डायबिटिज, पथरी, हार्ट, खून, मोटापा, पीलिया, प्रमेह, सांस, खसरा, लिवर, बवासीर रोगों में फायदा करेला

769px-Momordica_charantia_003करेला जैसे कड़वी सब्जी से भी बेहद स्वादिष्ट सब्जियां बनती है अगर बनाना आता हो तो !

आजकल की कई सो कॉल्ड हाई स्टेटस की मॉडर्न महिलायें दुनिया भर के कुकिंग कोर्स करने के बाद भी ऐसा खाना बनाती हैं जिसको ना उनके पति को खाने में इंटरेस्ट होता है ना ही उनके बच्चों में, इसलिए उनके घर के बच्चे नौकरानी के हाथों का खाना खाकर बड़े हो रहे हैं !

ऐसी महिलाओं को समझना चाहिए की जब सेवा नौकरानी करेगी तो बुढ़ापे में प्यार और इज्जत नौकरानी ही पाएगी ! एक जमाना था की गाँवों में रहने वाली दादी, काकी लोग अपने बूढ़े झुर्रीदार पर प्यार से सने हाथों से जो स्वादिष्ट खाना मिटटी के चूल्हे पर बनाती थी की खाने वाला सारी लाज शर्म छोड़कर थाली चाट चाट कर खाता था !

आईये बात करते हैं पूरे भारत वर्ष में आसानी से उपलब्ध होने वाले करेले के बारे में ! करेले में प्रचूर मात्रा में विटामिन A, B और C पाए जाते हैं। इसके अलावा कैरोटीन, बीटा कैरोटीन, लूटीन, आइरन, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मैगनीज जैसे फ्लावोन्वाइड भी पाए जाते हैं।

करेला वात विकार, पाण्डु, प्रमेह एवं कृमिनाशक होता है। करेला शीतल, भेदक, हलका, कड़वा व वातकारक होता है और ज्वर, पित्त, कफ रूधिर विकार और कृमि रोग का नाश भी करता है। इसमें विटामिन ‘ए’ अधिक मात्रा में होता है।

आईये जानते हैं करेले के औषधीय फायदे –

– कम तेल, कम मसाले और कम आलू से बनी करेले की सब्जी रोज खाने से शूगर लेवल कण्ट्रोल करने में बहुत मदद मिलती है (पर डायबिटिज के मरीज को इस बात का जरूर ख्याल रखना चाहिए की उनका सबसे बड़ा परहेज है किसी भी बात का तनाव ना लेना और उनकी सबसे बड़ी दवा है हर 10 – 15 मिनट बाद खुल कर हँसना) !

– करेला के फलों को छाया शुष्क कर महीन चूर्ण बनाकर रखें | 3 से 5 ग्राम की मात्रा में जल से सेवन करना चाहिए | मधुमेह में यह उत्तम कार्य करता है | यह अग्नाशय को उत्तेजित कर इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाता है | करेला अन्य औषधियों के समान शरीर के केवल एक अंग या टिशू को ही प्रभावित नहीं करता बल्कि पूरे शरीर के ग्लूकोज मैटाबॉलिज्म पर असर करता है| मधुमेह के लिए करेले का जूस काफी फायदेमंद होता है। करेले में इंसुलिन की तरह कई रसायन पाए जाते हैं, जो ब्लड शूगर लेवल को कम करता है।

– करेले में मौजूद खनिज और विटामिन शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं जिससे कैंसर जैसी बीमारी का मुकाबला भी किया जा सकता है।

– एक कप पानी में दो चम्मच करेले का रस, तुलसी के पत्तों का रस और शहद मिलाकर रात में सोते समय पीने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों में आराम मिलता है। दमा होने पर बिना मसाले की छौंकी हुई करेले की सब्जी खाने से फायदा होता है।

– 10 मिली करेला फल रस या पत्र रस में राई और नमक बुरक कर पिलाने से गठिया में लाभ होता है |

– करेला दिल के लिए कई मायनों में काफी फायदेमंद होता है। यह अर्टरी वॉल पर इकठ्ठा होने वाले खराब कोलेस्ट्रोल को कम करता है, जिससे हॉर्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। साथ ही यह ब्लड शूगर लेवल को भी कम करता है, जिससे दिल तंदुरुस्त बना रहता है।

