आज के स्कन्द गुप्त : श्री डोभाल

· January 16, 2016

किसी देश की बागडोर अगर भ्रष्ट व बेईमान लोगों के हाथों में हो तो उस देश में रहने वाले देश प्रेमी नागरिकों की बेचैनी और घबराहट वही समझ सकता है जो वाकई में देश प्रेमी हो ! और किसी देश की बागडोर अगर देश भक्त मजबूत किस्म के आदमी के हाथ में हो तो उस देश में रहने वाले देश प्रेमियों की संतुष्टि भी वही समझ सकता है जो वाकई में देश भक्त हो !

भारत देश की पूर्व की सरकारों ने क्या और कितना काम किया है ये देश का आम आदमी अपने हालात देख कर खुद ही समझ सकता है ! भारत देश की आज की सरकार क्या काम कर रही है उसका असर सबसे निचले स्तर मतलब आम आदमी तक पहुचने में समय तो जरूर लगेगा पर वो असर टिकाऊ, फायदेमंद और सुरक्षित होगा !

भारतवर्ष के दूरदर्शी प्रधानमंत्री मोदी जी यों तो देश हित के लिए एक छोटे से बच्चे की सलाह को भी गम्भीरता से लेते हैं, पर उनके कुछ खास सलाहकार ऐसे हैं जो वाकई में खास कहलाने योग्य हैं ! इन्ही सलाहकारों में से एक हैं श्री अजित डोभाल ! जिन्हें एक ज़माने में भारत का रियल जेम्स बांड कहा जाता था !

दुश्मन के गढ़ में अन्दर तक घुसकर दुश्मन की जड़ खोदने का साहस, मजाक नहीं होता ! अच्छे से अच्छे दबंग, गुंडा, बहादुर कहे जाने वाले लोग भी अगर गलती से भी किसी ऐसी स्थिति में आ जाय की उनकी जान पर खतरा बन पड़े तो वो दहाड़े मारकर रोने लगते हैं पर श्री डोभाल जैसे प्राण मोह से विरक्त आदमी जिनके सिर पर मातृ भूमि की सुरक्षा की धुन पागलपन की हद तक सवार हो, वो देश सुरक्षा के ऑपरेशन्स में बिना अंजाम तक पहुचाये
हुए, कदम वापस नहीं खीचते !

सिर्फ कुछ हजार रूपए तनख्वाह पाने के लिए कोई बार बार बेहद खतरनाक परिस्थितियों में अपने आपकों फ़साना बिल्कुल ही नहीं चाहेगा क्योंकि हर सामान्य डरपोक संसारी आदमी का यही सोचना होता है की जब जान ही नहीं रहेगी तो पैसा लेकर कोई क्या करेगा, पर जो होते ही हैं अलग, देश हित को माथे पर और जान की परवाह जूते की नोक पर रखने वाले, उन्हें तो ऐसे ही कामों में मजा आता है ! ऐसे जन्मजात देशभक्त योद्धा को अगर दुकान पर बैठकर दाल चावल बेचना हो तो शायद वो बिल्कुल फिसड्डी साबित हों पर उन्हें देश सुरक्षा से सम्बंधित किसी खतरनाक मिशन पर भेजा जाय तो उनका उत्साह और ख़ुशी देखते बनती है ! ऐसे बेहद तेजतर्रार और देश भक्त व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाना निश्चित रूप से मोदी जी की बुद्धिमानी और देशभक्ति का प्रमाण है !

भारतवर्ष की आम जनता का कई बार मन विचलित हो जाता है की मोदी जी जिनके श्री बाबा रामदेव, श्री सुब्रमन्यम स्वामी, श्री डोभाल आदि जैसे बेहद बुद्धिमान और देशभक्त शुभ चिन्तक हों, वो कुछ खास कमाल क्यों नहीं दिखा पा रहें हैं !

असल में एक समस्या ऐसी है जिसे सभी देश भक्त लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए की यहाँ हर जगह, हर डिपार्टमेंट में भेड़ की खाल में भेड़िये बहुत हैं और इन भेड़ियों का हर वो आदमी अपना दुश्मन लगता हैं जो इनकी भ्रष्टाचार की पाप की कमाई में रोड़ा बनता है, और ऐसे हर भेड़िये मुसीबत पड़ने पर तुरन्त एकजुट होकर उस ईमानदार आदमी के पीछे हाथ धोकर पड़ जाते हैं जो उन्हें कमाने नहीं दे रहा है ! आज के जमाने में एक बहुत बड़ा अस्त्र है बिकाऊ मीडिया जिसका ये भेड़िये अच्छे से नाजायज इस्तेमाल करना जानते हैं खासकर, ईमानदार आदमी को बेईमान साबित करने में तथा बेईमान को ईमानदार साबित करने में ! भारतीय संविधान में मीडिया को बहुत ही ज्यादा आजादी दी गयी है जिसका नाजायज फायदा उठाकर ये बिकाऊ मीडिया वाले किसी भी आदमी का गुनाह बिना साबित हुए उसकी छवि मटियामेट कर जनता की निगाह में भ्रष्ट साबित कर देते हैं,  या किसी भी भ्रष्ट आदमी से पैसा खाकर उसे रातो रात खूब पब्लिसिटी देकर जनता की नजर में हीरो व ईमानदारी का मसीहा बना देते हैं !

