अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 19 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

एक दिन मियाँ आजाद साँड़नी पर सवार हो घूमने निकले, तो एक थिएटर में जा पहुँचे। सैलानी आदमी तो थे ही, थिएटर देखने लगे, तो वक्त का खयाल ही न रहा। थिएटर बंद हुआ,...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 20 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

दूसरे दिन सवेरे आजाद की आँख खुली तो देखा, एक शाह जी उनके सिरहाने खड़े उनकी तरफ देख रहे हैं। शाह जी के साथ एक लड़का भी है, जो अलारक्खी को दुआएँ दे रहा...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 21 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

मियाँ आजाद रेल पर बैठ कर नाविल पढ़ रहे थे कि एक साहब ने पूछा – जनाब, दो-एक दम लगाइए, तो पेचवान हाजिर है। वल्लाह, वह धुआँधार पिलाऊँ कि दिल फड़क उठे। मगर याद...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 22 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

मियाँ आजाद के पाँव में तो सनीचर था। दो दिन कहीं टिक जायँ तो तलवे खुजलाने लगें। पतंगबाज के यहाँ चार-पाँच दिन जो जम गए, तो तबीयत घबराने लगी लखनऊ की याद आई। सोचे,...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 23 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

मियाँ आजाद शिकरम पर से उतरे, तो शहर को देख कर बाग-बाग हो गए। लखनऊ में घूमे तो बहुत थे, पर इस हिस्से की तरफ आने का कभी इत्तिफाक न हुआ था। सड़कें साफ,...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 24 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

बड़ी बेगम साहबा पुराने जमाने की रईसजादी थीं, टोने टोटके में उन्हें पूरा विश्वास था। बिल्ली अगर घर में किसी दिन आ जाय, तो आफत हो जाय। उल्लू बोला और उनकी जान निकली। जूते...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 25 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

मियाँ आजाद हुस्नआरा के यहाँ से चले, तो घूमते-घामते हँसोड़ के मकान पर पहुँचे और पुकारा। लौंड़ी बोली कि वह तो कहाँ गए हैं, आप बैठिए। आजाद – भाभी साहब से हमारी बंदगी कह...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 26 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

आजाद ने सोचा कि रेल पर चलने से हिंदोस्तान की हालत देखने में न आएगी। इसलिए वह लखनऊ के स्टेशन पर सवार न होकर घोड़े पर चले थे। एक शहर से दूसरे शहर जाना,...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 27 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

मियाँ आजाद और खोजी चलते-चलते एक नए कस्बे में जा पहुँचे और उसकी सैर करने लगे। रास्ते में एक अनोखी सज-धज के जवान दिखाई पड़े। सिर से पैर तक पीले कपड़े पहने हुए, ढीले...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 28 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

दूसरे दिन नौ बजे रात को नवाब साहब और उनके मुसाहब थिएटर देखने चले। नवाब – भई, आबादीजान को भी साथ ले चलेंगे। मुसाहब – जरूर, जरूर उनके बगैर मजा किरकिरा हो जायगा। इतने...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 29 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

आज तो निराला समाँ है। गरीब, अमीर, सब रँगरलियाँ मना रहे हैं। छोटे-बड़े खुशी के शादियाने बजा रहे हैं। कहीं बुलबुल के चहचहे, कहीं कुमरी के कह-कहे। ये ईद की तैयारियाँ हैं। नवाब साहब...

अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 30 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)

दूसरे दिन सुबह को नवाब साहब जनानखाने से निकले, तो मुसाहबों ने झुक-झुक कर सलाम किया। खिदमतगार ने चाय की साफ-सुथरी प्यालियाँ और चमचे ला कर रखे। नवाब ने एक-एक प्याली अपने हाथ से...

व्यंग्य – नेता का स्थान – (लेखक – पांडेय बेचन शर्मा उग्र)

लड़कपन से लेकर बी.ए. पास हो लेने तक, आठ वर्ष की अज्ञान अवस्‍था से तेईस वर्ष की अपरिपक्‍व अवस्‍था तक वे दोनों अभिन्‍न मित्र रहे। दोनों तीव्र भी थे, दोनों ‘देश के चमकते हुए...

आत्मकथा – दिग्दर्शन – (लेखक – पांडेय बेचन शर्मा उग्र)

‘मैंने क्‍या-क्‍या नहीं किया? किस-किस दर की ठोकरें नहीं खाईं? किस-किसके आगे मस्‍तक नहीं झुकाया?’ मेरे राम! आपको न पहचानने के सबब ‘जब जनमि- जनमि जग, दुख दसहू दिसि पायो।’ आशा के जाल में...

आत्मकथा – प्रवेश – (लेखक – पांडेय बेचन शर्मा उग्र)

चन्‍द ही महीने पहले बिहार के विदित आचार्य श्री शिवपूजन सहायजी (पद्मभूषण), आचार्य नलिन विलोचनजी शर्मा तथा श्री जैनेन्‍द्र कुमारजी मेरे यहाँ कृपया पधारे थे। साथ में बिहार के दो-तीन तरुण और भी थे।...

आत्मकथा – अपनी खबर – (लेखक – पांडेय बेचन शर्मा उग्र)

मनकि बेचन पाँडे, वल्‍द बैजनाथ पाँडे, उम्र साठ साल, क़ौम बरहमन, पेशा अख़बार-नवीसी और अफ़साना-नवीसी, साक़िन मुहल्‍ला सद्दूपुर चुनार, ज़िला मिर्ज़ापुर (यू.पी.), हाल मुकाम कृष्‍णनगर, दिल्‍ली-31, आज ज़िन्‍दगी के साठ साल सकुशल समाप्‍त हो...