सभी यौन रोगों में निश्चित फायदा पहुचातें हैं ये योग आसन

· January 3, 2017

स्थिति बहुत डांवाडोल हो चुकी है ! मेकअप के बल पर ऊपर से युवा दिखने वाले, अंदर से भी युवा हैं की नहीं, समझना मुश्किल है !


Complete cure of deadly disease like HIV/AIDS by Yoga, Asana, Pranayama and Ayurveda.

एच.आई.वी/एड्स जैसी घातक बीमारियों का सम्पूर्ण इलाज योग, आसन, प्राणायाम व आयुर्वेद से

कई तो शादी से पहले ही नपुंसक हो चुके होतें है और कई शादी के बाद 4 – 5 साल में ही बुजुर्ग हो जातें है !

इस विकट स्थिति का सबसे ज्यादा श्रेय जाता है आधुनिकता के नाम पर फैले बेशर्मी के माहौल को, जो युवाओं के मन को कम उम्र से ही दूषित कर उनके शरीर का नाश करना शुरू कर देता है !

भ्रष्ट से भ्रष्ट राजनेता या सिनेमा में काम करने वाले प्रसिद्ध एक्टर एक्ट्रेस भी कभी नहीं चाहतें हैं कि उनकी संतान कम उम्र से ही गन्दी बातें सीखकर अपने शरीर का नाश कर ले, लेकिन जब कोई स्वयं सेवी संगठन इस खुल्लम खुल्ला फैले व्याभिचार के माहौल को कण्ट्रोल करने के लिए आवाज उठाने लगता है तब यही भ्रष्ट नेता और कई प्रसिद्ध एक्टर एक्ट्रेस, आजादी का हनन, व्यक्तिगत अधिकार, फ्रीडम ऑफ़ लाइफ स्टाइल जैसी बातें करके इस पर कोई कठोर क़ानून नहीं बनने देते !

किसी ना किसी को तो पहल करनी ही पड़ेगी इस गन्दगी की सफाई के लिए नहीं तो भविष्य में नपुंसकता की बीमारी इतना साम्राज्य फैला देगी कि बिना किसी दवा की मदद के नार्मल तरीके से लड़का पैदा करने वालों को आश्चर्य से देखा जाएगा !

तनाव और क्रोध की वजह से भी शुक्राणु अल्पता पैदा होती है इसलिए जबरदस्ती खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए ! खुश रहने के लिए दिन रात जब जब मौका मिले तब तब भगवान् के किसी भी नाम का मानसिक या वाचिक जप करना चाहिए ! भगवान् के नाम का जप कही भी, किसी भी अवस्था में बिना शुद्ध, अशुद्ध स्थान का ध्यान रखे हुए किया जा सकता है (लेकिन भगवान के मन्त्र का जप सिर्फ शुद्ध अवस्था में ही करना चाहिए ! भगवान् के नाम जप के विस्तृत फायदे जानने के लिए कृपया इस लेख के नीचे दिए गए लिंक्स को देखें) !

यौन रोगों का आज के मॉडर्न एलोपैथिक साइंस में कोई भी परमानेंट असरदायक इलाज नहीं है अलबत्ता यह कई बार जरूर सुनने को मिलता है कि एलोपैथिक मेडिसिन्स से इलाज करने से समस्या और बिगड़ गयी !

इन कठिन बीमारियों का परमानेंट इलाज सिर्फ योग और आयुर्वेद (Yogasana and Ayurveda) में है !

“स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े कुछ मूर्धन्य योग प्रशिकक्षों ने हमें सभी तरह के कठिन से कठिन यौन रोगों में निश्चित फायदा पहुचाने वाले योग, आसन व प्राणायाम (Yoga, asana, pranyama) के बारें में बताया जिन्हें हम सर्व हित के लिए यहाँ प्रस्तुत कर रहें हैं !

भारत में आज भी बहुत से युवक, यौन रोगों से ग्रसित होने के बावजूद लोक लाज की वजह से उसे हमेशा छुपातें रहतें हैं और उसका ठीक से इलाज नहीं करवातें जिससे रोग का भविष्य में और प्रबल होने की संभावना बढ़ जाती है ! इसलिए “स्वयं बनें गोपाल” समूह इस लेख को पढ़ने वाले हर आदरणीय पाठक से विनम्र निवेदन करता है कि इस लेख को बिना किसी संकोच या शर्म के, अधिक से अधिक सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि आपके इस मानवता धर्म को निभाने की वजह से, हो सकता है कि कोई निराश अक्षम युवक या स्त्री, फिर से सक्षम होकर पिता या माता बनने की अपार ख़ुशी प्राप्त कर सके !