– पीलिया और मलेरिया जैसे बुखार में करेले को पीसकर निकाले गए रस को दिन में दो बार पिलाना चाहिए।

– यदि पाचन शक्ति कमजोर हो तो किसी भी प्रकार करेले का नित्य सेवन करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। करेला स्वयं भी शीघ्र पचता है। करेले की तासीर ठंडी होती है। यह पचने में हल्का होता है। यह शरीर में वायु को बढ़ाकर पाचन क्रिया को तेज करता है। इससे पेट साफ होता है। प्रति 100 ग्राम करेले में लगभग 92 ग्राम नमी होती है। साथ ही इसमें लगभग 4 ग्राम कार्बोहाइडेट, 15 ग्राम प्रोटीन, 20 मिलीग्राम कैल्शियम, 70 मिलीग्राम फास्फोरस, 18 मिलीग्राम, आयरन तथा बहुत थोड़ी मात्रा में वसा भी होती है। इसमें विटामिन ए तथा सी भी होती है जिनकी मात्रा प्रति 100 ग्राम में क्रमश: 126 मिलीग्राम तथा 88 मिलीग्राम होती है।

– दाद, खाज, खुजली, सियोरोसिस जैसे त्वचा रोगों में करेले के रस में नींबू का रस मिलाकर पीना फायदेमंद है।

– करेले का रस और एक नींबू का रस मिलाकर सुबह सेवन करने से शरीर में उत्पन्न टाक्सिन और अनावश्यक वसा कम होती है और मोटापा दूर होता है।

– पथरी रोगियों को दो करेले का रस पीने और करेले की सब्जी खाने से आराम मिलता है। इससे पथरी गलकर बाहर निकल जाती है। 20 ग्राम करेले के रस में शहद मिलाकर पीने से पथरी गल कर पेशाब के रास्ते निकल जाती है |

– खूनी बवासीर में एक बड़ा चम्मच करेले का रस शक्कर मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिन तक लें| करेले और पत्तों का रस एक चम्मच शक्कर मिलाकर पीने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है।

– करेले के 10 मिली रस में जीरे का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पिलाने से शीत-ज्वर में लाभ होता है |

– सिर दर्द होने पर करेले के रस का लेप लगाने से आराम मिलता है।

– जिन बच्चों का जिगर खराब होता है,पेट साफ नहीं होता और पानी पीने से पेट फूल जाता है। उन्हें आयु के हिसाब से एक या आधा चम्मच करेले का रस में पानी मिलाकर पिलाने से बढ़ा हुआ जिगर ठीक हो जाता है और पेट में भरा पानी साफ हो जाता है।

– करेले के तीन बीज और तीन काली मिर्च को घिसकर पानी मिलाकर पिलाने से उल्टी-दस्त बंद हो जाते हैं। हैजे के रोगी को करेले के रस में प्याज का रस और कुछ बूंदे नींबू का रस मिलाकर देना लाभदायक है।

– करेले के रस में सुहागा की खील मिलाकर लगाने से मुँह के छाले मिटते हैं |

– सूखे करेले को सिरके में पीसकर गर्म करके लेप करने से कंठ की सूजन मिटती है ।

– 10 मिली करेला पत्र रस पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |

– खसरा होने पर दो चम्मच करेले के रस में एक चम्मच शहद और दो चुटकी हल्दी मिलाकर दिन में दो बार लेना फायदेमंद है।

– करेला पत्र रस को दाद पर लगाने से लाभ होता है | इसे पैरों के तलवों पर लेप करने से दाह का शमन होता है|

(नोट – अति सर्वत्र वर्जयेत्…..मतलब रोज रोज जरूरत से ज्यादा करेला खाने से खून में शूगर लेवल ज्यादा कम हो सकता है इसलिए डायबिटिज के मरीज को करेला रोज खाना तो चाहिए लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं……किसी भी सब्जी, अनाज या फल का पूरा फायदा तभी मिलता है जब उसे बिना किसी रासायनिक खाद और कीट नाशक के पैदा किया जाय)

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