने लगे। शापूरजी ने रुई की दलाली शुरू की और धन कमाने लगे ? कमाई दोनों ही कर रहे थे, पर शापूरजी प्रसन्न थे; कावसजी विरक्त। शापूरजी को...

लेख – अलंकार – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

कविता में भाषा की सब शक्तियों से काम लेना पड़ता है। वस्तु या व्यापार की भावना चटकीली करने और भाव को अधिक उत्कर्ष पर पहुँचाने के लिए कभी किसी वस्तु का आकार या गुण...

कहानी – बासी भात में खुदा का साझा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

शाम को जब दीनानाथ ने घर आकर गौरी से कहा, कि मुझे एक कार्यालय में पचास रुपये की नौकरी मिल गई है, तो गौरी खिल उठी। देवताओं में उसकी आस्था और भी दृढ़ हो...

लेख – काव्य की भाषा – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

कविता में कही गई बात चित्र रूप में हमारे सामने आनी चाहिए। यह हम पहले कह आए हैं। अत: उसमें गोचर रूपों का विधान अधिक होता है। वह प्राय: ऐसे रूपों और व्यापारों को...

कहानी – लॉटरी – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

जल्‍दी से मालदार हो जाने की हवस किसे नहीं होती ? उन दिनों जब लॉटरी के टिकट आये, तो मेरे दोस्त, विक्रम के पिता, चचा, अम्मा, और भाई,सभी ने एक-एक टिकट खरीद लिया। कौन...

लेख – चमत्कारवाद – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

काव्य के संबंध में ‘चमत्कार’, ‘अनूठापन’ आदि शब्द बहुत दिनों से लाए जाते हैं। चमत्कार मनोरंजन की सामग्री है, इसमें संदेह नहीं। इससे जो लोग मनोरंजन को ही काव्य का लक्ष्य समझते हैं वे...

कहानी – कानूनी कुमार – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मि. कानूनी कुमार, एम.एल.ए. अपने आँफिस में समाचारपत्रों, पत्रिकाओं और रिपोर्टों का एक ढेर लिए बैठे हैं। देश की चिन्ताओं से उनकी देह स्थूल हो गयी है; सदैव देशोद्धार की फिक्र में पड़े रहते...

कविता -आखिरी कलाम – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल )

पहिले नावँ दैउ करलीन्हा । जेंइ जिउ दीन्ह, बोल मुख कीन्हा॥ दीन्हेसि सिर जो सँवारै पागा । दीन्हेसि कया जो पहिरै बागा॥   दीन्हेसि नयन जोति, उजियारा । दीन्हेसि देखै कहँ संसारा॥   दीन्हेसि...