तो बाहरी शत्रुओं से निपटाना आसान है अपेक्षाकृत अपने ही घर में बैठे आस्तीन के सापों से जो मोदी जी को मामूली सा मामूली अच्छा काम भी बिना विरोध के करने ही नहीं देते हैं ! ऊपर से पता नहीं चलता है लेकिन सच्चाई यही है की सरकार के अन्दर और बाहर दोनों ओर टांग खीचने वाले बहुत हैं, पर इन सभी छोटे बड़े विरोधों से निपटते हुए, और सैकड़ों फर्जी लांछन सहते हुए भी, सच्चे लौह पुरुष मोदी जी ने विकास के कामों की रफ़्तार कभी धीमे नहीं पड़ने दी !

जैसे किसी खाली जमीन पर जब कोई मकान बनना शुरू होता है तो शुरू के 15 दिन से 1 महीने तक उस जमीन पर कोई निर्माण नहीं दिखाई देता है क्योंकि उस समय तक सबसे जरूरी नींव बन रही होती है, उसी तरह श्री बाबा रामदेव, श्री सुब्रमन्यम स्वामी और मोदी जी ने जिस अति उच्च स्तर के उज्जवल भारत का खाका तैयार किया है, उसकी भी नींव का काम या जिसे आम जनता के लिए अदृश्य काम कह सकते हैं, पूर्ण होने में कुछ समय तो लगेगा ही, पर ये तो तय है की जब ये काम पूर्ण होगा तो निश्चित ही सभी को बहुत सुखद अनुभूति होगी !

मंत्रालय कोई भी हो, चाहे रक्षा मंत्रालय हो, गृह मंत्रालय हो या विदेश मंत्रालय, श्री अजित की सलाह बहुत मायने रखती है ! जैसे कई शताब्दियों पहले भारत वर्ष के अति तेजस्वी सम्राट श्री स्कन्द गुप्त ने कई वर्ष तक राजमहल के सुख और ऐशो आराम छोड़ कर भारत की सीमा पर ही परमानेंट डेरा डाल कर, बार बार घुसपैठ करने वाले क्रूर,निर्दयी, बर्बर तत्कालीन आतंक वादी हूड़ों का महा नाश किया था, ठीक वही कहानी श्री डोभाल की भी तो है !

आइये जानते हैं, सिनेमा के नकली हीरो के नकली एक्शन के बारे में नहीं, बल्कि असली दुनिया के असली योद्धा श्री डोभाल के जीवन के पहलुओं के बारे में –

श्री अजित डोभाल का जन्म 1945 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में एक गढ़वाली परिवार हुआ। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अजमेर के मिलिट्री स्कूल से पूरी की थी, इसके बाद उन्होंने आगरा विश्व विद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए किया और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद वे आईपीएस की तैयारी में लग गए। कड़ी मेहनत के बल पर वे केरल कैडर से 1968 में आईपीएस के लिए चुन लिए गए। 2005 में इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के चीफ के पद से रिटायर हुए हैं। अभी अजीत कुमार डोभाल, आई.पी.एस. (सेवानिवृत्त), भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। वे 30 मई 2014 से इस पद पर हैं। डोभाल भारत के पांचवे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं।

आईपीएस अधिकारी के रूप में कुछ साल बिताने के बाद, डोभाल ने 33 वर्ष से अधिक समय खुफिया अधिकारी के तौर पर कई बेहद महत्व पूर्ण काम किये और इस दौरान वह पूर्वोत्तर, जम्मू कश्मीर और पंजाब में तैनात रहे।

उन्हें महज 6 साल के करियर के बाद ही इंडियन पुलिस मेडल से सम्मानित किया गया था जबकि परंपरा के मुताबिक वो पुरस्कार कम से कम 17 साल की नौकरी के बाद ही मिलता था ! राष्ट्रपति वेंकटरमन ने भी इन्हें 1988 में कीर्तिचक्र से सम्मानित किया ! श्री अजीत डोभाल पहले ऐसे शख्स थे जिन्हें सेना में दिए जाने वाले कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था ! वे भारत के ऐसे एक मात्र नागरिक हैं, जिन्हें शांतिकाल में दिया जाने वाले दूसरे सबसे बड़े पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है !