महिलाओं में अधिकांश दोष मासिक धर्म की गड़बड़ीयों से होता है ! लगभग एक प्रतिशत स्त्रियों में फैलोपियन ट्यूब (how can a blockage in a fallopian tube prevent pregnancy) बन्द होने की शिकायत पाई जाती है जिसमें लगभग 50 प्रतिशत स्त्रियों को आप्रेशन से लाभ मिलता है और उनके एक तरफ का रास्ता खुल जाता है जिससे वे गर्भधारण करने में सक्षम हो पाती हैं। ऑपरेशन के अलावा नीचे दिए योग, आसन व प्राणायाम (yogas, asanas, pranayamas) के नियमित अभ्यास से फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) की समस्या में बहुत लाभ मिलते देखा गया है !

पुरूषों के दोष में, उनके वीर्य में या तो शुक्राणु बिल्कुल नहीं होते या फिर बहुत कम मात्रा में होते हैं। यदि किसी के वीर्य के शुक्राणु स्त्री के गर्भ तक नहीं पहुँच पाते तो इसमें स्त्री का कोई दोष नहीं होता है ! यदि दोष होता है तो पुरूष के वीर्य का होता है क्योंकि ऐसे पुरुष अपनी पूर्व की मनमानी हरकतों से अपने वीर्य को पतला व बेजान बना चुके होते हैं। ध्यान रहें, शुक्राणुओं का निर्माण, पुष्ट व गाढ़े तथा निर्दोष वीर्य से ही होता है और ऐसे वीर्य में ही शुक्राणु अधिक मात्रा में विकसित होकर तेजगति से चलने वाले क्रियाशील बनते हैं जिसके फलस्वरूप स्त्री गर्भवती होकर स्वस्थ व सुंदर बच्चे को जन्म देती है।

यौन समस्याएं (sex information about sex problems, gupt rog gyan) जिन्हें गुप्त रोग (gupt rog of hidden part), धातु रोग, रति रोग (private part Venereal Diseases Symptoms) मैथुन रोग, सम्भोग रोग, वीर्य रोग (varieties of sexual diseases like semen, seminal fluid, sperm, nerve, seed, slime, veery, virya, veerya, spermatozoon, spunk, cum related problems), नपुंसकता (impotency, impotence, castrate, eunuch, sexless ,adjective, impotent, neuter) जननांगो से सम्बंधित रोग के नाम से भी आम जनमानस समझतें हैं, उन्हें कई प्रकार से व्यक्त करतें हैं | जैसे– शीघ्रपतन (early ejaculation or Premature ejaculation ), वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं की कमी या वीर्य की कमी या निल शुक्राणु (sexual debility), वीर्य का पतलापन, शुक्रमेह, धातु गिरना (shukrmeh, dhatu rog), स्वप्न दोष (Night emission, night fall), धातुक्षीनता (Spermatorrhea), लिंग में कड़ापन ना होना या लिंग में उत्थान ना होना (erectile dysfunction, erection, retention, ejaculation), यौन संचारित रोग (sexually transmitted disease, STD), उपदंश (सिफलिस, powerful metastastic or latent Syphilis), सुजाक (गोनोरिया, Gonorrhoea), लिंफोग्रेन्युलोमा बेनेरियम (Lyphogranuloma Vanarium), रतिज व्राणाभ (Chancroid), एड्स या एच आई पॉजिटिव (AIDS or HIV positive), जोश उत्साह की कमी या काम इच्छा की कमी या कामुकता की कमी (lack of sexual desire, sex force, sex feeling), वीर्यवाहक नली सम्बंधित समस्या (Spermatic cord problems), लिंग दोष (defect of penis), शिश्न चर्म रोग (skin disease of penis), वीर्य के दोष (sperm disorder), पौरुषग्रंथि का बढ़ना व सूजन (Enlargment of prostate gland), लिंगोद्रेक (Chordee), लिंग में वृद्धि (Enlargement of the penis), अष्ठीला (Hypertrophy), अण्डकोष का बढ़ना (Hydrocele), अण्डकोष की जलन (Inflammation of the testicles), अण्डकोष की सूजन (Swelling of the testicles), अण्डकोष की खुजली (Itching of the testicles), अण्डकोष के रोग (Testicles problems), बांझपन (Sterility, egg, testicle, acarpous, barren, neuter, Female Infertility), शुक्राणुओं द्वारा स्त्री के डिम्बाणु के निषेचन में समस्या जिससे गर्भ धारण में समस्या, योनि का ढीलापन, श्वेत प्रदर (ल्युकोरिया, likoria, leucorrhoea symptoms treatment), रक्‍त प्रदर आदि महिलाओं के रोग, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओ), ऐंडोमेटरिओसिज़, गर्भाशय फाइब्रॉएड, अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूबज़, कैंडिडा, क्लैमिडिया (chlamydia symptoms and treatments), श्रोणि जलन बीमारी (पीआईडी, Salpingitis, श्रोणि सूजन बीमारी, VTO, यह महिला जननांग अंगों के एक गंभीर संक्रमण है, गर्भाशय में शामिल हैं जो, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब), योनि त्वचा रोग (genital herpes योनि त्वचा रोग काम क्रिया से फैलने वाली बीमारी, यौन संचारित बीमारी एसटीडी है जो कि हर्पिस सिम्प्लेक्स नामक वायरस प्रकार – 1, एच एस वी-1, और टाइप – 2 ,एच एस वी-2 से पैदा होता है) !

