जब नोट बंदी के चमत्कारी असर ने इतने जल्दी खरपतवार की सफाई शुरू कर दी, तो आगे आने वाले कानूनों से तो भ्रष्टाचारियों में तबाही ही मच जायेगी

· March 11, 2017

जब “स्वदेश चेतना” जैसे बड़े मीडिया ग्रुप के प्रमुख सम्पादक श्री डॉक्टर किसलय उपाध्याय जैसे कुछ चन्द निष्पक्ष, निर्भीक व ईमानदार मीडियाकर्मी बार बार खुल कर बोल रहे थे कि पूर्व में हुए दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार जैसे विधानसभा चुनावों में काला धन ने अहम भूमिका निभाई थी तो बहुत से लोगों (खासकर खानदान विशेष की सर्वोच्च भ्रष्ट पार्टी के युवराज पप्पू के नियमित चाटुकार समर्थक गणों) को बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा था …………………………………… पर अब यही बात प्रत्यक्ष सही साबित होते हुए दिख रही है ………………………………………………………… क्योंकि मोदी जी के द्वारा लाये गए नोट बंदी के फैसले की वजह से ………………………………. “नोट के बदले वोट” खरीदने की घृणित प्रक्रिया में काफी गिरावट हुई …………………………………………. जिसकी वजह से इस विधानसभा चुनाव में सिर्फ धन बल के दम पर राजनीति करने वाले बहुत से लोगों को ध्वस्त होते हुए देखा गया !

हालाकि अभी तो सिर्फ नोट बंदी पर यह हाल है ……………………………….. कल को जब बेनामी संपत्ति और अन्य भ्रष्ट्राचार नियामक सम्बंधित कड़े कानून असर दिखाना शुरू करेंगे ………………………….. तब तो ऐसे सारे कूड़े कचरों की जड़ से ही सफाई हो जायेगी !

चूंकि बहुत से भ्रष्ट लोगों ने पिछले कई दशकों से अथाह संपत्ति लूट कर रखी है जिसमें से काफी कुछ सोना, चांदी, हीरा, जवाहरात, जमीन, बंगले आदि के रूप में भी चोरी छुपे सहेज कर रखा गया है ………………………………. अतः ऐसे लोगों की कमर पूरी तरह से टूटने में कुछ महीने से कुछ वर्ष तक लग सकतें हैं …………………………………….. पर ये निश्चित है कि अगर मोदी जी शासन में बने रहें ……………………………….. तो देर सवेर भारत माँ का खून चूसने वाले ऐसे सभी गद्दारों का खात्मा होकर ही रहेगा !

पंजाब और गोवा के रिजल्ट इसलिए उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड की तरह मन मुताबिक़ नहीं आ पाया …………………………… क्योंकि इसके पीछे कुछ ऐसे अहम कारण देखने को मिले जिन्हें बीजेपी को एक सबक के रूप में लेना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि ऐसी गलतियां दुबारा ना होने पाए !

जैसे पंजाब इसलिए दुखद रहा क्योंकि बीजेपी ने अकाली दल को ऐन इलेक्शन टाइम में धोखा देकर अकेला छोड़ देना उचित नहीं समझा (जैसा कि हर अन्य मौकापरस्त पार्टियाँ करती रहती है) ……………………………… पर इस वफादारी का खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ा क्योंकि पंजाब की जनता की निगाह में अब अकाली दल के प्रति वो विश्वास नहीं रहा था …………………………….. इसलिए लगभग सभी चुनाव विश्लेषक यही कह रहें है कि अगर बीजेपी पंजाब में अकेले लड़ी होती तो निश्चित रूप से इससे काफी अच्छी स्थिति में होती ……………………………………. खैर जो हो गया वो हो गया, अब उस गलती को बदला तो नहीं जा सकता ………………………………………. पर इस गलती का परिणाम केवल बीजेपी ही नहीं झेलेगी, बल्कि अब पंजाब की जनता भी झेलेगी जहाँ पर अब वो पार्टी सरकार बनाने जा रही है जो अनगिनत घोटालों के लिए ना केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में भी प्रसिद्ध हो चुकी है !

गोवा में बीजेपी के पीछे रह जाने का मुख्य कारण भी वही है जो उत्तर प्रदेश में गैर बीजेपी पार्टियों की हार के पीछे था ………………………….. मतलब ………………………. सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति को वरीयता देकर, बहुसंख्यक समाज के हितों को बार बार अनदेखा, अनसुना करते रहना ………………………………….. बहुत से राजनेता आज भी यही मूर्खता कर रहें है कि अल्पसंख्यकों के वोट को अधिक से अधिक पाने के लिए, बहुसंख्यक जनता की मूलभूत सुविधाओं व अधिकारों तक को भी नकार देतें हैं ……………………………. जिसका जवाब, नाराज बहुसंख्यक जनता 5 साल बाद वोट के रूप में देती है जैसा कि गोवा में बीजेपी के साथ व उत्तरप्रदेश में गैर बीजेपी पार्टियों के साथ हुआ …………………………………. ये तो ऐन मौके पर गोवा में मोदी जी ने चुनाव प्रचार की कमान खुद संभाल कर गोवा की जनता की नाराजगी दूर करने की कोशिश की, नहीं तो गोवा में बीजेपी की स्थिति और भी बुरी साबित हो सकती थी !

मणिपुर जहाँ बीजेपी का बेस बहुत ही कमजोर था, वहां पर बीजेपी ने पिछली बार की तुलना में इस बार अप्रत्याशित रूप से बढ़त हासिल की है ……………………………………… जिसका पूरा श्रेय एक मात्र मोदी जी के द्वारा पिछले कई वर्षों में बेहद ईमानदारीपूर्वक किये गए अनगिनत विकास के कार्यों का प्रचंड प्रसिद्धि है ……………………………………….. मोदी जी की यह प्रसिद्धि भारत की भी सीमा को पार कर विदेशों में भी काफी फ़ैल चुकी है …………………………………………. और मोदी जी की प्रसिद्धि में कितनी ताकत है यह इस बात से भी साबित होती है कि ……………………………………. इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कई नए और अनजान चेहरों को भी टिकट दिया था पर उनका भी जनता ने भरपूर स्वागत किया क्योंकि उनके पीछे जो शख्स खड़ा था उसका नाम था – श्री “ नरेन्द्र दामोदरदास मोदी “ !

अभी कुछ दिनों पूर्व तक मोदी जी द्वारा नोट बंदी करने पर जिसका देखो वही अर्थशास्त्री बन करकर आम जनता के दिमाग में जहर घोलने की कोशिश कर रहा था कि नोट बंदी से गरीबी बढ़ेगी, बिजनेस रोजगार के अवसर कम हो जायेंगे आदि आदि ………………………………….. पर ऐसा कुछ हुआ तो नहीं ………………………………अलबत्ता यह जरूर हुआ कि ऐसे सलाह देने वालों के मुंह पर जनता ने इस इलेक्शन में इतना करारा तमाचा मारा है कि उन्हें इस सदमे से उबरने में काफी समय लग जाएगा !

भारत माता की जय ………………………………..वन्दे मातरम !

(पूर्व के लेखों को पढ़ने के लिए, कृपया नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें)-

facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail


ये भी पढ़ें :-