एक ऐसा योग जिसमे बिना कुछ किये सारे रोगों का निश्चित नाश होता है

1767bd733310a45b4b234ac651fd13cb4आदमी कुछ भी काम ना करे मतलब कोई भी हाथ पैर ना हिलाये, मुंह आँख भी बंद कर ले, लेकिन जब तक जिन्दा है तब तक वो सोचना नहीं छोड़ सकता है !

ज्यादातर लोग, सोचने को एक फिजूल और मामूली काम समझते हैं और इसीलिए लोगों ने कई तरह की कहावतें भी बना रखी हैं जैसे खयाली पुलाव बनाना आदि आदि, और इन सभी बातों का निष्कर्ष यही है की सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होता है, काम करना पड़ता है !

पर यहाँ आपसे ठीक इसका उल्टा कहा जाय की सिर्फ सोचने से ही सब कुछ हो सकता है तो आप क्या कहेंगे ?

बहुत से लोगों को ये कल्पना, अतिश्योक्ति, गप्प आदि लग सकता है क्योंकि उनका पाला कभी किसी सच्चे राज योगी से नहीं पड़ा !

हठ योग की साधना जैसे प्राणायाम, आसन, ध्यान की थोड़ी मात्रा तो बहुत से लोग करतें हैं पर राज योग के सच्चे जानकार कम ही बचे हैं !

राज योग की पूरी प्रक्रिया को आसान शब्दों में कहा जाय तो ये है की राज योग में दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति, “मन” को वश में करने का प्रयास किया जाता है ! मन की शक्ति इतनी अपार है कि उसकी तुलना ईश्वर की शक्ति से की जा सकती है और ये मन 1 सेकेंड के लिए भी 100 % किसी एक चीज पर केन्द्रित हो जाय तो गजब चमत्कार हो सकता है !

पर यहाँ एक बात अच्छे से समझने वाली बात है की सोच या विचार, मन नहीं होते हैं बल्कि मन का एक हिस्सा मात्र होते हैं ! हालांकि मन को वश में करने के लिए सोच को ही हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है !

हमारे परम आदरणीय हिन्दू धर्म ने इस मन की अपरम्पार ताकत को पहचाना और इसी पर राज योग शास्त्र की रचना की गयी !

राज योग में लिखा है की कोई भी आदमी प्रतिदिन ऐसा बार बार गम्भीरता से सोचे की शिवो अहम् अर्थात मै ही शिव हूं तो धीरे धीरे उसके अन्दर शिवत्व के लक्षण और शक्ति पैदा होने लगेगी ! कोई साधक सोचे की अहं ब्रह्मास्मि अर्थात मै ही परम ब्रह्म यानी ईश्वर हूं तो धीरे धीरे उसके अन्दर सही में ईश्वरत्व पैदा होने लगता है !

मन की प्रचंड ताकत को साधने के लिए अपनी सोच विचार को कण्ट्रोल कर एक ही चीज पर फोकस करना पड़ता है मतलब बिना दिमाग भटके, आदमी को एक ही चीज के बारे में लगातार सोचते रहने का अभ्यास बढ़ाना पड़ता है !

और अगर आदमी भगवान् की स्वरूपता पाने की बजाय अपने शरीर के रोगों का नाश चाहे तो ध्यान करे की उसके ह्रदय में भगवान मृत्युंजय महादेव शिव, माता पार्वती के साथ विराज मान हैं और उनके शरीर से जो दिव्य तेज निकल रहा है वो साक्षात् अमृत स्वरुप है और वो दिव्य प्रकाश पूरे शरीर में तेजी से समां रहा है जिससे उसके शरीर के सारे रोगों का नाश हो रहा है और उसका पूरा शरीर बहुत सुन्दर और स्वस्थ और मजबूत बन रहा है !

ऐसा ध्यान, रोगी आदमी चाहे बैठकर या लेटकर कैसे भी लगा सकता है पर जल्दी फायदे के लिए जितना अधिक से अधिक हो सके ध्यान लगाए !

केवल ऐसा प्रतिदिन मात्र सोचने भर से ही निश्चित ही शरीर की सारी बिमारियों में आराम मिलने लगता है ! दुनिया की कोई भी बिमारी ऐसी नहीं है जिसमें इससे आराम ना मिल सकें !

राज योग के इसी सिद्धान्त की नक़ल कर विदेशियों ने सेल्फ रियलाइजेशन थ्योरी बनायी और इसको सिखाने का पैसा भी लेते हैं पर भारत वर्ष में पैदा होने वाला भारतीय स्वतः इन दिव्य ज्ञान को ईश्वरीय कृपा से प्राप्त कर लेता है !

एक बात जो सबसे जरूरी है की ध्यान सही से तभी लग पायेगा जब मन को दी जाने वाली खुराक पर लगाम लगेगी ! मन कई जगह से खुराक इक्कठी करता है इसलिए ना तो आँखों से गन्दी अश्लील चीजे देखें, ना कानों से किसी की बुराई सुनें, ना मुंह से कोई गाली गलौज या झूठ बोलें और ना ही मुंह में कोई पाप की कमाई का खाना या तामसिक खाना (मांस, मदिरा) डालें !

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