इन्होंने 6 साल पाकिस्तान में भी गुजारे हैं और चीन, बांग्लादेश की सीमा के उस पार मौजूद आतंकी संगठनों और घुसपैठियों की नाक में नकेल भी डाली है। श्री अजीत डोभाल की पहचान सुरक्षा एजेंसियों के कामकाज पर उनकी पैनी नजर की वजह से बनी है, ऐसी ही साफ समझ की बदौलत श्री डोभाल ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को संकट से उबारा था ! 24 दिसंबर 1999 को एयर इंडिया की फ्लाइट आईसी 814 को आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया और उसे कांधार लेते गए ! भारत सरकार के इस बड़े संकट में संकटमोचक बनकर उभरे श्री डोभाल !

ये उस वक्त वाजपेयी सरकार में एमएसी के मुखिया थे, आतंकवादियों और सरकार के बीच बातचीत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और 176 यात्रियों की सकुशल वापसी करायी ! लगातार 110 घंटे आतंकवादियों से नेगोशियेट करने के बाद सिर्फ 3 आतंकवादियों को छोड़ा गया जबकि मांग 40 की थी !

ये ऐसे बहादुर शख्स थे, जिन्होंने दुश्मन के गढ़ मतलब पाकिस्तान के लाहौर में लगातार 6 साल तक मुसलमान बनकर रहकर जासूसी करने का भयंकर जोखिम उठाया था !

भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उन्होंने एक गुप्तचर की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई, जिसकी मदद से ही सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका ! इस दौरान उनकी भूमिका एक ऐसे पाकिस्तानी जासूस की थी, जिसने खालिस्तानियों का विश्वास जीत लिया था और उनकी तैयारियों की जानकारी मुहैया करवाई थी !

इन्होने पाकिस्तान और ब्रिटेन में राजनयिक जिम्मेदारियां भी संभाली और फिर करीब एक दशक तक खुफिया ब्यूरो की ऑपरेशन शाखा का लीड किया। रिटायर होने के बाद वे दिल्ली स्थित एनजीओ विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन चला रहे थे, जो वार्ता और विवाद निबटारे के लिए मंच उपलब्ध कराता है।

कश्मीर में भी उन्होंने उल्लेखनीय काम किया था और उग्रवादी संगठनों में घुसपैठ कर ली थी। उन्होंने उग्रवादियों को ही शांति रक्षक बनाकर उग्रवाद की धारा को मोड़ दिया था ! उन्होंने एक प्रमुख भारत- विरोधी उग्रवादी कूका पारे को अपना सबसे बड़ा भेदिया बना लिया था !

अस्सी के दशक में वे उत्तर पूर्व में भी सक्रिय रहे। उस समय ललडेंगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट ने हिंसा और अशांति फैला रखी थी, लेकिन तब उन्होंने ने ललडेंगा के सात में छह कमांडरों का विश्वास जीत लिया था और इसका नतीजा यह हुआ था कि ललडेंगा को मजबूरी में भारत सरकार के साथ शांति विराम का विकल्प अपनाना पड़ा था !

श्री डोभाल ने वर्ष 1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट द्वारा अपहरण किए गए रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू को बचाने की सफल योजना बनाई थी ! कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान, डोभाल आतंकवादी समूहों को तोड़ने में सफल रहे।

हाल ही में 4 जून को मणिपुर के चंदेल गांव में उग्रवादियों के हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। डोभाल ने पूर्वोत्तर भारत में सेना पर हुए हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई और भारतीय सेना ने सीमा पार म्यांमार में कार्रवाई कर उग्रवादियों को मार गिराया ! भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना और एनएससी एन खाप्लांग गुट के बागियों के सहयोग से ऑपरेशन चलाया, जिसमें करीब 30 उग्रवादी मारे गए !

श्री डोभाल द्वारा अपने कार्यकाल में देश सुरक्षा के लिए किये गए प्रयास हजारों हैं और उन सबका पूर्ण विवरण यहाँ देना सम्भव नहीं है पर ये तो जरूर है की आज के भारत का हर वो नागरिक जो भारत में अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहा है, उसकी इस सुकून भरी भावना के पीछे कहीं न कहीं श्री डोभाल का भी योगदान अवश्य है !

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