लगभग सभी यौन समस्याओं (sexual disease) में लाभ पाने के लिए निम्नलिखित योग आसनों का कम से कम 5 बार से लेकर 11 बार प्रतिदिन अभ्यास करना चाहिए, साथ ही ब्रहमचर्य का भी सख्ती से पालन करना चाहिए (क्योंकि जैसे बहते पानी में बाँध नहीं बन सकता वैसे ही अश्लीलता से भरे दिमाग की यौन समस्याओं का इलाज नहीं हो सकता है, इसलिए हर तरह के अश्लील साहित्य, अश्लील टीवी शो, मूवीज, तथा हंसी मजाक के नाम पर अश्लील बातें करने वाले या अश्लील मेसेज भेजने वाले दोस्तों से एकदम दूरी बना लेना चाहिए) !

वे योग, आसन व प्राणायाम (Yog, Asan, Pranayam) हैं –

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar), महामुद्रा (mahamudra yoga), सेतुबन्धासन (setu bandhasana), पश्चिमोत्तानासन (paad pashchimottanasan), भुजंगासन या सर्पासन (Bhujangasana or sarpasana pose), शलभासन (shalabhasana) का 5 – 5 बार अभ्यास करें !

फिर 20 मिनट धीरे धीरे कपाल भाति प्राणायाम (kapalbhati pranayama) करें उसके बाद 10 मिनट अनुलोम विलोम प्राणायाम (anulom vilom pranayama) करें !

फिर अंत में महाबंध (maha bandha mudra) जिसमें पेट से सांस बाहर निकालकर उड्डीयन बंध (uddiyana bandha asana), मूल बंध (moola bandha yoga) व जालन्धर बंध (jalandhara bandha kriya) तीनों एक साथ लगातें है, का 5 बार अभ्यास करें तो कुछ दिनों से लेकर कुछ महीने में (रोग की गंभीरता के हिसाब से ) ना सिर्फ आपकी सभी यौन समस्याओं में बल्कि अन्य सभी बिमारियों में भी आपको निश्चित आराम मिलने लगेगा, साथ ही पूरा शरीर बेहद मजबूत और तेजोमय होने लगता है !

सूर्य नमस्कार सभी यौन रोगों के अलावा एड्स में भी बहुत फायदेमंद है जिसके बारे में “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े स्वयं सेवी एक्सपर्ट्स बहुत गहनता से शोध कर रहें है और जल्द ही, निकट भविष्य में हम इसके बारे में एक विस्तृत लेख आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे !

निष्कर्ष यही है कि परहेज के साथ इन आसनों (Yogasan) का नियमित अभ्यास करने वालों को कैसे नहीं उनकी यौन समस्याओं में लाभ मिलेगा !

जानिये हर योगासन को करने की विधि

जानिये हर प्राणायाम को करने की विधि

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